Unit 5 Custom Low Mcom Notes

Contents

Unit 5 Custom Low Mcom Notes

Unit 5 Custom Low Mcom Notes:- In this post, we want to tell you that, mcom 1st year customs law: Introduction levy and collection duties: taxable events; custom duties, classification and valuation of import and export goods; assessment; abatement and remission of duty; exemptions; refund and recovery. Custom Low Mcom Notes

 

सीमा शुल्क क्या है? भारतीय कर व्यवस्था के सन्दर्भ में समझाइए। What is Custom Duty? Explain with reference to Indian Taxation System,

किसी भी देश में विकास हेतु धन की आवश्यकता होती है। चूँकि इस विकास से देश की जनता को ही लाभ होता है। अतः सरकार द्वारा जनता से कर के रूप में वसूली की जाती है जो कि काफी प्राचीन समय से विभिन्न रूपों में की जाती रही है। भारतवर्ष में कर व्यवस्था के अन्तर्गत दो प्रकार के कर लगाए जाते हैं –

(1) प्रत्यक्ष कर

(2) अप्रत्यक्ष कर

प्रत्यक्ष कर में आयकर राजस्व वसूली का सबसे बड़ा और प्रमुख स्रोत है जबकि अप्रत्यक्ष करों में बिक्री कर, सेवा कर [वर्तमान में वस्तु एवं सेवा कर (GST)) तथा सीमा शुल्क आदि शामिल हैं।

 

सीमा शुल्क (Custom Duty)

सीमा शुल्क भारत सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक अप्रत्यक्ष कर है जो वस्तुओं के आयात तथा निर्यात पर लागू होता है। भारत में वर्तमान में सीमा शुल्क से सम्बन्धित ‘सीमा शुल्क अधिनियम, 1962’ लागू है जिसमें पूर्व में परिवर्तन हो चुके हैं; यथा- सर्वप्रथम सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 को तत्कालीन ‘समुद्री सीमा शुल्क अधिनियम, 1878’ से प्रतिस्थापित किया गया था। सन् 1975 में पूर्व प्रचलित Indian Tariff Act, 1934 को Custom Tariff Act, 1975 के रूप में प्रतिस्थापित किया गया। अनेक संशोधनों तथा पूर्व प्रचलित अधिनियमों को अप्रचलित कर ‘सीमा शुल्क अधिनियम, 1962’ सम्पूर्ण रूप में प्रचलित है। भारतीय संविधान के अन्तर्गत अनुच्छेद 246 के अन्तर्गत सारवीं अनुसूची में इसका विस्तृत विवरण है जो कि निम्न प्रकार है

प्रथम सूची (संघीय सूची (List I Union List)

विधान बनाने की संसद को प्राप्त अनन्य शक्ति सम्बन्धी विषयों का वर्णन इस सूची में है।

द्वितीय सूची (राज्य सूची) (List II State List)

राज्य की विधायिका बनाने की अनन्य शक्ति सम्बन्धी विषयों का वर्णन इस सूची में है।

तृतीय सूची (समवर्ती सूची (List Ill Concurrent List)

संसद एवं राज्य विधायिका (संघीय सूची को छोड़कर) को विधान बनाने की प्राप्त शक्ति का वर्णन इस अनुसूची में है।

 

सीमा शुल्क सम्बन्धी दर (Rates of Custom Duty)

1, मूल सीमा शुल्क (सीमा अधिनियम की धारा 2) शुल्क अधिनियम की धारा 12 एवं सीमा शुल्क टैरिफ

[Basic Customs Duty (Section 12 of the Customs Act and Section 2 of the Customs Tariff Act)]

शुल्क की मानक दर (Standard rate of duty) – सामान्यतः अनुसूची के कॉलम 4 में वर्णित दर लागू होती है।

अधिमानी सीमा शुल्क की दर (Preferential rate of duty) – केन्द्र सरकार द्वारा घोषित अधिमानी क्षेत्रों से आयातित माल पर अधिमानी सीमा शुल्क की दर (कॉलम 5 में वर्णित) लागू होती है।

सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 25 के अन्तर्गत केन्द्र सरकार कुछ अधिमानी क्षेत्रों से माल के आयात पर अधिमानी सीमा शुल्क की दरें अधिसूचित कर सकती हैं।

अधिमानी शुल्क दरों के लिए पूर्व शर्ते (Conditions to be fulfilled for preferential rate of duty) – (1) आयातक यह घोषणा करेगा कि आयातित माल का अधिमानी क्षेत्रों में उत्पादन/निर्माण किया गया है।

(2) माल के आयात के समय आयातकर्त्ता द्वारा अधिमानी दरों के लागू करने के सम्बन्ध में विशेष दावा करना चाहिए।

