Market Segmentation Bcom Notes

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Market Segmentation Bcom Notes:- In this post, we will give you notes of Principal of Marketing of Bcom 3rd year English and Hindi, Market Segmentation Bcom Notes Hindi and English.

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बाजार विभक्तीकरण (Market Segmentation)

 

बाजार विभक्तीकरण का अर्थ एवं परिभाषाएँ (Meaning and Definitions of Market Segmentation)

बाजार विभक्तीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें किसी बाजार के विभिन्न ग्राहकों को उनकी विशेषताओं, आवश्यकताओं, व्यवहार आदि के अनुसार समजातीय समूहों में विभाजित किया जाता है ताकि प्रत्येक समूह के लिए सही विपणन कार्यक्रम एवं व्यूहरचना का निर्माण किया जा सके। आर० एस० डावर के अनुसार, “ग्राहकों का समूहीकरण अथवा बाजार को टुकड़ों में बाँटना ही बाजार विभक्तीकरण कहलाता है।”

 

बाजार विभक्तीकरण के उद्देश्य (Objectives of Market Segmentation)

फिलिप कोटलर के अनुसार, “बाजार विभक्तीकरण का उद्देश्य उपभोक्ताओं के बीच ऐसे अन्तर को ज्ञात करना है जो उन्हें चयन करने अथवा उन्हें विपणन करने में निर्णायक हो सकता है।” संक्षेप में, बाजार विभक्तीकरण के प्रमुख उद्देश्य निम्नांकित हैं –

  1. बाजार के सही स्वरूप को समझना।
  2. बाजार में विद्यमान एवं भावी उपभोक्ताओं में से एकसमान आवश्यकताओं, विशेषताओं, व्यवहार वाले उपभोक्ताओं के समूह बनाना।
  3. प्रत्येक समूह के उपभोक्ताओं की रुचियों, आवश्यकताओं, पसन्द-नापसन्द की जानकारी करना।
  4. उन नये बाजार क्षेत्रों को ज्ञात करना जिनमें संस्था की विपणन क्रियाओं का विस्तार किया जा सके।
  5. समुचित एवं सर्वोत्तम बाजार क्षेत्रों का चयन एवं विकास करना।
  6. बाजार के प्रत्येक वर्ग के ग्राहकों के लिये विपणन मिश्रण एवं विपणन व्यूहरचना तैयार करना।
  7. विपणन क्रियाओं को ग्राहक-अभिमुखी बनाना।
  8. सम्भावित ग्राहकों को वास्तविक ग्राहक बनाना।

 

बाजार विभक्तीकरण के आधार (Bases for Market Segmentation)

बाजार विभक्तीकरण विभिन्न आधारों पर किया जा सकता है। फिलिप कोटलर के अनुसार बाजार विभक्तीकरण के मुख्य आधार निम्नलिखित है—

  1. भौगोलिक आधार,
  2. जनांकिकी आधार,
  3. मनोवैज्ञानिक आधार,
  4. क्रेता व्यवहार सम्बन्धी आधार।

(1) भौगोलिक आधार (Geographic Basis) – बाजार विभक्तीकरण भौगोलिक तत्वों, जैसे क्षेत्र, जलवायु, घनत्व, राष्ट्र राज्य, प्रदेश, नगरों एवं गाँवो आदि के आधार पर भी किया जा सकता है। क्षेत्र के आधार पर ग्रामीण क्षेत्र, अर्द्धशहरी क्षेत्र, शहरी क्षेत्र, जलवायु के आधार पर गर्म क्षेत्र तथा ठण्डे क्षेत्र आदि। भौगोलिक तत्वों के आधार पर बाजार विभक्तीकरण तब ही करना चाहिए जबकि उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाना हो तथा उसका वितरण दूर-दूर बिखरे हुए उपभोक्ताओं को करना हो। इस प्रकार के बाजार विभक्तीकरण की सहायता से विपणनकर्ता प्रत्येक क्षेत्र की विशेषताओं के अनुरूप अपना विपणन कार्यक्रम समायोजित कर सकता है।

