Unit 1 Income Tax Act 1961 Mcom Notes

Unit 1 Income Tax Act 1961 Mcom Notes

Unit 1 Income Tax Act 1961 Mcom Notes

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आयकर अधिनियम, 1961 (Income Tax Act, 1961)

 

कम्पनी की कुल आय की गणना (Calculation of Total Income of Company)

कम्पनी की कुल आय की गणना उसी प्रकार की जाती है, जिस प्रकार अन्य करदाताओं की कर-योग्य आय की गणना की जाती है। कम्पनी की ‘कुल आय’ की गणना विधि निम्नवत् है –

कम्पनी की कुल आय ज्ञात करने से पहले कम्पनी की विभिन्न शीर्षकों की कर योग्य आय की गणना की जाती है। कम्पनी की ‘व्यापार अथवा पेशे से लाभ एवं प्राप्तियाँ’ शीर्षक की कर योग्य आय ज्ञात करने के लिए लाभ-हानि खाते का समायोजन उसी प्रकार किया जाएगा, जिस प्रकार अन्य करदाताओं की दशा में किया जाता है। इसी प्रकार कम्पनी की अन्य शीर्षकों की आय जैसे ‘मकान सम्पत्ति से आय’, ‘पूँजी लाभ’ या ‘अन्य साधनों से आय की गणना भी उसी प्रकार तथा उन्हीं नियमों के अनुसार की जाएगी। एक कम्पनी करदाता की कर योग्य आय चार शीर्षकों में हो सकती है। ‘वेतन’ शीर्षक के अन्तर्गत कम्पनी करदाता की आय नहीं होती है।

उसके बाद, कम्पनी की कुल आय में अन्य व्यक्तियों की धारा 60 एवं 61 की आये भी जोड़ी जा सकती है, अर्थात् सम्पत्ति के हस्तान्तरण के बिना उसकी आय का हस्तान्तरण एवं सम्पत्ति के खण्डनीय हस्तान्तरण से उत्पन्न आय आदि।

शीर्षक वार आयों का योग किया जाता है। योग करते समय, चालू हानियों या आगे लायी गई हानियाँ, यदि कोई है, को धारा 70 से 80 के प्रावधानों के अनुसार, पूरा किया जाता है। बची हुई राशि कम्पनी की ‘सकल कुल आय’ होगी। अन्त में, इस सकल कुल आय में से धारा 80 की वे कटौतियाँ (अधिनियम के अध्याय VI-A में प्रदत्त) जो कम्पनी करदाता को उपलब्ध है, दी जाती हैं। इस धारा के अन्तर्गत उपलब्ध कटौतियों को घटाने के बाद आने वाली राशि ही कम्पनी की ‘कुल आय’ (Total income) है। कर निर्धारण वर्ष 2019-20 के लिए धारा 80 के अन्तर्गत अग्रलिखित कटौतियाँ उपलब्ध हैं –

 

