Bcom 1st Year Business Low Promissory-Note and Bills of Exchange

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प्रतिज्ञा-पत्र एवं विनिमय-विपत्र (Promissory-Note and Bills of Exchange)

 

प्रश्न 37. प्रतिज्ञा-पत्र, विनिमय-विपत्र तथा चैक को परिभाषित करते हुये इनके बीच अन्तर स्पष्ट कीजिये।

उत्तर-

विनिमय-विपत्र (Bills of Exchange)

परिभाषा- विनिमय साध्य विलेख अधिनियम की धारा 5 के अनुसार, (“विनिमय-विपत्र एक शर्त रहित आज्ञा-पत्र है जिसमें लिखने वाले के हस्ताक्षर होते हैं तथा लेखक, विलेख में वर्णित निश्चित धनराशि किसी निश्चित व्यक्ति को अथवा उसके द्वारा

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आदेशित व्यक्ति को अथवा लेख-पत्र के वाहक को भुगतान करने का आदेश देता है।”

रिजर्व बैंक या सरकार को छोड़कर कोई भी व्यक्ति ऐसा विनिमय-पत्र नहीं लिख सकता जो वाहक की माँग पर देय हो।

विनिमयविपत्र का नमूना

विनिमयविपत्र के लक्षण (Characteristics of Bills of Exchange)- उपर्युक्त परिभाषा के आधार पर विनिमय-विपत्र में पाये जाने वाले लक्षण इस प्रकार हैं-1. यह लिखित होना चाहिये। 2. विनिमय-विपत्र में एक निश्चित धनराशि के भुगतान करने का आदेश होता है। १ यह शर्त रहित आदेश होता है। 4. विनिमय-विपत्र पर लेखक के हस्ताक्षर होना आवश्यक है। 5. इसका भुगतान निश्चित अवधि के बाद होता है। 6. इस पर नियमानुसार स्टाम्प भी लगाया जाता है। 7. इसका भुगतान निश्चित व्यक्ति को या उसके द्वारा आदेशित व्यक्ति को या लेखपत्र के वाहक को किया जाता है।

विनिमयविपत्र के पक्षकार (Parties to B/E)- विनिमय-विपत्र में निम्नलिखित तीन पक्षकार होते हैं-

1, लेखक या आहर्ता (Drawer)- वह व्यक्ति जो विनिमय-विपत्र को लिखता है, ‘. लेखक या आहर्ता कहलाता है। यह भुगतान का आदेश देता है।

2, आहारीं या स्वीकर्ता (Drawee or Acceptor)- वह व्यक्ति जिस पर विनिमय-पत्र लिखा जाता है अर्थात् जिसे भुगतान करने की आज्ञा दी जाती है, आहार्या कहलाता है। जब यह स्वीकति दे देता है तो इसे ‘स्वीकर्ता’ कह देते हैं।

3, भुगतान प्राप्तकर्ता या आदाता (Payee)- वह व्यक्ति जो विनिमय-विपत्र का भुगतान प्राप्त करता है। _ कभी-कभी लेखक और भुगतान प्राप्तकर्ता एक ही व्यक्ति होता है। ऐसी दशा में एक ही व्यक्ति दो पक्षकारों की स्थिति में होता है।

प्रतिज्ञापत्र (Promissory-Note)

परिभाषा (Definition)- विनिमय-साध्य विलेख अधिनियम की धारा 4 के अनुसार, “प्रतिज्ञा-पत्र एक लिखित विलेख है जिस पर लिखने वाले के हस्ताक्षर होते हैं तथा लेखक उसमें वर्णित किसी व्यक्ति अथवा उसके आदेशानुसार अथवा वाहक को शर्त रहित विलेख में अंकित राशि देने की प्रतिज्ञा करता है।”

यह ध्यान रखने योग्य है कि रिजर्व बैंक तथा केन्द्रीय सरकार के अतिरिक्त कोई भी संस्था या व्यक्ति ऐसा प्रतिज्ञा-पत्र नहीं लिख सकता जो वाहक की मांग पर देय हो।

