Unit 4 Return of Income Mcom Notes

Unit 4 Return of Income Mcom Notes

Unit 4 Return of Income Mcom Notes

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आय का विवरण (Return of Income)

 

आय का विवरण (धारा 139) (Return of Income)

आय के विवरण को आय का नक्शा भी कहते हैं। यह एक ऐसा विवरण है जिसमे आय के प्रत्येक शीर्षक से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ, धारा 80 की कटौतियाँ, कर दायित्व का विवरण, कर से छूटों का विवरण, घोषणा एवं इसे भरने के लिए कुछ वांछित संकेत एवं सुझाव दिए रहते हैं। यह छपे हुए फॉर्म के रूप में हिन्दी या अंग्रेजी अथवा दोनों भाषाओं में होता है। करदाता इसे आयकर कार्यालय से प्राप्त कर सकता है अथवा बाजार से क्रय कर सकता है। आयकर अधिनियम की धारा 139 के अनुसार आय की विवरणी से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण प्रावधान निम्नलिखित प्रकार हैं –

(1) आय का विवरण प्रस्तुत करना (Filing or Submission of Return of Income) – धारा 139(1) के अनुसार, प्रत्येक कम्पनी एवं साझेदारी फर्म को आय का विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य है चाहे उन्हें लाभ हो अथवा हानि। अन्य कोई भी व्यक्ति, जिसकी स्वयं की कुल आय अथवा उस व्यक्ति की कुल आय, जिसकी आय पर वह आयकर देने के लिए दायी है। यदि आय अधिकतम कर मुक्त सीमा से अधिक है तो उसके लिए आय | का विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य है। ऐसा व्यक्ति गतवर्ष की आय का विवरण निर्धारित फॉर्म में तथा निर्धारित ढंग से प्रमाणित करके आयकर कार्यालय में देय तिथि को या इससे पूर्व निर्धारित संलग्नकों के साथ दाखिल करता है। कर निर्धारण वर्ष 2019-20 तथा 2020-21 के लिए 60 वर्ष से कम आयु वाले पुरुष एवं महिला निवासी व्यक्ति (An Individual), हिन्दू अविभाजित परिवार एवं A.O.P. तथा B.O.I. के लिए कर मुक्त आय की सीमा ₹2,50,000 है। 60 वर्ष या अधिक लेकिन 80 वर्ष से कम आयु वाले निवासी व्यक्ति (पुरुष एवं महिला) करदाता के लिए कर मुक्त आय की सीमा ₹ 3 लाख है। 80 वर्ष या इससे अधिक आयु वाले निवासी व्यक्ति (पुरुष एवं महिला) करदाता के लिए कर मुक्त सीमा ₹ 5 लाख है।

कम्पनी, फर्म एवं सहकारी समिति आदि को अपनी सम्पूर्ण आय पर आयकर चुकाना पड़ता है अर्थात् इनके लिए कर मुक्त सीमा शून्य है।

पुण्यार्थ ट्रस्ट आदि द्वारा आयकर विवरणी दाखिल करना – यदि ऐसी संस्था की आय धारा 11 एवं 12 के अन्तर्गत कर मुक्त राशि घटाने से पूर्व कर योग्य सीमा से अधिक है, तो इसे देय तिथि तक अपनी आय का विवरण दाखिल करना होगा।

राजनीतिक दल द्वारा आयकर विवरणी दाखिल करनायदि राजनीतिक दल की आय धारा 13A के अन्तर्गत कर मुक्त राशि घटाने से पूर्व कर योग्य सीमा से अधिक है, तो इसे देय तिथि तक अपनी आय का विवरण दाखिल करना होगा।

हानि की विवरणीयदि किसी व्यक्ति को गतवर्ष में व्यवसाय से हानि, सट्टा व्यवसाय से हानि, निर्दिष्ट व्यवसाय से हानि या पूँजी लाभ शीर्षक में हानि होती है और वह उसे आगे ले जाकर इसकी पूर्ति करना चाहता है तो उसे देय तिथि तक अपनी आय का विवरण दाखिल करना होगा।

यदि हानि की विवरणी देय तिथि तक दाखिल नहीं की गयी, तो उक्त हानि को आगे ले जाकर पूरा नहीं किया जा सकता, परन्तु यह प्रावधान मकान-सम्पत्ति से आय शीर्षक में हानि, अशोधित ह्रास [धारा 32 (2)], वैज्ञानिक अनुसन्धान तथा परिवार नियोजन पर अशोधित पूँजीगत व्यय के सम्बन्ध में लागू नहीं होता।

अनिवार्य रूप से आय का विवरण दाखिल करना [धारा 142 (1)] – यदि कोई करदाता देय तिथि तक आय का विवरण दाखिल नहीं करता है, तो कर निर्धारण अधिकारी उसे नोटिस देकर, आय का विवरण फाइल करने का निर्देश दे सकता है। ऐसा विवरण उस अवधि में फाइल करना होगा जो नोटिस में सूचित की गई है। यदि वह इस अवधि में विवरण दाखिल नहीं करता तो उस पर धारा 234A के अन्तर्गत ब्याज लगाया जाएगा।