क्र० स०उप-धाराएँ  Sub-sectionsकटौती की प्रकृति Nature of Deduction
(i)80-Gपुण्यार्थ संस्थाओं या कोषों को दिए गए दान के सम्बन्ध में, ऐसे दान का 50% या 100% कटौती।
(ii)80-GGAवैज्ञानिक अनुसन्धान एवं ग्रामीण विकास के लिए दान के सम्बन्ध में (बशर्ते कि कम्पनी की सकल कुल आय में व्यापार अथवा पेशे से आय’ शीर्षक की आय शामिल नहीं हो), ऐसे दान का | 100% कटौती।
(iii)80-GGBकिसी राजनीतिक पार्टी अथवा एक निर्वाचक ट्रस्ट को रोकड़ के अतिरिक्त अन्य किसी विधि से दिए गए अंशदान के सम्बन्ध में, कटौती ऐसे अंशदान का 100%.
(iv)80-IAबुनियादी या आधारभूत सुविधाओं का विकास करने, दूरसंचार सेवाएँ प्रदान करने, औद्योगिक पार्क, विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र, ऊर्जा का उत्पादन, वितरण एवं संचरण करने एवं ऊर्जा के उत्पादन संयन्त्रों का पुनः उद्धार करने के व्यापार में संलग्न उपक्रम के लाभों या प्राप्तियों के सम्बन्ध में कटौती : ऐसे लाभों के 100% (प्रथम 5 कर निर्धारण वर्षों में कुछ विशेष दशाओं में 10 कर निर्धारण वर्षों तक) एवं ऐसे लाभों का 30% (अगले 5 वर्षों तक) तक।
(v)80-IAB1 अप्रैल, 2005 को अथवा इस तिथि के बाद अधिसूचित ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र के विकास के व्यापार में संलग्न औद्योगिक संस्थान या उपक्रम की उक्त व्यापार से लाभ या प्राप्तियों का 100% |
(vi)80-IACएक कम्पनी या सीमित दायित्व साझेदारी (LLP), जो 1 अप्रैल, 2016 से 31 मार्च, 2021 की अवधि में समामेलित हुई है, के पात्र व्यवहार (Eligible start-up) के अर्जित लाभों एवं प्राप्तियों के 100%।
(vii)80-IBनिम्न औद्योगिक उद्यम के लाभों या प्राप्तियों के सम्बन्ध में कटौती जहाजों के संचालन, होटल, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक शोध एवं विकास, खनिज तेलों का उत्पादन, आवास योजनाओं का निर्माण एवं विकास, मल्टीप्लैक्स थियेटर, कन्वेन्शन सेण्टर एवं ग्रामीण क्षेत्र में अस्पताल का संचालन आदि का व्यापार ऐसे व्यापार के लाभों का 100%, 50%, 30% एवं 25% जैसी भी दशा हो, की कटौती एक निश्चित अवधि के लिए स्वीकृत की जाती है।
(viii)80-IBAकिसी भी करदाता द्वारा संचालित आवासीय परियोजना के व्यापार (अर्थात् आवासों के विकास एवं निर्माण का व्यापार) के लाभों का 100% 1
(ix)80-ICकुछ विशेष वर्ग के राज्यों में स्थापित उपक्रमों या संस्थानों के लाभों के सम्बन्ध में कटौती :

‘अ’ वर्ग के राज्यों में लाभों का 100% (प्रथम 10 वर्ष तक)

‘ब’ वर्ग के राज्यों में लाभों का 100% (प्रथम 5 वर्षों तक)

लाभों का 20% (अगले 5 वर्षों तक)

‘स’ वर्ग के राज्यों में लाभों का 100% (प्रथम 10 वर्ष तक)

(x)80-IDविशेष क्षेत्र में होटल एवं कन्वेंशन सेण्टर व्यापार के लाभ एवं प्राप्तियों के सम्बन्ध में ऐसे लाभ एवं प्राप्तियों के 100% के बराबर कटौती प्रारम्भिक कर निर्धारण वर्ष से लगातार 5 वर्षों तक प्रदान की जाएगी।
(xi)80-IEउत्तर-पूर्वी राज्यों में वस्तु के उत्पादन एवं वांछनीय सेवा प्रदान करने वाले उपक्रम के लाभ एवं प्राप्तियों के 100% के बराबर कटौती प्रारम्भिक कर निर्धारण वर्ष से लगातार 10 कर निर्धारण वर्षों तक प्रदान की जाएगी।
(xii)80-JJAकूड़ा-करकट एकत्रित करने एवं उसको प्रसंस्करण करने के व्यापार के लाभों का 100% प्रथम 5 कर निर्धारण वर्षों तक |
(xiii)80-JJAAकोई भी करदाता जिस पर धारा 44 AB लागू होती है तथा उसने गत वर्ष में अथवा तुरन्त आगामी वर्ष में नवीन कर्मचारियों की नियुक्ति की है, तो गत वर्ष में व्यय की गई अतिरिक्त कर्मचारी लागत का 30%1
(xiv)80-LAतटीय बैंकिंग इकाइयों की आय के सम्बन्ध में कटौती ऐसी आय का 100% (प्रथम लगातार 5 वर्ष) एवं 50% (अगले 5 वर्ष) |
(xv)80-PAएक उत्पादक कम्पनी ‘वांछनीय व्यापार’ से सम्बन्धित लाभ एवं प्राप्तियों के 100% के बराबर कर निर्धारण वर्ष 2019-20 से 2024-25 तक कटौती प्रदान की जाएगी।

 

नोट – धारा 80 की कटौतियों के लिए ‘सकल कुल आय का आशय उस सकल कुल आय से है, जिसमें धारा 111A में सन्दर्भित अल्पकालीन पूँजी लाभ एवं दीर्घकालीन पूँजी लाभ एवं धारा 112A में सन्दर्भित दीर्घकालीन पूँजी लाभ सम्मिलित नहीं है अर्थात् ऐसे अल्पकालीन पूँजी लाभों एवं दीर्घकालीन पूँजी लाभों में से धारा 80 की कटौतियाँ प्रदान नहीं की जाएगी।

