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Capital Gain Income Tax Notes Hindi

पूंजी लाभ (Capital Gain)

 

प्रश्न 19–पूंजी लाभ से आप क्या समझते हैं? यह कितने प्रकार के होते हैं और इनकी गणना कैसे की जाती हैं? (मेरठ, 2009)

 

अथवा

 

पूंजी लाभ से आप क्या समझते हैं? पूंजी लाभ की गणना किस प्रकार की जाती है?

 

पूंजी लाभ का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Capital Gain)

 

आय-कर अधिनियम की धारा 45(1) के अनुसार किसी पूँजी सम्पत्ति के हस्तान्तरण से होने वाला लाभ पूँजी लाभ कहलाता है। पूँजी लाभ उस गत वर्ष की आय माना जाता है जिस गत वर्ष में पूँजी सम्पत्ति का हस्तान्तरण किया जाता है। इस प्रकार कोई भी आय पूँजी लाभ शीर्षक के अन्तर्गत तभी कर योग्य होगी जब निम्नलिखित सभी शर्ते पूरी हो रही हों- 1. पूँजी सम्पत्ति हो, 2. उस पूँजी सम्पत्ति का हस्तान्तरण किया गया हो, 3. यह हस्तान्तरण गत वर्ष मेंहुआ हो, 4. हस्तान्तरण के फलस्वरूप लाभ उत्पन्न हुआ हो, 5. उप्युक्त उत्पन्न लाभ कर मुक्त न हो। अत: पूंजी लाभ का अर्थ समझने के लिए (i) पूँजी सम्पत्ति एवं (ii) पूँजी सम्पत्ति का

 

हस्तान्तरण दोनों शब्दों को समझना परमावश्यक है। দুजी सम्पत्ति (Capital asset) धारा 2(14) के अनुसार कर-निर्धारण वर्ष 2015-16 से पूँजी सम्पत्ति से आशय (अ) करदाता द्वारा धारित (held) किसी भी प्रकार की सम्पत्ति से है, चाहे वह सम्पत्ति करदाता के व्यापार अथवा पेशे से सम्बन्धित हो अथवा नहीं; (ब) विदेशी संस्थागत विनियोक्ता द्वारा धारित कोई भी प्रतिभूति जिसमें सेबी अधिनियम, 1992 के अन्तर्गत बनाये गये नियमों के अनुसार विनियोग किया गया हो। पूँजी सम्पत्ति चल (Movable), अचल (Immovable), मूर्त (Tangible) अथवा अमूर्त (Intangible) किसी भी प्रकार की हो सकती है। परन्तु निम्नलिखित को पूँजी सम्पत्ति नहीं माना जाता है

 

(i) करदाता के व्यापार एवं पेशे के उपयोग के लिए रहतिया, उपभोग्य स्टोर्स एवं कच्चा माल (विदेशी संस्थागत विनियोक्ता द्वारा धारित प्रतिभूति को छोड़कर)। (ii) करदाता अथवा उस पर आश्रित, उसके परिवार के किसी सदस्य के व्यक्तिगत (निजी) उपयोग के लिए कोई घरेलू वस्तु जैसे पहनने के कपड़े, फर्नीचर, वाहन, टेलीविजन अथवा बिजली उपकरण आदि। अपराध-व्यक्तिगत उपयोग में आने वाले आभूषण, ज्वेलरी, सोना चांदी, हीरे जवाहरात, सोना चांदी या हीरे-जवाहरात जड़े कपड़े या फर्नीचर, मूल्यवान धातुओं के बर्तन आदि एवं कर निर्धारण वर्ष 2008-09 से (अ) पुरातत्वीय संग्रह (Archaeological collection), (ब) रेखाचित्र (drawings) (स) चित्रकारी (Paintings) (द) अन्य कोई कलाकृति (any work of art) आदि भी पूँजीगत सम्पत्ति की परिभाषा में ही आते हैं अर्थात् इन सभी को पूँजी सम्पत्ति माना जाता है।

