Unit 4 Registrations & Assessment Procedures Registration Mcom Notes

Unit 4 Registrations & Assessment Procedures Registration Mcom Notes

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Unit 4 Registrations & Assessment Procedures Registration Mcom Notes

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वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत पंजीकरण से क्या आशय है? इसके लाभ एवं पंजीकरण के प्रकार बताइए। What do you mean by registration under GST? Explain its advantages and its kinds,

वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत कर व्यवस्था को पारदर्शी बनाने एवं सुचारु रूप से चलाने के लिए पंजीकरण व्यवस्था को प्रभावी बनाया गया है। कर वसूली को बढ़ाने तथा दोहरे कर से बचाव के लिए इसके अन्तर्गत व्यापारी को एक यूनिक नम्बर दिया जाता है। व्यापारी अपना पंजीकरण व्यापार वाले राज्य में ही कराता है तथा यह PAN आधारित पंजीकरण होता है जिसमें व्यापारी को 15 अंकों की एक संख्या GSTIN (Goods and Service Tax Identification Number) दी जाती है जो व्यापारी के पंजीकरण का प्रमाण होता है।

पंजीयन से लाभ (Benefit of Registration)

वस्तु एवं सेवा कर के अधीन पंजीयन से निम्नलिखित लाभ हैं –

(1) व्यवसाय को मान्यता मिल जाती है क्योंकि व्यवसाय एक अधिनियम के अधीन पंजीकृत हो जाता है।

(2) पंजीकृत व्यापारी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी ऑनलाइन बिजनेस के लिए अधिकृत हो जाता है। इस प्रकार व्यवसाय का क्षेत्र बढ़ता है।

(3) प्रतियोगिता के क्षेत्र में गैर पंजीकृत व्यवसायों की अपेक्षा पंजीकृत व्यवसायों की प्रतिस्पर्द्धा क्षमता बढ़ जाती है, क्योंकि पंजीकृत व्यवसाय के पास एक वैध पंजीयन प्रमाण-पत्र होता है तथा इनपुट टैक्स क्रेडिट भी पंजीकृत व्यापारियों को ही मिलता है।

(4) सरकारी टेण्डर्स में भाग लेने के लिए अधिकृत हो जाते हैं क्योंकि अधिकांश सरकारी टेण्डरों में GSTIN की माँग की जाती है और GSTIN केवल पंजीकृत व्यापारी के पास ही होता है।

(5) बिना किसी प्रतिबन्ध के GST में पंजीकृत व्यापारी सम्पूर्ण भारत में कहीं पर भी, कहीं से भी और किसी से भी व्यापार को करने के लिए अधिकृत हो जाता है।

(6) GSTIN के आधार पर व्यवसायी अपने व्यवसाय के लिए बैंक में चालू खाता (Current Account) खोल सकते हैं क्योंकि GSTIN एक वैध और राजकीय प्रमाण-पत्र होता है जो व्यवसायी के व्यवसाय के अस्तित्व को प्रमाणित करता है।

(7) व्यवसायी अपने व्यवसाय को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों (Multinational companies) के साथ जोड़ सकते हैं, क्योंकि इस प्रकार की कम्पनियाँ केवल कर व्यवस्था में पंजीकृत व्यवसायों के साथ ही लेन-देन करती हैं।

 

पंजीकरण के प्रकार (Types of Registration)

वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत पंजीकरण निम्न प्रकार से किए जा सकते हैं –

I, अनिवार्य पंजीकरण (Mandatory Registration)

A, आधार सीमा वाला पंजीकरण (Registration with Threshold Limit)

प्रत्येक आपूर्तिकर्ता को उस राज्य या संघ शासित प्रदेश में वस्तु एवं सेवा कर के अधीन पंजीकरण कराना अनिवार्य है जहाँ से वह माल या सेवाओं की आपूर्ति करता है बशर्ते उसका किसी वित्तीय वर्ष में सकल आवर्त (Gross Turnover) ₹20 लाख से अधिक हो। लेकिन यदि कोई आपूर्तिकर्ता निम्नलिखित प्रदेशों में से किसी प्रदेश से माल एवं सेवाओं की आपूर्ति करता है तो सकल वार्षिक आवर्त की सीमा ₹ 20 लाख के स्थान पर ₹ 10 लाख होगी। ये राज निम्नवत् है –

(1) अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh)

(2) मणिपुर (Manipur)

(3) मेघालय (Meghalaya)

(4) मिजोरम (Mizoram)

(5) नागालैण्ड (Nagaland)

(6) सिक्किम (Sikkim)

(7) त्रिपुरा (Tripura)

(8) तेलंगाना (Talangana)

(9) उत्तराखण्ड (Uttarakhand)

(10) पुडुचेरी (Puducherry)

[धारा 22 (1) के अनुसार]

 

B, बिना आधार सीमा वाला पंजीकरण (Registration without Threshold Limit)

निम्नलिखित व्यक्तियों, व्यापारियों या व्यापारिक संस्थानों को अनिवार्य रूप से वस्तु एवं सेवा कर के अधीन पंजीकरण प्राप्त करना होगा, भले ही उनका वार्षिक टर्नओवर आधार सीमा से कम हो। यह निम्नवत् है—

(1) एजेण्ट

(2) प्रत्येक ई-कॉमर्स ऑपरेटर।

(3) अन्तर्राज्यीय कर योग्य आपूर्तिकर्ता।

(4) कर योग्य आपूर्तियों के अनिवासी करदाता

(5) धारा 51 के अन्तर्गत स्रोत पर कर की कटौती (TDS) करने वाले व्यक्ति

(6) इनपुट सेवा वितरक (ISD) |

(7) कर योग्य आपूर्तियों वाले आकस्मिक करदाता।

(8) ऐसे करदाता, जो प्रतिलोमी प्रभाव (Reverse Charge) के अधीन कर देने के लिए उत्तरदायी हैं।

(9) ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर माल एवं सेवाओं की आपूर्ति करने वाले व्यक्ति।

(10) वस्तु एवं सेवा कर लागू होने की तिथि (1 जुलाई, 2017) से पूर्व किसी अन्य अधिनियम, जैसे- VAT, CST, Service Tax आदि के अधीन पंजीकृत व्यक्ति।

(11) ऑनलाइन इन्फॉरमेशन एण्ड डाटाबेस एक्सेज या रिट्रीवल सेवा प्रदाता, जो भारत के बाहर से भारत में गैर-पंजीकृत व्यक्ति को सेवाएं दे रहे हैं।

(12) केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित व्यक्ति।

– उपर्युक्त 1 से 12 तक धारा 24 के अनुसार

(13) यदि कोई पंजीकृत व्यक्ति अपने व्यवसाय को चालू हालत में किसी अन्य व्यक्ति को, भले ही वह उत्तराधिकार के कारण हो या अन्य किसी कारण से, हस्तान्तरित करता है जो हस्तान्तरण प्राप्तकर्ता का यह दायित्व हो जाता है कि वह उस तिथि से जिस दिन से यह हस्तान्तरण प्रभावी हुआ है, अनिवार्य रूप से वस्तु एवं सेवा कर के अधीन पंजीकरण कराए।

– (धारा 22 (3) के अनुसार

(14) यदि उच्च न्यायालय या ट्रिब्यूनल के आदेश के अधीन संस्थाओं का संविलयन, विघटन या पुनर्गठन होता है तो कम्पनी रजिस्ट्रार, नई कम्पनी के लिए जिस दिन निगमन का प्रमाण पत्र जारी करेगा उस तिथि से इस संस्थान का वस्तु एवं सेवा कर के अधीन पंजीयन आवश्यक होगा।

[धारा 22 (4) के अनुसार)

(15) एक एग्रीगेटर जो अपने ब्राण्ड एवं ट्रेड नाम से सेवाओं की आपूर्ति करता है; जैसे-उबेर, ओला आदि कम्पनियाँ।

 

C, जिनके लिए पंजीयन अनिवार्य नहीं है (Who does not need Registration)

(1) ऐसे व्यक्ति, जो गैर कर योग्य वस्तुओं या पूर्णरूप से कर मुक्त वस्तुओं या सेवाओं का व्यापार कर रह हैं, उन्हें पंजीकरण लेने की आवश्यकता नहीं है।