(2) आयकर विवरणी दाखिल करने से मुक्ति (Exemption from Furnishing a Return of Income) – [धारा 139 (1C)], केन्द्रीय सरकार अधिसूचना जारी करके किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग (Class of Persons) को आय विवरणी दाखिल करने से मुक्त कर सकती है। ऐसा करते समय केन्द्रीय सरकार उन दशाओं (Conditions) को भी अधिसूचित करेगी जिनके अन्तर्गत ऐसी मुक्ति प्रदान की गई है।

(3) आय की विवरणी प्रस्तुत करने की निर्धारित तिथि (Due Date for Submitting Return of Income) – (अ) कम्पनी के लिए कर निर्धारण वर्ष की 30 सितम्बर।

(ब) गैर कम्पनी करदाता – यदि हिसाब का अंकेक्षण आवश्यक है कर निर्धारण वर्ष की 30 सितम्बर।

(स) अन्य किसी दशा में – कर निर्धारण वर्ष की 31 जुलाई।

(4) आय की विवरणी देरी से जमा करने पर फीस – यदि आय की विवरणी निर्धारित तिथि के उपरान्त देर से जमा की जाती है तो कर निर्धारण वर्ष 2018-19 से धारा 234F के अन्तर्गत निम्नलिखित फीस जमा करनी होगी –

(i) यदि कुल आय ₹ 5,00,000 से अधिक नहीं है तो ₹ 1,000 |

(ii) किसी अन्य दशा में, (अ) यदि विवरणी सम्बन्धित कर-निर्धारण वर्ष में 31.12 या इससे पूर्व जमा की जाती है तो ₹ 5,000, (ब) यदि विवरणी सम्बन्धित कर-निर्धारण वर्ष के पश्चात् में 31.12 जमा की जाती है तो ₹10,000 |

(5) आयकर विवरणी दाखिल करने में चूक करने पर ब्याज (धारा 234A) – यदि करदाता आयकर विवरणी निर्धारित तिथि तक दाखिल नहीं करता तो उसे निम्नलिखि अवधि का ब्याज देना होगा।

(i) विवरणी दाखिल करने की निर्धारित तिथि से विवरणी दाखिल करने की तिथि तक का

(ii) यदि विवरणी दाखिल ही नहीं की जाती तो विवरणी दाखिल करने की निर्धारित तिथि से सर्वोत्तम कर निर्धारण तिथि तक का। व्याज दर – 1% प्रति माह साधारण ब्याज दर से ब्याज की गणना की जाएगी।

यदि आय का रिटर्न देय तिथि के बाद दाखिल किया जाता है या दाखिल नहीं किया जाता परन्तु स्वयं कर निर्धारण पर देय कर की राशि का भुगतान आय का रिटर्न दाखिल करने की देय तिथि से पूर्व कर दिया जाता है, तो ब्याज नहीं लगेगा।

(6) E-Filing of Return – फर्मों, कम्पनी, करदाताओं एवं उन सभी करदाताओं को जिन्हें अपने खातों का अंकेक्षण कराना अनिवार्य है तथा प्रत्येक ऐसे करदाता को जो आयकर विभाग से कर वापसी की माँग करता है, आयकर विवरणी को e-filing ही करना होगा। इनके अतिरिक्त अन्य करदाता अपनी आयकर विवरणी को e-filing भी कर सकते हैं, चाहे तो निर्धारित फार्म को हाथ से भरकर भी दाखिल कर सकते हैं।

कर निर्धारण वर्ष 2013-14 से उन सभी करदाताओं के लिए भी आयकर विवरणी को e-filing करना अनिवार्य कर दिया गया है जिनकी कर योग्य आय गत वर्ष में ₹5 लाख या अधिक है।

(7) आय की संशोधित विवरणी (Revised Return of Income) [ धारा 139 (5)] – यदि किसी व्यक्ति को आयकर विवरणी दाखिल करने के बाद यह पता चलता है कि उक्त विवरणी में उससे कोई भूल अथवा गलती हो गयी है तो कर निर्धारण पूर्ण होने से पूर्व अथवा सम्बन्धित कर निर्धारण वर्ष समाप्त होने तक, जो भी पहले हो, वह संशोधित विवरणी दाखिल कर सकता है।

संशोधित विवरणी दाखिल करने की शर्ते – (i) प्रथम विवरणी जिसके सम्बन्ध में संशोधित विवरणी दाखिल की गई है धारा 139 (1) में वर्णित अवधि में या विलम्बित विवरणी [ धारा 139 (4) में दाखिल कर दी गई थी।

(ii) भूल जान-बूझकर नहीं की गई हो।

(8) आय की विवरणी का दोषपूर्ण होना (Defective Return of Income) [धारा 139 (9)] – यदि कर निर्धारण अधिकारी को ऐसा लगता है कि करदाता द्वारा दाखिल की गयी। आय की विवरणी दोषपूर्ण है, तो वह करदाता को ऐसी त्रुटि के बारे में सूचना देगा तथा 15 दिन की अवधि के भीतर ऐसी त्रुटि को सुधारने का अवसर प्रदान करेगा। करदाता द्वारा प्रार्थना करने पर 15 दिन की अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है। यदि निर्धारित अवधि में ऐसी गलती को नहीं सुधारा जाता, तो ऐसी विवरणी को व्यर्थ माना जाएगा और यह माना जाएगा जैसे कि करदाता ने आय का विवरण दाखिल ही न किया हो।