 

I, भारतीय कम्पनी (Indian Company)

आयकर अधिनियम की धारा 2 (26) के अनुसार, ‘भारतीय कम्पनी’ से तात्पर्य कम्पनी अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत निर्मित एवं पंजीकृत (formed and registered) कम्पनी से है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं –

(i) केन्द्रशासित प्रदेशों को छोड़कर शेष सम्पूर्ण भारत की वे कम्पनियाँ, जो कम्पनी से सम्बन्धित किसी ऐसे अधिनियम के अन्तर्गत निर्मित एवं पंजीकृत हैं, जो भारत के किसी भी भाग में पहले से लागू था;

(ii) केन्द्रीय अथवा राज्य सरकार के किसी कानून के अन्तर्गत स्थापित निगम;

(iii) कोई भी संस्था, संघ अथवा निकाय जिसे बोर्ड (CBDT) ने कम्पनी घोषित कर दिया है;

(iv) केन्द्रशासित प्रदेशों के लिए सम्बन्धित केन्द्रशासित प्रदेश में प्रचलित किसी अधिनियम के अन्तर्गत निर्मित एवं पंजीकृत कम्पनी बशर्ते कि उक्त सभी दशाओं में कम्पनी निगम, संघ, संस्था या निकाय का पंजीकृत या मुख्य कार्यालय (जैसी भी स्थिति हो) भारत में ही हो ।

 

II, घरेलू अथवा देशी कम्पनी (Domestic Company)

आयकर अधिनियम की धारा 2 (22 A) के अनुसार घरेलू अथवा देशी कम्पनी से आशय उस कम्पनी से है जो भारतीय कम्पनी हो अथवा ऐसी कम्पनी हो जिसने अपनी कर-योग्य आय के सम्बन्ध में अपनी ऐसी आय में से भारत में लाभांश घोषित तथा भुगतान करने का निर्धारित प्रबन्ध कर दिया हो । निर्धारित प्रबन्ध अग्रलिखित हैं –

(1) कम्पनी को अपने समस्त अंशधारियों का अंश रजिस्टर भारत में स्थित अपने व्यापार के प्रमुख स्थान पर नियमित रूप से रखना होगा। इस प्रकार अंश रजिस्टर का रखना अधिक से अधिक सम्बन्धित कर निर्धारण वर्ष की 1 अप्रैल तक प्रारम्भ हो जाना चाहिए।

(2) सम्बन्धित हिसावी वर्ष के हिसाब (Accounts) स्वीकृत करने तथा उनके सम्बन्ध में लाभांश घोषित करने की साधारण सभा केवल भारत में ही किसी स्थान पर की जाएगी।

(3) घोषित लाभांश समस्त अंशधारियों को केवल भारत में ही देय होगा।

 

III, कम्पनियों का निवास स्थान (Residential Status of Companies)

आयकर अधिनियम की धारा 6 (3) में कम्पनी के निवास स्थान का विवरण इस प्रकार दिया गया है

1, निवासी (Resident) एक कम्पनी किसी गत वर्ष में भारत में निवासी कही जाती है, यदि

(i) वह भारतीय कम्पनी हो, अथवा

(ii) उस वर्ष उसका नियन्त्रण एवं प्रबन्ध पूर्णतया भारत में स्थित हो। [उस वर्ष में उसके प्रभावी प्रबन्ध का स्थान भारत में रहा है। एक कम्पनी भारत में निवासी हो सकती है भले ही उसकी समस्त व्यापारिक क्रियाएँ भारत के बाहर होती हों। यदि कम्पनी का नियन्त्रण एवं प्रबन्ध पूर्णतया भारत में स्थित है तो कम्पनी भारत में निवासी मानी जाती है। इस बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ता कि क्रय-विक्रय कहाँ होता है। सामान्यतया एक कम्पनी का नियन्त्रण एवं प्रबन्ध वहाँ माना जाता है जहाँ उसके संचालक मण्डल की मीटिंग होती है।

2, असाधारण निवासी (Not Ordinarily Resident) एक कम्पनी असाधारण निवासी नहीं होती है।

3, अनिवासी (Non Resident) यदि कोई कम्पनी निवासी की शर्तों को पूरा नहीं करती है तो वह अनिवासी कहलाती है।