(3) सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम की धारा 4(2) के प्रावधानों के अनुसार ‘माल के उदय का स्थान निर्धारित किया जाएगा।

(4) सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम की धारा 4(3) के अन्तर्गत ऐसे क्षेत्र को अधिमानी क्षेत्र घोषित किया गया हो।

यदि आयातक उपर्युक्त कर्तव्यों के निर्वहन में असफल रहता है, तो माल पर ‘प्रमापित दर’ से सीमा शुल्क उद्गृहीत किया जाएगा।

, माल और सेवा कर मुआवजा उपकर सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 3(9)] Goods and Service Tax Compensation CESS [Section 3(9) of Customs Tariff Act]

माल और सेवा कर (राज्य के लिए मुआवजा) अधिनियम, 297 को धारा 8 के तहत लगाया गया जी०एस०टी० मुआवजा उपकर एक मुआवजा उपकर होता है। भारत में जी०एस०टी० के कार्यान्वयन के कारण राजस्व के नुकसान के लिए राज्यों को मुआवजे मुहैया कराने के लिए माल या सेवाओं की अन्तरर्राज्यीय आपूर्ति या अन्तराल पर जी०एस०टी० मुआवजा उपकर लगाया जाता है।

III, सीमा शुल्क प्रशुल्क अधिनियम की धारा 3 के तहत सीमा शुल्क का अतिरिक्त शुल्क (Additional Duty of Customs under Section 3 of Customs Tariff Act)

धारा 3(1) के तहत अतिरिक्त शुल्क [Additional duty under Section 3(1)]) – कोई सामान जो भारत में आयात किया जाता है, वह भी उत्पाद शुल्क या भारत में निर्मित एक सामान पर लगाए जाने वाले उत्पाद शुल्क के बराबर है। इस शुल्क को अतिरिक्त शुल्क कहा जाता है। यदि उत्पाद शुल्क माल के मूल्य की दर पर लगाया जाता है, अतिरिक्त शुल्क आयातित सामान के मूल्य की दर पर भी मूल्यांकित किया जाएगा।

मादक पेय के मामले में अतिरिक्त शुल्क की दर (Rate of additional duty in case of alcoholic liquor) – भारत में गृह उपभोग के लिए आयातित किसी मादक पेय के सम्बन्ध में केन्द्रीय सरकार विभिन्न राज्यों में उत्पादित या निर्मित मादक पेय की तरह उत्पाद शुल्क के सम्बन्ध में अतिरिक्त शुल्क की दर को सूचित कर सकती है।

 

कर एवं शुल्क आरोपण के स्तर (Stages of Imposition of Taxes and Duties)

कर एवं शुल्क आरोपण के निम्न तीन स्तर होते हैं –

1, उद्ग्रहण- इस स्तर पर कर शुल्क दायित्व की घोषणा की जाती है एवं वह व्यक्ति अथवा सम्पत्ति जिस पर कर अथवा शुल्क उद्ग्रहण होना है, उसे पहचानकर उस पर कर लगाया जाता है।

2, निर्धारण वह प्रक्रिया है, जिसमें कर शुल्क दायित्व की मात्रा निर्धारित की जाती है। कर अथवा शुल्क का दायित्व निर्धारण पर निर्भर नहीं करता है।

3, संग्रहण कर शुल्क के सम्बन्ध में अन्तिम प्रक्रिया इसके वास्तविक संग्रहण की है। कर की वसूली का कार्य प्रशासनिक अथवा अन्य कारणों से भविष्य में टाला जा सकता है जैसा कि उत्पाद शुल्क के सम्बन्ध में होता है, जहाँ दायित्व माल के निर्माण पर उदय हो जाता है, जबकि उसकी वसूली कारखाने से माल के निकासी के समय की जाती है।

सीमा शुल्क माल पर उद्गृहीत होता है न कि उस व्यक्ति पर जो उसका आयात कर रहा है अथवा सीमा शुल्क का भुगतान कर रहा है। यदि आयात की परिस्थितियाँ एकसमान है, तो इसी स्तर पर करारोपण करना ही न्यायकारी है। यही समता-भावना सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 12 में निहित है।

सीमा शुल्क का दायित्व सामान्यतः निम्न तीन घटकों पर निर्भर करता है—

(1) माल, समय एवं परिस्थितियाँ, जिनके अन्तर्गत सीमा शुल्क उग्रहणीय हो जाता है,

(2) सीमा शुल्क की राशि एवं उसके संग्रहण के लिए उचित प्रक्रिया, व्यवस्था एवं संगठन,

(3) समता अथवा नैतिकता के आधार पर अथवा देश के आर्थिक विकास पर नियन्त्रण एवं कर ढांचे के नियोजन के उपकरण के रूप में सरकार द्वारा अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए विमुक्ति स्वीकृत करना।

