Product Concept Bcom Notes

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Product Concept Bcom Notes:-  In this post, we will give you notes of Principal of Marketing of BCom 3rd year English and Hindi, Product Consumer and Industrial Goods Bcom Notes Hindi and English.

Notes:- This Post Already Available in Hindi and English language.

उत्पाद अवधारणा (Product Concept)

 

वस्तु या उत्पाद का अर्थ (Meaning of the Product)

उत्पाद का अर्थ उन दृष्टिगोचर भौतिक और रासायनिक लक्षणों से है जो कि आसानी से पहचान में आने वाली आकृति, आकार, परिमाण आदि में संग्रहीत हो। वास्तव में यह उत्पाद का संकीर्ण अर्थ ही है।

उत्पाद की परिभाषाएँ

(1) डब्ल्यू० एल्डरसन (W. Alderson) के अनुसार, “उत्पाद उपयोगिताओं का एक पुलिन्दा है जिसमें उत्पाद के विभिन्न लक्षण और उसके साथ दी जाने वाली सेवाएं सम्मिलित हैं।”

(2) आर० एस० डावर के अनुसार, “विपणन की दृष्टि से वस्तु को सुविधाओं का पुलिन्दा माना जा सकता है जो उपभोक्ता को प्रस्तुत की जा रही

(3) जॉर्ज फिस्क के अनुसार, “वस्तु मनोवैज्ञानिक सन्तुष्टियों का एक पुलिन्दा उत्पाद अवधारणा ‘उत्पाद अवधारणा’ शब्द सबसे पहले थियोडोर लेविट द्वारा प्रयुक्त किया गया था। उनके अनुसार उत्पाद अवधारणा से आशय उपयोगिताओं के योग से है

जिसमें विभिन्न उत्पाद विशेषताएँ तथा सेवाएँ सम्मिलित होती हैं। उत्पाद अवधारणा के निम्न तीन आयाम होते हैं

(1) प्रबन्धकीय आयाम – इसमें कुल उत्पाद सम्मिलित होता है जो विपणनकर्ता द्वारा बाजार में विक्रय हेतु प्रस्तुत किया जाता है। एक उत्पाद प्याज जैसा होता है जिसमें कई परतें होती हैं जो सभी उत्पाद की सम्पूर्ण धारणा बनाने में योगदान करती हैं। इसकी महत्त्वपूर्ण परतें निम्नलिखित है-

(अ) मुख्य उत्पाद (Core product) अथवा सेवा जिसके कुछ विशेष लक्षण होते हैं जिसके आधार पर उसकी पहचान होती है;

(ब) सम्बन्धित उत्पाद जैसे ब्राण्ड नाम, विशेष पैकिंग, ट्रेडमार्क आदि,

(स) प्रतीकात्मक उत्पाद जैसे सुपुर्दगी स्थापना, मरम्मत, गारण्टी आदि ।

(2) उपभोक्ता आयाम – यदि उत्पाद खरीदने से उपभोक्ता की आवश्यकता एवं आशाओं की सन्तुष्टि होती है तो वह उसे पुनः खरीदने का निर्णय लेता है

(3) सामाजिक आयाम – इसके अन्तर्गत यह माना जाता है कि उत्पाद के क्रय से न केवल तुरन्त सन्तुष्टि प्राप्त होगी, अपितु इससे उपभोक्ता का दीर्घकालीन कल्याण होगा।

उत्पाद वर्गीकरण

डॉ आर०एस०डाबर ने उत्पादों का वर्गीकरण निम्न प्रकार किया है–

Product Consumer Industrial Goods

उपभोक्ता उत्पाद – ये वे उत्पाद हैं जो अन्तिम उपभोक्ताओं द्वारा प्रयोग किये जाते हैं। इनका उपवर्गीकरण निम्न प्रकार है

(1) सुविधाजनक उत्पाद (Convenient Products) – सुविधा उत्पाद वे हैं जिन्हें उपभोक्ता बार-बार तुरन्त एवं न्यूनतम तुलना करके एवं अपेक्षाकृत बहुत कम क्रय प्रयासों से खरीदता है, जैसे-सिगरेट, साबुन, समाचार-पत्र, दियासलाई, दवाइयाँ आदि। यह उल्लेखनीय है कि ऐसे उत्पाद टिकाऊ नहीं होते और उपभोक्ताओं द्वारा उनका प्रयोग शीघ्रता से किया जाता है।