यदि करदाता निर्धारित 15 दिन की अवधि या बढ़ायी गई अवधि के बाद, किन्तु कर – निर्धारण होने से पूर्व दोष को सुधार देता है, तो निर्धारण अधिकारी इस देरी को माफ कर सकता है तथा विवरणी को वैध मान सकता है।

(9) विवरणी पर हस्ताक्षर (Signature on Return) [धारा 140] – आय के विवरण पर निम्नलिखित व्यक्ति हस्ताक्षर करेंगे तथा उसे सत्यापित करेंगे –

(i) व्यक्ति – सामान्य रूप से व्यक्ति (Individual) की दशा में स्वयं के द्वारा, यदि व्यक्ति भारत के बाहर गया हो, तो उसके द्वारा इस सम्बन्ध में अधिकृत व्यक्ति द्वारा, यदि व्यक्ति का मस्तिष्क ठीक नहीं है, तो उसके संरक्षक द्वारा या अन्य विशेष परिस्थिति में उसके द्वारा अधिकृत व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाएँगे।

(ii) हिन्दू अविभाजित परिवार – कर्त्ता द्वारा या विशेष परिस्थिति में परिवार के किसी वयस्क सदस्य द्वारा।

(iii) कम्पनी – प्रबन्ध संचालक द्वारा तथा विशेष परिस्थितियों में अन्य संचालक, अधिकृत व्यक्ति, निस्तारक या प्रमुख अधिकारी द्वारा।

(iv) फर्म – प्रबन्धक साझेदार द्वारा या अन्य किसी भी वयस्क साझेदार द्वारा।

(v) सीमित दायित्व वाली फर्म (LLP) – मनोनीत (Designated) साझेदार द्वारा अथवा अन्य किसी साझेदार द्वारा।

(vi) स्थानीय सत्ता- प्रमुख अधिकारी द्वारा।

(vii) राजनीतिक दल मुख्य प्रशासनिक अधिकारी द्वारा

(viii) अन्य दशा में – सक्षम या अधिकृत व्यक्ति।

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विभिन्न करदाताओं के लिए आय विवरण (Forms of Return for different Assessees)

आय विवरण फॉर्म संख्या (Return Form No.) करदाता, जिनके लिए फार्म प्रयुक्त है (Assessee for whom form is meant)
1, SAHAJ ITR-1 एक ‘एक व्यक्ति’ करदाता, जो निवासी है, असाधारण निवासी के अतिरिक्त जिनकी वेतन’ शीर्षक, आय, एक मकान-सम्पत्ति की आय एवं अन्य स्रोतों की आय (ब्याज आदि) है तथा जिसकी कुल आय ₹50 लाख तक है, के लिए।
2, ITR-R ऐसे ‘एक व्यक्ति’ एवं हिन्दू अविभाजित परिवार के लिए जिनकी किसी व्यापार या पेशे से आय या प्राप्ति नहीं है।
3, ITR-3 ऐसे ‘एक व्यक्ति’ एवं हिन्दू अविभाजित परिवार जिनकी एकाकी (स्वयं-स्वामित्त्व) व्यापार या पेशे से कोई आय या प्राप्ति है, के लिए। साझेदारों (Partners) को भी अपनी आय विवरण दाखिल करने के लिए इसी फार्म की आवश्यकता है। इससे पहले साझेदार ITR-2 में दाखिल करते थे।
4, ITR-4 SUGAM व्यापार अथवा पेशे की अनुमानित आय के लिए।
5, ITR-5 (i) एक व्यक्ति, (ii) हिन्दू अविभाजित परिवार, (iii) कम्पनी एवं (iv) ITR Form-7 के अन्तर्गत आय विवरण दाखिल करने वाले व्यक्तियों को छोड़कर अन्य व्यक्तियों के लिए।
6, ITR-6 कम्पनियों (इन कम्पनियों को छोड़कर, जो धारा 11 के अन्तर्गत कर मुक्ति का दावा करती हैं) के लिए।
7, ITR-7 उन सभी करदाताओं (कम्पनी को सम्मिलित करके) के लिए, जिन्हें धारा 139 (4A), 139 (4B), (4C), | (4D), (4E) या (4F) के अन्तर्गत आय विवरण दाखिल करना अनिवार्य है।
8, ITR-V प्राप्ति की रसीद |

 

आय विवरण का प्रारूप (Proforma of Income-tax Return)

आय विवरण के 7 प्रारूप हैं- SAHAJ ITR-1, ITR-2, ITR-3, ITR-4, ITR-5, ITR-6 एवं ITR-71 प्रत्येक आय विवरण विशेष वर्ग या वर्गों के करदाता या करदाताओं के लिए है। आयकर विभाग ने प्रत्येक वर्ष के करदाता या करदाताओं के लिए प्रत्येक कर निर्धारण वर्ष के लिए अलग-अलग आय विवरण तैयार किए हैं। प्रत्येक करदाता) वह आय विवरण भरता है, जो उस पर लागू होता है।

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आय विवरण फॉर्म की उपलब्धता (Availability of Income-returns)

आय विवरण (ITRs) एवं अन्य फॉर्म, जो आयकर विभाग में आय विवरण दाखिल करने में प्रयुक्त होते हैं, की उपलब्धता निम्न स्थानों पर होती है—