Custom Low Mcom Notes

उद्ग्रहण का समय एवं परिस्थितियाँ (Time and Conditions of Levy)

प्रभावी धारा (धारा 12) [Charging Section (Section 12)

(1) यह धारा अधिनियम की प्रभावी (Charging) धारा है। इस अधिनियम में अ अन्य किसी तत्कालीन प्रभावी विधान में, यदि विपरीत न हो, भारत में आयातित को निर्यादित माल पर, सीमा शुल्क उस दर से उद्गृहीत किया जाएगा, जो सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 (1975 का 51) अथवा तत्समय प्रभावी किसी विधान [उपधारा (1)] में निर्दिष्ट की गयी है।

(2) उपधारा (1) के प्रावधान उन सभी मालों पर प्रभावी होंगे, जो सरकार से सम्बन्धित है क्योंकि ये प्रावधान उन मालों पर लागू होते हैं, जो सरकार से सम्बन्धित नहीं है।

अतः सरकार द्वारा आयातित माल पर कोई सामान्य विमुक्ति नहीं है, परन्तु भारतीय नौ सेना, पुलिस द्वारा, रक्षा मन्त्रालय द्वारा एवं तटरक्षक दल इत्यादि। विशेष उपकरणों का आयात इस सम्बन्ध में अधिसूचित विशेष अधिसूचनाओं के अन्तर्गत उसमें निहित शर्तों एवं प्रक्रिया की अनुपालना की शर्त के साथ विमुक्त है।

उपर्युक्त प्रावधानों से निम्नांकित तथ्य/विवरण स्पष्ट होते हैं –

(1) सीमा शुल्क सभी मालों पर लागू है, तथापि ऐसा उद्ग्रहण अधिनियम की अन्य शर्तों के अधीन है। उदाहरण के लिए,

धारा 13 – चोरी के माल पर शुल्क नहीं,

धारा 22 – क्षतिग्रस्त माल पर कम शुल्क,

धारा 23 – नष्ट माल पर शुल्क माफी |

(2) माल भारत में आयातित अथवा विदेश को निर्यातित हो।

(3) सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम में उल्लेखित दर से सीमा शुल्क उद्ग्रहण |

(4) सरकारी माल को गैर-सरकारी माल के समान मानकर सीमा शुल्क लागू होगा।

Custom Low Mcom Notes

धारा 12 के प्रमुख तथ्य (Main Facts of Section 12)

(a) माल पर शुल्क (Charge on goods)

सीमा शुल्क माल पर लागू होता है न कि उस व्यक्ति पर जो माल का आयात कर रहा है अथवा सीमा शुल्क का भुगतान कर रहा है। यह माना जाता है कि शुल्क का भार ग्राहक पर डाल दिया जाएगा।

(b) कर शुल्क योग्य घटना माल का भारत में आयात अथवा भारत से बाहर निर्यात (Taxable event-Import of goods Into India/export of goods from India)

धारा 12 पर्याप्त रूप से यह स्पष्ट करती है कि सीमा शुल्क उद्ग्रहण के लिए माल का भारत में आयात अथवा भारत से निर्यात ही कर योग्य घटना है।

पूर्व में, आयात एवं निर्यात के समय के निर्धारण के सम्बन्ध में अनेक कठिनाइयाँ अनुभव की गई, जिसका मुख्य कारण धारा 2(27) में दी गयी ‘भारत’ की परिभाषा थी, जिसमें भारत के जल क्षेत्र (Territorial Waters of India) को भारत में शामिल किया गया है। परिणामस्वरूप किसी जहाज का ‘भारतीय जल क्षेत्र’ में अनभिज्ञ प्रवेश भी आयात माना जाएगा। इसके अतिरिक्त यह निर्धारित करना प्राय: असम्भव है कि कब जहाज ने भारतीय जल क्षेत्र को पार किया, परन्तु अब वह विषय अनसुलझा (res integra) नहीं रहा है।

 

कर योग्य घटना निर्धारण सम्बन्धी प्रमुख निर्णय (Relevant judgements regarding the determination of taxable event) – कर शुल्क योग्य घटना के निर्धारण में मुख्य परीक्षण यह है कि वह घटना कब हुई जिसके आधार पर शुल्क लगाया जाना है।

 

(i) कस्टम ड्यूटी से छूट (Exemption from Custom Duty)

सीमा शुल्क अथवा कस्टम ड्यूटी पर कानून के अनुच्छेद 26 के प्रावधानों के अनुसार, कुछ सामानों और कुछ योग्य आयातकों के लिए सीमा शुल्क, आयात शुल्क और करों से छूट प्रदान की गई है। निम्नलिखित वस्तुओं को सीमा शुल्क और करों से मुक्त किया गया है –

