Unit 1 Introduction E Commerce Bcom Notes

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 ई-कॉमर्स – एक परिचय (E-Commerce: An Introduction)

ई-कॉमर्स का परिचय- ई-कॉमर्स से आशय उन सभी व्यावसायिक गतिविधियों से है जिनमें विभिन्न व्यक्तियों और संगठन के मध्य सभी प्रकार के लेन-देन डिजिटल माध्यम/डाटा के जैसे लिखित टिप्पणी, आवाज या दृश्य सामग्री के माध्यम से किये जाते हैं। ई-कॉमर्स शब्द इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स (Electronic Commerce) का लघु रूप है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि जो व्यवसाय इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का प्रयोग करके किया जाता है, उस व्यवसाय को ई-कॉमर्स के नाम से जाना जाता है।

वर्तमान व्यावसायिक परिवेश में ई-कॉमर्स एक क्रान्ति के रूप में है जिसने व्यावसायिक क्रियाओं का एक नया आयाम प्रदान किया है। इसके अन्तर्गत वस्तुओं और सेवाओं के विक्रय से सम्बन्धित सूचनाएँ इण्टरनेट पर मानव कम्प्यूटर वार्ता के द्वारा प्रदान की जाती है। विस्तृत अर्थ में, ई-कॉमर्स से आशय कम्प्यूटर नेटवर्क का प्रयोग संगठन के प्रदर्शन में सुधार करना है। लाभ में वृद्धि, बाजार का विस्तार, ग्राहक सेवा सुधार, ऑनलाइन आदेश और वस्तुओं का शीघ्रता से वितरण करना ई-कॉमर्स के द्वारा ही सम्भव हो पाया है। ई-कॉमर्स पेपररहित व्यावसायिक सूचनाओं का आदान-प्रदान निम्न प्रकार से करता है

 

Electronic Document Interchange

 

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ई-कॉमर्स की परिभाषाएँ (Definitions of E-Commerce)

ई-कॉमर्स से आशय उस व्यावसायिक परिवेश से है जिसमें वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री से सम्बन्धित सूचनाएँ और उनका वितरण इलेक्ट्रॉनिकली इण्टरनेट के माध्यम से किया जाता है। ई-कॉमर्स को विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग के आधार पर इस प्रकार परिभाषित किया गया है. –

(1) संचार (Communication) – के दृष्टिकोण के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमर्स से आशय सूचनाओं, उत्पादों, सेवाओं और भुगतानों का आदान-प्रदान कम्प्यूटर नेटवर्क की सहायता से किया जाता है।”

(2) सेवा (Service) – के दृष्टिकोण से, “ई-कॉमर्स एक ऐसी तकनीक है जोकि किसी फर्म, उपभोक्ता एवं प्रबन्ध की इच्छा की पूर्ति करता है अर्थात् की लागत कम करना, माल की गुणवत्ता में वृद्धि और सेवा की गति में वृद्धि करना।”

(3) ऑनलाइन (Online) – सुविधा के दृष्टिकोण से, “ई-कॉमर्स किसी उत्पाद को बेचने और खरीदने एवं सूचनाओं को प्रदान करने की सुविधा प्रदान करता है और यह सुविधा इण्टरनेट या किसी अन्य ऑनलाइन सेवा द्वारा प्रदान की जाती है।”

(4) व्यावसायिक प्रक्रिया (Business Process) – के दृष्टिकोण से, ई-कॉमर्स तकनीक का वह अनुप्रयोग है जिसमें व्यापारिक लेन-देन एवं कार्यप्रवाह स्वयं संचालित होता रहता है। उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर एक सर्वमान्य परिभाषा यह है कि “ई-कॉमर्स एक ऐसी तकनीक है जो वस्तुओं, सेवाओं, सूचनाओं के साथ-साथ उपभोक्ता और संगठन के हितों का ध्यान रखते हुए सेवाएँ प्रदान करता है।”

 

ई-कॉमर्स आधारित गतिविधियाँ (E-Commerce based Activities)

ई-कॉमर्स के अन्तर्गत अनेक प्रकार की गतिविधियाँ शामिल हैं। नई-नई तकनीकों का विकास होने के कारण दिन-प्रतिदिन ई-कॉमर्स गतिविधियों में विस्तार होता जा रहा है। ई-कॉमर्स के अन्तर्गत विविध गतिविधियाँ जैसे Online Shopping (इण्टरनेट द्वारा क्रय-विक्रय), Online banking (इण्टरनेट द्वारा बैंकिंग लेन-देन), Online ticketing (यात्रा टिकटों की बुकिंग), इलेक्ट्रॉनिक भुगतान, Online auction (इण्टरनेट द्वारा नीलामी) और अन्य बहुत सी गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं।