(अ) आयकर विभाग (Income tax Department); या

(ब) आयकर आयुक्त का जनसम्पर्क अधिकारी (T) Public Relation Officer of CIT); या

(स) इस उद्देश्य के लिए चिह्नित डाक घर (Post-office selected for the purpose); या

(द) इस उद्देश्य के लिए चिह्नित केन्द्रीय भण्डार (The Kendriya Bhandars selected for the purpose); या

(इ) विभाग द्वारा इस हेतु अधिकृत विभिन्न अन्य एजेन्सी, प्रकाशक कम्पनियाँ आदि (Varous other Agencies, Publishing Companies authorised in this behalf by the Department)

इसके अतिरिक्त आय विवरण (ITR Forms) एवं अन्य फॉर्म को विभाग की वेबसाइट (Website) से डाउनलोड (Download) भी किया जा सकता है। आय विवरण भरते समय सावधानियाँ (Precautions while filling Return ) – आयकर विभाग में आय विवरण भरते समय निम्न सावधानियां बरतनी चाहिए –

(1) जहाँ तक सम्भव हो अंग्रेजी के बड़े अक्षरों (Capital letters) में नीली स्याही का प्रयोग करते हुए आय विवरण भरना चाहिए हानि की राशि को लाल स्याही से लिखें।

(2) साफ-सुथरा एवं उचित ढंग से लिखें।

(3) परिवर्तन एवं कटिंग्स पर हस्ताक्षर से प्रमाणन हो ।

(4) कोई भी कॉलम या ब्लॉक खाली न छोड़ा जाए। उसमें No applicable) अर्थात् लागू नहीं भरा जाए। / NIL या NA (Not) (5) जहाँ तक सम्भव हो आय विवरण भरने से पूर्व सभी देय करों का भुगतान कर दें।

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कोई प्रपत्र नहीं—संलग्नक रहित विवरण (No document Annexure-less Return)

धारा 139 (C) के अनुसार, प्रत्यक्ष करों के केन्द्रीय बोर्ड (CBDT) ने यह अधिकार प्रदान किया है कि आय विवरण दाखिल करते समय उसके साथ दाखिल किए जाने वाले प्रपत्रों; जैसे—विवरण, प्राप्ति रसीद, प्रमाण पत्र, अंकेक्षण रिपोर्ट अथवा अन्य कोई अभिलेख या प्रपत्र आदि जिन्हें आय विवरण के साथ संलग्न करना अनिवार्य होता है, संलग्न न किए जाएँ और आय विवरण बिना संलग्नकों के दाखिल कर लिया जाए। ये अभिलेख/प्रपत्र कर निर्धारण अधिकारी द्वारा माँगे जाने पर उसके समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

इस अधिकार का प्रयोग करते हुए CBDT ने आय विवरण में यह स्वतः निर्देशित कर दिया है कि आय विवरण के साथ कोई भी अभिलेख या प्रपत्र विवरण या संलग्नक आय एवं आयकर गणना का विवरण, लाभ-हानि खाता या चिट्ठे की प्रतिलिपि आदि संलग्न न करें। इसी प्रकार, स्त्रोत पर आयकर कटौती TDS या आयकर वसूली TCS का फार्म, अग्रिम कर स्वयं निर्धारण कर, अंकेक्षण रिपोर्ट या अन्य प्रपत्र भी संलग्न न करें।

करदाता आय विवरण दाखिल करते समय निम्न प्रपत्र एवं अभिलेख अवश्य – तैयार प्राप्त कर लें, ताकि कर निर्धारण अधिकारी द्वारा माँगे जाने पर इन्हें उसके सम्मुख प्रस्तुत किया जा सके –

(i) आय एवं आयकर गणना का विवरण;

(ii) स्त्रोत पर आयकर कटौती/वसूली का प्रमाण-पत्र फॉर्म 16, 16A या 27 D, जो भी लागू हो;

(iii) प्रीमियम, प्रॉवीडेण्ट फण्ड, NSC, नए समता अंश, सहयोगी कोष, NSS, चिकित्सकीय बीमा, दान आदि के प्रमाण-पत्र एवं रसीद जो माँगी गयी कटौतियों के साक्ष्य है;

(iv) यदि नियमित खाता पुस्तकें नहीं रखी जाती हैं तो प्राप्ति एवं भुगतान का विवरण;

(v) यदि मकान पर ऋण की कटौती मांगी गई है तो ब्याज का प्रमाण-पत्र ।

(vi) लाभ-हानि खाता, चिट्ठा, अंकेक्षण रिपोर्ट तथा स्वामी साझेदारों के व्यक्तिगत खाते;

(vii) धारा 80-IA, 80-IAB, 80-1B, 80-IBA, 80-IC, 80-ID or 80-1E की कटौती ली है तो इसके लिए लेखापालक (Accountant) की आख्या

(viii) धारा 44 AB के अन्तर्गत कर अंकेक्षण (Tax Audit) जहाँ भी आवश्यक है, करानी चाहिए तथा चार्टर्ड एकाउण्टेण्ट अनिवार्य रूप से धारा 44 AB अपनी अंकेक्षण रिपोर्ट अपनी Login से आयकर विभाग में दाखिल करेगा।