 

(iii) भारत में ग्रामीण कृषि भूमि (Rural Agricultural land in India) : परन्तु कर निर्धारण वर्ष 2014-15 से कृषि भूमि को आकाशीय मार्ग (Aerially) से मापने पर निम्नलिखित क्षेत्र में स्थित होने पर पूँजी सम्पत्ति माना जायेगा-(अ) स्थानीय सीमा से दो किलोमीटर क्षेत्र में, यदि वहां की जनसंख्या दस हजार से अधिक है, परन्तु एक लाख से अधिक नहीं है; (ब) स्थानीय सीमा से छः किलोमीटर क्षेत्र में, यदि वहाँ की जनसंख्या एक लाख से अधिक है, परन्तु दस लाख से अधिक नहीं है; (स) स्थानीय सीमा से आठ किलोमीटर क्षेत्र में, यदि वहाँ की जनसंख्या दस लाख से अधिक है।

(iv) गोल्ड बॉन्ड-6% गोल्ड बॉन्ड, 1977 अथवा 7% गोल्ड बॉण्ड्स, 1980 अथवा नेशनल डिफेन्स गोल्ड बॉण्ड्स, 1980 (अब प्रचलन में नहीं हैं।)

(v) स्पेशल बिअरर बॉण्ड, 1991(अब प्रचलन में नहीं हैं।)

(vi) स्वर्ण निक्षेप बॉण्ड्स-केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित स्वर्ण निक्षेप योजना, 1999 के अन्तर्गत जारी किए गए स्वर्ण निक्षेप बॉण्ड्स। 

 

विशेष- निम्नलिखित स्वयं उपार्जित सम्पत्तियां भी पूंजी लाभ के उद्देश्य से पूंजी सम्पत्ति ही मानी जाती हैं

(1) किसी व्यापार (पेशा नहीं) की स्वयं उपार्जित ख्याति;

(2) स्वयं उपार्जित किरायेदारी के अधिकार वाहन मार्ग परमिट तथा करघा घण्टे;

(3) किसी वस्तु के उत्पादन अथवा निर्माण के अधिकार।

 

स्वयं उपार्जित सम्पत्तियों को प्राप्त करने की लागत शून्य मानी जाती है एवं सम्पूर्ण क विक्रय राशि को ही कर-योग्य पूंजी लाभ माना जाता है।

 इस प्रकार उपरोक्त वर्णित पत्तियों को छोड़कर बाकी सभी सम्पत्तियाँ पूँजी-सम्पत्ति मानी जाती हैं। ख्याति, पेटेन्ट, फर्म में साझेदारों का भाग, लाइसेंस आदि भी पूँजी सम्पत्ति माने जाते हैं। संक्षेप में, पूँजी सम्पत्ति में निम्नलिखित को शामिल किया जाता है-

(1) भूमि, भवन, फ्लैट, प्लॉट;

(2) फर्नीचर, मशीनरी, संयंत्र आदि जिनकी सहायता से व्यापार अथवा उद्योग चलता है;

(3) सोना-चाँदी, हीरे जवाहरात एवं अन्य मूल्यवान पत्थर;

(4) 10,000 या इससे अधिक आबादी वाले नगर पालिका या केन्ट्नमेन्ट बोर्ड की सीमा या केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित क्षेत्र में कृषि भूमि;

(5) विनियोग की दृष्टि से क्रय किये गये अंश, प्रतिभूति आदि;

(6) ख्याति, पेटेन्ट, फर्म में भाग आदि।

(7) प्राचीन वस्तुओं का संग्रह, चित्रकारी, मूर्तियाँ व अन्य कलाकृतियाँ।

 

पूंजी लाभ के उद्देश्य से पूँजी पत्तियों के प्रकार

 