(2) ऐसा कृषक जो खेती करता हो तथा भूमि से उत्पन्न माल की आपूर्ति करता हो उसे GST में पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। (3) सरकार द्वारा सरकारी गजट के माध्यम से GST में पंजीयन के लिए विमुक्त घोषित व्यक्तियों या संस्थानों को पंजीयन की आवश्यकता नहीं होगी।

 

II, ऐच्छिक पंजीकरण (Voluntary Registration)

जो व्यक्ति अनिवार्य पंजीकरण के दायरे में नहीं आते हैं अर्थात् धारा 22 एवं 24 के अधीन पंजीकरण के लिए उत्तरदायी नहीं हैं, यदि वे चाहें तो ऐच्छिक रूप से स्वयं को GST के अधीन पंजीकृत करा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति ऐच्छिक पंजीकरण कराता तो ऐसे व्यक्ति पर GST विधान के सभी प्रावधान उसी प्रकार से प्रभावी होंगे जैसे कि अनिवार्य पंजीकरण पर लागू होते हैं।

– [धारा 25 (3) के अनुसार)

III, विभाग द्वारा पंजीकरण अर्थात् स्वयं प्रेरित पंजीकरण (Registration by Department or SUO-Motu Registration)

(1) यदि किसी सर्वे, पूछताछ, निरीक्षण या खोज के दौरान समुचित विभागीय प्राधिकारी यह पाता है कि यह व्यक्ति पंजीयन के लिए उत्तरदायी और पात्र था, लेकिन यह पंजीकरण के लिए आवेदन करने में असफल रहा है तो वह अधिकारी स्वयं प्रेरित होकर अर्थात् इस तथ्य को संज्ञान में लेकर उस व्यक्ति के पक्ष में अस्थायी आधार पर (Temporary basis) पंजीकरण जारी कर सकता है। पंजीकरण का यह आदेश GST REG-12 पर जारी किया जाएगा।

[नियम 16(1) के अनुसार]

(2) अस्थायी आधार पर जारी यह पंजीकरण उस तिथि से प्रभावी होगा जिस तिथि को –नियम 16(2) के अनुसार) यह जारी किया गया है।

(3) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जिसके पक्ष में अस्थायी आधार पर पंजीकरण जारी किया गया है वह जारी होने की तिथि से 90 दिन के अन्दर पंजीयन का निर्धारित आवेदन पत्र प्रस्तुत करेगा, लेकिन यदि ऐसे व्यक्ति ने अस्थायी आधार पर पंजीकरण के विरुद्ध अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील की है तो 90 दिन की अवधि लागू नहीं होगी और अपीलीय प्राधिकारी ने पंजीकरण के लिए उत्तरदायी माना है तो अपीलीय प्राधिकारी के निर्णय की तिथि से 30 दिन के अन्दर पंजीयन के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत करना होगा।

[नियम 16(3) के अनुसार]

(4) सामान्य रूप से पंजीयन के सम्बन्ध में लागू होने वाले सत्यापन एवं निर्गमन सम्बन् नियम यथा स्थिति इस आवेदन पत्र पर भी लागू होंगे।

(5) पंजीयन की स्वीकृति आदेश की तिथि से GSTIN प्रभावी हो जाएगा।

 

IV, माना गया पंजीयन (Deemed Registration)

इस सम्बन्ध में निम्नलिखित प्रावधान है –

[नियम 16 (5) के अनुसार]

(1) यदि कोई रजिस्ट्रेशन या यूनिक आईडेण्टिटी नम्बर (Unique ID) किसी राज् वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम (SGST Act) या संघ शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम (UTGST के अधीन स्वीकृत या जारी किया गया है, तो उस पंजीयन यूनिक आइडेण्टिटी नम्बर को केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम (CGST Act) के अधीन भी जारी किया हुआ माना जाएगा।

 

पंजीकरण सम्बन्धी निर्धारित फॉर्म (Forms relating to Registration)

 

क्र०सं० फार्म नम्बर विवरण
1. GST REG – 01 पंजीकरण का आवेदन-पत्र

(Application for Registration)

2. GST REG – 02 पावती-पत्र

(Acknowledgement)

3. GST REG – 03 अतिरिक्त सूचनाओं के लिए नोटिस

(Notice for seeking additional information/clarification/documents relating to application for registration/amendment/cancellation)

4. GST REG – 04 स्पष्टीकरण / अतिरिक्त सूचना/प्रपत्र

(Clarification/additional information/document for registration/amendment/cancellation)

 

5. GST REG – 05 आवेदन पत्र निरस्त करने का आदेश

(Order of rejection of application lamendment/cancellation)

6. GST REG – 06 पंजीकरण प्रमाण-पत्र

(Registration Certificate)

7. GST REG – 07 TDS या TCS के अन्तर्गत पंजीकरण का आवेदन-पत्र

(Application of registration as tax deductor at source (U/S 51) or tax collector at source (U/S 52)

8. GST REG – 08 TDS या TCS का पंजीकरणनिरस्त करने का आदेश

(Order of cancellation of registration as tax deductor at source or tax collector at source)

9. GST REG – 09 कर-योग्य अनिवासी व्यक्ति के लिए पंजीकरण का आवेदन-पत्र

(Application for registration of non-resident taxable person)

10. GST REG – 10 OIDAR के रजिस्ट्रेशन का आवेदन-पत्र

(Online information and data base access or retrieval services from outside India to a person in India other than a registered person),

11. GST REG – 11 आकस्मिक एवं अनिवासी करदाताओं द्वारा पंजीकरण को आगे बढ़ाने का आवेदन-पत्र

(Application for extension of registration period by casual/non-resident taxable person)

12. GST REG – 12 अस्थायी पंजीकरण का आदेश

(Order of grant of temporary registration/Suo-Moto registration)

13. GST REG – 13 UIN का आवेदन – पत्र

(Application/form for grant of unique identity number to UN bodies/embassies/others)

14. GST REG – 14 पंजीकरण में संशोधन का आवेदन पत्र

(Application for amendment in registration particulars)

15. GST REG – 15 संशोधन का आदेश

(Order of amendment)

16. GST REG – 16 पंजीकरण निरस्त करने का आवेदन पत्र (Application for cancellation of registration)
17. GST REG – 17 पंजीकरण निरस्त करने का कारण बताओ नोटिस

(Show cause notice for cancellation of registration)

18. GST REG – 18 कारण बताओ नोटिस का उत्तर

(Reply to the show cause notice issued for cancellation of registration)

19. GST REG – 19 पंजीकरण निरस्तीकरण का आदेश

(Order for cancellation of registration)

20. GST REG – 20 पंजीकरण निरस्तीकरण की कार्यवाही को रोकने का आदेश

(Order for dropping the proceedings for cancellation of registration)

21. GST REG – 21 पंजीकरण निरस्तीकरण की वापसी का आवेदन पत्र

(Application for revocation of cancellation of registration)

22. GST REG – 22 पंजीकरण निरस्तीकरण की वापसी का आदेश

(Order for revocation of cancellation registration)

23. GST REG – 23 पंजीकरण निरस्तीकरण की वापसी के आवेदन पत्र को निरस्त करने का कारण बताओ नोटिस (Show cause notice for rejection of application revocation of cancellation of registration)
24. GST REG – 24 कारण बताओ नोटिस का उत्तर

(Reply to the notice for rejection of application for revocation of registration)

25. GST REG – 25 अस्थायी पंजीकरण का प्रमाण-पत्र

(Certificate of provisional registration)

26. GST REG – 26 विद्यमान करदाता के नामांकन के लिए आवेदन पत्र

(Application for enrolment of existing tax payer)

27. GST REG – 27 अस्थायी पंजीकरण निरस्त करने का कारण बताओ नोटिस

(Show cause notice for cancellation of provisional registration)

28. GST REG – 28 अस्थायी पंजीकरण निरस्त करने का आदेश

(Order of cancellation of provisional registration)

29. GST REG – 29 प्रवासी करदाता का पंजीकरण निरस्त करने का आवेदन-पत्र

(Application for cancellation of registration of migrated tax payers)

30. GST REG – 30 क्षेत्र भ्रमण की रिपोर्ट का फॉर्म

(Form for field visit report)