(2) जनांकिकी आधार (Demographic Basis) – वर्तमान समय में जनांकिकी तत्वों के आधार पर बाजार विभक्तीकरण करना काफी लोकप्रिय है। इसके अन्तर्गत एक निर्माता विभिन्न समूहों में जनांकिकी तत्वों के आधार पर अन्तर करने का प्रयास करता है, जैसे- आयु, लिंग, परिवार का आकार, आय, शैक्षिक स्तर, जाति या धर्म, व्यवसाय आदि।

Market Segmentation Bcom Notes
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(3) मनोवैज्ञानिक आधार (Psychographic Basis) – जब बाजार को ‘उपभोक्ताओं की जीवन शैली या उनके व्यक्तित्व, जीवन मूल्य आदि के आधार पर विभाजित किया जाता है तो उसे बाजार का मनोवैज्ञानिक आधार पर विभक्तीकरण कहते हैं –

व्यवहार सम्बन्धी आधार (Buyer Behaviour gmentation) क्रेताओं के उत्पाद क्रय सम्बन्धी निर्णयों के आधार पर बाजार विभाजन क्रेता-व्यवहार विभक्तीकरण कहलाता है। निम्नलिखित घटकों के र पर क्रेता व्यवहार विभक्तीकरण किया जा सकता है

(i) क्रय अवसर (Buying Occasions) – क्रेताओं को किसी उत्पाद या सेवा क्रय करने या उपयोग करने के अवसरों के आधार पर विभाजित किया जा ता है, जैसे- शादी विवाह, जन्मदिन, वेलेन्टाइन्स डे आदि के अवसरों पर द/सेवाओं को खरीदने का निर्णय करते हैं।

(ii) लाभ अभिलाषा (Benefits Sought) – ग्राहक उत्पाद या सेवा को दते समय उससे कई लाभों की प्राप्ति की अभिलाषा भी रखते हैं, जैसे कुट से पेट भरने के साथ शक्ति की अभिलाषा, दाँत साफ करने के साथ की तकलीफ से राहत पाने की अभिलाषा के साथ उत्पाद क्रय किया जाता है |

(iii) प्रयोग दर (Usage Rate) – कुछ ग्राहक उत्पादों का बहुत अधिक योग करते हैं कुछ कम। अतः बाजार के लोगों को उनके द्वारा उत्पाद के योग करने की दर के आधार पर विभाजित किया जा सकता है।

(iv) ब्राण्ड निष्ठा (Brand Loyalty) – ग्राहकों को ब्राण्ड की लोकप्रियता के चार पर विभक्त किया जाता है।

(v) क्रेता अभिप्रेरक (Buyer Motivation) – इसके अन्तर्गत उन तत्वों को मलित करते हैं जिनसे प्रभावित होकर क्रेता वस्तु खरीदता है, -मितव्ययिता, वस्तु के गुण, विश्वसनीयता, प्रतिष्ठा प्राप्ति आदि।

(vi) प्रवृत्ति (Attitude) – बाजार में उत्पाद के प्रति भिन्न-भिन्न प्रवृत्ति के पाये जाते हैं। इनमें से कुछ उत्पाद के प्रति अति उत्साही, कुछ सकारात्मक, तटस्थ, कुछ नकारात्मक प्रवृत्ति के हो सकते हैं। अतः उपभोक्ता की इन्हीं त्तियों के आधार पर बाजार का विभक्तीकरण किया जा सकता है।

 

बाजार विभक्तीकरण के सम्बन्ध में विपणन रीति-नीतियाँ (Market Strategies towards Market Segmentation)

