Residence and Tax Liability Income Tax Notes Hindi

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Residence and Tax Liability Income Tax Notes Hindi
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निवास-स्थान तथा कर दायित्व (Residence and Tax Liability)

 

प्रश्न -आय-कर के लिए करदाताओं का निवास स्थान किस प्रकार निर्धारित किया जाता है? निवास स्थान का कर-दायित्व पर भार समझाइए। (मेरठ 2009 BP,2005; रूहेलखण्ड 2006 Imp; आगरा,2009; गढ़वाल,2007, 08 )

 

उत्तर. –  करदाता की निवासीय स्थिति का निर्धारण आयकर अधिनियम के अन्तर्गत किसी व्यक्ति की निवासीय स्थिति गत वर्ष में उसके भारत में रहने पर निर्भर करती है। नागरिकता एवं निवासीय स्थिति दोनों अलग-अलग अवधारणाएं हैं। सम्भव है कि एक भारतीय नागरिक, आय-कर हेतु अनिवासी हो और उसे आय कर देने की आवश्यकता न हो। इसी प्रकार एक व्यक्ति, जो भारतीय नागरिक नहीं है, कर-नियोजन हेतु निवासी हो और उसे आय कर देना पड़े। आय-कर के निर्धारण हेतु किसी व्यक्ति की निवासीय स्थिति प्रत्येक वर्ष बदल सकती है परन्तु नागरिकता नहीं। 

 

आयकर अधिनियम की धारा 6 के अनुसार निवासीय स्थिति के दृष्टिकोण से करदाता को निम्नलिखित तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है

 

  1. भारत में निवासी और साधारण निवासी (Resident and Ordinarily Resident in India) 
  2. भारत में असाधारण निवासी (Not Ordinarily Resident in India)
  3. अनिवासी (Non-resident) आय-कर अधिनियम के अनुसार विभिन्न प्रकार के करदाताओं, जैसे-व्यक्ति (An Individual), फर्म, हिन्दू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का समुदाय, कम्पनी आदि के निवास स्थिति के निर्धारण के लिए अलग अलग नियम बनाये गये हैं, जो अग्र प्रकार हैं 

 

व्यक्ति की निवास स्थिति का निर्धारण (Determination of Residential Status of An Individual) 

 

जैसा कि हम जानते ही हैं कि व्यक्ति (An Individual ) से आशय किसी नाम विशेष के मानव करदाता से है, जैसे-आशीष, गर्ग, रिचा अग्रवाल, अन्जू गर्ग, मोहित गोयल आदि। एक व्यक्ति करदाता के निवास स्थान का निर्धारण करने सम्बन्धी शर्तों को निम्नलिखित दो भागों में बांटा जा सकता है

 

(अ) आधारभूत शर्ते (Basic Conditions):

 

  1. वह गत वर्ष में कुल 182 दिन या उससे अधिक भारत में रहा हो। 
  2. वह गत वर्ष में कुल 60 दिन या उससे अधिक भारत में रहा हो, एवं गत वर्ष से पूर्व के 4 वर्षों में 365 दिन या उससे अधिक भारत में रहा हो।

अपवाद : निम्नलिखित स्थितियों में उपरोक्त आधारभूत शर्त (2) में 60 दिन के स्थान पर करदाता का भारत में गत वर्ष में 182 दिन रुके रहना आवश्यक होगा

(i) ऐसे भारतीय नागरिक जो गत वर्ष में भारत से बाहर रोजगार के लिए जाते हैं।

(ii) ऐसे भारतीय नागरिक जो गत वर्ष में किसी भारतीय जहाज के बेड़े के चालक दल के सदस्य के रूप में भारत छोड़ कर जाते हैं।

(iii) ऐसे भारतीय नागरिक अथवा भारतीय मूल का व्यक्ति जो भारत के बाहर रहता है एवं गत वर्ष में भारत में भ्रमण के लिए आता है।

 

(ब) अतिरिक्त शर्ते (Additional Conditions) : 

 

  1. वह गत वर्ष से पूर्व के 10 वर्षों में कम से कम 2 वर्षों में भारत का निवासी रहा हो, और 
  2. वह गत वर्ष के पूर्व के 7 वर्षों में कुल 730 दिन या उससे अधिक भारत में रहा हो।

 