  1. ऑनलाइन शॉपिंग (Online Shopping) – इण्टरनेट के प्रयोग द्वारा विभिन्न वेबसाइट्स और मोबाइल एप्प की सहायता से सीधे ग्राहकों को माल खरीदने का अवसर दिया जाता है। आजकल Virtual Stores पर, जोकि Online बनाये जाते हैं, अधिक मात्रा में वस्तुएँ उपलब्ध रहती है। ये स्टोर्स केवल Online उपलब्ध होते हैं एवं इनका कोई भौतिक संसाधन नहीं होता | Online Shopping के द्वारा ग्राहक घर बैठे-बैठे सामान खरीद लेता है।
  2. ऑनलाइन / इण्टरनेट बैंकिंग (Online/ Internet Banking) – ई-कॉमर्स बैंकिंग करने के लिए बैंक में की जाने वाली प्रतिबद्धता को समाप्त कर दिया है। आज लोग अपनी दैनिक बैंकिंग गतिविधियाँ ऑनलाइन घर बैठे-बैठे ही कर सकते हैं। वास्तव में ई-कॉमर्स के विकास में इण्टरनेट बैंकिंग का महत्वपूर्ण स्थान है।
  3. ऑनलाइन यात्रा टिकट बुकिंग (Online travelling ticketing) – आजकल सभी प्रकार की यात्रा की टिकटों की Online booking की जाती है। इनमें हवाई टिकट, ट्रेन टिकट, बस टिकट शामिल हैं साथ-ही-साथ मनोरंजन एवं खेल गतिविधियों के लिए भी Online Ticket की सुविधा उपलब्ध है।
  4. इलेक्ट्रॉनिक भुगतान (Electronic Payment) – विभिन्न सुविधा के बिल जैसे मोबाइल बिल, केबल बिल, इण्टरनेट बिल, बिजली बिल एवं Online Shopping के बिल का भुगतान आदि भी ई-कॉमर्स का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
  5. ऑनलाइन नीलामी (Virtual Actual) – ई-कॉमर्स ने ऑनलाइन नीलामी भी लोकप्रिय बना दिया है। अनेक वेबसाइट जैसे ई-बे (e-bay) आदि ऑनलाइन नीलामी करती है। ये वेबसाइट ग्राहकों को सर्वोत्तम मूल्य पर माल बेचने एवं खरीदने की सुविधा प्रदान करती है।
  6. इलेक्ट्रॉनिक डाटा इण्टरचेंज (Electronic data interchange) – इलेक्ट्रॉनिक डाटा इण्टरचेंज (E.D.I) का प्रयोग भिन्न-भिन्न स्थानों पर दो अथवा अधिक प्रयोगकर्त्ताओं (User) के मध्य प्रयोग किए जा रहे विभिन्न दस्तावेजों (Documents); जैसे–पत्र, बिल्स, किसी दस्तावेज की प्राप्ति की सूचना अथवा अन्य रिपोर्ट्स की इलेक्ट्रॉनिक माध्यम द्वारा एक-दूसरे तक पहुँचाना है। इस प्रकार, EDI का मुख्य कार्य कागज का स्थान लेना नहीं है, अपितु उसको दोबारा बनाने में व्यय होने वाले समय की बचत करना है। यह डाटा एक्सचेंज की नवीनतम पद्धति है। इसके अन्तर्गत डाटा एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर को सीधे ही भेज दिया जाता है।

 

ई-कॉमर्स के प्रमुख गुण या विशेषताएँ (Main Features or Characteristics of E-Commerce)

ई-कॉमर्स के प्रमुख गुण या विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

(1) ई-कॉमर्स में विक्रय एवं विक्रय संवर्द्धन ऑनलाइन किया जाता है जो तीव्रता के साथ निश्चित रूप से उपभोक्ताओं तक पहुँच जाता है।

(2) ई-कॉमर्स में वस्तुओं का भण्डारण नहीं किया जाता। आदेश प्राप्त होने पर ही का निर्माण किया जाता है।