(ix) आय या कटौती के साक्ष्य हेतु अन्य कोई भी प्रपत्र या अभिलेख या खाता प्रमाण-पत्र आदि।

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आय विवरण की ऑनलाइन फाइलिंग (Online Filing of Returns of Income)

‘आय विवरण’ की ऑनलाइन फाइलिंग का आशय आय विवरण की ई-फाइलिंग (e-filing) से है। ई-फाइलिंग से आशय इण्टरनेट (Internet) के माध्यम से आय विवरण की फाइलिंग से है। आयकर विवरण को इलेक्ट्रॉनिकली दाखिल करने की प्रक्रिया को ही ‘ई-फाइलिंग’ (e-filing) कहते हैं। आय विवरण की ई-फाइलिंग या ऑनलाइन फाइलिंग से तात्पर्य निम्न प्रकार से आय विवरण दाखिल करने से है –

(i) आय विवरण को इण्टरनेट के माध्यम से, डिजिटल हस्ताक्षर सहित या डिजिटल हस्ताक्षरों के बिना, इलेक्ट्रॉनिकली दाखिल करना।

(ii) आय विवरण में दी गयी सूचनाओं को इण्टरनेट के माध्यम से सम्प्रेषित करना तथा इसके बाद विवरण का सत्यापन ITR-V फॉर्म में सम्प्रेषित करना।

(iii) आय विवरण में दी गयी सूचनाओं को इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणन कोड के अन्तर्गत इलेक्ट्रॉनिकली सम्प्रेषित करना। इस प्रकार, आय विवरण को इण्टरनेट के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिकली दाखिल करने को ही ‘आय विवरण की ऑनलाइन फाइलिंग’ (Online filing of return) कहा जाता है। इसी को ‘ई-फाइलिंग’ (e-filing) या ई-विवरण (e-return) भी कहा जाता है।

ई-फाइलिंग का आशय (Meaning of e-filing)

(i) यह इण्टरनेट के माध्यम से आय विवरण को इलेक्ट्रॉनिकली दाखिल करने की प्रक्रिया है। इसी को आय विवरण को ऑनलाइन दाखिल करना भी कहा जाता है।

(ii) वे सभी करदाता जिन्हें धारा 44AB के अन्तर्गत खातों का वैधानिक अंकेक्षण अनिवार्य है तथा सभी कम्पनी करदाताओं को ई-रिटर्न (e-return) दाखिल करना अनिवार्य है तथा धारा 44AB की अंकेक्षक रिपोर्ट चार्टर्ड एकाउण्टेण्ट द्वारा अपने Login से आयकर Portal पर सीधे दाखिल की जाएगी।

(iii) ई-फाइलिंग डिजिटल हस्ताक्षरों (Digital signature) सहित अथवा डिजिटल हस्ताक्षरों के बिना की जा सकती है।

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ई-फाइलिंग के प्रकार (Types of e-filing)

आय विवरण को इलेक्ट्रॉनिकली दाखिल करने, अर्थात् ‘ई-फाइलिंग’ की तीन विधियाँ हैं –

(1) डिजिटल हस्ताक्षरों सहित ई-फाइलिंग, बाद में इसमें किसी कार्यवाही की आवश्यकता नहीं होती।

(2) डिजिटल हस्ताक्षरों के बिना ई-फाइलिंग, इसमें ई-फाइलिंग के बाद, अर्थात् आय विवरण को इलेक्ट्रॉनिकली दाखिल के बाद 120 दिनों में करदाता द्वारा विधिक रूप से हस्ताक्षरित ITR-V CPC बेंगलुरु को साधारण डाक या स्पीड पोस्ट के माध्यम से प्रेषित करना होगा। ITR-V प्रेषित करने के बाद ही डिजिटल हस्ताक्षर बिना आय विवरण दाखिल करने की प्रक्रिया पूर्ण मानी जाती है। ITR-V पंजीकृत डाक या कोरियर (Courier) के माध्यम से प्रेषित नहीं किया जा सकता।

(3) ‘ई-रिटर्न माध्यमक’ (e-Return Intermediary Le, ERI) के द्वारा आय विवरण की ई-फाइलिंग, जो (ERI) ई-फाइलिंग एवं ITR-V में सत्यापन डिजिटल हस्ताक्षरों सहित या डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण-पत्र बिना कर देगा।

ई-फाइलिंग इण्टरनेट के माध्यम से website http://incometax indiaefiling.gov.in पर की जाती है।

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आयकर विवरण की ऑनलाइन फाइलिंग की प्रक्रिया (Procedure of Online Filing of the Income Tax Return)

आयकर विवरण की ऑनलाइन फाइलिंग हेतु निम्न चरण (Steps) है –

(1) करदाता अपना ई-फाइलिंग खाता (e-filing account) बनाने के लिए आयकर विभाग की वेबसाइट http://incometaxindiaefiling.gov.in खोलेगा तथा ‘Register yourself’ पर क्लिक करके अपना समस्त व्यक्तिगत विवरण भर देगा। एक बार आपका ई-फाइलिंग खाता बन गया तो अपने खाते को अपनी यूजर आईडी (User ID) PAN एवं Passward से login कर दो। User ID करदाता का PAN होता है।

