Unit 3 Input Tax Credit & value of Supply Mcom Notes

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Unit 3 Input Tax Credit & value of Supply Mcom Notes

 

Unit 3 Input Tax Credit & value of Supply Mcom Notes:-  In this post, we want to tell you that, mcom 1st yearinput tax credit & value of supply: eligible and ineligible input tax credit; apportionments of credit and blocked credits; tax credits in respect of capital goods; recovery of excess tax credit; availability of tax credit in special circumstances: transfer of input credit (input service distribution): payment of taxes; refund; doctrine of enrichement; TDS, TCS; Reverse charge merchanism, job work; valuation procedure.

 

इनपुट टैक्स क्रेडिट क्या है? इसकी विशेषताएँ एवं मूल्यांकन प्रक्रिया समझाइए। What is input tax credit? Explain its characteristics and valuation procedure?

इनपुट टैक्स क्रेडिट, इनपुट टैक्स और आउटपुट टैक्स दोनों से सम्बन्धित है। और दोनों प्रकार के करों के बीच की कड़ी है। अधिनियम की धारा 2 (63) के अनुसार, इनपुट टैक्स क्रेडिट का आशय इनपुट टैक्स के क्रेडिट से है। “Input Tax Credit means the credit of Input Tax,”

[Section 2(63) CGST Act, 2017]

वस्तु एवं सेवा कर में इनपुट टैक्स क्रेडिट यह व्यवस्था है, जो यह सुनिश्चित करती है कि किसी एक वस्तु पर दोहरा कर (Dual taxation) न लगे अर्थात् एक वस्तु पर सरकार को जितना कर मिलना चाहिए, उसका पूरा बोझ अन्तिम खरीददार अर्थात् उपभोक्ता पर पड़े और माल की खरीद या बेंच की श्रृंखला में काम करने वाले व्यापारियों पर इसका बोझ न पड़े।

इस प्रकार एक पंजीकृत व्यापारी के विक्रयों पर वसूले गए कर को आउटपुट टैक्स और उसकी खरीदारियों पर चुकाए गए कर को इनपुट टैक्स (Input tax) कहा जाता है। वास्तव में इनपुट टैक्स क्रेडिट, क्रेडिट होते हैं जिनका उपयोग कोई व्यापारी अपने आउटपुट टैक्स की देनदारी को चुकता करने के लिए कर सकता है। यह क्रेडिट उसे उस टैक्स को चुकता करने के बदले में मिलते हैं, जो उसने पहले अपने माल की खरीद के समय कहीं पर चुकाए थे। चूँकि यह क्रेडिट उसे उस इनपुट टैक्स के बदले में मिलते हैं, अतः इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट कहा जाता है।

 

इनपुट टैक्स क्रेडिट की विशेषताएँ (Characteristics of Input Tax Credit)

इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं –

1, पंजीकरण (Registration) – इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने के लिए आवश्यक है कि माल के क्रेता और विक्रेता दोनों GST के अन्तर्गत पंजीकृत हो अन्यथा वे GST सिस्टम का हिस्सा नहीं बन पाएँगे और इनपुट टैक्स क्रेडिट जी०एस०टी० सिस्टम में प्रदर्शित नहीं होगा।

2, करों के प्रकार (Types of Taxes) – वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत आने वाले निम्न प्रकार के करों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था की गई है—

(i) केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST)

(ii) राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST)

(iii) संघ शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर (UTGST)

(iv) एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (IGST)

3, ITC की वापसी (Refund of ITC) – यदि आउटपुट टैक्स की तुलना में ITC की धनराशि अधिक है अर्थात् इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में आउटपुट टैक्स को डेबिट करने के बाद भी राशि शेष है, तो यह राशि अगले माह के लिए अग्रसारित की जा सकती है या वापसी की मांग भी की जा सकती है।

4, व्यापार की सहायक सामग्री (Accessory material of trade) – कोई व्यापारी या उत्पादक या सेवा प्रदाता यदि व्यापार को संचालित करने या उसकी बढ़ोतरी के लिए कुछ वस्तुएँ या सामान या सेवाएँ प्राप्त करता है, तो उन सामग्री या सेवा पर चुकाए गए इनपुट टैक्स का लाभ उसे मिलेगा। भले ही यह सामान आगे बिक्री के लिए नहीं होता।