(3) ई-कॉमर्स स्वसंचालित प्रक्रिया है।

(4) ई-कॉमर्स से अनावश्यक व्ययों में कमी आती है।

(5) ई-कॉमर्स में कम वित्त की आवश्यकता पड़ती है।

(6) ई-कॉमर्स से निजी एवं सार्वजनिक सुविधाएँ जैसे डाक एवं कोरियर का उपयोग बढ़ रहा है क्योंकि मालवाहक ही ई-कॉमर्स की रीढ़ है।

(7) ई-कॉमर्स में गारण्टी और देरी से भुगतान जैसे विवाद उत्पन्न नहीं होते क्योंकि वस्तुएँ पहले से ही निर्धारित होती हैं और सभी व्यवहार ऑनलाइन किए जाते हैं।

 

ई-कॉमर्स के उद्देश्य (Goals of E-Commerce)

ई-कॉमर्स अनेक कारणों से उपभोक्ता और विक्रेता दोनों की सुविधा के कारण आरम्भ हुआ। विक्रेता चाहता है कि उसका व्यवसाय बड़े स्तर पर हो एवं अधिक से अधिक उपभोक्ताओं की पहुँच में हो। वहीं क्रेता चाहता है कि उसे वस्तुओं को क्रय करने के अनेक विकल्प कम से कम कीमत पर प्राप्त हो । अतः ई-कॉमर्स दोनों के लिए लाभकारी है। संक्षेप में ई-कॉमर्स के निम्नलिखित उद्देश्य हैं—

  1. व्यावसायिक सम्बन्धों का विकास (Development of business relationship) – ई-कॉमर्स का प्राथमिक और प्रमुख उद्देश्य व्यावसायिक सम्बन्धों का विकास। ई-कॉमर्स में संगठन और उपभोक्ता में प्रत्यक्ष सम्बन्ध स्थापित हो जाता है जो बाजार वृद्धि में सहायक है।
  2. अच्छी उपभोक्ता सेवा (Better customer service) – ई-कॉमर्स में किसी भी समय उपभोक्ता द्वारा ऑनलाइन सहायता प्राप्त की जा सकती है। सभी सूचनाएँ सही समय पर प्राप्त हो जाने के कारण उपभोक्ता विभिन्न उत्पादों में से सबसे अच्छे उत्पाद का चयन कर सकता है।
  3. अधिक ग्राहक बनाना (Getting more customers) – ई-कॉमर्स का उद्देश्य बड़े क्षेत्र में अधिक से अधिक ग्राहकों को संगठन की वस्तुओं और सेवाओं के लिए आकर्षित करना एवं कम्पनी की वस्तुओं को क्रय करने हेतु प्रेरित करना है।
  4. प्रबन्धकीय लागतों में कमी (Reduce management costs) – स्वचालित ई-कॉमर्स प्रणाली का उपयोग प्रबन्धकीय लागतों में कमी करने के उद्देश्य से किया जाता है। डिजिटल मार्केटिंग का सही उपयोग करके लागत को कम किया जा सकता है।
  5. सेवाओं की कार्यक्षमता को बढ़ाना (Boosting the efficiency of services) – ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर ऑनलाइन स्टोर खोल कर संगठन द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं की कार्यक्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
  6. विक्रय में वृद्धि (Increase in sales) – विक्रय में वृद्धि करना ई-कॉमर्स का उद्देश्य है। ई-कॉमर्स के सभी उद्देश्य इस उद्देश्य से जुड़े हुए हैं।

 

ई-कॉमर्स के तकनीकी अवयव (Technical Components of E-Commerce)

ई-कॉमर्स के तकनीकी अवयव निम्नलिखित हैं –

  1. हार्डवेयर (Hardware) वेब सर्वर हार्डवेयर (Web Server Hardware) – ई-कॉमर्स का एक महत्वपूर्ण अवयव है जिस पर सम्पूर्ण ई-कॉमर्स प्रणाली का प्रदर्शन निर्भर है। वेब सर्वर हार्डवेयर का चयन करते समय ई-कॉमर्स लेन-देनों का काम करने के लिए जो सॉफ्टवेयर काम करेंगे उसे भी ध्यान रखना आवश्यक है। डाटा भण्डारण की क्षमता और गणना शक्ति ई-कॉमर्स लेन-देनों की मात्रा के अनुसार होनी चाहिए। यदि पहले से सही आवश्यकताओं की जानकारी नहीं है तो हार्डवेयर उच्च क्षमता वाला होना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर उसे upgrade किया जा सके।
  2. सॉफ्टवेयर (Softwares) – ई-कॉमर्स प्रणाली में सॉफ्टवेयर भी एक महत्वपूर्ण अवयव है जो ई-कॉमर्स सेवाओं और कार्य को चलाता है। बिना सॉफ्टवेयर हार्डवेयर कार्यशील नहीं हो सकता है। ई-कॉमर्स के सॉफ्टवेयर को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है –