(i) अल्पकालीन पूँजी सम्पत्तियाँ (Short-term capital assets)- अल्पकालीन पूँजी सम्पत्ति से आशय ऐसी पूँजी सम्पत्ति से है जो हस्तान्तरण से पूर्व करदाता के पास 36 माह या उससे कम अवधि के लिए रही हो अर्थात् करदाता 36 माह से अधिक अवधि के लिए सम्बन्धित सम्पत्ति का स्वामी न रहा हो। परन्तु कर-निर्धारण वर्ष 2015-16 से (i) यूनिट के अतिरिक्त अन्य कोई प्रतिभूति जो भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेन्ज पर सूचीबद्ध (listed) है, (ii) समता उन्मुखी पारस्परिक कोष (Equity Oriented Mutual Fund) के यूनिटस एवं (i) जीरो कूपन बॉण्ड को अल्पकालीन पूँजी सम्पत्ति तभी माना जाएगा जब यह हस्तान्तरण से पूर्व करदाता के पास 12 माह या उससे कम अवधि के लिए रहे हों। इस प्रकार असूचीबद्ध प्रतिभूतियों (कम्पनी के अंशों सहित) एवं समता उन्मुखी पारस्परिक कोष के अतिरिक्त अन्य किसी पारस्परिक कोष के urits को अल्पकालीन पूंजी सम्पत्ति तभी माना जाएगा जब यह हस्तान्तरण से पूर्व करदाता के पास 36 माह या उससे कम अवधि के लिए रहे हों। कर-निर्धारण वर्ष 2017-18 से किसी कम्पनी के समता एवं पूर्वाधिकार अंश जो भारत में किसी मान्य स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं है तो यह अवधि 36 माह के स्थान पर 24 माह मानी जायेगी।

 

(ii) दीर्घकालीन पूँजी सम्पत्तियाँ (Long-term capital assets)– दीर्घकालीन पूँजी सम्पत्ति से आशय ऐसी पूँजी सम्पत्ति से है जो हस्तान्तरण से पूर्व करदाता के पास 36 माह अथवा 12 माह से अधिक अवधि (जैसी भी स्थिति हो) के लिए रही हो अर्थात् करदाता 12 माह या 36 माह से अधिक अवधि के लिए सम्बन्धित सम्पत्ति का स्वामी रहा हो।

 

  1. पूंजी सम्पत्ति का हस्तान्तरण- सरल शब्दों में, ‘हस्तान्तरण’ का अर्थ किसी सम्पत्ति को दूसरे व्यक्तियों को बेच देना ये उससे सम्बन्धित समस्त अधिकारों को दूसरे व्यक्तियों (क्रेताओं) को सौंप देना है। आयकर अधिनियम की धारा 2(47) के अनुसार-पूंजी सम्पत्ति के हस्तान्तरण से आशय बिक्री, विनिमय व सम्पत्ति से सम्बन्धित अधिकारों के त्याग से हैं। यदि पूँजी सम्पत्ति का स्वामी पूँजी सम्पत्ति को उसके द्वारा संचालित व्यापार के स्टॉक में परिवर्तित कर लेता है तो इसे भी सम्पत्ति का हस्तान्तरण माना जायेगा।

 

संक्षेप में, पूँजी सम्पत्ति के हस्तान्तरण में मुख्यतया निम्नलिखित को शामिल किया जाता है

 

(i) सम्पत्ति की बिक्री, विनिमय अथवा सम्पत्ति को छोड़ देना, या

(ii) सम्पत्ति के सम्बन्ध में किन्हीं अधिकारों का समाप्त हो जाना, या

(iii) किसी कानून के अन्तर्गत संपत्ति का अनिवार्य अधिग्रहण, या

(iv) पूँजी सम्पत्ति के स्वामी द्वारा उसे अपने व्यापार के रहतिए के रूप में परिवर्तित करना, या रहतिया मान लेना

(v) ऐसा कोई व्यवहार जिससे किसी अचल सम्पत्ति का हस्तांतरण हो जाए अथवा किसी अचल सम्पत्ति को प्रयोग करने का अधिकार मिल जाए।