5, ITC का पलटना (Reversal of ITC) – यदि आपूर्ति प्राप्तकर्ता द्वारा बीजक का 150 दिन के अन्दर नहीं किया जाता है और ITC को उसके इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में जमा कर दिया गया है, तो इस ITC को तब तक के लिए रोक दिया जाएगा, जब तक आपूर्ति प्राप्तकर्त्ता द्वारा सम्बन्धित बोजक का भुगतान नहीं कर दिया जाता। भविष्य में का भुगतान होने पर यह ITC पुन: क्रेडिट लेजर में जमा कर दी जाएगी।

6, समय सीमा (Time Limit) – किसी बीजक पर ITC का लाभ, सम्बन्धित वित्तीय की सितम्बर माह की विवरणी दाखिल करने या वार्षिक विवरणी दाखिल करने की वास्तविक तिथि से (जो पहले हो) पहले ही ले लेना चाहिए। इस तिथि के बाद ITC देय नहीं होगी |

 

इनपुट टैक्स क्रेडिट की मूल्यांकन प्रक्रिया (Procedure for Valuation of Input Tax Credit)

विभिन्न प्रकार के व्यापारों की भिन्न परिस्थिति होने के कारण उनका मूल्यांकन कर की गणना, इनपुट टैक्स क्रेडिट की गणना एवं समायोजन विभिन्न परिस्थितियों के अनुसार होता है।

कुछ परिस्थितियों में इनपुट टैक्स क्रेडिट का मूल्याकंन निम्न प्रकार हो सकता है –

1, आपूर्ति राज्य से बाहर होने पर यदि वस्तु एवं सेवाओं का क्रय-विक्रय राज्य से बाहर दूसरे राज्यों से सम्बन्धित हो तो IGST की भी गणना का ध्यान रखना होता है।

2, एक ही राज्य के अन्दर व्यापार होने पर- अन्तर्राज्यीय आपूर्ति को दशा में CGST एवं SGST या UTGST ही लागू होता है तथा आउटपुट टैक्स का समायोजन भी अकेले ही होता है।

3, कर की दरों में भिन्नता होने पर ऐसी परिस्थिति में कमी या आधिक्य या रख-रखाव इलेक्ट्रॉनिक कैश या क्रेडिट लेजर के माध्यम से होगा।

4, आपूर्ति में पूंजीगत वस्तुओं के सम्मिलित होने पर इस परिस्थिति में पूँजीगत सम्पत्तियों के उपयोग को ध्यान में रखकर ITC की गणना की जाती है।

 

इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने में प्रतिबन्ध (Restrictions in Claiming Input Tax Credit)

वस्तु एवं सेवा कर प्रावधान में कर योग्य वस्तुओं और सेवाओं की पूर्ति में प्राय: प्रत्येक आगत पर चुकाए गए वस्तु एवं सेवा कर की भरपाई अर्थात् इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने की व्यवस्था है लेकिन कुछ मदों में इस प्रावधान को प्रतिबन्धित किया गया है। इन प्रतिबन्धित मदों में वस्तुओं और सेवाओं दोनों की मदें शामिल हैं। साधारण भाषा में इसे नकारात्मक (Negative) सूची कहा जाता है। केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 17(5) में ऐसी मदों का वर्णन किया गया है। इस सम्बन्ध में विस्तृत विवरण अग्र प्रकार है –

नकारात्मक सूची (Negative List)

(1) मोटर वाहन एवं अन्य सवारी (Motor Vehicle and other Conveyanyces),

(2) खाद्य एवं पेय पदार्थ, आउटर कैटरिंग, सौन्दर्य उपचार, स्वास्थ्य सेवाएँ एवं कॉस्मेटिक और प्लास्टिक सर्जरी।

(3) क्लब अथवा स्वास्थ्य अथवा फिटनेस सेण्टर की बीमा।

(4) कर्मचारियों के लिए यात्रा सुविधा।

(5) अचल सम्पत्तियों के निर्माण के लिए कार्य अनुबन्ध

(6) स्वयं के खाते में अचल सम्पत्तियों के निर्माण के लिए प्राप्त वस्तुएँ एवं सेवाएँ ।

(7) किराये पर कैब, जीवन बीमा एवं स्वास्थ्य बीमा

(8) कम्पोजीशन योजना के तहत कर का भुगतान।

(9) व्यक्तिगत उपभोग वाली वस्तुएँ अथवा सेवाएँ अथवा दोनों।

(10) अनिवासी कर योग्य व्यक्ति।

विस्तृत विवरण – नकारात्मक सूची की प्रत्येक मद का विस्तृत विवरण निम्न प्रकार

1, मोटर वाहन एवं सवारी (Motor vehicle and conveyance) – मोटर वाहन और सवारी के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उपलब्ध नहीं है, लेकिन यदि निम्नलिखित परिस्थितियाँ होंगी, तो इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उपलब्ध होगा –