(1) विदेशी राजनयिक या काउंसलर मिशन अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों और अन्य सरकारों के तकनीकी सहयोग की एजेन्सियों द्वारा आयात किए गए सामान, मिशन के प्रमुख और विदेश मन्त्रालय और अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग मन्त्रालय से प्रमापीकरण के लगाव के साथ अपने अधिकारिक कार्य के अभ्यास में उपयोग करने के लिए।

(2) उप-अनुच्छेद (क) में वर्णित मिशनों और संगठनों के आधिकारिक कर्मियों के व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात किया गया माल। इस उप-अनुच्छेद और उपपैरा (8) का कार्यान्वयन मौजूदा अन्तर्राष्ट्रीय कानून और सम्बन्धित सरकारों के बीच पारस्परिकता के सिद्धान्त पर आधारित होगा।

(3) प्रावधानों के अन्तर्गत सीमा शुल्क आयात शुल्क और करों से मुक्त माल)

(4) दान में दिया गया माल, अनुसन्धान और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए माल, नमूने और बिना व्यावसायिक मूल्य के प्रदर्शनी के लिए सामान मानव अवशेष वाले ताबूत।

(5) सीमा शुल्क के निदेशक द्वारा निर्धारित मात्रा में कम्बोडिया में निवास करने वाले व्यक्तियों द्वारा आपातित मोटर चालित वाहनों को छोड़कर घरेलू सामान व व्यक्तिगत प्रभाव और समान।

(6) सीमा शुल्क के निदेशक द्वारा निर्धारित यात्रियों, और यात्रियों द्वारा आयातित एक निश्चित मूल्य या मात्रा तक माल |

Custom Low Mcom Notes

(ii) हमारे देश में कस्टम ड्यूटी की भूमिका (Role of Custom Duty in Our Country)

कस्टम ड्यूटी उन सारे सामानों पर लगाते है, जो आयात किए जाते हैं और देश से बाहर भी भेजे जाते हैं अर्थात् माल के आयात निर्यात पर लगने वाला कर कस्टम ड्यूटी कहलाता है। आयात पर लगाए जाने वाले शुल्क को आयात शुल्क और निर्यात पर लगाए जाने वाले शुल्क को निर्यात शुल्क कहते हैं। यह एक अप्रत्यक्ष कर होता है। यह सरकार को राजस्व जुटाने में मदद करता है और साथ ही घरेलू संस्थानों को शिकारियों के चंगुल से बचाता है। कस्टम पर कर्तव्यों को माल, वजन, आयाम और अन्य प्रासंगिक मानदण्डों के मूल्य के आधार पर लगाय जाता है। यदि कोई व्यक्ति अथवा संस्था सीमा शुल्क कानून या प्रावधानों का उल्लंघन करती है, तो उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। भारत में एक एजेन्सी है जो भारत में सीमा शुल्क, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर और नारकोटिक्स के लिए जिम्मेदार होती है। धारा 2 (22) के तहत, माल में निम्नलिखित शामिल हैं—

(i) स्टोर (ii) ब्रेसलम, विमान और वाहन सामान, (iii) मुद्रा और परक्राम्य लिखित

अन्य चल सम्पत्ति आदि।

Custom Low Mcom Notes

(iii) कस्टम ड्यूटी के प्रकार (Types of Custom Duty)

भारत में सीमा शुल्क के प्रकार –

दूसरी अनुसूची के तहत आयात निर्यात किए गए सभी उत्पादों पर सीमा शुल्क नहीं लगाया जाता है। उदाहरण के लिए जीवन रक्षक दवाओं या उपकरणों खाद्यान्नों या उर्वरको कर नहीं लगाया जाता है। माल के उद्देश्य और माल के मूल्य के आधार पर सीमा शुल्क को निम्नानुसार विभाजित किया गया है।

1, आयात शुल्क (Import duty) – बाहर से देश में मँगाए जाने वाले माल पर शुल्क लगाया जाता है वह आयात शुल्क कहलाता है।

2, निर्यात शुल्क (Export duty) – देश से बाहर जाने वाले माल पर जो कर लगाया जाता है वह निर्यात शुल्क कहलाता है।

3, अतिरिक्त सीमा शुल्क (Extra custom duty) – अतिरिक्त सोमा शुल्क एक कर्त्तव्य है जो भारत में उत्पादित या निर्मित माल पर लगाया जाता है। यह काउण्टर बेलिंग ड्यूट का सबसेट है और इसे सर्विस टैक्स वैट जैसे स्थानीय करों के साथ आयात को बराबर करने के लिए आयातित सामानों पर लगाया जाता है।