(vi) शून्य कूपन बॉण्ड का शोधन

 

पूंजी लाभ की गणना (धारा 48) (Computation of Capital Gain)

 

पूंजी लाभों की गणना को दो भागों में बांटा जा सकता है-

 

  1. अल्पकालीन पूंजी लाभ या हानि (LTCG/STCG)- अल्पकालीन पूँजी सम्पत्ति हस्तान्तरण से होने वाले लाभ या हानि को अल्पकालीन पूँजी लाभ या हानि कहा जाता है। दूसरे शब्दों में, यदि पूँजीगत लाभ अल्पकालीन पूँजी सम्पत्तियों से हुआ है तो सम्पत्ति हस्तान्तरण पर प्राप्त या प्राप्य प्रतिफल की राशि में निम्नलिखित को घटाने के पश्चात् शेष रही राशि अल्पकालीन पूँजीगत लाभ होगा

 

(1) सम्पत्ति को प्राप्त करने की वास्तविक लागत;

(2) यदि सम्पत्ति में कोई सुधार या वृद्धि की गई है तो ऐसे सुधार या वृद्धि की लागत; तथा

(3) सम्पत्ति हस्तान्तरण के व्यय जैसे विज्ञापन, दलाली, नीलामी व्यय आदि। संक्षेप में,

 

अल्पकालीन पूंजी लाभ की गणना निम्न प्रकार की जाती है-

 

सम्पत्ति के हस्तांतरण पर प्राप्त प्रतिफल (Sales consideration)

 

Less-1. सम्पत्ति को प्राप्त करने की लागत (Cost of acquisition)

  1. सुधार की लागत (Cost of improvement)

 

  1. हस्तांतरण या बिक्री के सम्बन्ध में व्यय (Transfer expenses)

 

अल्पकालीन पूंजी लाभ

 

अल्पकालीन पूँजी हानि (Short-term capital loss)- यदि सम्पत्ति के हस्तान्तरण से प्राप्त प्रतिफल की राशि कम हो तो अन्तर की राशि अल्पकालीन पूँजी हानि मानी जाएगी। अल्पकालीन पूँजी हानि अन्य अल्पकालीन या दीर्घकालीन पूँजी हानि से पूरी की जा सकती है।

 

  1. दीर्घकालीन पूंजी लाभ या हानि (LTCG/LTC)– दीर्घकालीन पूँजी सम्पत्ति के हस्तान्तरण से होने वाले लाभ या हानि को दीर्घकालीन पूँजी लाभ या हानि माना जाएगा।

 

यदि पूँजीगत लाभ दीर्घकालीन सम्पत्ति से हुआ है तो हस्तान्तरण से प्राप्त प्रतिफल में से उपर्युक्त वर्णित सभी राशियाँ घटायी जाएँगी परन्तु (1) तथा (2) में वर्णित राशियों की वास्तविक लागत न घटाकर उनकी सूचकांक लागत (Indexed cost) को घटाया जाएगा। शेष राशि दीर्घकालीन पूंजी लाभ कहलायेगी।

 

संक्षेप में, आयकर अधिनियम की धारा 48 के अनुसार दीर्घकालीन पूँजी लाभों का निर्धारण निम्न प्रकार किया जाता है

 

दीर्घकालीन पूँजी सम्पत्ति का विक्रय मूल्य या प्रतिफल

घटाइये-निम्नलिखित मदों का योग

 

(a) सम्पत्ति के विक्रय या हस्तान्तरण के व्यय (Transfer expenses)

 

(b) सम्पत्ति को प्राप्त करने की सूचकांकित लागत (Indexed cost of acquisition)

 

(c) सम्पत्ति की सुधार की सूचकांकित लागत (Indexed Cost of improvement)

 

दीर्घकालीन पूंजी लाभ

 