 

पंजीयन (Registration)

Registration

अनिवार्य पंजीयन Mandatory Registration

(A) आधार सीमा वाला पंजीकरण (Registration with Threshold Limit)

प्रत्येक आपूर्तिकर्ता को उस राज्य या संघ शासित प्रदेश में वस्तु एवं सेवा कर के अधीन पंजीकरण कराना अनिवार्य है जहाँ से वह माल या सेवाओं की आपूर्ति करता है, बशर्ते उसका किसी वित्तीय वर्ष में सकल आवर्त (Gross Turnover) ₹20 लाख अधिक हो। लेकिन यदि कोई आपूर्तिकर्ता निम्नलिखित प्रदेशों में से किसी प्रदेश से माल एवं सेवाओं की पूर्ति करता है तो सकल वार्षिक आवर्त की सीमा ₹20 लाख के स्थान पर ₹ 10 लाख होगी। ये राज्य निम्न प्रकार हैं –

(1) मेघालय (Meghalaya)

(2) नागालैण्ड (Nagaland)

(3) त्रिपुरा (Tripura)

(4) उत्तराखण्ड (Uttarakhand)

(5) मणिपुर (Manipur)

(6) मिजोरम (Mizoram)

(7) सिक्किम (Sikkim)

(8) तेलंगाना (Talangana)

(9) पुडुचेरी (Puducherry)

(10) अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh)

उदाहरण (Example) –

(1) मैo XYZ Ltd, के व्यावसायिक स्थल नागालैण्ड, राजस्थान और हरियाणा में हैं, जहाँ से वे माल की पूर्ति करते हैं। उनकी तीनों स्थानों की कुल वार्षिक बिक्री ₹8 लाख है। ऐस स्थिति में ‘XYZ’ Ltd, को वस्तु एवं सेवा कर के अधीन रजिस्ट्रेशन करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उनका सम्पूर्ण भारत में वार्षिक टर्नओवर आधार सीमा अत् ₹20 लाख में कम है।

(2) उपर्युक्त उदाहरण में यदि ‘XYZ’ Ltd, का वार्षिक टर्नओवर ₹ 11 लाख हो जाए तो उन्हें केवल नागालैण्ड में पंजीयन कराना आवश्यक होगा, हरियाणा और राजस्थान में नहीं। (3) उपर्युक्त उदाहरण में यदि ‘XYZ’ Ltd, का वार्षिक टर्नओवर ₹ 26 लाख हो जाए, तो उन्हें तीनों राज्यों अर्थात् नागालैण्ड, राजस्थान और हरियाणा में अलग-अलग पंजीकरण कराना होगा।

(B) बिना आधार सीमा वाला पंजीकरण (Registration without Threshold Limit)

निम्नलिखित व्यक्तियों, व्यापारियों या व्यापारिक संस्थानों को अनिवार्य रूप से वस्तु एवं सेवा कर के अधीन पंजीकरण प्राप्त करना होगा, भले ही उनका वार्षिक टर्नओवर आधार सीमा से कम हो। ये निम्न प्रकार हैं|

(1) अन्तर्राज्यीय कर योग्य आपूर्तिकर्ता । (2) कर योग्य आपूर्तियों वाले आकस्मिक करदाता।

(3) ऐसे करदाता, जो प्रतिलोमी प्रभाव (Reverse charge) के अधीन कर देने के लिए उत्तरदायी हैं।

(4) कर योग्य पूर्तियों के अनिवासी करदाता।

(5) धारा 51 के अन्तर्गत स्रोत पर कर की कटौती (TDS) करने वाले व्यक्ति।

(6) इनपुट सेवा वितरक (ISD) | (7) प्रत्येक ई-कॉमर्स आपरेटर।

(8) ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर माल एवं सेवाओं की अपूर्ति करने वाले व्यक्ति।

(9) एजेण्ट

(10) वस्तु एवं सेवा कर लागू होने की तिथि (1 जुलाई, 2017) से पूर्व किसी अन्य अधिनियम, जैसे VAT, CST Service Tax आदि के अधीन पंजीकृत व्यक्ति।

(11) ऑनलाइन इन्फॉरमेशन एण्ड डाटाबेस एक्सेज या रिट्रीवल सेवा प्रदाता, जो भारत के बाहर से भारत में गैर-पंजीकृत व्यक्ति को सेवाएं दे रहे हैं।

(12) केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित व्यक्ति।

(13) यदि कोई पंजीकृत व्यक्ति अपने व्यवसाय को चालू हालत में किसी अन्य व्यक्ति को, भले ही वह उत्तराधिकार के कारण हो या अन्य किसी कारण से, हस्तान्तरित करता है तो हस्तान्तरण प्राप्तकर्त्ता का यह दायित्त्व हो जाता है कि वह उस तिथि से जिस दिन से यह हस्तान्तरण प्रभावी हुआ है, अनिवार्य रूप से वस्तु एवं सेवा कर के अधीन पंजीकरण कराये।

(14) यदि उच्च न्यायालय या ट्रिब्यूनल के आदेश के अधीन संस्थाओं का संविलयन, विघटन या पुनर्गठन होता है तो कम्पनी रजिस्ट्रार, नई कम्पनी के लिए जिस दिन निगमन का प्रमाण पत्र जारी करेगा उस तिथि से इस संस्थान का वस्तु एवं सेवाकर के अधीन पंजीयन आवश्यक होगा।

(15) एक एग्रीगेटर जो अपने ब्राण्ड एवं ट्रेड नाम से सेवाओं की आपूर्ति करता है; जैसे-उबेर, ओला आदि कम्पनियाँ।

ऐच्छिक पंजीकरण (Voluntary Registration) – जी०एस०टी० ढाँचे के भीतर सूचीबद्ध करने के लिए डीलरों द्वारा स्वैच्छिक पंजीकरण स्वयं पंजीकरण है। यह उन लोगों के लिए लागू है जो पंजीकरण के मापदण्डो के भीतर नहीं है और उन्हें जी०एस०टी० में पंजीकरण करने की आवश्यकता नहीं है।

यदि कोई व्यक्ति ऐच्छिक पंजीकरण प्राप्त करता है, लेकिन पंजीकरण के बाद 6 माह तक व्यापार प्रारम्भ नहीं करता है, तो समुचित अधिकारी निर्धारित विधि से ऐसे पंजीकरण को निरस्त कर सकता है।

 

अनिवार्य पंजीयन व ऐच्छिक पंजीयन में अन्तर (Difference between Mandatary Registration Vis Voluntary Registration)

जी०एस०टी० पंजीकरण केवल सरकार द्वारा निर्दिष्ट व्यक्तियों के लिए अनिवार्य है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति पंजीकरण लेने के लिए तैयार है, तो उसे सभी अनुपालन का पालन करना चाहिए। तो स्वैच्छिक पंजीकरण दो तरफा सिक्के की तरह है जिसमें देनदारियों के साथ लाभ भी होता है। ऐच्छिक पंजीकरण कराने पर करदाता अथवा पंजीकृत व्यक्ति पर सभी प्रावधान अनिवार्य पंजीकरण की तरह ही समान रूप से प्रभावी होंगे। ऐच्छिक पंजीकरण व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करता है। यह अनिवार्य नहीं होता है।

 

कर बीजक क्या होता है? वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत बीजक का महत्त्व एवं इसकी विषय-वस्तु समझाइए । What is tax invoice? Explain its importance and contents,

वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत बीजक से आशय एक ऐसे प्रपत्र से है जिसमें व्यापार के दोनों पक्षकारों (क्रेता एवं विक्रेता) के मध्य हुए लेन-देन का विवरण अंकित किया जाता है।

 

इस प्रपत्र को विक्रेता निर्गत करता है जिसमें विक्रीत वस्तु की मात्रा, वजन, धनराशि आदि का विवरण होता है तथा इसी के आधार पर कर की गणना की जाती है।

 

परिभाषा (Definition)

सामान्य अर्थों में बीजक एक कानूनी दस्तावेज होता है, जो विक्रेता द्वारा क्रेता को हस्तगत कराया जाता है और इसमें कर की राशि शामिल होती है और अधिक सरल शब्दों में कहा जा सकता है कि बीजक या बिल बेचे गए माल या उपलब्ध करायी गयी सेवाओं की मूल्य सहित एक सूची होती है।