(i) माल का परिवहन अर्थात् माल परिवहन एजेन्सियाँ, कोरियर एजेन्सी आदि को यह सुविधा उपलब्ध होगी।

(ii) मोटर वाहन की आगे आपूर्ति अर्थात् ऐसे शोरूम आदि, जो वाहनों का क्रय-विक्रय करते हैं।

(iii) सवारियों का परिवहन; जैसे- ट्रेवल एजेन्सी, एयर लाइन्स एजेन्सी, रोडवेज आदि।

(iv) ड्राइविंग, फ्लाइंग, नेवीगेशन आदि के प्रशिक्षण में प्रयुक्त वाहन; जैसे- मोटर डाइविंग स्क्रू स्कूल आदि।

2, खाद्य एवं पेय पदार्थ एवं सेवाएँ (Food and beverages and services) – निम्नलिखित वस्तुओं और सेवाओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ देय नहीं है –

(i) खाद्य एवं पेय पदार्थ

(ii) आउटडोर कैटरिंग

(iii) सौन्दर्य उपचार

(v) कॉस्मेटिक एवं प्लास्टिक सर्जरी

(iv) स्वास्थ्य उपचार

3, क्लब, स्वास्थ्य एवं फिटनेस सेण्टर की सदस्यता (Sale of a membership in a club, health and fitness centre) – सदस्यता शुल्क में किसी तरह का ITC का लाभ प्राप्त नहीं होगा।

उदाहरणमि० सुमित, कुंवर साहब फैशन कम्पनी के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, उन्होंने एक फिटनेस सेण्टर की सदस्यता ली, जिसकी ₹5000 की फीस कम्पनी की ओर से चुकाई गई। इस मामले में कम्पनी और मि० सुमित को ITC का कोई लाभ नहीं मिलेगा।

4, जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा कैब को किराये पर लेना (Life insurance, health insurance and rent a cab) — इन सेवाओं के लिए ITC का लाभ उपलब्ध नहीं है, लेकिन यदि सरकार द्वारा अनिवार्य कर दिया गया हो कि नियोक्ता कर्मचारियों को जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा या परिवहन की सेवाएं उपलब्ध कराये तो नियोक्त को इन मदों में किए गए भुगतान पर ITC का लाभ मिलेगा अथवा उसी श्रेणी की आन्तरिक आपूर्तियों का उपयोग बाह्य आपूर्तियों या संयुक्त अथवा मिश्रित आपूर्तियों के किसी हिस्से का उपयोग किया गया हो, तो ITC का लाभ मिलेगा।

5, यात्रा सुविधाएँ (Travel facility) – यदि नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारियों को छुट्टियां बिताने अथवा घर जाने आदि के लिए मुफ्त में यात्रा सुविधा दी जाती है, तो इस सुविधा पर ITC का लाभ नियोक्ता को प्राप्त नहीं होगा, लेकिन यदि यात्रा सुविधा व्यावसायिक कार्यों को पूरा करने के लिए दी जाती है, तो ITC का लाभ देय होगा। 6, कार्य संविदा (Work contract) कार्य संविदाओं पर ITC की सुविधा उपलब्ध नहीं है, लेकिन कार्य अनुबन्ध को आगे बढ़ाने के लिए यदि किसी अन्य की सेवाएँ ली गई हैं, तो इन सेवाओं पर ITC का लाभ देय होगा।

7, कम्पोजीशन योना (Composition scheme) – कम्पोजीशन योजना के अन्तर्गत पंजीकृत व्यक्ति द्वारा चुकाए गए कर पर ITC का लाभ देय नहीं है।

8, अनिवासी व्यक्ति (Non-residents) – अनिवासी व्यक्ति यदि कोई माल या सेवाएँ प्राप्त करते हैं, तो उन्हें ITC का लाभ देय नहीं होगा। यदि वे माल का आयात करते हैं, तो ITC का लाभ देय होगा।