भारतीय मूल के व्यक्ति से आशय (Meaning of an Indian origin) किसी व्यक्ति को भारतीय मूल का समझा जायेगा यदि उसका स्वयं का, माता-पिता का, दादा-दादी या नाना-नानी में से किसी एक का जन्म भी अविभाजित भारत में हुआ हो।

 

अविभाजित भारत (Undivided India) से आशय-अविभाजित भारत से आशय उस समय के भारत से है जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन नहीं हुआ था। 

 

दिनों की गणना के सम्बन्ध में ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बिन्दु

  1. यह आवश्यक नहीं है कि व्यक्ति भारत में लगातार रहे, वह बीच-बीच में विदेश आ जा सकता है। उसे वर्ष भर में कुल मिलाकर वांछित दिनों के लिए भारत में रहना है। 
  2. भारत में एक स्थान पर रहना या ठहरना आवश्यक नहीं है। रहने से आशय भारत में किसी भी स्थान पर रहने से है।
  3. यदि भारत में आने और भारत छोड़ने वाले दिनों का स्पष्ट समय ज्ञात नहीं हो, तो भारत में रहने के दिनों की गणना करने के लिए भारत में आने तथा भारत से जाने वाले दोनों दिन शामिल होंगे।

 

उपरोक्त शर्तों के आधार पर एक व्यक्ति की निवासीय स्थिति निम्नलिखित प्रकार निर्धारित की जाती है

(i) साधारण निवासी व्यक्ति (Ordinarily Resident Individual)– यदि कोई व्यक्ति उपर्युक्त वर्णित आधारभूत शर्तों में से कम-से-कम एक शर्त पूरी करे तथा साथ ही साथ दोनों अतिरिक्त शर्ते भी पूरी करे तो वह सम्बन्धित गत वर्ष के लिए भारत में आय कर हेतु साधारण निवासी माना जायेगा।

(ii) असाधारण निवासी व्यक्ति (Not-ordinarily Resident Individual)  यदि कोई व्यक्ति उपर्युक्त वर्णित आधारभूत शर्तों में से कम-से-कम एक शर्त पूरी करे तथा अतिरिक्त शर्तों में से कोई एक अथवा एक भी शर्त पूरी नहीं करे तो वह सम्बन्धित गत वर्ष के लिये भारत में आय-कर निर्धारण हेतु असाधारण निवासी माना जाएगा। 

(iii) निवासी व्यक्ति (Non-Resident Individual)- यदि कोई व्यक्ति उपर्युक्त वर्णित आधारभूत शर्तों में से कोई एक भी शर्त पूरी नहीं करे तो वह सम्बन्धित गत वर्ष के लिए भारत में आयकर हेतु अनिवासी समझा जायेगा इस स्थिति में यह महत्वहीन होगा कि वह अतिरिक्त शर्ते पूरी कर रहा है अथवा नहीं। 

 

नोट : करदाता किसी भी गत वर्ष में अपने को असाधारण निवासी अथवा अनिवासी मानता है तो यह सिद्ध करने का भार स्वयं करदाता पर होगा। 

 

  1. हिन्दू अविभाजित परिवार (H.U.F.) हेतु निवासीय स्थिति का निर्धारण | धारा 6(2)]

 

हिन्दू अविभाजित परिवार भी व्यक्ति की भाँति निवासी की दृष्टि से तीन प्रकार के होते हैं 

 

(i) (साधारण निवासी परिवार (Ordinarily Resident H.U.F.)- एक हिन्दू अविभाजित परिवार गत वर्ष में भारत में साधारण निवासी माना जाएगा यदि

 

(अ) परिवार का प्रबन्ध एवं नियंत्रण पूर्ण या आंशिक रूप से भारत में स्थित हो, तथा 

(ब) परिवार का कर्ता व्यक्ति के लिए निर्धारित अतिरिक्त दोनों शर्ते पूरी करता हो,

अर्थात् वह गत वर्ष के पूर्व के 10 वर्षों में कम से कम 2 वर्ष निवासी एवं 7 वर्षों में कम से कम 730 दिन भारत में रहा हो।

 

(ii) असाधारण निवासी परिवार (Not ordinarily Resident H.U.F.)  एक हिन्दू अविभाजित परिवार भारत में असाधारण निवासी माना जाएगा यदि