(2) बिक्रीगत उत्पाद (Shopping Products) – विक्रोगत या सौदे के उत्पाद वे हाते हैं जिनका चुनाव और क्रय करने से पूर्व उपभोक्ता उपयुक्तता, किस्म, कीमत और शैली आदि आधारों पर विभिन्न निर्माताओं के उत्पादों से तुलनाएँ करता है। इन उत्पादों में फर्नीचर, महिला भरधान एवं जूते, बढ़िया चीनी के बर्तनों के सेट, कीमती साड़ियाँ आदि को सम्मिलित किया जा सकता है।

(3) विशिष्ट उत्पाद (Speciality Products) – विशिष्ट उत्पाद से आशय ऐसे उत्पादों से है जिनमें कुछ ऐसी अद्वितीय विशेषताएँ होती हैं जिनके कारण एक विशिष्ट क्रेता समूह अपनी आदतवश ऐसे उत्पादों के क्रय हेतु विशेष प्रयत्न करने को भी तत्पर रहता है।

रेफ्रीजरेटर, कारें, मूल्यवान विद्युत उपकरण, खाने का कीमती सामान, एकत्र किये जाने वाले स्टाम्प एवं सिक्के आदि विशिष्ट उत्पादों के कुछ उदाहरण हैं।

(II) औद्योगिक उत्पाद (Industrial Products)

अमेरिकन मार्केटिंग एसोसिएशन की परिभाषा समिति के अनुसार, “औद्योगिक उत्पाद वे हैं जो मुख्यतः अन्य माल (उत्पाद) के उत्पादन में अथवा सेवाएँ प्रदान करने में प्रयोग हेतु बनाये जाते हैं। इनमें साज-सामान, संघटक हिस्से, अनुरक्षण, मरम्मत, परिचालन, आपूर्तियाँ कच्चा माल अर्द्ध-निर्मित माल और गढ़ी हुई सामग्रियाँ सम्मिलित हैं।” इस प्रकार ये उत्पाद उपभोक्ताओं के उपभोग हेतु नहीं होते बल्कि कारखानों में उपभोक्ता माल बनाने के काम आते हैं। दूसरे शब्दों में, औद्योगिक उत्पाद अन्तिम उपभोक्ताओं द्वारा प्रयोग नहीं किये जाते। अन्तिम उपभोक्ताओं की तुलना में औद्योगिक प्रयोगकर्ताओं के क्रय व्यवहार में काफी एकरूपता देखने को मिलती है। ऐसे उत्पादों के नेताओं की संख्या काफी कम होती है। प्रत्येक क्रय बड़ी मात्रा में और अधिक मूल्य का होता है।

उत्पाद का महत्त्व (Importance of Product)

उत्पाद के महत्व को निम्नांकित दो वर्गों में विभक्त करके अध्ययन किया जा सकता है—

  1. विपणनकर्त्ताओं के लिए महत्व

विपणनकर्ता के लिए उत्पाद के महत्व को निम्नांकित शीर्षकों से स्पष्ट किया जा सकता है—