किसी वस्तु बाजार के क्रेताओं में समानता नहीं पायी जाती है। इस कारण जार विभक्तीकरण किया जाता है। अतः क्रेताओं की भिन्नता के अनुसार एक वसायी अपनी विपणन रीति-नीति में भी अन्तर कर सकता है। बाजार भक्तिकरण के सम्बन्ध में विपणन प्रबन्धक प्रायः अग्र विपणन रीति-नीतियों का करते हैं –

  1. अभेदित विपणन रीति-नीति (Undifferentiated Marketing Strategy),
  2. भेदित विपणन रीति-नीति (Differentiated Marketing Strategy),
  3. संकेन्द्रित विपणन रीति-नीति (Concentrated Marketing Strategy) ।

(1) अभेदित विपणन रीति-नीति (Undifferentiated Marketing Strategy) – इस विपणन रीति-नीति के अन्तर्गत फर्म एक उत्पाद के लिये एक ही पणन कार्यक्रम प्रस्तुत करती है। इसके अन्तर्गत ग्राहकों के मध्य अन्तर नहीं या जाता और सभी के लिये एक ही विपणन कार्यक्रम, एक ही विज्ञापन ध्यम और एक ही ब्राण्ड व पैकिंग आदि का प्रयोग किया जाता है। भारत में अधिकांश फर्मे अमेदित विपणन रीति-नीति का ही प्रयोग करती है। उदाहरण के लिए, कोका कोला कई वर्षों तक एक ही स्वाद वाला और एक ही बोतल आकार में उपलब्ध रहा। इसी तरह सिगरेटों के सम्बन्ध में ब्राण्ड की भिन्नता के बाद भी सभी प्रकार की सिगरटें समान रूप से लम्बी, सफेद कागज में लपेटी हुई और हल्के पैकेटों में रखकर बेची जाती हैं।

अभेदित विपणन रणनीति में एक प्रकार की वस्तु बनायी जाती है। इसमें व्यक्तियों को समान (common) आवश्यकताओं पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है. और उत्पाद का ऐसा आकार और कार्यक्रम तैयार किया जाता है जो अधिकांश ग्राहकों को प्रभावित करें।

(2) भेदित विपणन रीति-नीति (Differentiated marketing strategy) – इस रणनीति के अन्तर्गत विक्रेता विभिन्न ग्राहक वर्गों की विशेषताओं के अनुसार विभिन्न प्रकार और किस्म की वस्तुएँ उत्पादित करता है और बेचता है। पृथक-पृथक उत्पादों के लिये विभिन्न विपणन कार्यक्रम बनाये जाते हैं। इस रीति-नीति का प्रयोग विक्रय को बढ़ाने और प्रत्येक बाजार खण्ड की गहराई तक पहुँचने के लिये किया जाता है।

उदाहरण के लिये अब सिगरेटें भिन्न-भिन्न लम्बाई की बनने लगी हैं। एक ही ब्राण्ड की सिगरेट फिल्टर्ड या अनफिल्टर्ड (filtered or unfiltered) बनायी जाने लगी हैं। गोल्डन टोबेको कम्पनी लिमिटेड दस नामों के सिगरेट बनाती व बेचती हैं। इसी तरह हिन्दुस्तान लीवर लिमिटेड अनेक प्रकार के नहाने के साबुन बनाती हैं, जैसे- लाइफबॉय, लक्स, रेक्सोना, लिरिल, पीयर्स, सुप्रीम आदि।

अभेदित विपणन रीति-नीति की तुलना में भेदित विपणन रीति-नीति द्वारा कुल बिक्री में वृद्धि की जा सकती हैं परन्तु इसके साथ ही इसके प्रयोग से उत्पाद परिवर्तन लागत, उत्पादन लागत, प्रशासनिक लागत, संग्रहण लागत व संवर्द्धन लागत भी बढ़ जाती है। यह रीति विक्रय अभिमुखी तो है, परन्तु इसका ‘लाभ-अभिमुखी’ होना इस बात पर निर्भर करता है कि बढ़ी हुई लागतों की तुलना में विक्रय में किस अनुपात में वृद्धि होती है।