(अ) परिवार का सम्पूर्ण या आंशिक नियंत्रण भारत में हो, तथा (ब) परिवार का कर्ता निम्नलिखित दो अतिरिक्त शर्तों में से कोई भी शर्त पूरी नहीं करता है या केवल एक अतिरिक्त शर्त पूरी करता हो

  1. वह गत वर्ष के पूर्व के 10 वर्षों में कम से कम 2 वर्ष निवासी रहा हो, अथवा 
  2. गत वर्ष के पूर्व के 7 वर्षों में कम से कम 730 दिन भारत में रहा हो। 

 

(iii) अनिवासी परिवार (Non Resident H.U.F.) यदि किसी हिन्दू अविभाजित परिवार का नियंत्रण सम्पूर्ण रूप से भारत के बाहर अर्थात् विदेश में हो, तो वह अनिवासी कहलायेगा।

 

  1. फर्म या व्यक्तियों के समुदाय की निवासीय स्थिति का निर्धारण [धारा 6 (2)।

 

आय-कर हेतु निवासीय स्थिति के दृष्टिकोण से फर्म दो प्रकार की होती है निवासी फर्म (Resident Firm)-कोई फर्म या व्यक्तियों का समुदाय गत वर्ष में भारत में निवासी माना जायेगा, यदि उसका नियंत्रण सम्पूर्ण या आंशिक रूप से भारत में स्थित हो।

(i) निवासी फर्म (Non-Resident Firm) कोई फर्म या व्यक्तियों का समुदाय गत वर्ष में भारत में निवासी माना जाएगा, यदि उसका प्रबंध एवं नियंत्रण भारत के बाहर स्थित हो।

 

नोट- प्रबन्ध एवं नियन्त्रण उस स्थान से हुआ माना जाता है जिस स्थान पर व्यापार चलाने की नीति बनाई जाती है एवं व्यापार के संचालन से सम्बन्धित निर्देश दिये जाते हैं।

 

  1. कम्पनी की निवासीय स्थिति का निर्धारण धारा 6 (3)] आय-कर हेतु निवासीय स्थिति के दृष्टिकोण से कम्पनी दो प्रकार की होती है  

(i) निवासी कम्पनी (Resident Company) यदि एक कम्पनी भारतीय कम्पनी है अथवा उसका प्रबन्ध एवं नियंत्रण पूर्ण रूप से भारत में स्थित है, तो वह निवासी मानी जाएगी। इसका अर्थ हुआ कि

(अ) भारत में समामेलित प्रत्येक कम्पनी निवासी मानी जाएगी।

(ब) भारत के बाहर समामेलित (विदेशी) कम्पनी भारत में निवासी तभी मानी जायेगी, जबकि उसका सम्पूर्ण प्रबन्ध एवं नियंत्रण भारत से होता है।

 

(ii) अनिवासी कम्पनी (Non-Resident Company)-ऐसी कम्पनी अनिवासी मानी जाएगी, जो भारतीय कम्पनी नहीं है तथा उसका सम्पूर्ण प्रबन्ध एवं नियंत्रण भारत में नहीं है। इस प्रकार व्यक्ति एवं हिन्दू अविभाजित परिवार साधारण निवासी, असाधारण निवासी एवं अनिवासी होते हैं, लेकिन फर्म, व्यक्तियों के समुदाय एवं कम्पनी केवल निवासी या अनिवासी होती है।

 

नोट-एक कम्पनी का प्रबन्ध एवं नियन्त्रण उस स्थान पर हुआ माना जाता है जहाँ उसके संचालक मण्डल की मीटिंग होती है।

 

  1. अन्य व्यक्तियों की निवासीय स्थिति का निर्धारण [धारा 6 (4)]

अन्य व्यक्ति भारत में निवासी तभी माने जायेंगे जब उनका प्रबन्ध एवं नियंत्रण पूर्ण अथवा आंशिक रूप से भारत में स्थित हो, यदि उनका प्रबन्ध एवं नियंत्रण पूर्ण रूप से भारत के बाहर स्थित है तो वह अनिवासी माने जाते हैं।

 

नोट-यदि कोई व्यक्ति एक स्रोत के लिए भारत में निवासी है तो वह अन्य सभी स्रोतों के लिए भारत में निवासी ही माना जायेगा।

 