प्रतिज्ञापत्र के लक्षण या विशेषताएँ (Characteristics of P/N) उपर्युक्त परिभाषा के आधार पर प्रतिज्ञापत्र में इन लक्षणों का होना अनिवार्य है-1. यह लिखित होना चाहिये। 2. लेखक द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिये। 3. यह देनदार (ऋणी) द्वारा लिखा जाता है। 4. इसमें भुगतान करने की प्रतिज्ञा की जाती है। 5. भुगतान की प्रतिज्ञा शर्त रहित होनी चाहिये। 6. इसमें धनराशि का निश्चित होना आवश्यक है। 7. भुगतान की अवधि निश्चित होती है। 8. भुगतान देश की मुद्रा में होना चाहिये। 9. रक़म के अनुसार मुद्रांक (Stamp) का लगाया जाना अनिवार्य है। 10. भुगतान एक निश्चित व्यक्ति को या उसके आदेशित व्यक्ति को दिया जाता है।

प्रतिज्ञापत्र का नमूना

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प्रतिज्ञापत्र के पक्षकार (Parties of Promissory-Note)- प्रतिज्ञा-पत्र में दो पक्षकार होते हैं-

(i) लेखक अथवा आहर्ता (Drawer)- जो प्रतिज्ञा-पत्र को लिखता है, यह व्यनि ऋणी या देनदार होता है जो भुगतान करने की प्रतिज्ञा करता है।

(ii) आदाता या भुगतान पाने वाला (Payee)- जिसे प्रतिज्ञा-पत्र की रकम का भुगतान प्राप्त करना होता है।

 

विनिमय विपत्र, चैक एवं प्रतिज्ञापत्रं में अन्तर आधार

 

आधारविनिमय विपत्रचैकप्रतिज्ञा-पत्र
1. पक्षकारइसमें तिन पक्षकार होते है – लेखक, स्वीकर्ता एवं आदाता (देनदार) |इसमें भी तीन पक्षकार होते है-इसमें दो पक्षकार होते है – लिखने वाला एवं भुगतान पाने वाला |
2. लेखकइसमें लेखर राशि प्राप्त करने वाला व्यक्ति होता है |इसमें लेखक देनदार होता हैइसमें भी लेखक देनदार होता है |
3. स्वीकृतिइसमें देनदार से स्वीकृति कराना आवश्यक होता है |इसमें स्वीकृति क आवश्यकता नही होती है |इसमें भी स्वीकृति की आवश्यकता नही होती है
4. प्रकृतिइसमें भुगतान का आदेश होता है |इसमें भी भुगतान का आदेश होता है |इसमें भूटान करने की प्रतिज्ञा होती है |
5. अवधियहाँ देखने या अवधि समाप्त होने पर देय होता है |यहाँ हमेशा माँग पर देय होता है |यहाँ माँग आर या अवधि समाप्त होने पर देय होता है |
6. स्टाँम्पइसमें स्टाम्प लगाया जाता है |इसमें स्टाम्प की कोई आवश्यकता नही होती |इसमें भी स्टाम्प लगाना आवश्यक होता है |
7. रेखांकनइसमें रेखांकन नही होता है |इसमें रेखांकन किया जा सकता हैइसमें रेखांकन नही होता है
8. अनुग्रह दिनइसमें तीन दिन अनुग्रह के दिए जाते है |इसमें अनुग्रह दिन का प्रश्न ही नही उठता है |इसमें भी तीन दिन का अनुग्रह दिया जाता है |
9. लेखक की मृत्यु का प्रभावलेखक की मृत्यु का कोई प्रभाव नही पड़ता है |लेखक की मृत्यु होने पर बैंक भुगतान रोक देता है |मृत्यु का कोई प्रभाव नही पड़ता है |
10. अनादरणअनादरण की दशा एन धारक को अन्य दायी पक्षकारों को सुचना देना आवश्यक हैइसमें अनादरण की सुचना देना आवश्यक नहीं है |इसमें सुचना देने का प्रश्न ही नही उठता है |
11. नोटिंग एवं प्रोटेस्टिंगअनादरण हो जाने पर नोटिंग एवं प्रोटेस्टिंग आवश्यक हो जाता है |इसमें इन्सकी कोई आवश्यकता नही होती है |इस्मने भी सिंकी आवश्यकता नही होती है |

 


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