 

IV, कम्पनी कर या निगम कर (Corporation Tax)

कम्पनी कर से तात्पर्य उस कर से है जो एक कम्पनी अपनी कर योग्य आय पर देती है। केवल केन्द्र सरकार को ही कम्पनियों पर कर लगाने का अधिकार है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 366(6) के अनुसार, कम्पनी से तात्पर्य उस कर से है जो कम्पनी अपनी आय पर देती है तथा निम्नलिखित शर्तें पूरी होती हैं–

(1) यह कर कृषि आय पर नहीं लगाया जा सकता,

(2) कम्पनी द्वारा दिया गया कर अंशधारियों की ओर से दिया हुआ नहीं माना जाता,

अतः उन्हें इस सम्बन्ध में कोई कटौती नहीं मिलती।

अंशधारियों को प्राप्त लाभांश पर कर देना होगा। यदि किसी प्रावधान के अन्तर्गत लाभांश के सम्बन्ध में कटौती या कर छूट दी गई है तो अंशधारियों को यह छूट या कटौती मिलेगी।

 

V, जनता के सारवान् हित वाली कम्पनी (Company in which Public are Substantially Interested)

आयकर अधिनियम की धारा 2 (18) के अनुसार, जनता के सारवान् हित वाली कम्पनी वह होती है

1, सरकारी स्वामित्व के अधीन कम्पनी – जिसका स्वामित्व सरकार अथवा रिजर्व बैंक के पास है अथवा जिसके कम-से-कम 40 प्रतिशत अंश (मूल्य के अनुसार सरकार अरिजर्व बैंक अथवा रिजर्व बैंक के स्वामित्व वाले किसी निगम के पास है, अथवा

2, बिना लाभ के उद्देश्य वाली कम्पनी – जो कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 अथवा कम्पनी अधिनियम 1956 की धारा 25 के अन्तर्गत पंजीकृत है। ये कम्पनियों वाणिज्य, कला, विज्ञान, धर्म, पुण्यार्थ अथवा अन्य ऐसे ही उद्देश्यों के लिए होती है, लाभ कमाने के उद्देश्य के लिए नहीं, अथवा

3, बोर्ड द्वारा घोषित कम्पनी – जिसमें कोई अंश पूंजी नहीं है तथा जो बोर्ड के आदेश द्वारा जनता के सारवान् हित वाली कम्पनी घोषित कर दी गयी है, अथवा

4, निधि या पारस्परिक लाभ समिति – यह पारस्परिक लाभ हेतु वित्तीय कम्पनी है। अर्थात् इसका प्रमुख व्यापार अपने सदस्यों की जमा रखने का है और जो केन्द्र सरकार द्वारा पारस्परिक लाभ हेतु समिति घोषित कर दी गई है, अथवा

5, सहकारी समिति के अधीन कम्पनी – ऐसी कम्पनी जिसके कम-से-कम 50%% मताधिकार वाले अंश पूरे सम्बन्धित गत वर्ष में एक या एक से अधिक सहकारी समितियों के पास रहे हो, अथवा

6, अन्य कम्पनी – ऐसी कम्पनी जो कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 (68) के अनुसार, प्राइवेट कम्पनी नहीं है तथा जो निम्नलिखित शर्तों में से एक शर्त पूरी करती है—

(i) सम्बन्धित गत वर्ष के अन्तिम दिन उसके समता अंश भारत में किसी मान्य स्टॉक एक्सचेंज में Listed थे,

(ii) इसके कम-से-कम 50% (औद्योगिक कम्पनी की दशा में 40%) मताधिकार वाले समता अंश पूरे गत वर्ष में सरकार अथवा किसी वैधानिक अथवा जनता के सारवान् हित वाली किसी कम्पनी अथवा उसकी सम्पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कम्पनी के पास रहे हो।

नोट- यदि किसी सार्वजनिक कम्पनी के अधिकांश समता अंश किसी ऐसी विदेशी कम्पनी के पास है जिसमें जनता का सारवान् हित है तो ऐसी सार्वजनिक कम्पनी जनता के सारवान् हित वाली कम्पनी कहलाएगी।

Widely held Company – जनता के सारवान् हित वाली कम्पनी इसी नाम से अधिक प्रचलित है।

Closely held Company ऐसी कम्पनी जिसमें जनता का सारवान् हित नहीं होता इसी नाम से अधिक प्रचलित है।