4, सुरक्षा शुल्क (Safety duty) – यह सुरक्षा शुल्क स्थानीय घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा करने के लिए लगाया जाता है ताकि घरेलू उत्पादकों और उनकी उत्पादकता को कोई नुकसान अथवा हानि न हो, इसकी गणना स्थानीय उद्योगों को हुए नुकसान के आधार पर की जाती है।

5, एण्टी डंपिंग ड्यूटी (Anti dumping duty) – जब कोई उत्पादक अपने देश के बाजार से कम कीमत पर विदेशी बाजार में उत्पाद को निर्यात करता है तो सरकार सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 की धारा 9 ए के तहत एण्टीडंपिंग शुल्क लगाती है।

6, शिक्षा उपकर (Education Cess) – यह शुल्क माध्यमिक उपकर के लिए 2% तथा अन्य शिक्षा उपकर के लिए 1% की दर से लगाया जाता है|

7, राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक ड्यूटी (National Calamity Contingent duty) – यह शुल्क लम्बाई, पान मसाला या किसी भी अन्य सामान पर लगाया जाता है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इसमें शुल्क की दर 10% से 45% तक होती है।

Custom Low Mcom Notes

(iv) कस्टम ड्यूटी की उगाही (Levy of Custem Duty)

कर/शुल्क के सम्बन्ध में अन्तिम प्रक्रिया इसके वास्तविक संग्रहण की है। शुल्क / कर की वसूली का कार्य प्रशासनिक अथवा अन्य कारणों से भविष्य में टाला जा सकता है जैसा कि उत्पाद शुल्क के सम्बन्ध में होता है जहाँ दायित्व माल के निर्माण पर उदय हो जाता है जबकि उसकी वसूली कारखाने से माल के निकासी के समय की जाती है।

सीमा शुल्क माल पर उद्गृहीता होता है न कि उस व्यक्ति पर जो इसका आयात कर रहा है अथवा सीमा शुल्क का भुगतान कर रहा है। यदि आयात की परिस्थितियाँ एकसमान हैं, तो उसी स्तर पर करारोपण करना ही न्यायाकारी हैं। यही समता भावना सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 12 में निहित है।

सीमा शुल्क का दायित्व सामान्यतः निम्न तीन घटकों पर निर्भर करता है—

(1) माल, समय एवं परिस्थितियाँ, जिसके अन्तर्गत सीमा शुल्क उद्ग्रहणीय हो जाता है।

(2) सीमा शुल्क की राशि एवं उसके संग्रहण के लिए उचित प्रक्रिया व्यवस्था एवं संगठन

(3) समता अथवा नैतिकता के आधार पर अथवा देश के आर्थिक विकास पर नियन्त्रण 8वें कर ढांचे के नियोजन के उपकरण के रूप में सरकार द्वारा अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए विमुक्ति स्वीकृत करना।

Custom Low Mcom Notes

I, आयात (Imports)

1, गृह उपभोग के लिए माल की निकासी (In case of goods cleared for home consumption) – सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा है कि माल का आयात तब प्रारम्भ होता है जब वह भारतीय सामुद्रिक क्षेत्र को पार कर लेता है एवं तब तक जारी रहता है, जब तक वह माल भारत में माल के समूह में मिल नहीं जाता; कर योग्य घटना वहाँ उदित होती है जब माल सीमा शुल्क बैरियर्स पर पहुंचता है एवं गृह उपभोग के लिए ‘प्रवेश बिल’ प्रस्तुत कर दिया जाता है।

[Garden Silk Mills vs UOI, 1999 (113) E,L,T, 358 (S,C,)]

2, भण्डारगृह के लिए निकासी (In case of goods cleared for warehousing) – भण्डारगृह के लिए माल की दशा में सीमा शुल्क बैरियर्स तब पार माना जाएगा, जब माल सीमा शुल्क क्षेत्र से बाहर निकाल लिया जाता है एवं भारत में माल के समूह में शामिल हो जाता है।

[Kiran Spinning Mills vs Collector of Customs: E,C,C, 570 1999 (113) E,L,T, 753 (S,C,)j

 

II, निर्यात (Exports)

सामान का निर्यात तब पूर्ण होता है जब माल भारत के प्रादेशिक जल को पार करता है।

गृह उपभोग एवं भण्डारगृह के लिए माल की निकासी में अन्तर (Distinction between clearance for home consumption and clearance for warehousing) – गृह उपभोग के लिए निकासी का आशय है कि माल पर आयात शुल्क का निपटारा कर दिया गया है, अतः माल उपभोग अथवा उपयोग के लिए निकासी किया गया है। माल का गृह उपभोग के लिए निकासी के स्थान पर उसे भण्डारगृह में जमा कराया जा सकता है एवं सीमा शुल्क संग्रहण तब तक स्थगित कर दिया गया है जब तक माल गृह उपभोग के लिए नहीं निकाला जाता है। सरकारी राजस्व की सुरक्षा आयात के समय निर्धारित शुल्क को दुगुनी राशि के समतुल्य आयातक द्वारा ऐसा बॉण्ड, जिससे वह स्वयं बाध्य है, के निष्पादन से संरक्षित है। आयातक माल भण्डारण के शुल्क, किराया एवं ब्याज के भुगतान के लिए भी दायी है।