(i) वेब सर्वर सॉफ्टवेयर (Web Server Software) – वेब सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ-साथ ई-कॉमर्स के लिए वेब सर्वर सॉफ्टवेयर की आवश्यकता भी होती है। यह सॉफ्टवेयर कुछ अन्य कार्यों जैसे सुरक्षा, पहचान और वेब पेज भेजने का काम करता है। वेब सर्वर सॉफ्टवेयर एक वेब लॉग फाइल तैयार करता है जो विभिन्न जानकारियाँ जैसे साइट पर आने वाले विजिटर का URL, विजिटर द्वारा साइट पर लगाया गया समय, सर्च इंजन एवं साइट को ढूँढ़ने के लिए उपयोग किए गए keywords आदि की पहचान करता है।

(ii) ई-कॉमर्स सॉफ्टवेयर (E-Commerce Software) – ई-कॉमर्स के विकास के साथ अनेक एप्लीकेशन भी उद्भव हो गया है जैसे इलेक्ट्रॉनिक शॉपिंग कार्ट (Electronic shopping cart) जो यह पहचान करता है कि किस वस्तु का क्रय हेतु चयन किया गया एक अच्छे ई-कॉमर्स सॉफ्टवेयर को निम्नलिखित प्रक्रियाओं के लिए सहयोगी होना चाहिए है।

(a) सूची प्रबन्ध (Catalog Management)

(b) उत्पाद विन्यास (Product Configuration)

(c) शॉपिंग कार्ट (Shopping Cart)

(d) लेन-देन प्रसंस्करण (Transaction Processing)

(e) वेब ट्राफिक डाटा विश्लेषण (Web Traffic data Analysis)

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ई-कॉमर्स का कार्य (Functions of E-Commerce)

ई-कॉमर्स के कुछ मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं –

  1. वैश्विक पहुँच (Global Reach) – ई-कॉमर्स वैश्विक स्तर पर ऑनलाइन किया जाने वाला व्यवसाय है। ई-कॉमर्स एक बड़े क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्राहकों को एक ही समय में अपनी सेवाएँ दे सकता है।
  2. सरल संचालन (Easy Navigation) – इसका अर्थ है कि जिस उत्पाद की आवश्यकता होती है उसे कम से कम समय में सरलता से खोजा जा सकता है। ग्राहकों को उस उत्पाद को खोजने में अपना समय व्यर्थ नहीं करना पड़ता है।
  3. सभी जगह उपलब्धता (Ubiquity) – इसका अर्थ है कि व्यवसाय की सेवाएँ किसी समय भी और कहीं से भी प्राप्त की जा सकती हैं। परम्परागत व्यवसाय की भाँति ई-कॉमर्स एक स्थान तक सीमित नहीं है। ग्राहक अपनी इच्छा और सुविधा के अनुसार लेन-देन कर सकते हैं। ई-कॉमर्स वेबसाइट पर सरलता से किसी मोबाइल फोन, टेबलेट आदि द्वारा किसी समय भी पहुँचा जा सकता है। ई-कॉमर्स यूजर फ्रेंडली होता है और सर्वत्र इसकी पहुँच होती है।
  4. सरल उत्पाद तुलना (Easy Product Comparison) – ऑनलाइन बड़ी मात्रा में उत्पाद उपलब्ध रहते हैं जिनकी सरलता के साथ अन्य उत्पादों के साथ तुलना की जा सकती है। यह तुलना उनके मूल्यों, गुणवत्ता और अनेक अन्य तुलनाएँ विभिन्न वेबसाइट्स पर की जा सकती हैं। ग्राहक सरलता से तुलना के पश्चात् सबसे अच्छे उत्पाद का चयन कर सकता है।
  5. अन्तरक्रियाशीलता (Interactivity) – अन्तरक्रियाशीलता से आशय व्यवसाय और ग्राहकों के बीच सम्प्रेषण का होना है। ग्राहक सरलता से व्यवसाय के साथ बातचीत कर सकता है। अपने सवाल और समस्या को व्यवसाय की वेबसाइट की सहायता से सरलता से उठा सकता है। ग्राहक व्यावसायिक उत्पाद और सेवाओं के विषय में अपने सुझाव और प्रतिपुष्टि भी दे सकता है।