(3) संकेन्द्रित विपणन रीति-नीति (Concentrated Marketing Strategy) – इस नीति के अन्तर्गत सम्पूर्ण बाजार के स्थान पर किसी एक बाजार भाग या कुछ भागों पर ही सम्पूर्ण विपणन शक्ति केन्द्रित की जाती है। यह रीति-नीति उस समय अधिक उपयुक्त रहती है जब फर्म का आकार छोटा एवं वित्तीय साधन सीमित हों। फिलिप कोटलर के अनुसार, “इस रीति के अन्तर्गत फर्म एक बड़े आकार के छोटे भाग की बजाय एक या कुछ उप-बाजारों के बड़े भाग के लिये प्रयास करती है। अन्य शब्दों में, बाजार के अनेक भागों में अपनी शक्ति बिखरने की बजाय फर्म कुछ ही क्षेत्रों में अपनी शक्ति को केन्द्रित करती है जिससे एक अच्छी बाजार स्थिति को प्राप्त किया जा सके।” भारत में अनेक संस्थाओं द्वारा इस नीति का पालन किया जा रहा है, जैसे कई पुस्तक प्रकाशक सभी विषयों की पुस्तकें प्रकाशित न कर केवल कुछ ही विषयों की पुस्तकों के प्रकाशन का कार्य करते हैं। इनमें भी कुछ प्रकाशक महाविद्यालय स्तर की पुस्तकें व कुछ स्कूल स्तर की पुस्तकों के प्रकाशन का कार्य करते हैं। उदाहरण के लिये, स्वात प्रकाशन ने महाविद्यालयीन स्तर की पुस्तकों के प्रकाशन के क्षेत्र में विशेषता प्राप्त कर ली है।


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Market Segmentation

MEANING OF MARKET SEGMENTATION

The concept of market segmentation is based on the assumption that total market for most of the products is not homogeneous but too much heterogeneous. This is so because people have different needs and values. Therefore, a marketer can not serve all customers in a broad market.

For Example: There may be a total market for textiles, electrical appliances, cosmetics, washing machines etc. but within the total for each of these products, there might exist many markets which differ vitally from each other. Under textile sub- markets, there might be demand for cotton cloth in one sector of population, in other for silk, yet in other for synthetic fibre textiles. This is so because two customers of a product are never common but they differ in their nature, qualities, taste, fashion, preference, buying habits or motives for buying. Thus, on the basis of these characteristics, customers having similar qualities and characteristics are grouped in segments. The characteristics of customers of one segment differ with those of other segments. The marketers may take the advantage of situation and divide the total market into smaller groups of consumers i.e., segments on the basis of significant difference in buyer characteristics. In a sense market segmentation is a strategy of ‘divide and conquer’ i.e., dividing the market in order to conquer them. Thus, market segmentation is the process of dividing a potential market into distinct submarkets of buyers with homogeneous needs and characteristics. It is to identify the groups of buyers on the basis of differences in their desires and requirements.

ASSUMPTIONS OF MARKET SEGMENTATION PROCESS

(i) Markets are heterogeneous.
(ii) Different market segments respond differently.
(iii) Market segmentation is consistent with the marketing concept.

DEFINITIONS OF MARKET SEGMENTATION

“Market segmentation is the strategy of dividing markets in order to conquer them.”

-Alan. A. Robert

“Market segmentation consists of taking the total heterogeneous market for a product and dividing it into several submarkets or segments, each of which tends to be homogeneous in all significant aspect.”

-William J. Stanton

OBJECTIVES/PURPOSE OF MARKET SEGMENTATION

In short, the main objectives of market segmentation are as follows:
1. Grouping customers on the basis of their homogeneous characteristics such as taste, habits, nature, qualities, needs, behaviour, sex etc..
2. To design different marketing programme for each consumer group according to their nature.
3. To achieve market targets..
4. To develop new products according to consumers’ needs.
5. To expand the market and satisfy the consumers.
6. To make the activities of the firm customer-oriented.
7. To determine marketing strategies, targets and goals.