Income Tax Act 1961

कम्पनी का कर निर्धारण (Assessment of Company)

कम्पनी का कर निर्धारण करने से पूर्व कम्पनी की गत वर्ष की कुल आय ज्ञात की जाती है। कर निर्धारण हेतु कम्पनी का मुख्य अधिकारी कर निर्धारण वर्ष में 30 सितम्बर तक कम्पनी की कुल आय का विवरण/नक्शा आयकर विभाग के पास जमा करेगा। कम्पनी पर अन्य करदाताओं की तरह ही कर निर्धारण किया जाता है, किन्तु अन्य करदाताओं से यह निम्न बिन्दुओं पर अलग है-

(i) कम्पनी को अपनी सम्पूर्ण कुल आय पर आयकर देना होता है। कम्पनी के लिए न्यूनतम कर मुक्ति सीमा नहीं है अर्थात् यदि कम्पनी की कुल आय ₹100 है, तो उसे इसी पर आयकर देना होगा।

(ii) कम्पनी को अपनी ‘सम्पूर्ण कुल आय’ पर एक ही दर से आयकर देना होता है। अर्थात् कम्पनी की दशा में आय के विभिन्न खण्ड नहीं हैं।

(iii) आयकर लगाने की दृष्टि से कम्पनी को तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है

(अ) देशी कम्पनी, जिनमें जनता का सारवान् हित है (Domestic company in which public are substantially interested) Widely-held domestic’ कम्पनी भी कहते हैं।

(ब) देशी कम्पनी, जिसमें जनता का सारवान् हित नहीं है (Domestic company in which public are not substantially interested) ‘Closely-held domestic’ कम्पनी भी कहते हैं। नोट-‘अ’ एवं ‘ब’ वर्ग की घरेलू कम्पनियों के लिए अब आयकर की दरें एकसमान

(स) विदेशी कम्पनी। हैं। अतः अब इस विभाजन की आवश्यकता नहीं है। कर की दरें (Rates of Tax) कम्पनी की ‘कर योग्य आय पर कर निर्धारण वर्ष 2019-20 में निम्न दरों से आयकर की गणना की जाती है—

Percentage of Taxable Income

(i) एक देशी कम्पनी की दशा में (In case of a domestic company)

(अ) यदि इसका कुल आवर्त या सकल प्राप्तियाँ गत वर्ष 2017-18 में ₹400 करोड़ से अधिक नहीं      25%

(ब) किसी भी अन्य घरेलू (देशी) कम्पनी की दशा में                                                                 30%

 

(ii) एक विदेशी कम्पनी की दशा में (In case of a foreign company)

(अ) तकनीकी सेवाएं प्रदान करने के सम्बन्ध में सरकार से अथवा एक भारतीय कम्पनी से प्राप्त रॉयल्टी [ जो 1 अप्रैल, 1961 से 31 मार्च, 1976 तक की अवधि में किसी भारतीय संस्थान से हुए प्रसंविदे के अन्तर्गत प्राप्त हुई हो ] एवं फीस [ जो 1 मार्च, 1964 से 31 मार्च, 1976 के मध्य केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित किसी तकनीकी सेवा अनुबन्ध के अन्तर्गत प्राप्त हुई हो ] से प्राप्त राशि के सम्बन्ध में।                                                                                                                 50%

(ब) अन्य आयों के सम्बन्ध में (In respect of other incomes)                                              40%

अधि-कर (Surcharge) – यदि कम्पनी की शुद्ध आय ₹1 करोड़ से अधिक है, किन्तु ₹10 करोड़ से अधिक नहीं है, तो एक घरेलू कम्पनी द्वारा कुल आयकर दायित्व के 7% के बराबर अधिकर देय होगा तथा एक विदेशी कम्पनी द्वारा 2% की दर से अधिकर देय होगा, किन्तु यदि कम्पनी की शुद्ध आय ₹10 करोड़ से अधिक है, तो एक घरेलू कम्पनी द्वारा कुल आयकर दायित्व के 12% के बराबर अधिकर देना होगा तथा विदेशी कम्पनी को 5% की दर से अधिकर देना होगा।

किन्तु यदि किसी कम्पनी की शुद्ध आय ₹1 करोड़ से अधिक नहीं है, तो उस कम्पनी द्वारा कोई अधिकर देय नहीं होगा।

स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर (Health and education cess) – एक घरेलू एवं विदेशी कम्पनी की दशा में उसके आयकर एवं अधिकर के 4% के बराबर स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर देय होगा।