Custom Low Mcom Notes

विशेष स्थितियों में शुल्क दायित्व(Duty Liability in Certain Special Circumstances)

(A) भारत में उत्पादित निर्मित माल का पुनः आयात (धारा 20) [Re importation of goods produced/manufactured in India (Section 20)] – यदि माल का भारत से निर्यात के पश्चात् पुनः आयांत किया गया है, तो ऐसा माल आयात शुल्क के उग्रहण के लिए उन्हीं शर्तों एवं प्रतिबन्धों के साथ (यदि कोई है) माना जाएगा जो कि उसी प्रकार के एवं मूल्य के आयात पर लागू हैं।

इसका आशय यह है कि भारत में निर्मित अथवा उत्पादित माल निर्यात के पश्चात् पुनःआयात किया जाता है तो उसे आयातित माल के समकक्ष माना जाएगा।

इस सम्बन्ध में रियायतें (Concessions in this Regard)

निम्नांकित अधिसूचनाओं के अन्तर्गत इस सम्बन्ध में रियायतें दी गयी हैं –

(i) पुनःआयातित माल का पूर्व में निर्यात मरम्मत के लिए अथवा शुल्क वापसी अथवा छूट आदि के साथ किया गया था

 

क्र०सं० निर्यातित माल का विवरण पुनः आयात पर देय सीमा शुल्क
1,

 

शुल्क वापसी, उत्पाद शुल्क की छूट, शुल्क बॉण्ड के अन्तर्गत आदि राशि प्रोत्साहनों के साथ निर्यात किया गया। निर्यात के समय उपलब्ध/प्रयुक्त प्रोत्साहन बिना बराबर।
2,

 

विदेश में मरम्मत के लिए माल का निर्यात किया गया था। मरमत की उचित राशि जिसमें मरम्मत में प्रयुक्त माल का मूल्य (चाहे ऐसी लागतें वास्तव में हुई हो अथवा नहीं) बीमा एवं दोनों ओर का भाड़ा शामिल हो।

 

Custom Low Mcom Notes

उपर्युक्त विमुक्तियों / रियायतों के लिए पूर्व शर्ते

(a) पुनःआयात की समय सीमा (Time-limit for re-importation) — पुनः आयात के लिए समय सीमा 3 वर्ष है, जिसे बढ़ाकर 5 वर्ष किया जा सकता है।।

(b) समान (वही) माल (Same goods) – पूर्व में निर्यातित एवं पुनः आयातित माल वही (Same) होना आवश्यक है।

(c) स्वामित्व में परिवर्तन नहीं (No change in ownership) – उपर्युक्त दोनों विमुक्तियों में वर्णित माल के स्वामित्व में परिवर्तन नहीं हुआ होना चाहिए।

[अधिसूचना संख्या 94/96 Cus, दिनांक 16,12,1996]

(ii) मरम्मत, अनुकूलन, प्रक्रियाकरण, पुनःरचना अथवा समकक्ष उद्देश्यों के लिए (निर्यातित माल के) पुनःआयात की दशा में विमुक्तियाँ –

 

क्र०सं० भारत में निर्मित माल के पुनः आयात उद्देश्य

 

समय सीमा

 

अन्य शर्तें

 

1,

 

मरम्मत एवं अनुकूलन के लिए

 

3 वर्ष (नेपाल की दशा में 10 वर्ष) (अ) पुन: आयत के 6 माह (अधिकतम 1 वर्ष) में पुन: निर्यात हो जाए)

(ब) सहायक/उपआयुक्त सीमा शुल्क माल के वाही (Same) पहचान से संतुष्ट हो |

2, (a) पुनः प्रक्रियाकरण

(b) रिफाइनिंग

(c) रिमेकिंग

(d) समकक्ष क्रियाएँ

[जो (a) से (c) प्रक्रिया के समान हो]

1 वर्ष (स) आयातकर्ता द्वारा पुनर्निर्यात के समय घोषणा एवं बॉण्ड का निष्पादन किया गया हो।

 

 

Custom Low Mcom Notes

सीमा शुल्क अधिनियम के अन्तर्गत शुल्क वापसी एवं वसूली सम्बन्धी प्रावधान समझाइए। Explain the provisions related to refund and recovery’ under Custom Act,