 

ई-कॉमर्स के लाभ (Advantages of E-Commerce)

ई-कॉमर्स के लाभों को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है –

I. ग्राहकों को लाभ (Advantages of Customers)

  1. कम मूल्यों पर वस्तुओं की उपलब्धता – ई-कॉमर्स व्यवसाय में माल की लागते मध्यस्थ न होने के कारण कम हो जाती है और ग्राहकों को कम कीमत पर वस्तुएँ उपलब्ध हो
  2. वैश्विक बाजार (Global Market) – ई-कॉमर्स का एक लाभ यह है कि ग्राहक जाती हैं। सम्पूर्ण विश्व में से कहीं से भी खरीदारी कर सकता है। विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वैश्विक स्तर पर खरीदे गए उत्पाद पर कोई कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी।
  3. 24 घण्टे पहुँच (24 Hours Access) – ऑनलाइन व्यवसाय 24 घण्टे चलता रहता है। ई-कॉमर्स समय और दूरी सम्बन्धी सभी बाधाओं को दूर करके लोगों को व्यवसाय करने की सुविधा प्रदान करता है।
  4. अधिक पसन्द की सुविधा (More Choice Facility) – ई-कॉमर्स उपभोक्ताओं को उत्पाद का चयन करने हेतु अनेक विकल्प प्रदान करता है। उदाहरण के लिए- उपभोक्ता क्रय करने से पूर्व बड़े ब्राण्ड्स के उत्पादों के गुणों का अध्ययन करके उत्पाद का चयन कर सकता
  5. शीघ्र डिलीवरी (Quick Delivery) – ई-कॉमर्स उत्पादों और सेवाओं की शीघ्र डिलीवरी प्रदान करता है।
  6. सूचनाओं की उपलब्धता (Availability of Informations) – उपभोक्ता उपयुक्त एवं विस्तृत सूचनाएँ कुछ ही मिनटों में प्राप्त कर सकता है।

 

II व्यवसाय को लाभ (Advantages to Business)

  1. विस्तृत बाजार (Large Market) – ई-कॉमर्स व्यवसाय को एक विस्तृत बाजार प्रदान करता है। व्यवसाय अपने उत्पादों को वैश्विक स्तर पर विक्रय कर सकता है और बड़े पैमाने पर व्यापार का लाभ उठा सकता है
  2. विज्ञापन की कम लागत (Low Cost of Advertisement) – इण्टरनेट पर विज्ञापन प्रिण्ट और टेलीविजन विज्ञापन की तुलना में काफी कम लागत पर हो जाता है।
  3. प्रवेश में कम बाधाएँ (Low barriers for entry) – कोई भी व्यक्ति सरलता से इण्टरनेट पर व्यापार प्रारम्भ कर सकता है। प्रारम्भ करने की लागते भी कम होती हैं क्योंकि ई-कॉमर्स व्यापार में कम पूँजी की आवश्यकता पड़ती है।
  4. रणनीतिक लाभ (Strategic Benefits) – ई-कॉमर्स व्यवसाय का रणनीतिक लाभ यह है कि यह कम डिलीवरी समय, कम श्रम लागत और अन्य लागतों को कम करने में सहायक होता है। इनमें से निम्नलिखित प्रमुख है –

(i) प्रपत्रों को तैयार करना

(ii) त्रुटियों को खोजना और उनको दूर करना

(iii) लेन-देनों का समाधान

(iv) मेल (mail) तैयार करना

(v) टेलीफोन पर बातचीत

(vi) अधिसमय (overtime)

(vii) डाटा एण्ट्री

(viii) पर्यवेक्षण लागत।

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ई-कॉमर्स के दोष / हानियाँ (Disadvantages of E-Commerce)

ई-कॉमर्स के दोष / हानियों को भी दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है –