 

न्यूनतम वैकल्पिक कर (Minimum Alternate Tax)

यदि किसी कम्पनी की कुल आय पर देय कर उसके पुस्तक लाभ के 18.5% (+ अधिभार देय है तो + स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर) से कम है तो पुस्तक लाभ कम्पनी की कुल आय माना जाएगा तथा ऐसी कम्पनी को अपनी इस आय पर उपर्युक्त वर्णित दर से कर देना होगा। इसे ही न्यूनतम वैकल्पिक कर कहा जाता है।

कर निर्धारण वर्ष 2020-21 के लिए न्यूनतम वैकल्पिक कर की निम्न दरें लागू होंगी

 

(i) घरेलू कम्पनी (Domestic company) की दशा में,(इन्हें कुल आय मान पुस्तकीय लाभों कर) का 15%
(ii) विदेशी कम्पनी (Foreign company) पुस्तकीय लाभों की दशा में,(इन्हें कुल आय मान कर) का 15%

 

अधिकर (Surcharge) – घरेलू कम्पनी की दशा में न्यूनतम वैकल्पिक कर का 7% ( अथवा 12% ) एवं विदेशी कम्पनी की दशा में न्यूनतम वैकल्पिक कर का 2% (अथवा 5%) अधिकर लगाया जाएगा। यदि पुस्तकीय लाभ ₹ 1 करोड़ से अथवा ₹10 करोड़ से अधिक है, तो अधिकर दर तदनुसार 7% या 12% अथवा 2% या 5% होगी।

किन्तु यदि पुस्तकीय लाभ ₹ 1 करोड़ से अधिक नहीं हैं तो अधिकर देय नहीं होगा।

स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर (Health and Education Cess or HEC) – एक घरेलू कम्पनी एवं विदेशी कम्पनी की दशा में न्यूनतम वैकल्पिक कर एवं अधिकर का 4% शिक्षा उपकर (HEC) भी लगाया जाएगा।

अतः कर निर्धारण वर्ष 2020-21 के लिए न्यूनतम वैकल्पिक कर की प्रभावी कुल दर निम्न होगी

 

पुस्तकीय लाभ ₹ 1 करोड़ से अधिक नहो होंपुस्किया लाभ ₹ 1 करोड़ से अधिक होंपुस्तकीय लाभ ₹ 10 करोड़ से अधिक हों
MATSCHECTotalMatScHECTotalMATSCHECTotal
घरेलू कं०15%__4%15.6%15%7%4%16.692%15%12%4%17.472%
विदेशी कं०15%__4%15.6%15%2%4%15.92%15%5%4%16.38%

 

Income Tax Act 1961

न्यूनतम वैकल्पिक कर [Minimum Alternate Tax ( MAT)]

धारा 115-JB कर निर्धारण वर्ष 2001-02 से लागू की गई है। इस धारा के अनुसार, यदि कम्पनी द्वारा देय आय कर, जो इस अधिनियम के अन्तर्गत गर्णित किया गया है, कम्पनी के पुस्तकीय लाभों के 15% से कम है, तो पुस्तकीय लाभ ही कम्पनी की कुल आय मानी जाएगी तथा उस पर कम्पनी करदाता द्वारा 15% की दर से आयकर चुकाया जाएगा। इस आयकर पर 7% (या 12%) अथवा 2% (या 5%) की दर से अधिकर, यदि देय है तथा आयकर एवं अधिकर के 4% की दर से स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर की गणना भी की जाएगी। ऐसे आयकर को वैकल्पिक आयकर (Minimum Alternate Tax ie. MAT) कहा जाता है।

पुस्तकीय लाभ (Book Profit) – ‘पुस्तकीय लाभ से तात्पर्य कम्पनी के उस शुद्ध लाभ से है, जो उक्त सम्बन्धित अधिनियम के अनुसार, सम्बन्धित गत वर्ष के लिए कम्पनी द्वारा तैयार किए गए लाभ-हानि विवरण द्वारा प्रदर्शित है तथा जिसे आयकर अधिनियम को धारा 115-JB के प्रावधानों के अनुसार समायोजित किया गया है।