माल के आयातक या निर्यातकों द्वारा कुछ दशाओं में सीमा शुल्क का निर्धारित शुल्क से ज्यादा भुगतान कर दिया जाता है। इस परिस्थिति में ज्यादा भुगतान किए गए मूल्य को वापसी का अधिकार (कुछ दशाओं में ब्याज सहित) आयातक एवं निर्यातकों को मिलता है जिसे सीमा शुल्क अधिनियम के अन्तर्गत शुल्क वापसी या रिफण्ड कहा जाता है।

Custom Low Mcom Notes

शुल्क वापसी की प्रक्रिया (Process of Refund)

सीमा शुल्क अधिनियम के अन्तर्गत शुल्क वापसी के सम्बन्ध में सर्वप्रथम उस व्यक्ति को निर्धारित प्रारूप के अन्तर्गत आवेदन करना होता है तथा आवेदन सभी प्रपत्रों के साथ सम्बन्धित अधिकारी के पास प्रस्तुत करना होता है। सक्षम अधिकारी द्वारा यह सुनिश्चित कर लिए जाने पर कि आवेदक द्वारा दिए गए शुल्क और ब्याज का सम्पूर्ण या कोई भी हिस्सा वापस किया जा सकता है, तो वह शुल्क वापसी का आदेश पारित कर सकता है। शुल्क वापसी से सम्बन्धित प्रमुख प्रावधान निम्न प्रकार हैं

शुल्क वापसी हेतु आवेदन (Application for Refund) – सीमा शुल्क अधिनियम के प्रावधान के अनुसार दावे को उन नियमों में प्रतिलिपि में बनाया जाना चाहिए जो सहायक या उपायुक्त को दिया जाता है। इन अधिकारियों का सीमा क्षेत्र वह होता है जहाँ सीमा शुल्क का भुगतान किया गया था।

(1) यह दावा उपधारा 27(1) के अनुसार ऐसे शुल्क या ब्याज के भुगतान की तारीख से एक वर्ष की समाप्ति से पहले हो जाना चाहिए।

(2) ब्याज की वापसी के लिए वही व्यक्ति दावा कर सकता है जिसने शुल्क या व्याज का भुगतान किया या ऐसी घटना को अंजाम दिया हो।

(3) उपधारा 27 (1) के दूसरे प्रावधान के अन्तर्गत विरोध के तहत शुल्क या ब्याज मामले में रिफण्ड दावे को किसी समय सीमा के बिना दायर किया जा सकता है।

(4) आवेदन पत्र के साथ शुल्क वापसी सम्बन्धी आवश्यक प्रपत्रों के साथ जमा किया (5) शुल्क वापसी के लिए आवेदन-पत्र प्राप्त होने के 3 माह के जाना चाहिए।

अन्दर यदि भुगतान नहीं किया जाता है तो आवेदक को 6% की दर से ब्याज का भुगतान किया जाता है। (6) धारा 26 के अनुसार निर्धारित शर्तों के पूर्ण होने पर यदि सामान के निर्यात पर निर्यात शुल्क का भुगतान किया जाता है तो माल वापसी के बाद ऐसा शुल्क उस व्यक्ति को वापस कर दिया जाता है।

Custom Low Mcom Notes

वसूली सम्बन्धी प्रावधान (Provisions for Recovery)

सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के अन्तर्गत वसूली सम्बन्धी प्रावधान लगभग केन्द्रीय उत्पाद शुल्क कानून के प्रावधानों के जैसे ही हैं। धारा 28 के अन्तर्गत वसूली से पूर्व उस व्यक्ति को अपनी सफाई देने का उचित अवसर दिया जाता है। वसूली से सम्बन्धित अन्य प्रावधान निम्नलिखित है

1, ब्याज की गणना के लिए दर और समय अवधि [उपधारा (2)] – धारा 28 के अनुसार शुल्क का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति द्वारा ब्याज का भुगतान किया जाएगा।

केन्द्र सरकार, आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा 10% और 36% प्रतिवर्ष के बीच व्याज तय कर सकती है। वर्तमान में, केन्द्र सरकार ने अधिसूचना संख्या 33 / 2016 (NT) दिनांक 01-03-2016 के माध्यम से 15% प्रतिवर्ष ब्याज की दर को अधिसूचित किया।

ब्याज की गणना उस महीने के पहले दिन से की जाएगी जो उस माह के बाद आएगा जिसमें शुल्क का भुगतान किया गया था या गलत तरीके से किए गए रिफण्ड की तिथि से ऐसे शुल्क के भुगतान की तिथि तक, जैसा मामला हो।