I. तकनीकी सीमाएँ (Technical Limitations)

  1. सुरक्षा की कमी (Lack of Security) – ई-कॉमर्स पद्धति में सुरक्षा, विश्वसनीयता प्रमाप आदि की कमी रहती है और इसमें कुछ सम्प्रेषण सम्बन्धी बाधाएँ भी रहती हैं।
  2. इण्टरनेट पर निर्भरता (Depends on Internet) – ई-कॉमर्स का सम्पूर्ण कार्य इण्टरनेट पर निर्भर है और इण्टरनेट की अपनी सीमाएँ हैं। इण्टरनेट के प्रभावित होने पर ई-कॉमर्स भी अवश्य प्रभावित हो जाता है।
  3. अधिक एप्लीकेशन की आवश्यकता (More need of Applications) – ई-कॉमर्स व्यवसाय को कुछ मौजूदा एप्लीकेशनस् और डाटाबेस के साथ एकीकृत करने में कठिनाई आती है। विक्रेताओं को विशेष वेब सर्वर की आवश्यकता पड़ सकती है।
  4. असंगत सॉफ्टवेयर (Incompatibility of Softwares) – कुछ ई-कॉमर्स सॉफ्टवेयर कुछ हार्डवेयर के लिए असंगत होते हैं या ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए असंगत हो सकते हैं जिससे ई-कॉमर्स का कार्य बाधित हो जाता है।

 

॥. गैर तकनीकी सीमाएँ (Non-Technical Limitations)

(1) ई-कॉमर्स के लिए सॉफ्टवेयर स्वयं तैयार करने की लागत बहुत अधिक आती है और इसमें समय भी अधिक लगता है।

(2) ई-कॉमर्स में सुरक्षा और निजता की भी गम्भीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

(3) उपभोक्ता अंजान और पहचान रहित विक्रेताओं पर विश्वास नहीं करते हैं। भौतिक व्यापार को ऑनलाइन व्यापार में परिवर्तित करना एक कठिन कार्य होता है।

(4) ई-कॉमर्स व्यवसाय निष्ठावान ग्राहकों के बिना लम्बे समय तक नहीं चल सकता।

(5) उत्पाद सूचनाओं की उपलब्धता, डाटाबेस सूची और व्यवसाय सम्बन्धी अन्य सूचनाएँ ई-कॉमर्स वेबसाइट पर ही उपलब्ध होती हैं इस कारण इसमें प्रतियोगिता (Competition) का अभाव रहता है।

(6) ई-कॉमर्स व्यवसाय में अनेक कानूनी समस्याएँ जैसे सॉफ्टवेयर कॉपीराइट उल्लंघन, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी और व्यावसायिक धोखेबाजी आदि ई-कॉमर्स वातावरण में सम्मिलित रहती हैं।

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ई-कॉमर्स का क्षेत्र (Scope of E-Commerce)

व्यावसायिक क्षेत्र में आज कम्प्यूटर और इण्टरनेट सेवाओं का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। ई-कॉमर्स व्यवसाय आज आम आदमी की पहुँच में आ गया है। ई-कॉमर्स के क्षेत्र में निम्नलिखित तीन क्षेत्रों को शामिल किया जाता है—

  1. इलेक्ट्रॉनिक बाजार (Electronic Market) – इलेक्ट्रॉनिक बाजार वह बाजार है। जहाँ उत्पादों का आदान-प्रदान इलेक्ट्रॉनिक डाटा के माध्यम से किया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक बाजार सूचनाओं के उपयोग और संचार तकनीक का उपयोग करके प्रस्तावों की एक विस्तृत श्रेणी उपलब्ध करता है ताकि ग्राहक उन प्रस्तावों में दिए गए मूल्यों की तुलना कर सकें और क्रय निर्णय ले सकें। उदाहरण के लिए — हवाई यात्रा की बुकिंग
  2. इलेक्ट्रॉनिक डाटा इण्टरचेंज (EDI) – इलेक्ट्रॉनिक डाटा इण्टरचेंज (E.D.I.) का प्रयोग भिन्न-भिन्न स्थानों पर स्थित दो अथवा अधिक प्रयोगकर्ताओं (User) के मध्य प्रयोग किए जा रहे विभिन्न दस्तावेजों (Documents); जैसे–पत्र, बिल्स, किसी दस्तावेज की प्राप्ति की सूचना अथवा अन्य रिपोर्टस को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम द्वारा एक-दूसरे तक पहुँचाना है। इस प्रकार, EDI का मुख्य कार्य कागज का स्थान लेना नहीं है, अपितु उसको दोबारा बनाने में व्यय होने वाले समय की बचत करना है। यह डाटा एक्सचेंज की नवीन पद्धति है। इसके अन्तर्गत डाटा एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर को सीधे ही भेज दिया जाता है।