शुद्ध लाभ का समायोजन (Adjustment of Net Profit) – कम्पनी के लाभ-हानि विवरण द्वारा प्रदर्शित शुद्ध लाभ में कुछ राशियाँ जोड़कर तथा उसमें से कुछ राशियाँ घटाकर ‘पुस्तकीय लाभ’ ज्ञात किया जाता है। जोड़ने एवं घटाने वाली राशियों को समायोजन कहा जाता है। निम्न प्रारूप के अनुसार, शुद्ध लाभ का समायोजन करके पुस्तकीय लाभ ज्ञात किया जाता है—

Computation of Book Profit

Profit as per statement of profit and loss (prepared in accordance with the provisions discussed earlier)

Add: The following amounts if they have been shown in the expense part of the Statement of Profit and Loss:

(i) Income tax paid or payable or provision for income tax

(ii) The amounts carried to any reserves by whatever name called other than a reserve specified u/s 33 AC

(iii) Provisions made for meeting liabilities, other than ascertained liabilities

(iv) Provisions for losses of subsidiary companies

(v) Dividends paid or proposed

(vi) Expenditures relating to exempt income [i.e.. incomes exempted u/s10, (Except 10 (38) being long-term capital gains on transfer of an equity share or a unit) or 11 or 12] (vii) Expenditure in connection with income from

AOP or BOI on which income tax is not payable u/s 86

(viii) Expenditure in connection with the income of a foreign company from:

(a) Capital gains on securities, or

(b) Interest, royalty or fees for technical services

(ix) Notional loss on transfer of capital asset being share of a special purpose vehicle to a business trust in exchange of units or notional loss on such units

(x) Amount or amounts of expenditure relatable to income from royalty in respect of patent chargeable to tax u/s 115 BBF.

(xi) Depreciation (including account of revaluation) depreciation on

(xii) The amount of deferred tax and the provision therefore

(xiii) Provision for dimunition in the value of any asset

(xiv) The amount standing in revaluation reserve relating to revalued assets on the retirement or disposal of such asset, if such amount is not taken to statement of profit and loss

(xv) Amount of gain on transfer of units referred to in section 47(xvii)

 

Less: The following amounts if credited to statement of profit and loss:

(i) Amount withdrawn from any reserves or provisions (excluding a reserve credited before 1-4-1997 without debiting the statement of profit and loss if it is credited to statement of profit and loss)

(ii) Exempt incomes credited to statement of profit and loss to which any provision of section 10 except u/s 10(38) or section 11 or section 12 applies

(iii) Depreciation debited to statement of profit and loss (excluding depreciation on account of revaluation of assets)

(iv) Amount withdrawn from revaluation reserve credited to statement of profit and loss to the extent it does not exceed the amount of epreciation on account of revaluation of assets

(v) Income in connection with a share in AOP or BOI on which income tax is not payable u/s 86 (vi) Income accuring or arising to a foreign company from:

(a) Capital gain on securities, or

(b) Interest, royalty or fees for technical services

(vii) Notional gain from:

a) transfer of a capital asset being special purpose vehicle to a business trust in exchange of units, or

(b) any change in carrying amount of said units, or

(c) gain on transfer of units referred to in section 47 (xvii)

(viii) Amount of income of royalty in respect of patent chargeable to tax u/s 115 BBF(ix) The aggregate amount of unabsorbed depreciation and loss brought forward, if an for corporate insolvency resolution process has been admitted by the Adjudicating Authority u/s 7 or 9 or 10 or one Insolvency and Bank Ruptcy Code, 2016.

(x) Brought forward losses or unabsorbed depreciation (whichever is less) as per books of accounts (in case of a company other than the company referred to in clause

(ix) above] (xi) Profits of sick industrial company

(xii) The amount of deferred tax, if any amount is credited to P & L A/c. such

Book Profits

 

न्यूनतम वैकल्पिक कर के सम्बन्ध में कर समंजन से सम्बन्धित प्रावधान [Provisions Regarding Tax Credit in Respect of Minimum Alternative Tax (MAT)]

सम्बन्धित प्रावधान इस प्रकार होंगे –

1, उपर्युक्त (1) Income tax paid/payable or provision for IT के अन्तर्गत जोड़े जाने वाले आयकर के अन्तर्गत निम्न सम्मिलित होंगे (अ) धारा 115-0 के अन्तर्गत वितरित लाभों पर आयकर अथवा धारा 115R के अन्तर्गत वितरित आय पर आयकर; (ब) इस अधिनियम के अन्तर्गत वसूली जाने वाली ब्याज की राशि –

(स) केन्द्रीय अधिनियम द्वारा समय-समय पर लगाया जाने वाला अधिकर (surcharge);

