Unit 5 Corporate Governance 2nd Mcom Notes

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सेबी के दारा “निगमित अभिशासन का विस्तार” (“Corporate Governance Code developed by the SEBI,”)

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने सूचीबद्ध कम्पनियों के सम्बन्ध में निगम प्रशासन के मानक को बढ़ावा देने और बढ़ाने के लिए निगम प्रशासन (कॉरपोरेट गवर्नेस) पर एक समिति का गठन किया। 25 जनवरी, 2000 को सेबी ने अपनी बैठक में समिति की सिफारिश पर विचार किया और निर्णय लिया कि लिस्टिंग समझौते में संशोधन किया जाए और एक नया खण्ड, जो कि धारा 49 हो, लिस्टिंग समझौते में शामिल किया जाए।

कम्पनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के साथ सामंजस्य करने के दृष्टिकोण एवं निगम प्रशासन ढाँचा को ओर अधिक प्रभावशाली करने के लिए सेबी ने लिस्टिंग समझौते की धारा 49 के प्रावधानों पर पुनर्विचार करके 17 अप्रैल, 2014 को मुख्य परिपत्र जारी किया जो धारा 49 के प्रावधानों को संशोधित करता है। इस मुख्य परिपत्र के जारी होने के बाद सेवी द्वारा धारा 49 पर जारी पूर्व के परिपत्र (Circular) को हटा दिया। धारा 49 में सेबी द्वारा दिए गए निगम प्रशासन संहिता का विवरण इस प्रकार है

 

I, निदेशक मण्डल (Board of Directors)

(1) कम्पनी सहमत है कि कम्पनी के निदेशक मण्डल में कार्यकारी और गैर-कार्यकारी निदेशकों का एक इष्टतम संयोजन होगा, जिसमें कम-से-कम एक महिला निदेशक और गैर-कार्यकारी निदेशक, निदेशक मण्डल के पचास प्रतिशत से कम नहीं होंगे।

(2) स्वतन्त्र निदेशकों की संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि अध्यक्ष कार्यकारी है या गैर-कार्यकारी। एक गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के मामले में, कम-से-कम एक तिहाई बोर्ड में स्वतन्त्र निदेशक शामिल होने चाहिए और कार्यकारी अध्यक्ष के मामले में, कम-से-कम आधे बोर्ड में स्वतन्त्र निदेशक शामिल होने चाहिए।

(3) ‘स्वतन्त्र निर्देशकों” का अर्थ है वे निर्देशक जो –

(क) निदेशक का पारिश्रमिक प्राप्त करने के अलावा, कम्पनी, उसके प्रवर्तकों, उसके प्रबन्धन या सहायक कम्पनियों के साथ कोई अन्य भौतिक आर्थिक सम्बन्ध या लेन-देन नहीं करते हैं, जो बोर्ड निदेशक के निर्णय की स्वतन्त्रता को प्रभावित कर सकता है।

(ख) प्रवर्तकों या निदेशक मण्डल और निदेशक मण्डल के नीचे के स्तर पर किसी व्यक्ति से सम्बन्धित नहीं है।

(ग) तुरन्त पूर्ववर्ती तीन वित्तीय वर्षों में कम्पनी का कार्यकारी न रहा हो।

(घ) पिछले तीन वर्षों से वैधानिक या आन्तरिक ऑडिट फर्म का भागीदार या कार्यकारी नहीं है जो ऑडिट फर्म कम्पनी से जुड़ी है। (च) आपूर्तिकर्त्ता, सेवा प्रदाता कम्पनी का ग्राहक नहीं है, या पट्टेदार पट्टेदाता नहीं है जो निदेशकों की स्वतन्त्रता को प्रभावित कर सकता है।

(छ) कम्पनी में सारवान् हित वाला शेयरधारक नहीं है अर्थात् 2 प्रतिशत या अधिक मतदान वाले शेयर नहीं रखता।

(ज) कम-से-कम 21 वर्ष आयु का है।

(झ) अधिक-से-अधिक 7 सूचीबद्ध कम्पनी में स्वतन्त्रता निदेशक के रूप में कार्य कर सकता है।

(ञ) किसी कम्पनी में पूर्णकालिक निदेशक के रूप में कार्य करने वाला निदेशक तीन से अधिक सूचीबद्ध कम्पनी में स्वतन्त्र निदेशक नहीं हो सकता। गैर-कार्यकारी निदेशकों एवं स्वतन्त्र निदेशकों को सभी फीस, प्रतिफल निदेशक मण्डल द्वारा तय किया जाएगा और अंशधारियों द्वारा सामान्य सभा में अनुमोदित किया जाएगा।