(2) करदाता के लिए उपयुक्त आयकर विवरण फॉर्म (Income Tax Return Form) का चुनाव करें तथा [Income tax return software (Excel file)] डाउनलोड करें। डाउनलोड पोर्टल http://www.incometaxindia.gov.in से करें। Income tax return फॉर्म के डाउनलोड होने के बाद आपके कम्प्यूटर पर एक जिप फाइल (Zip file) बन जाएगी। वैसे आयकर विवरणों की ई-फाइलिंग के लिए बने बनाए Software भी बाजार में उपलब्ध हैं।

(3) रिटर्न को डाउनलोडेड (Downloaded) सॉफ्टवेयर का प्रयोग करके तैयार करें तथा ‘XML फाइल बनाएँ। ‘XML’ फाइल बनाने से पूर्व करदाता को उचित स्थान पर अपना ‘आधार कार्ड नम्बर’ एवं ‘पासपोर्ट नम्बर’ उल्लेखित करना होगा।

(4) User ID. पासवर्ड (Password), जन्म तिथि से e-filing की website को | Login करें तथा Captcha code enter करें।

(5) e-file पर जाएँ तथा ‘upload return’ के बटन क्लिक (Click) करें।

(6) कम्प्यूटर के पर्दे (Screen) पर आपका PAN तथा आपके द्वारा चुना गया कर निर्धारण वर्ष प्रदर्शित होगा।

(7) XML फाइल चुनने के लिए ब्राउज (Browse) करें।

(8) अगले चरण में DSC (Digital Signature Certificate), यदि लागू है, को upload करें तथा submit return के बटन को दबाएँ।

(9) सफलतापूर्वक अपलोड (Upload) हो जाने के बाद ‘पावती विवरण (Acknowledgement details) प्रकट होगा। अब प्रिण्ट (Print) पर क्लिक करें, ताकि ITR-V में पावती पत्र छपकर आ जाएँ।

(10) यदि आय विवरण डिजिटली हस्ताक्षरित है, तो पावती प्रकट होते ही रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया पूरी जो जाएगी। पावती पत्र (Acknowledgement slip) ITR-V में प्रिण्ट होने पर उसे करदाता रिटर्न दाखिल करने के साक्ष्य के रूप में उसे अपने पास रख लेगा।

(11) यदि रिटर्न डिजिटली हस्ताक्षरित (Digitally signed) नहीं है, तो e-रिटर्न के सफलतापूर्वक Submission होने पर फॉर्म ITR-V बनेगा, जिसका Print out करदाता लेगा। यह पावती एवं सत्यापन फॉर्म होता है। करदाता द्वारा सत्यापन (Verification) भाग भरा जाएगा तथा करदाता द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा। विवरण को इलेक्ट्रॉनिकली (Electronically) ई-फाइलिंग (e-filing) करने की तिथि से 120 दिनों के अन्दर सत्यापित ITR-V फॉर्म करदाता द्वारा आयकर विभाग के निम्न पते, साधारण डाक या स्पीड पोस्ट से प्रेषित करेगा –

Central Processing Centre, Income-tax Department, Bengaluru 560500 Karnataka.

 

‘पंजीकृत डाक‘ या ‘कोरियर’ (Courier) द्वारा भेजे गए ITR-V फॉर्म स्वीकृत नहीं किए जाते हैं, किन्तु Speed Post से भेजे जा सकते हैं। इसी प्रकार, ITR-V फॉर्म आयकर विभाग के किसी भी अन्य कार्यालय में अथवा अन्य किसी भी विधि से स्वीकृत नहीं किए जाते हैं।

यदि ITR-V फॉर्म उपर्युक्त 120 दिन के बाद भेजा जाता है, तो यह माना जाता है कि रिटर्न दाखिल नहीं किया गया है। (12) ITR-V फॉर्म प्राप्त हो जाने के बाद आयकर विभाग करदाता की e-mail ID. जो करदाता द्वारा अपने आयकर रिटर्न फॉर्म में अंकित की है, पर ई-मेल पावती (E-mail acknowledgement) भेजेगा। आयकर विभाग करदाता को उसके द्वारा दिए गए मोबाइल नम्बर पर आयकर रिटर्न की प्राप्ति का SMS भी प्रेषित करेगा।

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आय-विवरण का अर्थ (Meaning of Return of Income)

आय के विवरण को ‘आय का नक्शा’ भी कहते हैं। यह एक ऐसा विवरण है जिसमें आय के प्रत्येक शीर्षक से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ, धारा 80 की कटौतियाँ, कर दायित्व का विवरण, कर से छूटों का विवरण, घोषणा एवं इसे भरने के लिए कुछ वांछित संकेत एवं सुझाव दिए रहते हैं। यह छपे हुए फॉर्म के रूप में हिन्दी या अंग्रेजी अथवा दोनों भाषाओं में होता है। करदाता इसे आयकर कार्यालय से प्राप्त कर सकता है अथवा बाजार से क्रय कर सकता है।

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आय-विवरण के प्रकार (Types of Return of Income)