घटाइये-धारा 5454854 D, 54EC,54F,54G एवं 54GA के अन्तर्गत कर-मुक्त राशि

 

कर-योग्य दीर्घकालीन पूंजी-लाभ या हानि

 

नोट- (1) यदि दीर्घकालीन पूँजी सम्पत्ति के हस्तान्तरण से प्राप्त प्रतिफल की राशि घटाई जाने वाली मदों के योग से कम हो अर्थात् घटाने के बाद ऋणात्मक (Negative) राशि आ रही हो तो उसे दीर्घकालीन पूँजी हानि माना जाता है। (2) दीर्घकालीन पूँजी हानि को केवल दीर्घकालीन पूँजी लाभों से ही समायोजित किया जा सकता है। (3) जिन सम्पत्तियों पर ‘व्यापार तथा पेशे से आय’ शीर्षक में हास स्वीकार्य होता है उनसे होने वाला पूँजीगत लाभ हमेशा अल्पकालीन ही होगा। अत: उनकी प्राप्ति लागत एवं वृद्धि लागत को सूचकांकित नहीं किया जाएगा। (4) सूचकांकित लागत ज्ञात करने हेतु केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित ‘लागत वृद्धि सूचकांक’ का प्रयोग किया जाता है।

 

सम्पत्ति को प्राप्त करने की सूचकांकित लागत

= क्रय मूल्य या लागत x सम्पत्ति के हस्तान्तरण वाले वर्ष का सूचकांक / सम्पत्ति को प्राप्त करने वाले वर्ष का सूचकांक

 

(यदि सम्पत्ति 1 अप्रैल, 1981 के पूर्व क्रय की गई हो तो वर्ष 1981-82 का सूचकांक)

 

सम्पत्ति के सुधार की सूचकांकित लागत = सुधार व्यय x हस्तान्तरण वाले वर्ण का सूचकांक / सुधार व्यय वाले वर्ष का सूचकांक

 

प्रश्न 20—पूँजी सम्पत्ति के हस्तान्तरण से आप क्या समझते हैं? कौन से व्यवहार हस्तान्तरण नहीं माने जाते हैं? जो व्यवहार हस्तान्तरण नहीं माने जाते उन पर होने वाले पूंजी लाभ के सम्बन्ध में आय-कर के क्या नियम ?

(मेरठ 2011, 2009 BP, 2005; आगरा 2007)

 

उत्तर-

 

हस्तान्तरण न माने जाने वाले व्यवहार (Transactions not Regarded as Transfer)

 

धारा 47 के अनुसार निम्नलिखित व्यवहार पूँजी लाभ के सम्बन्ध में हस्तान्तरण नहीं माने जाते हैं

 

  1. हिन्दू अविभाजित परिवार के पूर्ण या आंशिक विभाजन की दशा में पूँजी सम्पत्ति का बँटवारा।

 

  1. उपहार, वसीयत अथवा अखण्डनीय ट्रस्ट के अन्तर्गत किसी पूँजी सम्पत्ति का हस्तान्तरण।

 

  1. एक सूत्रधारी कम्पनी द्वारा अपनी सहायक कम्पनी को हस्तान्तरित की गई कोई पूंजी सम्पत्ति बशर्ते (i) सूत्रधारी कम्पनी के पास सहायक कम्पनी के सम्पूर्ण अंश हैं (ii) सहायक कम्पनी एक भारतीय कम्पनी है, (ii) हस्तान्तरण रहतिये के रूप में न हुआ हो।

 

  1. एक सहायक कम्पनी द्वारा अपनी सूत्रधारी कम्पनी को हस्तान्तरित की गई कोई पूंजी सम्पत्ति बशर्ते (i) हस्तान्तरण रहतिये के रूप में न हुआ हो, (ii) सहायक कम्पनी के सम्पूर्ण अंश सूत्रधारी कम्पनी के पास है तथा (ii) सूत्रधारी कम्पनी एक भारतीय कम्पनी है।