निवासीय स्थिति के आधार पर करदाता की कुल आय का क्षेत्र अथवा कर-भार 

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 5 के अनुसार करदाता पर कर-भार उसकी निवासीय स्थिति एवं इस बात पर निर्भर करता है कि आय कहाँ तथा कब अर्जित अथवा प्राप्त हुई है। इस सम्बन्ध में निम्नलिखित नियम उल्लेखनीय हैं 

  1. निवासी करदाता की कुल आय का क्षेत्र (Scope of Total Income of Resident) एक निवासी करदाता की कुल आय में निम्नलिखित आय शामिल की जाती हैं चाहे वे किसी भी साधन से प्राप्त की गई हो 

(i) गत वर्ष में करदाता द्वारा या उसकी ओर से भारत में प्राप्त हुई अथवा प्राप्त हुई मानी गई समस्त आय।

(ii) गत वर्ष में करदाता को भारत में उपार्जित या उदय हुई अथवा उपार्जित या उदय मानी गई समस्त आय।

(iii) गत वर्ष में करदाता को भारत के बाहर उपार्जित या उदय हुई समस्त आय। 

  1. असाधारण निवासी करदाता की कुल आय का क्षेत्र (Scope of Total Income of Not-Ordinarily Resident) एक असाधारण निवासी की कुल आय में निम्नलिखित आयों को सम्मिलित किया जाता है 

(i) गत वर्ष में करदाता द्वारा या उसकी ओर से भारत में प्राप्त हुई अथवा प्राप्त हुई मानी गई समस्त आय।

(ii) गत वर्ष में करदाता को भारत में उपार्जित या उदय हुई अथवा उपार्जित या उदय मानी गई समस्त आय।

(iii) भारत के बाहर प्राप्त या उपार्जित हुई किसी ऐसे व्यापार की आय जिसका नियंत्रण भारत से होता हो अथवा किसी ऐसे पेशे की आय जिसकी स्थापना भारत में हुई हो।

 

  1. अनिवासी करदाता की कुल आय का क्षेत्र (Scope of Total Income of Non-residents)- एक निवासी करदाता की कुल आय में निम्नलिखित आय को सम्मिलित किया जाता है

(i) गत वर्ष में करदाता द्वारा या उसकी ओर से भारत में प्राप्त हुई अथवा प्राप्त हुई मानी गई समस्त आय।

(ii) गत वर्ष में करदाता को भारत में उपार्जित या उदय हुई अथवा उपार्जित या उदय मानी गई समस्त आय। 

 

नोट- यदि कोई बिना कर लगी आय जो कि गत वर्ष से पूर्व की हो तथा भारत के बाहर कमाई गई हो, यदि गत वर्ष में भारत में लाई जाती है, तो उस आय को गत वर्ष की कर-योग्य आय में सम्मिलित नहीं किया जायेगा क्योंकि यह आय का हस्तान्तरण है न कि आय।

 

कर-भार से संबंधित आय-कर के नियम एक दृष्टि में

  1. भारत में प्राप्त अथवा प्राप्त समझी जाने वाली’ आय पर सभी करदाताओं को कर देना पड़ता है।
  2. भारत में उपार्जित अथवा उपार्जित समझी जाने वाली आय पर भी सभी करदाताओं को कर देना पड़ता
  3. भारत के बाहर उपार्जित एवं प्राप्त होने वाली’ (भारत के बाहर नियन्त्रित व्यापार से तथा भारत के बाहर स्थापित पेशे से) आय पर केवल निवासी करदाताओं को ही कर देना पड़ता है।

4.निवासी करदाताओं को गत वर्ष से सम्बन्धित सभी प्रकार की देशी एवं विदेशी आयों पर कर देना पड़ता है चाहे वह आय कहीं भी उपार्जित या प्राप्त हुई हो। अनिवासी को भारत के बाहर उपार्जित तथा प्राप्त व्यापारिक आय पर तभी कर देना पड़ता है, जो व्यापार का नियन्त्रण भारत से होता हो अथवा विदेश में हुई आय ऐसे

पेशे से हो जिसकी स्थापना भारत में हुई है।

  1. अनिवासी को केवल भारत में प्राप्त या भारत में उपार्जित आयों पर ही कर देना पड़ता है, शेष आय पर कर नहीं देना पड़ता।

 


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