आय विवरण निम्नलिखित प्रकार का हो सकता है –

(1) हानि का विवरण (Return of loss) – यदि किसी व्यक्ति को गत वर्ष में व्यवसाय से हानि, सट्टा व्यवसाय से हानि, निर्दिष्ट व्यवसाय से हानि अथवा ‘पूँजी लाभ’ शीर्षक में तथा घुड़दौड़ हेतु घोड़े रखने से हानि होती है और वह उसे आगे ले जाना चाहता है तो वह धारा 139 (1) के अन्तर्गत दी हुई समय सीमा के अन्दर हानि का विवरण निर्धारित फॉर्म में निर्धारित ढंग से प्रमाणित करके दाखिल कर सकता है। यदि हानि का विवरण प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो करदाता को हानि को आगे ले जाकर पूरा करने का अधिकार नहीं होगा। यदि मकान सम्पत्ति से आय शीर्षक से हानि हो तो ऐसी हानि का विवरण निर्धारित समयावधि में भरना अनिवार्य नहीं है। एक कम्पनी तथा फर्म के लिए प्रत्येक वर्ष आय का विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य है। अतः उनके लिए वैसे भी अपनी हानि का विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

[धारा 139 (3)]

 

नोट- (i) यदि ‘मकान सम्पत्ति से आय’ शीर्षक में हानि हो तो समय पर प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं करने पर भी इसे आगे ले जा सकते हैं।

(ii) यदि निर्धारण तिथि तक हानि का विवरण प्रस्तुत न किया जाए तो हानि को आगे ले जाने का अधिकार समाप्त हो जाता है परन्तु उसी वर्ष की हानियों को नियमानुसार उसी वर्ष के लाभों के साथ समायोजन (Set off) फिर भी किया जा सकता है।

(iii) यदि विवरण देरी से प्रस्तुत किया है तो केवल उसी वर्ष की हानियाँ आगे नहीं ले जायी जा सकेंगी परन्तु यदि पूर्व के वर्षों में विवरण सही समय पर प्रस्तुत किया है तो पूर्व वर्षों की हानियाँ आगे ले जायी जा सकती हैं।

(iv) यदि एक व्यक्ति जिसे धारा 35AD के अन्तर्गत किसी गत वर्ष में हानि हुई हो और ऐसी हानि के लिए उसने दावा किया हो अथवा ऐसी हानि के किसी भाग को आगे ले जाना हो तो करदाता को धारा 139 (1) के अन्तर्गत दी गई समय सीमा के अन्दर हानि का विवरण प्रस्तुत करना होगा।

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(2) देर से दाखिल आय का विवरण (Late filing of return of income or belated return) – यदि किसी व्यक्ति ने धारा 139 (1) के अन्तर्गत निर्धारित अवधि में अपनी आय का विवरण दाखिल नहीं किया है तो वह ऐसे सम्बन्धित कर निर्धारण वर्ष के अन्त तक अथवा सम्बन्धित कर निर्धारण वर्ष की कर निर्धारण प्रक्रिया पूर्ण होने से पहले किसी भी समय, जो भी तिथि दोनों में पहले आए, आय का विवरण देर से दाखिल कर सकता है। माना कि कर निर्धारण वर्ष 2020-21 के लिए करदाता को आय का विवरण 31 जुलाई, 2020 तक प्रस्तुत करना है और निर्धारित समय तक वह आय का विवरण प्रस्तुत नहीं करता है तो वह 31 मार्च, 2021 तक आय का विवरण प्रस्तुत कर सकता है परन्तु यदि कर निर्धारण 31 मार्च, 2021 से पहले पूर्ण हो चुका हो तो कर निर्धारण की तिथि तक आय का विवरण प्रस्तुत कर सकता है। विशेष दशाओं में वित्त मन्त्रालय द्वारा इस तिथि में परिवर्तन किया जा सकता है।

[धारा 139 (4)]

(3) पुण्यार्थ अथवा धार्मिक ट्रस्टों की आय का विवरण (Return of income of charitable or religious trusts) – प्रत्येक व्यक्ति जिसे पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से पुण्यार्थ अथवा धार्मिक उद्देश्यों के लिए रखी गई सम्पत्ति एवं ऐच्छिक चन्दों से आय प्राप्त होती हैं और ऐसी कुल आय अधिकतम कर मुक्त सीमा से अधिक है तो वह निर्धारित फॉर्म पर, निर्धारित अवधि में तथा निर्धारित ढंग से प्रमाणित करके ट्रस्ट की आय का विवरण प्रस्तुत करेगा।

(4) राजनीतिक पार्टियों की आय का विवरण (Return of Political Parties) – प्रत्येक राजनीतिक पार्टी का मुख्य प्रशासकीय अधिकारी, जो चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाता हो, यदि राजनीतिक पार्टी की कुल आय अधिकतम कर मुक्त सीमा से अधिक है तो वह निर्धारित फॉर्म पर, निर्धारित अवधि में तथा निर्धारित ढंग से पार्टी की ‘आय का विवरण’ प्रस्तुतः करेगा।

(5) विशिष्ट संघ या संस्थाओं की आय का विवरण (Return of Association) – वैज्ञानिक अनुसन्धान संस्था, न्यूज एजेन्सी, ट्रेड यूनियन, धारा 10 (23A) ((23B) में वर्णित संस्थाएँ या समुदाय, विश्वविद्यालय एवं अन्य शिक्षण संस्थाएँ, हॉस्पिटल व अन्य मेडिकल संस्थाएँ, कोष एवं ट्रस्ट आदि की आय यदि धारा 10 की कर मुक्ति के पूर्व न्यूनतम कर योग्य आय की सीमा से अधिक हो जाती है तो इन्हें भी आय का विवरण निर्धारित समय-सीमा में प्रस्तुत करना होगा।