“A tax invoice is a legal document that a seller submits to a customer in which the tax is included,” बीजक को केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम में भी परिभाषित किया गया है और कहा गया है कि बीजक या कर बीजक का आशय उस बीजक से है जिसका वर्णन धारा 31 में किया गया है।

“Invoice or tax invoice means the tax invoice referred to in section 31,”

[Section 2(66), CGST Act, 2017]

मुख्य बिन्दु (Main Points)

बीजक के सम्बन्ध में कुछ मुख्य बिन्दु (विशेषताएँ) निम्न प्रकार हैं –

(1) बीजक एक वैधानिक प्रपत्र होता है, जिसे वस्तु एवं सेवा कर के अधीन मान्यता प्रदान की गई है।

(2) वस्तु एवं सेवा कर के अधीन वैसे तो सभी विक्रेता अपने बीजक का प्रारूप स्वयं निर्धारित कर सकते हैं, लेकिन विभाग द्वारा कुछ बिन्दुओं को उसमें शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है।

(3) बीजक माल एवं सेवाओं के लेन-देन का साक्ष्य होता है, जिसे सभी पक्ष स्वीकार करते हैं।

(4) बीजक छपे हुए प्रारूप में होता है, जिसे माल या सेवाओं की आपूर्ति के समय हाथ से या टाइप करके या कम्प्यूटर के माध्यम से भरा जाता है।

 

बीजक का महत्त्व (Importance of Invoice)

बीजक का महत्त्व निम्नलिखित परिस्थितियों में समझा जा सकता है –

(1) बीजक लेन-देन का साक्ष्य होता है तथा वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत इसे मान्यता प्राप्त है।

(2) वस्तु एवं सेवा कर के अधीन बीजक के आधार पर ही कर की गणना की जाती है।

(3) बीजक के कारण व्यापारिक लेन-देनों में पारदर्शिता बनी रहती है।

(4) बीजक के आधार पर ही व्यापारिक पुस्तकों में लेखे किए जाते हैं।

(5) बीजक के माध्यम से ही आपूर्ति के समय (Time of supply) का निर्धारण होता है।

(6) बीजक के आधार पर ही माल या सेवा का आपूर्ति प्राप्तकर्त्ता ITC का लाभ उठा सकता है, क्योंकि बिना बीजक के ITC का लाभ देय नहीं होगा।

(7) आपूर्ति को सुनिश्चित करने या आपूर्ति के सम्बन्ध में कोई भी निर्णय लेने के लिए बीजक एक प्राथमिक दस्तावेज होता है।

(8) माल के परिवहन के दौरान भी बीजक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

Registrations Assessment Procedures Registration

बीजकों की विषय वस्तु (Contents of Invoices)

1, सामान्य बीजक की विषय-वस्तु (Contents of general invoice) – बीजक के लिए अधिनियम द्वारा या सरकार द्वारा कोई निर्धारित प्रारूप जारी नहीं किया गया है, लेकिन नियमावली के नियम 46 के अनुसार, बीजक में निम्नलिखित विवरण होने चाहिए –

(i) आपूर्तिकर्ता का नाम, पता तथा GSTIN |

(ii) एक या अनेक सीरीज में क्रमानुसार संख्या, जो 16 अंक या वर्ष से अधिक नहीं होगी। इस क्रमांक में वर्णमाला या अंक या विशेष वर्ग जैसे हाइफन या डैश आदि शामिल होंगे। और प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए यूनिक होगा।

(iii) निर्गमन की तिथि |

(iv) प्राप्तकर्ता का नाम, पता, GSTIN अथवा UIN (यदि वह पंजीकृत हो ।

(v) यदि आपूर्ति प्राप्तकर्ता अपंजीकृत है तथा आपूर्ति का मूल्य 50,000 या उससे अधिक है, तो प्राप्तकर्त्ता का नाम पता तथा सुपुर्दगी स्थल का पता, राज्य के नाम व कोड सहित|

2, निर्यात की दशा में बीजक (Invoice in case of export) – यदि निर्यात की आपूर्ति के लिए बीजक जारी किया जा रहा है, तो बीजक में निम्नलिखित वाक्य अंकित करना होगा –

“SUPPLY MEANT FOR EXPORT/SUPPLY TO SEZ UNIT OR SEZ DEVELOPER FOR AUTHORISED OPERATIONS ON PAYMENT OF INTEGRATED TAX,”

OR

“SUPPLY MEANT FOR EXPORT/SUPPLY TO SEZ UNIT OR SEZ DEVELOPER FOR AUTHORISED OPERATIONS UNDER BOND OR LETTER OF UNDERTAKING WITHOUT PAYMENT OF INTEGRATED TAX,

जैसी भी स्थिति हो। इसके साथ ही सामान्य बीजक को विषयवस्तु में वर्णित बिन्दु 5 में यह सूचना अंकित करनी होगी –

(1) प्राप्तकर्ता का नाम और पता,

(ii) सुपुर्दगी का पता,

(iii) गन्तव्य देश का नाम।

3, ISD का बीजक (Invoice of input service distributor) – ISD द्वारा जो बोजक या क्रेडिट नोट निर्गत किया जाता है, उसमें निम्नलिखित मदे शामिल होंगी –

(i) ISD का नाम, पता तथा GSTIN

(ii) एक या अनेक श्रेणियों में क्रमानुसार संख्या, जिनमें वर्णमाला या अंकमाला पा विशेष चिह जो हाइफन या ईश और स्लैश जिन्हें क्रमशःया और जैसे प्रतीक चिन्ह इनका कोई सम्मिश्रणा

(iii) वितरण की जाने वाली क्रेडिट की धनराशि

(iv) ISD या उसके अधिकृत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर या डिजिटल हस्ताक्षर।

4, बैंक अथवा वित्तीय संस्थानों के बीजक (Invoices of banking or financial institutions) – यदि कर योग्य सेवाओं की प्रदाता कोई बैंकिंग कम्पनी या वित्तीय संस्था है (जिसमें गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनी भी शामिल है) पूरे माह में दी गई सेवाओं के लिए एक समेकित (Consolidated) बीजक या बीजक के स्थान पर अन्य कोई प्रपत्र उ चाहे जिस नाम से पुकारा जाए, चाहे वह क्रमानुसार संख्यांकित हो या न हो, सेवा प्राप्तकर्ता नाम और पते हो या न हो, सेवाएँ चाहे भौतिक रूप से दी गई हों या इलेक्ट्रॉनिक रूप में दी गई हो, जारी कर सकती है, लेकिन ऐसे बीजक या प्रपत्र में नियम 46 में वर्णित विषय-वस्तु अवश्य हो ।

[नियम 54(2) के अनुसार)]

5, माल परिवहन एजेन्सी का बीजक (Invoice of goods transport agency) – यदि सेवा प्रदाता के रूप में कोई माल परिवहन एजेन्सी है, जो सड़क मार्ग से माल वाहन के माध्यम से माल परिवहन की सेवाएं दे रही हैं, वह जो बीजक या बोजक के स्थान पर अन्य कोई प्रपन्न, उसे चाहे जिस नाम से पुकारा जाए, जारी करेगी उसमें निम्नलिखित विवरण होगे –

(i) प्रेषण (माल का) कुल वजन,

(ii) प्रेषक का नाम,

(iii) प्रेषण प्राप्तकर्त्ता का नाम,

(iv) जिस माल वाहन से माल ढोया जा रहा है, उसका पंजीकरण नम्बर,

(v) ढोये जा रहे माल का विवरण,

(vi) यात्रा के प्रारम्भिक और गन्तव्य स्थान का विवरण,

(vii) कर भुगतान के लिए उत्तरदायी व्यक्ति (चाहे वह प्रेषक हो, प्राप्तकर्ता हो या ट्रान्सपोर्ट एजेन्सी हो) का GSTIN, उपर्युक्त विवरण के अलावा नियम 46 में वर्णित अन्य विवरण भी शामिल होंगे।

[नियम 54 (3) के अनुसार]