निदेशक मण्डल की बैठक एक वर्ष में कम-से-कम चार बार आयोजित की जाएगी। किसी भी दो बैठकों के बीच अधिकतम चार माह का अन्तराल हो सकता है। लिस्टिंग समझौते के अनुबन्ध X में बोर्ड को उपलब्ध की जाने वाली न्यूनतम जानकारी दी गई है। एक निदेशक सभी कम्पनियों को मिलाकर जिनमें वह निदेशक है, 10 से अधिक समितियों में सदस्य नहीं होगा या पाँच से अधिक समितियों में अध्यक्ष नहीं होगा।

निदेशक मण्डल नियमित रूप से कम्पनी पर लागू होने वाले नियमों और कानूनों के अनुपालन की रिपोर्ट की जाँच करेगा और गैर-अनुपालन की दशा में संशोधन करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। निदेशक मण्डल द्वारा सभी बोर्ड के सदस्यों और वरिष्ठ प्रबन्धन के लिए एक आचरण संहिता रखना अनिवार्य होगा, जो कम्पनी की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा। बोर्ड के सभी सदस्य और वरिष्ठ प्रबन्धन वार्षिक आधार पर आचरण संहिता के अनुपालन की पुष्टि करेंगे। कम्पनी की वार्षिक रिपोर्ट में कम्पनी के सीईओ द्वारा हस्ताक्षरित इस आशय की घोषणा शामिल होगी। आचरण संहिता स्वतन्त्र निदेशक के उत्तरदायित्व निर्धारित करेगी जैसा कि कम्पनी अधिनियम, 2013 में दिया गया है।

 

II, लेखापरीक्षा समिति (Audit Trial Committee)

कम्पनी में एक योग्य और स्वतन्त्र ऑडिट समिति गठित की जाएगी और वह निम्नलिखित विचारार्थ विषयों का ध्यान रखेगी –

(1) लेखापरीक्षा समिति में कम-से-कम तीन सदस्य होंगे, जिनमें से सभी गैर-कार्यकारी निदेशक होंगे, जिनमें से अधिकांश स्वतन्त्र होंगे और कम-से-कम एक निदेशक के पास वित्तीय और लेखा ज्ञान होगा।

(2) समिति का अध्यक्ष एक स्वतन्त्र निदेशक होगा।

(3) शेयरधारक के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए अध्यक्ष वार्षिक आम बैठक में उपस्थित होगा।

(4) लेखापरीक्षा समिति को ऐसे अधिकारियों को आमन्त्रित करना चाहिए, जो यह उचित समझती है, (विशेष रूप से वित्त के प्रमुख) लेकिन विभिन्न अवसरों पर यह कम्पनी के किसी भी अधिकारी से मिल सकती है। वित्त निदेशक, आन्तरिक लेखापरीक्षा के प्रमुख और जब आवश्यक हो, बाहरी लेखापरीक्षक का एक प्रतिनिधि लेखापरीक्षा समिति की बैठकों के लिए आमन्त्रित किया जाएगा।

(5) कम्पनी सचिव समिति के सचिव के रूप में कार्य करेगा।

(6) ऑडिट कमेटी साल में कम से कम तीन बार बैठक करेगी। एक बैठक वार्षिक खातों को अन्तिम रूप देने से पहले और हर छह महीने में एक बैठक की जाएगी। कोरम दो सदस्यों या ऑडिट समिति के सदस्यों में से एक तिहाई होगा, जो भी अधिक है लेकिन कम-से-कम दो स्वतन्त्र निदेशक अवश्य होने चाहिए।

(7) लेखापरीक्षा समिति में ऐसी शक्तियाँ होंगी जिनमें निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं –

(i) किसी भी गतिविधि के सन्दर्भ में इसकी जाँच करना।

(ii) किसी भी कर्मचारी से जानकारी लेना।

(iii) बाहर कानूनी या अन्य पेशेवर सलाह प्राप्त करने के लिए।

(iv) यदि आवश्यक हो तो सम्बन्धित विशेषज्ञता के साथ बाहरी लोगों की उपस्थिति को सुनिश्चित करना।

(v) लेखापरीक्षा समिति की भूमिका में निम्नलिखित शामिल होंगे

(a) कम्पनी की वित्तीय रिपोर्टिंग प्रक्रिया और प्रकटीकरण की स्थिति का निरीक्षण करना और यह सुनिश्चित करना कि वित्तीय विवरण सही है, पर्याप्त और विश्वसनीय है।

(b) बाहरी लेखापरीक्षक की नियुक्ति और हटाने की सिफारिश करना, लेखापरीक्षा शुल्क निर्धारण और किसी अन्य सेवाओं के लिए भुगतान के लिए भी मंजूरी।