 

  1. एकीकरण की किसी योजना के अन्तर्गत, एकीकरण की जाने वाली कम्पनी द्वारा एकीकृत कम्पनी को पूंजी सम्पत्ति का हस्तांतरण, बशर्ते की एकीकृत कम्पनी एक भारतीय कम्पनी हो।

 

  1. एकीकरण की किसी योजना के अन्तर्गत, एकीकरण की जाने वाली विदेशी कम्पनी द्वारा एकीकृत विदेशी कम्पनी को भारतीय कम्पनी के अंशों का हस्तांतरण, यदि एकीकरण की जाने वाली कम्पनी के कम से कम 25 प्रतिशत अंशधारी एकीकृत विदेशी कम्पनी में भी अंशधारी बने रहते है और ऐसे हस्तांतरण पर होने वाले पूंजी लाभ पर उस देश में कर नहीं लगता जिस देश में एकीकरण की जाने वाली कम्पनी समामेलित है।

 

  1. विभक्तीकरण की दशा में विभक्त कम्पनी द्वारा किसी पूंजी सम्पत्ति का भारतीय परिणामी कम्पनी को हस्तांतरण।

 

  1. भारत में स्थित कृषि भूमि का हस्तांतरण जो 1-4-1970 से पूर्व हुआ हो।

 

  1. किसी कम्पनी के बॉण्ड्स, ऋणपत्रों का उसी कम्पनी के अंशों या ऋणपत्रों में परिवर्तन।

 

  1. ऐसी पूंजी सम्पत्ति जो कला, पुरातत्व, वैज्ञानिक या कला संग्रह, पुस्तक, हस्तलिपि आदि का कार्य हो, का सरकार, विश्वविद्यालय अथवा एक सार्वजनिक म्यूजियम अथवा संस्था को हस्तातंरण, जिन्हें सरकार द्वारा बजट में राष्ट्रीय महत्व का घोषित कर दिया है।

 

  1. एक अनिवासी द्वारा दूसरे अनिवासी को भारत के बाहर विदेशी मुद्रा में क्रय किये गये बॉण्ड्स अथवा भारतीय कंपनी के अंशों का हस्तांतरण

 

  1. किसी पूर्वाधिकारी सहकारी बैंक द्वारा किसी उत्तराधिकारी सहकारी बैंक को किसी समामेलन/विलयन में पूँजी सम्पत्ति का हस्तान्तरण।

 

  1. किसी अंशधारी द्वारा किसी समामेलन/विलयन में उसके द्वारा पूर्वाधिकारी सहकारी बैंक में धारिता अंशों का हस्तान्तरण, यदि ऐसा हस्तान्तरण उत्तराधिकारी सहकारी बैंक में अंशों के आबंटन रूपी प्रतिफल के लिए किया गया हो।

 

  1. रुग्ण औद्योगिक कम्पनी (विशिष्ट व्यवस्थाएँ) अधिनियम, 1985 की धारा 18 के अन्तर्गत रुग्ण कम्पनी द्वारा किसी भूमि का हस्तान्तरण बशर्ते इस रुग्ण इकाई का संचालन कर्मचारी सहकारी संस्था द्वारा किया जाता है।

 

  1. बैंकिंग कम्पनी के बैंकिंग संस्थान में समामेलन की योजना के अंतर्गत पूँजी सम्पत्ति का हस्तान्तरण।

 

हस्तान्तरण न माने जाने वाले व्यवहारों पर होने वाले पूँजी लाभ के सम्बन्ध में आय-कर प्रावधान की विवेचन

 

 धारा 45 (1) अनुसार किसी पूंजी सम्पत्ति के हस्तान्तरण से होने वाला लाभ पूँजी लाभ कहलाता है। इसलिए जब कोई व्यवहार हस्तान्तरण ही नहीं है तो उस पर उत्पन्न होने वाला पूँजी लाभ कर योग्य नहीं होगा।

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