6, यात्री परिवहन सेवाप्रदाता का बीजक (Invoice of passenger transport supplier) – यदि वह प्रदाता के रूप में यात्री परिवहन की सेवाओं का प्रदाता है, तो उसके बीजक में टिकट शामिल होंगे, फिर चाहे जिस नाम से पुकारा जाए, चाहे सेवाग्रहीता का नाम और पता हो या न हो, परन्तु उस बीजक में नियम 46 में वर्णित अन्य विवरण अवश्य शामिल होंगे।

7, पुनः निरीक्षित बीजक (Revised invoice) – पंजीयन के उत्तरदायी होने और पंजीकरण प्राप्त होने की तिथि के मध्य में जारी किए गए बीजक, जब पंजीकरण प्राप्त होने की तिथि से 1 माह के अन्दर पुनः बाधित किए जाते हैं, तो उन्हें पुनः निरीक्षित बीजक कहा जाता है।

8, खुदरा बीजक (Retail invoice) – व्यापार की साधारण भाषा में इन कर बोजकों को ही बीजक कहा जाता है। लेकिन जब एक विक्रेता द्वारा अन्तिम ग्राहक अर्थात् उपभोक्ता को बेचे गए किसी सामान या उपलब्ध करायी गयी सेवा के लिए कोई बीजक जारी किया जाता है, तो इन बीजकों को खुदरा बीजक (Retail invoice) के नाम से जाना जाता है, क्योंकि एक, तो यह बीजक छोटी-छोटी धनराशि के लिए कई ग्राहकों के लिए जारी किए जाते है और दूसरे, इन बीजकों के निर्गत करने का उद्देश्य ग्राहक से भुगतान का अनुरोध करना होता है।

खुदरा बीजक दो प्रतियों में ही तैयार किए जाते हैं- मूल प्रति ग्राहक के लिए तथा दूसरी प्रति (जिसे डुप्लीकेट कॉपी कहते हैं) विक्रेता के लिए होती है। खुदरा बीजक अन्तर्राज्यीय बिक्री के लिए एवं अपंजीकृत ग्राहक के लिए भी जारी किया जाता है। इसका उपयोग सामान्यतः कर मुक्त वस्तुओं की बिक्री के लिए या छोटे व्यापारियों द्वारा अधिक किया जाता है।

विषय-वस्तु (Contents) – खुदरा बीजक में सामान्यतः निम्नलिखित मदों को शामिल किया जाता है –

(1) बीजक संख्या………………..

(2) निर्गमन की तिथि………………..

(3) क्रेता का विवरण………………..

(4) विक्रेता का विवरण………………..

(5) वस्तु की मात्रा………………..

(6) प्रति नग दर………………..

(7) कुल धनराशि………………..

(8) छूट आदि (यदि हो) ………………..

(9) भुगतान योग्य धनराशि………………..

(10) विक्रेता या उसके अधिकृत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर………………..

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विवरणी क्या है? वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत कितने प्रकार की विवरणी भरी जाती है? What is return? How many types of return are filled under GST?

किसी भी व्यापारी (जिसका GST में पंजीकरण है) द्वारा एक निर्धारित अवधि में किए गए समस्त लेन-देनों (क्रय विक्रय कर दायित्व) का विवरण सरकार को एक निर्धारित प्रारूप में तथा निर्धारित समय पर देना होता है जिसके आधार पर कर की गणना कर की अदायगी एवं जाँच की जाती है।

इस प्रक्रिया को वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत विवरणी प्रस्तुत करना कहते हैं। सरकार द्वारा कर प्रणाली को सुगम एवं पारदर्शी बनाने तथा कर चोरी रोकने के उद्देश्य से रिटर्न भरने की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है।

 

परिभाषा (Definition)

केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 2 (97) के अनुसार, “Return means any return prescribed or otherwise required to be furnished by or under this act or the rules made there under,”

[CGST Act, 2017, Sec, 2(97)]

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विवरणी की विशेषताएँ (Characteristics of Return)

(1) GST पोर्टल पर विवरणी से सम्बन्धित फॉर्म को सृजित किया जा सकता है, उसे भर कर तैयार किया जा सकता है, लेकिन प्रस्तुत केवल ऑनलाइन ही किया जा सकता है।

(2) वस्तु एवं सेवा कर के अधीन पंजीकृत सभी व्यक्तियों के लिए रिटर्न भरना अनिवार्य है।

(3) GST पोर्टल पर स्वयं विवरणी भर सकते हैं या किसी अन्य को इस कार्य के लिए अधिकृत किया जा सकता है।

(4) विवरणी के फॉर्मेट पूर्व निर्धारित हैं। इनमें किसी प्रकार की घटोतरी या बढ़ोतरी नहीं की जा सकती है।

(5) विवरणी कब तक प्रस्तुत करनी है, इसके लिए पूर्व से ही तिथियों निर्धारित है।

(6) विवरणी में केवल व्यावसायिक लेन-देनों को शामिल किया जाता है, व्यक्तिगत लेन-देनों को नहीं।

(7) पंजीकृत व्यक्ति को अपने सभी बीजक निर्धारित समय में कॉमन पोर्टल पर अपलोड करने होते हैं। शेष सम्बन्धित सूचनाएँ स्वतः सृजित हो जाती है।

(8) विवरणी में व्यापारिक लेन-देनों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के करों (जैसे CGST, SGST, IGST आदि) का विवरण दिया जाता है।

(9) विवरणी करदाता द्वारा सरकार को और सरकार के लिए प्रस्तुत की जाती है।

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विवरणी के प्रकार (Types of Return)

विवरणी को उसकी प्रकृति आदि के आधार पर निम्न प्रकार से विभाजित किया जा सकता है-

I, व्यवसाय के अनुसार (According to Business)

यदि व्यवसाय या व्यवसायी की दृष्टि से देखा जाए तो विवरणी तीन प्रकार की होती है—

1, नियमित व्यवसाय (Regular business) – जो व्यवसाय नियमित होते हैं और व्यवसायी नियमित रूप से जो विवरणी प्रस्तुत करते हैं। वे हैं –

(i) GSTR-01

(ii) GSTR-02

(iii) GSTR-03

(iv) GSTR-09

(v) GSTR-9C

2, कम्पोजीशन व्यवसाय (Composition business) – जो व्यापारी कम्पोजीशन योजना के अन्तर्गत पंजीकृत होते हैं, वे निम्नलिखित विवरणी भरते हैं

(i) GSTR-04

(ii) GSTR-9A

3, अन्य व्यवसाय (Other business) – जो व्यवसाय या व्यवसायी उपर्युक्त दोनों श्रेणियों में नहीं आते हैं, उन्हें अन्य की श्रेणी में शामिल किया जाता है। इस श्रेणी के व्यवसायी निम्नलिखित विवरणी भरते हैं

(i) GSTR-05

(ii) GSTR-06

(iii) GSTR-07

(iv) GSTR-08

(v) GSTR-10

(vi) GSTR-11

 

II, अवधि के अनुसार (According to Period)

1, मासिक विवरणी (Monthly return)—

(i) GSTR-01

(ii) GSTR-02

(iii) GSTR-03

(iv) GSTR-05

(v) GSTR-06

(vi) GSTR-07

(vii) GSTR-08

(viii) GSTR-11

2, त्रैमासिक विवरणी (Quarterly return) – निम्नलिखित विवरणी प्रत्येक तिमाही में प्रस्तुत करनी होती है –

(i) GSTR-04

3, वन टाइम विवरणी (One time return) – निम्नलिखित विवरणी व्यवसायी को केवल एक बार प्रस्तुत करनी होती है—

(i) GSTR-10

4, वार्षिक विवरणी (Annual return) – वार्षिक आधार पर निम्नलिखित विवरणी प्रस्तुत की जाती है—

(1) GSTR-09

(ii) GSTR-9A

(iii) GSTR-9C

 

III, धनराशि के अनुसार (According to Amount)

धनराशि के अनुसार विवरणी दो प्रकार की हो सकती है –

1, शून्य धनराशि वाली (Nil amount return) – यदि किसी रिटर्न के लिए आवश्यक लेन-देन व्यापारी द्वारा निर्धारित कर अवधि में नहीं किए जाते हैं तो धन उत्पन्न नहीं होता, लेकिन व्यापारी को रिटर्न अवश्य भरना होता है। धनराशि के खाने में शून्य अंकित किया जाता है। इस श्रेणी में कभी भी कोई रिटर्न आ सकती है। इन्हें शून्य धनराशि वाली रिटर्न कहा जाता है।