निम्नलिखित शर्तों के अधीन कोई ब्याज देय नहीं होगा –

(i) धारा 151A के तहत बोर्ड द्वारा आदेश, निर्देश या अनुदेश जारी करने के फलस्वरूप शुल्क भुगतान योग्य हो जाता है।

(ii) इस तरह के आदेश अनुदेश या निर्देश जारी होने की तारीख से 45 दिनों के भीतर स्वेच्छा से शुल्क का पूरा भुगतान किया जाता है।

(iii) किसी भी वाद के स्तर पर इस तरह के भुगतान के खिलाफ अपील करने का कोई अधिकार नहीं है।

2, भुगतान में देरी पर ब्याज – किसी भी फैसले, व्यवस्था, आदेश या किसी भी अदालत, अपीलीय ट्रिब्यूनल या किसी प्राधिकरण या इस अधिनियम या उसके तहत बनाए गए नियमों के किसी भी अन्य प्रावधानों के आदेश में कुछ भी शामिल होने के बावजूद, धारा 28 के प्रावधानों के अनुसार शुल्क का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति, निर्दिष्ट दर पर ब्याज का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार होगा, चाहे वह भुगतान स्वेच्छा से किया जाए या धारा 28 के तहत शुल्क के निर्धारण के बाद।

[उपधारा (1)]

3, ब्याज का भुगतान करने का दायित्व – इस शुल्क पर ब्याज भी देय होगा जिससे यह उपकरण के उपयोग की तिथि से इस शुल्क की वसूली की तिथि तक धारा 28 AM के तहत तय दर पर वसूली जा सके।

4, कुछ मामलों में शुल्क की वसूली (धारा 28 AAA ) – इस धारा के प्रावधान उपकरण (शुल्क छूट या छूट लिपि या शुल्क क्रेडिट लिपि) के मूल धारक से शुल्क की वसूली को यथासम्भव प्राप्त करने के लिए, कहने के लिए, एक DEPB लिपि के लिए, मिलीभगत या जानबूझकर गलती या तथ्यों के दमन द्वारा प्राप्त होता है तो हस्तान्तरी द्वारा लिपि का उपयोग करने से सम्बन्धित शुल्क, उसके मूल धारक से माँगा जा सकता है।

5, शुल्क और व्याज की वसूली का तरीका – उचित अधिकारी उस व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस प्रदान करेगा जिसे उपकरण जारी किया गया था। इस तरह के व्यक्ति को नोटिस प्राप्त होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर नोटिस का जवाब देना होगा कि नोटिस में निर्दिष्ट राशि (ब्याज को छोड़कर) उससे क्यों नहीं वसूल की जानी चाहिए। उचित अधिकारी ऐसे व्यक्ति से वसूल किया जाने वाला शुल्क या ब्याज या दोनों की राशि का निर्धारण करेगा और उस व्यक्ति को आदेश की प्राप्ति की तारीख से 30 दिन की अवधि के भीतर यह चुकाना होगा, चाहे ब्याज की राशि अलग से निर्दिष्ट हो या नहीं। यदि ऐसा व्यक्ति 30 दिनों की अवधि के भीतर राशि चुकाने में विफल रहता है, तो वह धारा 142 की उपधारा (1) के निर्धारित तरीके से पुनः प्राप्त की जाएगी। जहाँ धारा 28 के तहत शुल्क का निर्धारण करने वाला आदेश पारित किया जाता है, वहाँ इस धारा के तहत शुल्क की वसूली के लिए कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता।

[उपधारा (4)]

6, क्रेता से एकत्र किए गए शुल्क को केन्द्रीय सरकार को जमा कराना (उपधारा 22 B) – (i) अपीलीय ट्रिब्यूनल या किसी न्यायालय के किसी भी आदेश या निर्देश में या इस अधिनियम या इसके तहत बनाए गए नियमों के किसी भी अन्य प्रावधान में उल्लेखित किसी भी बात के बावजूद, प्रत्येक व्यक्ति जो इस अधिनियम के तहत शुल्क का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार है और सीमा शुल्क का प्रतिनिधित्व करने वाले तरीके से, ऐसे माल को उसके क्रेता से इस अधिनियम के तहत किसी भी तरह के सामान पर भुगतानित, निर्धारित या आंकलित शुल्क से अधिक मात्रा में राशि एकत्रित करता है, वह केन्द्रीय सरकार के जमा के लिए की गयी राशि का भुगतान करेगा।

[उपधारा (1)]

Custom Low Mcom Notes

Unit 5 Custom Low Mcom Notes
Unit 5 Custom Low Mcom Notes

 Custom Low Mcom Notes


Follow me at social plate Form
Facebook Instagram YouTube Twitter

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
B.com
M.com
B.sc
Help