(c) प्रबन्धन के साथ वार्षिक वित्तीय विवरणों की समीक्षा करना बोर्ड को प्रस्तुत करना।

  • लेखांकन नीतियों और प्रथाओं में कोई भी परिवर्तन।
  • प्रबन्धन द्वारा निर्णय के आधार पर प्रमुख लेखा प्रविष्टियाँ
  • प्रारूप ऑडिट रिपोर्ट में योग्यता।
  • लेखापरीक्षा से उत्पन्न महत्त्वपूर्ण समायोजन
  • लेखांकन मानकों का अनुपालन।
  • वितीय विवरणों से सम्बन्धित स्टॉक एक्सचेंज और कानूनी आवश्यकताओं का अनुपालन।

(d) प्रबन्धन, बाहरी और आन्तरिक लेखा परीक्षकों के साथ समीक्षा करना।

(e) कम्पनी की वित्तीय और जोखिम प्रबन्धन नीतियों की समीक्षा करना।।

(1) जमाकर्त्ताओं, ऋणपत्रधारकों, शेयरधारकों (घोषित लाभांश की स्थिति में) के भुगतान में चूक के कारणों पर ध्यान देना।

 

III, सहायक कम्पनी (Subsidiary Company)

(अ) सूत्रधारी कम्पनी के निदेशक मण्डल से कम-से-कम एक स्वतन्त्र निदेशक असूचीकृत सहायक कम्पनी के निदेशक मण्डल में निदेशक होगा।

(ब) सूत्रधारी कम्पनी की ऑडिट कमेटी, सहायक कम्पनी के वित्तीय विवरणों की समीक्षा भी कर सकती है; विशेष रूप से असूचीकृत सहायक कम्पनी में किए गए निवेश का|

(स) सहायक कम्पनी की बोर्ड बैठकों का कार्यवृत्त सूत्रधारी कम्पनी की बोर्ड बैठक में समीक्षा के लिए रखा गया।

(द) सूत्रधारी कम्पनी की बोर्ड रिपोर्ट में सहायक कम्पनी के मामलों की भी समीक्षा का वर्णन करा जाएगा।

 

IV, प्रकटीकरण (Disclosure)

(क) सम्बन्धित पक्ष लेन-देन (Related Party Transactions)

  • सम्बन्धित पक्षों के साथ सभी लेन-देन के विवरण को अनुमोदन (अनुसमर्थन के लिए लेखापरीक्षा समिति के समक्ष रखा जाएगा और निगम प्रशासन का पालन के प्रतिवेदन के साथ)
  • कम्पनी सम्बन्धित पक्ष लेन-देन हेतु अपनी नीति को कम्पनी की वेबसाइट पर प्रदर्शित करेगी और उस वेबसाइट का लिंक अपनी वार्षिक रिपोर्ट में देगी।

(ख) जोखिम प्रबन्धन पर बोर्ड प्रकटीकरण (Board Disclosure on Risk Management)

  • जोखिम प्रबन्धन और प्रक्रियाओं को न्यूनतम करने के बारे में बोर्ड सदस्यों को सूचित करने के लिए प्रक्रियाओं को लागू करेगा।
  • प्रबन्धन अनुपालन अधिकारी द्वारा जोखिम नियन्त्रण की प्रक्रिया की समीक्षा बोर्ड द्वारा की जाएगी।

(ग) प्रारम्भिक सार्वजनिक निर्गमन, अधिकार निर्गमन से आय (Proceeds from Public issue, Right issue)

जब एक प्रारम्भिक सार्वजनिक निर्गमन के माध्यम से धन एकत्रित किया जाता है तो लेखापरीक्षा समिति को तिमाही आधार पर निधियों के उपयोग / अनुप्रयोगों का खुलासा करना चाहिए। इसके अलावा, वार्षिक आधार पर, प्रविवरण में दिए गए कम्पनी के उद्देश्यों के अतिरिक्त उद्देश्यों के लिए उपयोग की गई धनराशि का विवरण तैयार करके लेखापरीक्षा समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगी। यह विवरण स्वतन्त्र लेखापरीक्षकों द्वारा प्रमाणित किया जाएगा।

(घ) निदेशकों का परिश्रमिक (Remuneration of Directors)