2, धनराशि वाली रिटर्न (Amounted return) – शून्य धनराशि वाली रिटर्न को छोड़कर शेष सभी रिटर्न धनराशि वाली होती हैं।

 

IV, वरीयता के आधार पर (According to Priority)

वरीयता के आधार पर विवरणियाँ तीन प्रकार की हो सकती हैं –

1, प्रथम विवरणी (First return) – GST के लिए उत्तरदायी होने की तिथि से लेकर पंजीकरण जारी होने की तिथि के मध्य में सम्पन्न होने वाले लेन-देनों के लिए जो विवरणी प्रस्तुत की जाती है उसे प्रथम विवरणी कहा जाता है क्योंकि जब तक GST का पंजीकरण नहीं होगा तब तक GSTIN नहीं मिलेगा और जब तक GSTIN नहीं होगा तब तक रिटर्न नहीं भरी जाएगी।

2, अन्तिम विवरणी (Final return) – जिस करदाता ने अपना पंजीकरण निरस्त करने का आवेदन पत्र दिया है या विभाग द्वारा किसी कारण से पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है तो करदाता को अपने अन्तिम स्टॉक का विवरण दिखाते हुए अन्तिम बार विवरणी प्रस्तुत करनी होती हैं। इसे ही अन्तिम विवरणी कहा जाता है।

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विवरणी सम्बन्धी निर्धारित फॉर्म (Forms relating to Returns)

 

क्र०सं० फार्म नम्बर विवरण
1. GSTR – 01 वस्तु एवं सेवाओं की बाह्य आपूर्तियों का विस्तृत विवरण

(Details of outward supplies of goods or services)

2. GSTR – 1A आपूर्तियों का स्वतः तैयार विस्तृत विवरण

(Details of Auto drafted supplies)

3. GSTR – 02 वस्तु एवं सेवाओं की आन्तरिक आपूर्ति का विस्तृत विवरण

(Details of inward supplies of goods or services)

4. GSTR – 02A आपूर्तियों का स्वतः तैयार विस्तृत विवरण

(Details of Auto drafted supplies)

5. GSTR – 03 मासिक विवरण

(Monthly returns)

6. GSTR – 03A रिटर्न जमा न करने के कारण धारा 46 के अन्तर्गत दोषी होने का नोटिस

(Notice to return defaulter u/s 46 for not filing returns)

7. GSTR – 03B नोटिस का जवाब

(Reply of notice)

8. GSTR – 04 कम्पोजीशन लेवी का तिमाही विवरण

(Quarterly return for registered person opting for composition levy)

9. GSTR – 04A कम्पोजीशन लेवी का स्वतः तैयार विस्तृत विवरण

(Auto drafted details for registered person opting for composition levy)

10. GSTR – 05 अनिवासी कर योग्य व्यक्ति की विवरणी

(Return for non-resident taxable persons)

11. GSTR – 5A OIDAR की आपूर्तियों की विस्तृत विवरणी

(Details of supplies of online information and database access or retrieval services by a person located outside India made to non-taxable person in India)

12. GSTR – 06 ISD के लिए रिटर्न

(Return for input service distributor)

13. GSTR – 06A आपूर्तियों का स्वतः तैयार विस्तृत विवरण

(Details of supplies auto drafted form)

14. GSTR – 07 TDS के लिए विवरणी

(Return for tax deducted at source)

15. GSTR – 07A TDS का प्रमाण-पत्र

(Applications of TDS)

16. GSTR – 08 TDS का विवरण

(Statement of TDS)

17. GSTR – 09 वार्षिक विवरणी

(Annual return)

18. GSTR – 09A कम्पोजीशन करदाता की वार्षिक विवरणी,

(Annual return for composition tax payer)

19. GSTR – 09C मिलान विवरण

(Reconciliation statement)

20. GSTR – 10 अन्तिम विवरणी

(Final return)

21. GSTR – 11 UIN धारक की आगत आपूर्तियों का विवरण

(Statement of inward supplies by persons having Unique Identification Number)

 

विवरणी की स्क्रूटिनी‘ अथवा ‘स्क्रूटिनी निर्धारण का GST विधान में क्या आशय है? What does scruting of returns means under GST law?

वस्तु एवं सेवा कर के अधीन सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु कर (Tax) है। करदाता को चिन्ता रहती है कि कितना कर देना है, कब देना है, और किस प्रकार से देना है जबकि वस्तु एवं सेवा कर विभाग को इस बात की चिन्ता रहती है कि करदाता ने कर जमा किया है या नहीं: किया है तो कितना किया है, और जितना जमा किया है वह सही है या नहीं। इन्हीं सब बिन्दुओं पर निर्णय लेने को कर निर्धारण (Assessment) कहा जाता है। वस्तु एवं सेवा कर की नजर में प्रत्येक करदाता ईमानदार होता है, अतः विभाग चाहता है कि प्रत्येक करदाता स्वयं कर का निर्धारण करे और सरकारी कोष में जमा करे इसीलिए विभाग द्वारा नियम आदि बना दिए गए हैं, लेकिन यदि करदाता अपने दायित्व को पूरा करने में असमर्थ रहता है, तो निर्धारण का कार्य विभाग द्वारा किया जाता है और यह कार्य विभाग द्वारा किया जाता है और यह कार्य विभाग द्वारा करदाता की सहायता से किया जाता है। इस प्रकार कर की दर मात्रा भुगतान आदि को समयानुसार और सही मात्रा में निर्धारित करने की प्रक्रिया को कर निर्धारण कहा जाता है।

सामान्य अर्थों में, करदाता के कर निर्धारण की प्रक्रिया को ‘निर्धारण कहा जाता है। केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 2(11) के अनुसार, इस अधिनियम के अधीन कर दायित्व को निर्धारित करने को ‘निर्धारित’ कहा जाता है जिसमें स्व-निर्धारण, पुनः निर्धारण, अनन्तिम निर्धारण, अल्प निर्धारण एवं सवोत्तम निर्णय निर्धारण शामिल है।

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कर निर्धारण के प्रकार (Types of Assessment)

वस्तु एवं सेवा कर के अधीन कर निर्धारण निम्न प्रकार के होते हैं –

 

Types of Assessment

 

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स्कूटिनी निर्धारण (Scrutiny Assessment)

(1) पंजीकृत व्यक्ति द्वारा जो रिटर्न एवं अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं, उनकी सम्बन्धित अधिकारी द्वारा छानबीन की जाती है। यदि छानबीन के दौरान कोई कमी स्पष्ट होती है तो ऐसे पंजीकृत व्यक्ति को नोटिस जारी किया जाएगा।

[धारा 61 (1) के अनुसार)]

उपर्युक्त धारा का नोटिस GST ASMT-10 पर दिया जाएगा, जिसमें छानबीन में कमियों का उल्लेख होगा और यदि सम्भव हो तो कर की राशि ब्याज, अर्थदण्ड आदि भी सूचित किया जाएगा। इसके लिए अधिकतम 30 दिन का समय दिया जाता है।

[नियम 99 (1) के अनुसार)]

(2) पंजीकृत व्यक्ति के पास नोटिस प्राप्त होने के बाद दो विकल्प होते हैं –

(i) वह नोटिस में वर्णित कमियों को स्वीकार कर ले औद तद्नुसार कर की राशि, ब्याज, अर्थदण्ड आदि का भुगतान करे।

(ii) नोटिस में वर्णित कमियों को स्वीकार न करें। इस बिन्दु पर भी पंजीकृत व्यक्ति के पास निम्नलिखित दो विकल्प होते हैं

 

(अ) नोटिस का कोई जवाब प्रस्तुत न करे।

(ब) सूचित की गई कमियों के विरोध में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे। यह स्पष्टीकरण GST-ASMT-11 पर प्रस्तुत किया जाएगा। होते हैं|
(iii) स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर सक्षम अधिकारी के समक्ष निम्नलिखित दो विकल्प

(अ) यदि उत्तर सन्तोषजनक है तो धारा 60(2) के अनुसार कार्यवाही को समाप्त कर दे और नियम 99 के अनुसार GST-ASMT 12 पर पंजीकृत व्यक्ति को सूचित करे।

(ब) नोटिस का उत्तर प्राप्त न होने पर या प्राप्त स्पष्टीकरण सन्तोषजनक न होने पर धारा 61(3) के अनुसार अग्रिम कार्यवाही करे। इन कार्यवाहियों में निम्नलिखित में से कोई कार्यवाही प्रारम्भ की जा सकती है।

  • विभागीय अधिकारियों के माध्यम से ऑडिट
  • कमिश्नर द्वारा नामित चार्टर्ड एकाउण्टेण्ट या कॉस्ट एकाउण्टेण्ट के द्वारा ऑडिट करना।
  • निरीक्षण (Inspection)
  • खोज (Search)
  • जब्तीकरण (Seizure)
  • गिरफ्तारी (Arrest)
  • माँग जारी करना (Initiate demand)
  • वसूली करना (Initiate recovery)।

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ऑडिट से आपका क्या आशय है? वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत ऑडिट कितने प्रकार से किया जाता है? What do you mean by Audit? Explain different types of audit under GST?