आजकल EDI का प्रयोग मुद्रा सम्बन्धी दस्तावेजों के आदान-प्रदान में बड़े स्तर पर किया जा रहा है। इसको हम इलेक्ट्रॉनिक फण्ड ट्रांसफर (Electronic Fund Transfer : EFT) के नाम से भी जानते हैं।

  1. इण्टरनेट वाणिज्य (Internet Commerce) – इण्टरनेट वाणिज्य से आशय वैश्विक इण्टरनेट का उत्पादों, सेवाओं का क्रय-विक्रय और विक्रय पश्चात् सेवाओं का प्राप्त करने हेतु किया जाने वाला उपयोग है। इण्टरनेट वाणिज्य कुछ नयी तकनीकें और व्यवसाय को नयी क्षमताएँ प्रदान करता है। सूचना एवं संचार तकनीकों का प्रयोग करके विज्ञापन किया जा सकता है और बड़ी मात्रा में उत्पादों और सेवाओं का विक्रय किया जा सकता है। इस प्रकार ई-कॉमर्स इण्टरनेट का व्यावसायिक प्रयोग करके व्यवसाय में वृद्धि करता है।

इण्टरनेट का प्रयोग पुस्तकों को क्रय करने हेतु भी किया जा सकता है। ऐसी पुस्तकें डाक द्वारा सुपुर्द की जाती हैं।

पर्यटन उद्योग में भी इण्टरनेट का प्रयोग, उपयोग करके टिकटों की बुकिंग, होटल बुकिंग, ट्रैवल एजेण्टों की जानकारी आदि उपलब्ध रहती है।

इण्टरनेट का प्रयोग आज संगीत के क्षेत्र में भी पहुँच गया है। ऑनलाइन होने वाली संगीत एवं फिल्म प्रदर्शन की टिकटों की बिक्री भी सम्भव हो गयी है।

 

ई-कॉमर्स के अनुप्रयोग (Application of E-Commerce)

ई-कॉमर्स का प्रयोग निम्नलिखित मुख्य व्यावसायिक क्षेत्रों में विस्तृत रूप से हो रहा है —

(1) उत्पादों के क्रय और विक्रय में

(2) रियल एस्टेट बाजार

(3) ऑनलाइन बैंकिंग

(4) माल की सुपुर्दगी

(5) आयात और निर्यात

(6) आपूर्ति श्रृंखला प्रबन्ध

(7) इण्टरनेट पर फुटकर में उत्पाद की उपभोक्ताओं को बिक्री।

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ई-कॉमर्स का ढाँचा (Framework of E-Commerce)

ई-कॉमर्स ढाँचा में निम्नलिखित तत्त्व शामिल हैं –

  1. सूचना राजपथ (Information Superhighway (I – way)) – सूचना राजपथ, सूचनाओं और सामग्री को हस्तान्तरित करने का आधार है। यह सूचनाओं का सम्मिश्रण और वितरण माध्यम उपलब्ध करता है जो विभिन्न व्यावसायिक संगठनों को एक साथ लाता है। यह इस बात का द्योतक है कि बड़ी मात्रा में वाणिज्यिक गतिविधियाँ इण्टरनेट के द्वारा की जा रही हैं।

एक सफल ई-कॉमर्स एप्लीकेशन को I-way के आधारिक संरचना की आवश्यकता उसी प्रकार पड़ती है जिस प्रकार सामान्य व्यवसाय को एक स्थान से दूसरे स्थान तक माल ले जाने के लिए अन्तर्राज्यीय राजमार्ग की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रकार I way को अनेकों कम्प्यूटर्स, संचार तन्त्र और संचार सॉफ्टवेयर की आवश्यकता पड़ती है।

 

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Framework of E-Commerce

  1. मल्टीमीडिया तत्त्व और नेटवर्क पब्लिशिंग – इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली जिसके द्वारा सामग्री का हस्तान्तरण किया जाता है वो गैर-इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली के अनुरूप है। इसमें विभिन्न प्रकार के उत्पाद वितरण केन्द्रों पर रखे जाते हैं और बाद में उनका वितरण होता है। वर्तमान नेटवर्क पब्लिशिंग का सबसे प्रचलित स्वरूप www है। यह छोटे व्यापारों और व्यक्तियों को विभिन्न तत्वों को HTML प्रारूप में विकसित करने की सुविधा देते हैं। संक्षेप में वेबसाइट एक वितरण केन्द्र में उत्पाद सूचनाएँ तैयार और पब्लिश करने का एक साधन है।
  2. सन्देश एवं सूचना वितरण (Messaging and Information Distribution) – सूचना वितरण और सन्देश प्रणाली इण्टरनेट द्वारा नेटवर्क पर उपलब्ध रहती है। यह कार्य सॉफ्टवेयर द्वारा पूर्ण होता है।
  3. सामान्य व्यावसायिक क्रियाएँ (Normal Business Services) – सामान्य व्यावसायिक क्रियाओं का उपयोग क्रय और विक्रय प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए किया जाता है। ई-कॉमर्स एप्लीकेशन सूचना स्रोतों को ऑनलाइन उपलब्ध कराता है और लेन-देनों को सुगम करता है।