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IMPORTANCE/BENEFITS/ADVANTAGES OF MARKET SEGMENTATION

Market segmentation ensures higher customer satisfaction. and improves effectiveness of marketing program. It offers following specific benefits:

(1) Better Position to Locate Marketing Opportunities: Marketers are in a better position to locate and compare marketing opportunities of his products. He is able to judge product acceptance or assess resistance to his product.
(2) Prepare Effective Marketing Program: By dividing the market into various segments, a marketer can make his marketing programme according to the requirements of consumers.
(3) Win Competition: Market segmentation helps the producers to face the competition of his rivals effectively.
(4) Better Allocation of Marketing Resources: The marketer can make best use of resources according to needs of various segments of market.
(5) Better Assessment of the Strengths and Weaknesses of the Competitor: Competitive strengths and weaknesses can be assessed effectively and marketers can avoid fierce competition.
Market segmentation helps in determining the kinds of promotional devices that are effective and also helps to evaluate their results.

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CRIETERIA, BASES OR FACTORS FOR MARKET SEGMENTATION

There are many ways to group customers in segmenting the market. Broadly speaking there are two main approaches to identify market segments:

(I) PEOPLE ORIENTED APPROACH/CUSTOMER’S PERSONAL CHARACTERISTICS APPROACH

Under this, those characteristics or variables are considered which are independent of any product or service. It is tried to find out the type of customer ‘ who’ will buy the product. Various characteristics for classification of customers are:

(1) Geographic Segmentation: Geographic location is the usual and popular basis for market segmentation. For planning and administrative purposes the marketer will often find it convenient to subdivide the country into areas in systematic way. Geographic segmentation may be on the basis of state, region, density of area, size of city and climate etc. In short, Geographic segmentation can take place as follows:

(i) Region: North, South, East, West, Central.
(ii) Climate: Hot, Cold, Rainy, Humid.
(iii) City Size: Towns, small cities, metropolitan.
(iv) Density of Area: Rural, semi-urban, urban.

The marketer may design the marketing strategies taking into consideration the characteristics of individual markets.

(2) Demographic Segmentation: Demography is the study of population. Under this, market segments are defined according to demographic factors such as age, sex, marital status, number and age of children.
For Example: Markets may be segmented on the basis of sex i.e. ladies and gents. Lipstick is meant for women whereas shaving cream is meant for gents.

Demographic factors are easier to recognise and measure. Moreover these can be easily co-related with sales and other marketing data. Various bases of demographic segmentation are:

(i) Age Group: Children, teenagers, adults, grownups.
(ii) Sex: Male, female.
(iii) Marital Status: Married, unmarried.
(iv) Family Life Cycle: Young, single, young married, no child, married with one child.
(v) Family Size: One, two to three, four, five and above.

(3) Socio-Economic Segmentation: Under this, segmentation is done on the basis of socio-economic characteristics like income, education, occupation, social class, religion, culture. Socio-economic factors especially when used together, can help to locate a market precisely.

This method is widely used because it not only helps in locating segments but also in measuring the size of segment easily. Various basis are:

(i) Religion: Hindu, Muslim, Christian, Sikh.
(ii) Nationality: Indians, Chinese, Americans.
(iii) Occupation: Professional, business, clerical.
(iv) Income: High income, middle income, lower income.
(v) Education: Primary, secondary, senior secondary. college, university.

(4) Psychographic Segmentation: In the psychographic base, population differences in terms of personality, life styles, self images form the basis of population clustering. Various basis are:

(i) Life Style: Conservative, liberal, adventurous.
Example: Some customers prefer latest products, some like antiques, rare products.

(ii) Social Class: Products demanded by the groups are: Upper Class Prestigious goods like diamond, AC, luxury cars.
Middle Class: Cooler, T.V., scooter. Lower Class: Necessity goods like cycle.