[धारा 139 (4-C)]

(6) संशोधित विवरण (Revised Return) [धारा 139 (5)] – यदि किसी व्यक्ति के द्वारा आय का विवरण प्रस्तुत किए जाने के बाद ऐसा अनुभव हो कि विवरण में कोई भूल या त्रुटि हो गई है या गलत विवरण चला गया है, तो वह कर निर्धारण पूर्ण होने से पूर्व अथवा सम्बन्धित कर निर्धारण वर्ष के समाप्त होने तक, जो भी पहले हो संशोधित विवरण दाखिल कर सकता है। निम्नलिखित शर्तें पूरी होने पर ही करदाता द्वारा अपने रिटर्न को संशोधित (Revised Return) किया जा सकता है।

(i) रिटर्न को संशोधित (Revised) तभी किया जा सकता है, जबकि प्रथम रिटर्न (वह) रिटर्न जिसके लिए सुधार हेतु संशोधित रिटर्न प्रस्तुत किया जाना हो) धारा 139 (1) के तहत निर्धारित अवधि में या धारा 142 (1) के अन्तर्गत कर निर्धारण अधिकारी द्वारा दिए गए नोटिस के भीतर की अवधि में भरा जा चुका हो।

(ii) भूल जानबूझकर न की गयी हो।

उदाहरण के लिए, एक करदाता को ‘व्यापार एवं पेशे से लाभ’ शीर्षक से कर निर्धारण वर्ष 2020-21 (गतवर्ष 2019-20) में आय है तथा उसके द्वारा अपना आयकर रिटर्न 31 अगस्त तक भरा जाना अनिवार्य है। ऐसी स्थिति में उसके द्वारा भरा जाने वाला संशोधित रिटर्न तभी फाइल किया जा सकता है, जबकि उसने अपना पहला रिटर्न 31 अगस्त, 2020 के पूर्व जमा करा दिया हो और भूल जानबूझकर नहीं की गयी हो। यदि करदाता अपना पहला रिटर्न निर्धारित अवधि के भीतर फाइल नहीं करता है, तो उसके द्वारा संशोधित रिटर्न फाइल नहीं किया जा सकता है अर्थात् विलम्बित विवरण (Belated Return) को कभी भी संशोधित नहीं किया जा सकता है।

Return of Income Notes

(7) दोषपूर्ण आय का विवरण (Defective Return) धारा 139 (9) –  यदि कर निर्धारण अधिकारी करदाता द्वारा प्रस्तुत किए गए विवरण को दोषपूर्ण या अपूर्ण मानता है, तो वह गलती सुधारने की सूचना दे सकता है। ऐसी सूचना प्राप्त होने के बाद 15 दिन के अन्दर त्रुटि ठीक कर दी जानी चाहिए, अन्यथा प्रस्तुत किया गया विवरण व्यर्थ हो जाएगा। यदि कर निर्धारण अधिकारी चाहे तो 15 दिन से अधिक समय दे सकता है या विलम्ब माफ कर सकता है। निम्नलिखित स्थितियों में आय का विवरण दोषपूर्ण माना जाएगा

(i) आय के विवरण में विभिन्न शीर्षक के अन्तर्गत कर योग्य आय, सकल कुल आय तथा कुल आय की गणना के सम्बन्ध में दिए हुए विवरण, कॉलम या तालिकाएँ अपूर्ण रूप से भरी हुई हों,

(ii) देयकर की गणना का विवरण नहीं दिया गया हो,

(iii) आवश्यक होने पर भी अंकेक्षक रिपोर्ट नहीं लगी हो,

(iv) उद्गम स्थान पर काटे गए कर, अग्रिम चुकाए गए कर का प्रमाण संलग्न नहीं हो,

(v) यदि करदाता अपना हिसाब किताब नियमित रूप से रखता है एवं आय के विवरण के साथ निर्माण खाता, व्यापार खाता, लाभ-हानि खाता, आय-व्यय खाता तथा चिट्ठा तथा एकाकी व्यापार अथवा पेशे की दशा में मालिक का व्यक्तिगत खाता, फर्म की दशा में साझेदारों के व्यक्तिगत खातों की प्रतिलिपियाँ संलग्न नहीं हैं।

(vi) यदि करदाता अपना हिसाब-किताब नियमित रूप से नहीं रखता है एवं आय के विवरण के साथ एक विवरण नहीं लगाता हो, जिसमें निम्नलिखित को दर्शाया गया हो –

(a) कुल बिक्री अथवा सकल प्राप्तियाँ,

(b) सकल लाभ, व्यय और व्यापार का शुद्ध लाभ इन राशियों की गणना जिस आधार पर की गयी हो, उसका स्पष्टीकरण;

(c) विविध देनदार, लेनदार, माल का रहतिया तथा गत वर्ष के अन्तिम दिन रोकड़ का शेष। यदि उपर्युक्त स्थितियों को कर निर्धारण अधिकारी द्वारा दिए गए समय के भीतर सुधारा नहीं जाता है, तो इसका प्रभाव यह होगा कि रिटर्न अमान्य हो जाएगा।

 

 

Return of Income Notes

Unit 4 Return of Income Mcom Notes
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