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आपूर्ति श्रृंखला प्रबन्ध (Supply Chain Management)

आपूर्ति श्रृंखला में वे सभी गतिविधियाँ आती हैं जो कच्चे माल प्रवाह और परिवर्तन से प्रारम्भ होकर अन्तिम उपभोक्ता तक पहुँचने के दौरान की जाती हैं। आपूर्ति श्रृंखला प्रबन्ध बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन का एक प्रभावी और शक्तिशाली तरीका है जो सही समय पर सही कीमत पर सही उत्पाद सही स्थान पर पहुँचाता है। यह खर्च में कमी करके लाभ में वृद्धि करने की महत्वपूर्ण नीतियों में से एक है। जब एक आपूर्ति श्रृंखला इलेक्ट्रॉनिक रूप से चलाई जाती है, सामान्यतः वेब तकनीकी द्वारा, तब इसे e-supply श्रृंखला के नाम से जाना जाता है।

आपूर्ति श्रृंखला प्रबन्ध (SCM) एक संगठन में इसके आपूर्तिकर्ता और ग्राहकों को उत्पादों की आपूर्ति के सम्बन्ध में किए जाने वाली समस्त आपूर्ति गतिविधियों में समन्वय स्थापित करता है।

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आपूर्ति श्रृंखला के लाभ (Benefits of Supply Chain)

(1) इण्टरनेट पर आदेश प्राप्त करना

(2) आदेश की पूर्ति करना

(3) ऑनलाइन भुगतान प्राप्त करना

(4) जोखिम को कम करना

(5) स्टॉक स्तर को न्यूनतम करना।

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ई-कॉमर्स और ई-व्यवसाय (E-Commerce and E-Business)

ई-कॉमर्स एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उत्पादों एवं सेवाओं का इण्टरनेट द्वारा क्रय, विक्रय, लेन-देन, आदेश और भुगतान किया जाता है। इस प्रकार के ऑनलाइन व्यावसायिक लेन-देनों में विक्रेता क्रेता के साथ आमने-सामने बातचीत न करके ऑनलाइन बातचीत करता है।

ई-व्यवसाय (E-Business) ऑनलाइन किया जाने वाला व्यवसाय है। यह इण्टरनेट की मदद से चलाया जाता है। ई-कॉमर्स, ई-व्यवसाय का एक महत्वपूर्ण अवयव है।

ई-कॉमर्स और ई-व्यवसाय में निम्नलिखित अन्तर हैं –

(1) वस्तुओं और सेवाओं का इण्टरनेट के द्वारा क्रय – विक्रय ई-कॉमर्स कहलाता है। जबकि ई-बिजनेस व्यवसाय की इलेक्ट्रॉनिक रूप से उपस्थिति होती है जिससे इण्टरनेट द्वारा सभी व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं।

(2) ई-कॉमर्स ई-बिजनेस का एक महत्वपूर्ण भाग है।

(3) ई-कॉमर्स में मौद्रिक लेन-देन शामिल होते हैं लेकिन ई-व्यवसाय में मौद्रिक एवं अन्य सम्बन्धित गतिविधियाँ शामिल होती हैं।

(4) ई-कॉमर्स के लिए एक वेबसाइट की आवश्यकता होती है जो व्यवसाय को प्रस्तुत करती है जबकि ई-बिजनेस में एक वेबसाइट, ग्राहक सम्बन्धों का प्रबन्ध, और संगठन में संसाधन का नियोजन आवश्यक होता है ताकि व्यवसाय इण्टरनेट पर चलाया जा सके। (5) ई-कॉमर्स सम्पूर्ण विश्व से जुड़ने के लिए इण्टरनेट का उपयोग करता है जबकि ई-बिजनेस के लिए इण्टरनेट, इंट्रानेट और एक्स्ट्रानेट का प्रयोग किया जाता है।

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