  1. विपणन का आधार – उत्पाद विपणन का आधार है। बिना उत्पाद के विपणन कार्य सम्भव ही नहीं है। उत्पाद ही विपणन का आदि एवं अन्त है।
  2. विपणन नीतियों एवं क्रियाओं का केन्द्र बिन्दु – उत्पाद ही सभी विपणन नीतियों एवं क्रियाओं का केन्द्र बिन्दु है। उत्पाद ही वह प्रारम्भिक बिन्दु है जहाँ से विपणन नीतियों एवं क्रियाओं को आगे बढ़ाया जाता है। उत्पाद रेखा एवं उत्पाद मिश्रण को ध्यान में रखकर ही मूल्य निर्धारित किया जाता है, मध्यस्थों की नियुक्ति की जाती है तथा संवर्द्धनात्मक मिश्रण का निर्धारण किया जाता है।
  3. विपणन प्रयासों की सफलता का आधार – यदि विपणनकर्त्ता उत्पाद सम्बन्धी निर्णय बुद्धिमत्ता से करता है तो उसकी विपणन की समस्याओं का स्वतः समाधान हो जाता है। यदि वह उत्पाद सम्बन्धी निर्णय करने में नासमझी करता है तो वह अपनी विपणनसमस्याओं को तत्काल कई गुणा बढ़ा लेता है।
  4. संस्था के लाभों का निर्धारक – उत्पाद ही संस्था के लाभों का निर्धारक होता है। अच्छा उत्पाद ग्राहकों को संतुष्ट करता है। परिणामस्वरूप, संस्था का विक्रय बढ़ता है और उससे संस्था के लाभ बढ़ते हैं। विपरीत स्थिति में संस्था के लाभ सीमित ही नहीं रहते बल्कि कभी-कभी तो संस्था को हानि भी उठानी पड़ जाती है।
  5. संस्था की सफलता का निर्धारक – एक विद्वान के अनुसार, “उत्पाद सर्वाधिक प्रभावी घटक है जो संस्था की सफलता को निर्धारित करता है।” वास्तव में संस्था की दीर्घकालीन सफलता अच्छे उत्पादों पर ही निर्भर करती है।
  6. संस्था की ख्याति में वृद्धि – अच्छे उत्पाद संस्था की ख्याति में वृद्धि करने में सहायक होते हैं, क्योंकि संतुष्ट ग्राहक संस्था एवं उसके उत्पादों की दूसरों के समक्ष प्रशंसा करते हैं जिससे उनकी ख्याति में वृद्धि होती है।
  7. क्रेता की दृष्टि से महत्त्व

वस्तु सभी आर्थिक क्रियाओं की केन्द्र बिन्दु है। यह क्रेता की क्रयशक्ति, उसका जीवन स्तर, मानसिक सन्तुष्टि व आवश्यकताओं की पूर्ति को प्रभावित करती है। उत्तम वस्तुओं का चयन एक क्रेता के जीवन को सफल बनाता है तथा वस्तुओं का अभाव उसमें अशान्ति उत्पन्न करता है। जब निर्माता वस्तुओं की पूर्ति में अवरोध पैदा करते हैं तो सरकार उसकी पूर्ति बनाये रखने के लिए प्रशासनिक नियन्त्रण लागू करती है। अतः विपणन प्रबन्धकों का सामाजिक उत्तरदायित्व हो जाता है कि वे वस्तुओं की उचित पूर्ति ही न बनाये रखें बल्कि मूल्य भी उचित रखे तथा वस्तु की क्वालिटी में गिरावट न होने दें।


Product: Consumer and Industrial Goods

MEANING AND DEFINITION OF PRODUCT

Product is the first and basic element of a marketing mix. A product is anything offered by a firm to the market. It may be an article, commodity, service, idea or place.

In our daily life we buy different kinds of products so as to satisfy our varied needs. In this way, we can say that product is one which has the capacity to satisfy our wants/needs. That is why, the product is at times defined as a bundle of potential utility.

According to R. S. Davar, “A product may be regarded from the marketing viewpoint as bundle of benefits which are being offered to consumer. According to Philip Kotler, “A product is a bundle of physical service and symbolic particulars expected to yield satisfactions or benefits to the buyer.” According to Alderson, “Product is a bundle of utilities consisting of various product features and accompanying services.”

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CHARACTERISTICS OR ESSENTIAL FEATURES OF PRODUCT

The main characteristics or essential features of a product are as follows:

  1. Tangible Attributes: The first and the foremost important characteristic of a product is its tangibility. It means that it may be touched, seen and its physical presence felt, e.g. cycle, book, pencil, table etc.
  2. Intangible Attributes: Alternatively, the product may be intangible in the form of service, such as banking, insurance or repairing services.
  3. Exchange Value: The third characteristic of a product is that it must have exchange value. Every product, whether tangible or intangible should have an exchange value and should be capable of being exchanged between the buyer and seller for a mutually agreed consideration.
  4. Utility Benefits: Another important characteristic of a product is that it should have utility, i.e.a bundle of potential utility or benefits.
  5. Differential Features : Another important characteristic from the marketing point of view is that the product should have differential features, i.e. it can be differentiated from other products. Different types of packaging and branding can create the image of product differentiation in the mind of the consumer.
  6. Consumer Satisfacton: Another characteristic from the marketing viewpoint is that the products should have the ability to deliver value satisfaction to consumers for whom they are intended.
  7. Business Need Satisfaction: The last also equally important characteristic of a product is that it should also have the attribute to satisfy a business need. The basic business need obviously is to earn profit on the product sold. It must have the attribute of generating profit.