  • गैर कार्यकारी निदेशक के सभी आर्थिक सम्बन्ध या लेन-देन का वार्षिक रिपोर्ट में कम्पनी का खुलासा किया जाएगा।
  • निदेशकों के पारिश्रमिक पर कॉरपोरेट प्रशासन के अन्तर्गत वार्षिक विवरण में किया जाने वाला प्रकटीकरण।
  • सभी निदेशकों के पारिश्रमिक पैकेज के सभी तत्त्व अर्थात् वेतन, लाभ, बोनस, स्टॉक विकल्प, पेंशन आदि।
  • निश्चित घटक और प्रदर्शन से जुड़े प्रोत्साहन का विवरण।
  • सेवा अनुबन्ध, सूचना अवधि, विच्छेद शुल्क।
  • स्टॉक विकल्प विवरण, यदि कोई हो और क्या छूट के साथ ही जारी किया जाता है जिस अवधि में उपार्जित किया गया और जिस पर प्रयोग किया जा सके।

(च) प्रबन्धन (Management)

वार्षिक रिपोर्ट जो अंशधारियों के सामने प्रस्तुत की जाती है, उसमें निदेशकों की रिपोर्ट और उसके अंश, प्रबन्धन चर्चा और विश्लेषण शामिल किए जाने चाहिए। प्रबन्धन चर्चा और विश्लेषण रिपोर्ट अग्रलिखित विषयों को समाहित करेगी—

  • उद्योग संरचना और विकास
  • अवसर और खतरे।
  • खण्ड वार या उत्पाद-वार प्रदर्शन दृष्टिकोण |
  • जोखिम और चिन्ता।
  • आन्तरिक नियन्त्रण प्रणाली और उनकी पर्याप्तता
  • परिचालन के सम्बन्ध में वित्तीय प्रदर्शन पर चर्चा प्रदर्शन।
  • मानव संसाधन औद्योगिक सम्बन्ध में सामग्री विकास

(छ) शेयरधारक (Shareholders)

  • नए निदेशक की नियुक्ति या फिर नियुक्ति के मामले में शेयरधारकों को निम्नलिखित जानकारी प्रदान की जानी चाहिए|
  • विशिष्ट कार्यात्मक क्षेत्रों में उनकी विशेषज्ञता की प्रकृति तथा ऐसी कम्पनियों के नाम
  • निदेशक का संक्षिप्त विवरण; जिनमें व्यक्ति निर्देशन भी रखता है और बोर्ड की समितियों की सदस्यता भी।
  • कम्पनी के तिमाही परिणाम, जो विश्लेषकों को प्रस्तुत किए गए हैं, कम्पनी की वेबसाइट पर रखा जाएगा, या ऐसे भेजा जाएगा जिससे स्टॉक एक्सचेंज जिस पर कम्पनी सूचीबद्ध है, इसे अपनी वेबसाइट पर रखने में सक्षम हो सके।
  • एक गैर-कार्यकारी निदेशक की अध्यक्षता में एक बोर्ड समितिः ‘शेयर धारक/निवेशक शिकायत समिति के नाम से विशेष रूप से शेयरधारक की शिकायत निवारण के लिए बनाई जाएगी जैसे निवेशकों की शेयरों के हस्तान्तरण, बैलेंस शीट न मिलने घोषित लाभांश आदि की प्राप्ति न होना।
  • कम्पनी का बोर्ड किसी अधिकारी या समिति को शेयर हस्तान्तरण की शक्ति सौंप देगा ताकि शेयर हस्तान्तरण प्रक्रिया में तेजी आ सके।

(ज) सीईओ/सीएफओ प्रमाणन (Certification by the Chief Executive Officer/Chief Finance Officer)

कम्पनी का सीईओ या प्रबन्ध निदेशक कम्पनी अधिनियम, 2013 में दिए गए प्रावधानों द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। वे प्रमाणित करेंगे कि कम्पनी के वित्तीय विवरण उनके सर्वोत्तम ज्ञान के आधार पर ठीक हैं। कम्पनी के विवरण कम्पनी का सच्चा और उचित चित्र प्रस्तुत करते हैं। ये विवरण लेखांकन प्रमापों, नियमों और प्रावधानों के आधार पर तैयार किए गए हैं। इन विवरणों में कोई भी असत्य कथन नहीं है और कोई भी आवश्यक तथ्य छूटा नहीं है।

(झ) निगम प्रशासन पर प्रतिवेदन (Report on Corporate Governance)

वार्षिक रिपोर्ट में निगम प्रशासन पर एक अलग सेक्शन होगा जो निगम प्रशासन के अनुपालन का विवरण प्रस्तुत करेगा। यदि निगम प्रशासन का पालन नहीं किया गया है, तो इसके कारणों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया जाएगा। कम्पनियाँ प्रत्येक तिमाही की समाप्ति के 15 दिन के अन्दर स्टॉक एक्सचेंज को निगम प्रशासन के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

Unit 5 Corporate Governance 2nd Mcom Notes
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