व्यापार की लेखा पुस्तकों में लेन-देन के विवरणों की सत्यता और जाँच की प्रक्रिया को खातों का अंकेक्षण कहा जाता है। सामान्य रूप से व्यवसायी स्वयं अपनी पुस्तकों का अंकेक्षण ऐच्छिक रूप से करा सकता है किन्तु कुछ सरकारी विभागों द्वारा अंकेक्षण कराना अनिवार्य होता है। वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत व्यापारी द्वारा प्रस्तुत किए गए रिकॉर्ड के आधार पर ही कर लगाया जाता है अत: विभाग द्वारा कुछ बड़े व्यापारियों के खातों की जाँच पेशेवर विशेषज्ञ (सामान्यतः चार्टर्ड एकाउण्टेण्ट) से करायी जाती है जिसके द्वारा दी गई राय या परिणाम को ऑडिट रिपोर्ट कहते हैं।

परिभाषा (Definition)

“एक निर्धारित अवधि के खातों की विशेषज्ञों द्वारा की जाने वाली जाँच को ऑडिट कहा जाता है।”

[Section 2 (13) CGST Act, 2017]

उद्देश्य (Objectives)

खातों का अंकेक्षण मुख्यतः खातों की शुद्धता का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसके कुछ उद्देश्य भी है जो निम्नवत् है—

(1) वार्षिक टर्नओवर की गणना करना एवं प्रस्तुत की गई रिटर्न की सत्यता की जाँच करना |

(2) इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावों की सत्यता तथा देय करों की गणना।

(3) भुगतान किए गए करो की सत्यता तथा अधिनियम की व्यवस्थाओं का पालन सुनिश्चित करना।

(4) सामान्यतः एक निर्धारित सीमा से अधिक टर्नओवर वाले व्यापारियों का ऑडिट करना।

(5) ऑडिट का कार्य पूर्ण होने के बाद ऑडिट रिपोर्ट जारी करना।

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ऑडिट के प्रकार (Types of Audit)

वस्तु एवं सेवा कर के अधीन ऑडिट सामान्यतः निम्न प्रकार के होते हैं –

1, अनिवार्य ऑडिट (Compulsory Audit) – CGST के अन्तर्गत जब पंजीकृत व्यापारी के लिए ऑडिट कराना अनिवार्य हो तो उसे अनिवार्य ऑडिट कहा जाता है। अधिनियम को धारा 35(5) में कहा गया है कि एक निर्धारित सीमा से अधिक वार्षिक टर्नओवर होने पर पंजीकृत व्यक्ति को अपने खातों का ऑडिट कराना अनिवार्य होगा और वह व्यक्ति अपनी वार्षिक रिटर्न के साथ ऐसी ऑडिट रिपोर्ट की प्रति प्रस्तुत करेगा।

“प्रत्येक निर्धारित सीमा से अधिक टर्नओवर वाले पंजीकृत डीलर / व्यापारियों का ऑडिट चार्टर्ड एकाउन्टेण्ट या कॉस्ट एकाउन्टेण्ट द्वारा किया जाएगा तथा इसकी एक प्रति के साथ समाधान विवरण तथा धारा 44 उपधारा (2) के अन्तर्गत अन्य आवश्यक प्रपत्र जमा करने होंगे।”

[धारा 35(5) CGST एक्ट, 2017]

“Every registered person, whose turnover during a financial year exceeds the prescribed limit shall get his accounts audited by a Chartered Accountant or a Cost Accountant and shall submit a copy of the audited annual accounts, the reconciliation statement under Sub section (2) of Section 44 and such other documents in such form and manner as may be prescribed,”

[Section 35 (5), CGST Act, 2017]

2, विभागीय ऑडिट (Departmental Audit) – यह ऑडिट निम्नलिखित दो प्रकार का होता है –

(i) सामान्य ऑडिट (General Audit) – जब वस्तु एवं सेवा कर विभाग के कमिश्नर या उसके द्वारा अधिकृत समुचित अधिकारी द्वारा किसी पंजीकृत व्यक्ति के खातों का ऑडिट किया जाता है तो इसे सामान्य ऑडिट कहा जाता है। इस ऑडिट के लिए कमिश्नर को एक सामान्य आदेश या विशेष आदेश लिखित में जारी करना होता है।

[धारा 65 (1) के अनुसार]

(ii) विशेष ऑडिट (Special Audit) – यदि छानबीन, जाँच या खोज या अन्य किसी कार्यवाही के दौरान असिस्टेण्ट कमिश्नर स्तर के अधिकारी को राजस्व के हित एवं सन्देह की पुष्टता के आधार पर यह आभास होता है कि मूल्य की घोषणा सही नहीं है या जो ITC का उपयोग किया गया है वह सामान्य नहीं है तो वह कमिश्नर का अनुमोदन प्राप्त करके ऐसे व्यक्ति को लिखित में निर्देशित कर सकता है कि वह कमिश्नर द्वारा नामित या एकाउण्टेण्ट कॉस्ट एकाउण्टेण्ट से अपने अभिलेखों एवं खातों का ऑडिट कराए।

[धारा 66(1) के अनुसार]

असिस्टेण्ट कमिश्नर द्वारा इस प्रकार की सूचना या निर्देश GST ADIT-03 पर निर्धारित फॉर्म पर दी जाएगी।

[नियम 102 के अनुसार]

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कर निर्धारण Assessment of Tax

वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत कर प्रणाली को अत्यधिक पारदर्शी बनाने के क्रम में विभाग द्वारा करदाता को स्वयं कर का निर्धारण कर विभाग के कोष में जमा करने का प्रावधान किया गया है, किन्तु साथ ही कर निर्धारण का कार्य विभाग द्वारा भी उन परिस्थितियों में किया जाता है, जब करदाता ऐसा करने में असमर्थ हो या विभाग को उसमें कुछ शक या त्रुटि दिखाई दे।

परिभाषा (Definition)

“इस अधिनियम के अधीन कर दायित्व को निर्धारित करने को निर्धारण कहा जाता है। जिसमें स्वनिर्धारण, पुनः निर्धारण, अनन्तिम निर्धारण, अल्प निर्धारण एवं सर्वोत्तम निर्णय निर्धारण शामिल हैं।”

[Section 2 (11) CGST Act, 2017]

कर निर्धारण के प्रकार (Types of Assessment of Tax)

I, स्वयं कर निर्धारण (Self-assessment of Tax)

जब कोई करदाता अपने अभिलेखों के अनुसार स्वयं निर्धारित करता है कि किसी कर अवधि में उसे कितना कर देना है और स्वयं निर्धारित करके कर की राशि सरकारी कोष में जमा करता है तथा कर विवरणी के माध्यम से कर अधिकारियों को इस बात की सूचना देता है, तो इसे स्वतः कर निर्धारण कहा जाता है।

वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम में भी यही कहा गया है कि करदाता स्वयं कर निर्धारित करेगा और धारा 39 के अनुसार विवरणी जमा करेगा।

[धारा 59 के अनुसार]

II, अस्थायी / अनन्तिम निर्धारण (Provisional Assessment)