(द) केन्द्रीय अधिनियम द्वारा समय-समय पर आयकर लगाया पर जाने वाला स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर (Health and Education cess)

2, यह स्पष्ट किया जाता है कि एक बीमा कम्पनी या बैंकिंग कम्पनी या बिजली के उत्पादन एवं आपूर्ति में लगी कम्पनी अथवा अन्य वर्ग की कम्पनी, जो उस कम्पनी से सम्बन्धित अधिनियम द्वारा संचालित है, को यह विकल्प प्राप्त है कि वह अपना लाभ-हानि खाता कर निर्धारण एवं 2012-13 तक या तो सम्बन्धित कम्पनी के प्रावधानों के अनुसार तैयार कर ले अथवा कम्पनी अधिनियम, 2013 की अनुसूची III के भाग II के प्रावधानों के अनुसार तैयार कर ले।

3, यह स्पष्ट किया जाता है कि इस धारा के प्रावधान एक विदेशी कम्पनी करदाता पर लागू नहीं होंगे, यदि

(i) करदाता उस देश या विशिष्ट क्षेत्र (Specified territory) का निवासी है, जिसके साथ भारत का धारा 90(1) के अन्तर्गत दोहरे करारोपण (Double taxation) का प्रसंविदा है;

(ii) करदाता उस देश का निवासी है जिसके साथ भारत का दोहरे करारोपण का अनुबन्ध नहीं है तथा करदाता कम्पनी के सम्बन्ध में प्रचलित एवं प्रभावी किसी अधिनियम के अन्तर्गत पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है।

4, यह भी स्पष्ट किया जाता है कि इस धारा के प्रावधान विदेशी कम्पनी करदाता पर लागू नहीं होंगे। यदि इसकी कुल आय पूर्ण रूप से धारा 44B या धारा 44BB या धारा 44BBA या धारा 44BBB में निर्दिष्ट व्यवसाय के लाभों एवं प्राप्तियों से है एवं ऐसी आय पर

इन धाराओं में उल्लेखित दरों से कर लगाने के लिए प्रस्तावित किया गया है।

5, संचय एवं प्रावधानों से आहरित राशि, जो लाभ-हानि खाते में जमा किए गए पुस्तकीय लाभ ज्ञात करने के लिए निम्न प्रावधानों के अन्तर्गत कम कर दी जाएगी –

(अ) 1- 4 – 1997 से पूर्व सृजित ऐसा संचय, जिसे बिना लाभ-हानि खाते में नामित (debit) किए ही सृजित कर लिया था, पुस्तकीय लाभों में से नहीं घटाए जाएंगे।

(ब) 1 – 4 – 1997 को अथवा इसके बाद सृजित संचय, जो लाभ-हानि खाते में जमा (credit) किया गया है, तभी पुस्तकीय लाभों से घटाया जाएगा, जबकि उस गत् वर्ष में, जिसमें यह संचय या प्रावधान सृजित किया गया था, पुस्तकीय लाभों जोड़ दिया गया था।

6, आगे लायी गयी हानि में हास सम्मिलित नहीं होगा। यह प्रावधान उस समय लागू नहीं होगा, जबकि आगे लायी गयी हानि या अशोधित हास ‘शून्य’ है।

7, बीमार औद्योगिक कम्पनी के लाभ उस कर निर्धारण वर्ष से सम्बन्धित होने चाहिए, जो औद्योगिक कम्पनी को बीमार घोषित किए गए गत वर्ष से सम्बन्धित कर निर्धारण वर्ष से उस कर निर्धारण वर्ष तक है, जिसमें कम्पनी की शुद्ध पूँजी (दत्त पूँजी + स्वतन्त्र कोष) उसकी संचित हानियों के बराबर अथवा उससे अधिक हो जाती है। बीमार औद्योगिक कम्पनी की परिभाषा बीमार औद्योगिक कम्पनी (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1985 की धारा 17(1) में दी गई है।

 

आकिंक प्रश्नोत्तर Numerical Questions

Income Tax Act 1961 Numerical Question.

Note:- Click here to View.

Income Tax Act 1961

Unit 1 Income Tax Act 1961 Mcom Notes
Unit 1 Income Tax Act 1961 Mcom Notes

 

Realted Post:-
Unit 2 Tax Management Mcom Notes
Unit 3 Tax Planning Mcom Notes
Unit 4 Return of Income Mcom Notes
Unit 5 Taxation of International Transactions Mcom Notes


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