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IMPORTANCE OF PRODUCT

  1. Product is the Centre of all Marketing Activities: Product is the pivot and all the marketing activities cluster around it. Marketing activities such as advertising, sales promotion, distribution, buying, selling etc. are all made possible only on account of the product. It is the product which is purchased, sold, advertised, distributed etc. In short, product is the engine that pulls the marketing activities, programmes etc.
  2. Beginning Point of All Planning Activities: Product is the begining point of all planning activities. The other P’s (Price, Place, Promotion, Packaging) can’t work without product. Product is the objective of a firm and a marketer adopts marketing programme, marketing mix to achieve this objective successfully.
  3. Centre of Consumption and Satisfaction: From the consumer’s point of view, product is the centre of their consumption and satisfaction. It is the philosophy of modern marketing concept.
  4. Importance from Social Viewpoint: From social viewpoint also, products satisfy the needs of society. On the one hand, product satisfies the need of consumers and on the other, it provides employment and standard of living to millions of people.
  5. Corporate Need Satisfaction: The basic corporate need for profit is satisfied by products. It is the product through which a company exploits market opportunities and generates sales volume and revenue.
  6. A Competitive Weapon: Product is the competitive weapon of very great potential.

 

Classification of Products

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  1. Consumer Goods: Consumer products/goods are those finished products which are used by the ultimate consumers or households. In short, these products/goods are used by the consumer for their own consumption but not for processing or further transformation. These goods include a wide range of our daily necessities, items of comforts and luxuries e.g., Tooth-paste, soap, blade, shoe polish, pens, paper, two-wheelers, furniture, television, audio system, clothes, books, cars and so on.

(a) Convenience Goods: These goods are purchased with minimum of effort because the buyer has knowledge of the product characteristics prior to purchase. The consumer does not want to search for additional information. In buying convenience goods the habit dominates consumer’s behaviour. The convenience goods are easily available and thus take less shopping time. For marketing of these products, the marketer relies on intensive distribution, intensive advertising and instore displays.

(b) Shopping Goods: Such goods are mostly consumer durables which satisfy a specific but not urgent want of a customer. They are costly and require advance purchase planning. The customer does not possess full knowledge of the products or its substitutes. He wishes to visit several shops and personally inspect the product to evaluate its quality, price, suitability and other specification. The purchase of such goods involves special search efforts. According to Prof. Stanton, “Shopping goods are those goods for which a customer wishes to compare quality, price and style at several stores before purchasing.”

Examples of shopping goods are television, radio, audio system, household furniture, readymade garments, washing machine, scooter and motorbikes, jewellery etc.

(c) Speciality Goods: Consumers will make special effort to buy speciality products. Consumers search extensively for an item and are extremely reluctant to accept substitutes for it. Speciality goods are particular brands, stores and persons to which consumers are loyal.

  1. Industrial Goods: Industrial products/goods are primarily used in producing other goods. Industrial goods are generally thought of as goods sold to industrial users. Industrial users are business, industrial or institutional organisations who buy products to use for the operation of their business or in making other products.

Industrial goods may be classified as follows:

(a) Raw Materials: Raw materials are those industrial goods which require further processing. Most of the agricultural products or semimanufactured goods are raw materials such as cotton, steel, glass, natural rubber etc. Parts of assembly goods are also included in the raw materials such as scooter parts, bicycle parts, car parts etc.

(b) Equipments: Equipment goods included in this category of industrial goods are of three subcategories. They are:

(i) Installations such as boilers, lathes, saw mills;

(ii) Accessory equipments such as welding, equipment, tools, calculators, sugarcane processing and refining equipments etc.

(c) Fabricated Materials: Fabricated materials are a part of finished products which do not change their form and are directly used in the manufactured goods, such as batteries, electric motors, automobile parts, spark plugs, motor car tyres etc.

(d) Operating Supplies: Operating supplies are those goods which are essential to the business operations of industrial users. They do not form a part of the finished product such as fuel, coal, machinery oil, lubricants etc. Actually, they are consumed.

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