कभी-कभी करदाता के समक्ष ऐसी परिस्थितियाँ आ जाती है जब वह कर निर्धारित करने में स्वयं को असमर्थ पाता है; जैसे –

(1) वह सही तरीके से कर की गणना न कर पा रहा हो।

(2) किसी लेन-देन का मूल्य निर्धारित न हो पा रहा हो।

(3) वस्तुओं एवं सेवाओं में भेद न कर पा रहा हो।

(4) किसी अधिसूचना के सम्बन्ध में यह ज्ञात न हो पा रहा हो कि यह अधिसूचना उस पर लागू होगी या नहीं।

वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 60 के अनुसार, यदि करदाता स्वयं कर का निर्धारण न कर पा रहा हो तो वह अस्थायी रूप से कर निर्धारण के लिए कर अधिकारियों से अनुरोध कर सकता है।

[धारा 60(1) के अनुसार]

III, अल्प निर्धारण (Summary Assessment)

(1) अधिनियम की धारा 64 में अल्प निर्धारण की अनुमति दी गई है। यदि सक्षम अधिकारी को यह विश्वास हो जाता है कि विलम्ब करने से विभागीय राजस्व की क्षति सम्भावित है और सम्बन्धित मामलों में तुरन्त कर निर्धारण की आवश्यकता है तो वह ज्वाइण्ट कमिश्नर या एडीशनल कमिश्नर की अनुमति लेकर तत्काल कार्यवाही करते हुए GST ASMT-16 पर निर्धारण आदेश जारी करेगा।

(2) यदि सम्बन्धित करदाता समझता है कि उस पर गलत तरीके से कर निर्धारण किया गया है तो वह इस आदेश को वापस लेने की माँग के लिए GST-ASMT-17 पर आवेदन पत्र प्रस्तुत करेगा।

(3) करदाता के आवेदन पत्र की स्वीकृति या उसे निरस्त करने का आदेश सक्षम अधिकारी द्वारा 30 दिन के अन्दर GST-ASMT-18 पर जारी किया जाएगा।

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IV, स्कूटिनी निर्धारण (Scrutiny Assessment)

(1) पंजीकृत व्यक्ति द्वारा जो रिटर्न एवं अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं, उनकी सम्बन्धित अधिकारी द्वारा छानबीन की जाती है। यदि छानबीन के दौरान कोई कमी पायी जाती है तो ऐसे पंजीकृत व्यक्ति को नोटिस दिया जाएगा।

[धारा 61(1) के अनुसार]

उपर्युक्त धारा का नोटिस GST ASMT-10 पर दिया जाएगा, जिसमें छानबीन में कमियों का उल्लेख होगा और यदि सम्भव हो तो कर की राशि, ब्याज, अर्थदण्ड आदि भी सूचित किया जाएगा। इसके लिए अधिकतम 30 दिन का समय दिया जाता है।

[नियम 99 (1) के अनुसार]

(2) पंजीकृत व्यक्ति के पास नोटिस प्राप्त होने के बाद दो विकल्प होते हैं –

(i) वह नोटिस में वर्णित कमियों को स्वीकार कर ले और तदनुसार कर की राशि, अर्थदण्ड आदि का भुगतान करे। ब्याज,

(ii) नोटिस में वर्णित कमियों को स्वीकार न करें। इस बिन्दु पर भी पंजीकृत व्यक्ति के पास निम्नलिखित दो विकल्प होते हैं

(a) नोटिस का कोई जवाब प्रस्तुत न करे।

(b) सूचित की गई कमियों के विरोध में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे। यह स्पष्टीकरण GST ASMT-11 पर प्रस्तुत किया जाएगा।

(iiii) स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर सक्षम अधिकारी के समक्ष निम्नलिखित दो विकल्प होते हैं –

(a) यदि उत्तर सन्तोषजनक है तो धारा 61(2) के अनुसार कार्यवाही को समाप्त कर दे और नियम 99 के अनुसार GST ASMT-12 पर पंजीकृत व्यक्ति को सूचित करे।

(b) नोटिस का उत्तर प्राप्त न होने पर धारा 61 (3) के अनुसार निम्न में से कोई कार्यवाही प्रारम्भ की जा सकती है—

  • विभागीय अधिकारियों के माध्यम से ऑडिट
  • कमिश्नर द्वारा नामित चार्टर्ड एकाउण्टेण्ट या कॉस्ट एकाउण्टेण्ट के द्वारा ऑडिट कराना।
  • निरीक्षण (Inspection)
  • खोज (Search)
  • जब्तीकरण (Seizure)
  • गिरफ्तारी (Arrest)
  • माँग जारी करना (Initiate demand)
  • वसूली करना (Initiate recovery)

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V, सर्वोत्तम निर्णय निर्धारण (Best Judgement Assessment)

वस्तु एवं सेवा कर में सर्वोत्तम कर निर्धारण का विकल्प भी है। इसमें सक्षम अधिकारी को यह विकल्प दिया गया है कि वह उपलब्ध सूचनाओं, प्रपत्रों और परिस्थितियों के आधार पर कर निर्धारण का कार्य अपने विवेकानुसार करे। सर्वोत्तम कर निर्धारण तब सर्वोत्तम कहा जाता है, जब –

(1) निर्णय करने वाले अधिकारी अपने विवेक का उपयोग करें।

(2) वर्तमान परिस्थितियों और उपलब्ध सूचनाओं को ध्यान में रखें।

(3) निर्णय से किसी प्रकार का पूर्वाग्रह परिलक्षित न होता हो।

(4) निष्कर्ष तर्कपूर्ण हों।

(5) निर्णय से मनमानी न झलकती हो।

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कर निर्धारण सम्बन्धी निर्धारित फॉर्म

 

क्र०सं० फार्म नम्बर विवरण
1. GST ASMT – 01 अस्थायी निर्धारण का आवेदन पत्र

(Application for provisional assessment)

2. GST ASMT – 02 अतिरिक्त सूचनाओं के लिए नोटिस

(Notice for seeking additional information/ larification/documents for provisional assessment)

3. GST ASMT – 03 नोटिस का जवाब

(Reply to the notice seeking additional information)

4. GST ASMT – 04 अस्थायी निर्धारण का आदेश

(Order of provisional assessment)

5. GST ASMT – 05 जमानत राशि जमा करना

(Furnishing of security)

6. GST ASMT – 06 अन्तिम निर्धारण के लिए अतिरिक्त सूचनाओं के लिए नोटिस

(Notice for seeking additional information/ clarification/documents for final assessment)

7. GST ASMT – 07 अन्तिम निर्धारण आदेश

(Final assessment order)

8. GST ASMT – 08 जमानत राशि की वापसी का आवेदन पत्र

(Application for withdrawal of security)

9. GST ASMT – 09 जमानत राशि की वापसी/निरस्त करने का आदेश

(Order for release of security or rejecting application)

10. GST ASMT – 10 स्क्रूटिनी के बाद कमियाँ सूचित करने का नोटिस

(Notice for intimating discrepancies in the return a scrutiny),

11. GST ASMT – 11 धारा 61 के अधीन कमियों की सूचना का उत्तर देना

(Reply to the notice issued under section 61 intimating discrepancies in the return)

12. GST ASMT – 12 धारा 61 के अधीन जवाब की स्वीकृति का आदेश

(Order of acceptance of reply against the notice issued u/s 61)

13. GST ASMT – 13 धारा 62 के अधीन निर्धारण आदेश

(Assessment order u/s 62)

14. GST ASMT – 14 धारा 63 के अधीन निर्धारण के लिए कारण बताओ नोटिस

(Show cause notice for assessment u/s 63)

15. GST ASMT – 15 धारा 63 के अधीन निर्धारण आदेश

(Assessment order u/s 63)

16. GST ASMT – 16 धारा 64 के अधीन निर्धारण आदेश

(Assessment order u/s 64)

17. GST ASMT – 17 धारा 64 के अधीन निर्धारण आदेश को वापस लेने का आवेदन-पत्र

(Application for withdrawal of assessment order issued v/s 64)

18. GST ASMT – 18 धारा 64(2) के आवेदन पत्र की स्वीकृति/निरस्त करना।

(Acceptance or rejection of application field u/s 64(2))

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