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(II) CUSTOMER RESPONSE (PRODUCT ORIENTED APPROACH) SEGMENTATION

Under this type of segmentation, customer response or buyer behaviour is considered related to product benefits, product usage, brand loyalty and store patronage. It is tried to find out why customers buy a certain product. The various bases of segmentation reflecting buyer behaviour are:

(1) Benefits Pattern: Consumers expect benefits from the product. Benefits sought by consumers are the basic reason for the existence of market segment. Customer satisfaction directly depends upon product benefits. Example: Taste, flavour, cost, quality, repairs, style, performance etc. First consumers are grouped on the basis of benefits they expect and then each segment is analysed on the basis of demographic, socio-economic characteris tics leading to appropriate marketing mix for each segment.

(2) Use Pattern: The use of the total consumption of a family unit for a given product may act as a basis of segmentation. There are light users, medium users and heavy users. Marketers always try to influence heavy users. One more group can also be framed of non-users. Marketers try to create interest of these users in their offerings.

(3) Brand/Store Loyalty: Segmentation on the basis of loyalty enables a marketer to tailor the marketing policy and product appeal so as to retain the loyal customers, to attract new consumers from rival brand and to convert non-loyal into loyal buyers. However brand loyalty is not easy to measure.

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ALTERNATIVE MARKETING STRATEGIES TOWARDS MARKET SEGMENTS

(i) Undifferentiated Marketing Strategy Under: undifferentiated marketing strategy, there is only one marketing mix or product for the whole market as well as customers. There is neither grouping of customers nor market segmentation. The strategy lays emphasis on one product and formulates only one marketing programme.
Example: For many years the reputed Coca Cola company followed such a strategy-one brand, one product, one bottle for one big market but later on due to competition given by rivals it had to adopt differential marketing.

Features: 1. One target market, 2. Narrow product line, 3. One marketing mix for the target market, 4. One marketing program, 5. Preference to common needs of customers.

Merits: 1. Large scale production, 2. Cost economies, 3. Maximum profits, 4. Reduced market research expenses, 5. Increase in goodwill of the firm, 6. Common advertising programme.

Demerits: 1. Profits in short run only, 2. Product oriented strategy, 3. Ignores various needs of customers.
(2) Differentiated Marketing StrategyL Under this, grouping of customers is done on the basis of their common characteristics. It differentiates among the groups on the basis of their age, sex, religion, educational level, income, taste, caste, family size etc.

Example: Maruti Udyog Ltd. that tries to produce car for every ‘purse-purpose and personality’. Hindustan Lever has one brand of bath soap for each market segment.
Features: 1. Various market segments, 2. Large product line, 3. Product variety to customers, 4. Different marketing programmes, 5. Different marketing mix for each segment.

Merits: 1. Higher sales and higher customer satisfaction, 2. Firm can develop brand preference and repeat sales, 3. Customer oriented strategy, 4. More suitable to common usage products.
Demerits: 1. Higher production and higher marketing cost, 2. Difficult to implement due to limited firm’s resources, 3. Additional sales increase may be lower than additional cost increase i.e. stage of diminishing returns.

(3) Concentrated Marketing Strategy: Under this strategy, the marketer focusses on certain areas of market. It follows ‘one product-one segment’ strategy. In the words of Philip Kotler, “Instead of going after a small share of a large market, the firm goes after a large of one or few submarkets. But another way instead of spreading itself this is many parts of the market, it concentrates its forces to gain a good market position in a few areas. “The firm selects a market area where there is no strong competition and it can do best in that area. If it succeeds in matching its resources with customer demand, it may enjoy an element of monopoly in that area.

Example: ‘ Rolex’ watch co. concentrated only on costly, quality and high priced watches. A publishing house may concentrate only on text books say on accounts, economics. Johnson & Johnson produces baby products.

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