9, व्यक्तिगत उपयोग (Personal uses) – किसी व्यक्ति द्वारा यदि निजी उपयोग के लिए वस्तुएँ या सेवाएँ प्राप्त की जाती है, तो उन्हें ITC का लाभ देय नहीं होगा क्योंकि इन वस्तुओं का आगे विक्रय सम्भव नहीं है और इन पर कोई आउटपुट टैक्स सृजित नहीं होगा।

10, मुफ्त नमूने, नष्ट समान, आदि (Free samples and destroyed goods etc) – व्यापार में माल के खो जाने नष्ट हो जाने, चोरी हो जाने अथवा समाप्त कर दिए जाने वाले माल पर या मुफ्त में उपहार अथवा नमूने बाँटने आदि पर लगने वाले GST पर ITS का लाभ देय नहीं है। उदाहरण के लिए नववर्ष के उपलक्ष्य में वितरित किए जाने वाले कलेण्डर, डायरी आदि पर ITC का लाभ देय नहीं होगा।

11, स्वयं के खाते में अचल सम्पत्ति का निर्माण (Constructing an immovable property on own account) – किसी अचल सम्पत्ति के निर्माण के लिए अपने खाते में प्राप्त माल एवं सेवाओं आदि पर ITC का लाभ देय नहीं होगा, लेकिन यदि प्लाण्ट एवं मशीनरी का निर्माण किया जाता है, तो निर्माण के लिए उपयोग में लाए गए माल एवं सेवाओं पर ITC का लाभ देय होगा।

स्पष्टीकरण (Explanation) – अचल सम्पत्ति के निर्माण के सम्बन्ध में दो शब्द अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। अतः उनकी व्याख्या की जा रही है –

(i) निर्माण (Construction) – अमान्य क्रेडिट के सन्दर्भ में निर्माण शब्द में, निर्माण, नवीकरण सम्बर्द्धन रूपान्तरण, मरम्मत, जिसका सम्बन्ध अचल सम्पत्ति के पूंजीकरण से हो, शामिल है।

(ii) प्लाण्ट एवं मशीनरी (Plant and machinery) – प्लाण्ट एवं मशीनरी का आशय उपकरण, औजार और ऐसी मशीनरी से है, जोकि नींव या संरचना द्वारा भूमि से जुड़ी हुई हो, लेकिन इसमें भूमि, भवन, सिविल संरचना, दूरसंचार, टावर्स, कारखाना भवन के बाहर डालो गई पाइप लाइन शामिल नहीं है।

12, अधिनियम के अनुसार दोषी व्यक्ति (Defaulting persons as per act) – यदि कोई व्यक्ति अधिनियम की धारा 74, 129 एवं 130 के अधीन दोषी पाया गया है जैसे कर अपवंचना करना, माल या सवारी की जब्ती आदि के कारण कर जमा किया है, तो वह ITC के लाभ के लिए पात्र नहीं होगा।

 

वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत कर भुगतान से क्या आशय है? इसकी प्रक्रिया समझाइए। What is meant by payment of tax under GST system? Explain its process,

साधारण शब्दों में, कर भुगतान हेतु उत्तरदायी व्यक्ति द्वारा कर की धनराशि सम्बन्धित विभाग में जमा करने की प्रक्रिया ही कर भुगतान कहलाती है परन्तु वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत अर्थदण्ड, ब्याज, शुल्क आदि भी कर भुगतान में सम्मिलित किए जाते है।

 

कर भुगतान की विशेषताएँ (Features of Payment of Tax)

कर भुगतान की मुख्य विशेषताएँ (Main Features of Payment of Tax)

कर भुगतान की मुख्य विशेषताएँ निम्न प्रकार है –

(1) कर का भुगतान उत्तरदायी व्यक्ति द्वारा किया जाता है तथा यह अनिवार्य है।

(2) कर का भुगतान ऑनलाइन ई-भुगतान प्रक्रिया के माध्यम से होता है। इसमें कागज पर हस्तलिखित व्यवस्था मान्य नहीं है।

(3) कर भुगतान की प्रक्रिया मानवीय हस्तक्षेप से बाहर है।

(4) कभी भी, कहीं भी और किसी भुगतान पद्धति से कर का भुगतान किया जा सकता है।

(5) किसी भी बैंक के माध्यम से कर का आसानी से भुगतान हो जाता है और यह एक कागज रहित प्रक्रिया है।

(6) भुगतान के लिए नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, NEFT, RTGS OTC किसी भी पद्धति का उपयोग किया जा सकता है।

(7) सरकारी खातों में तत्काल और तीव्रता से कर की राशि पहुँच जाती है। (8) सभी प्राप्तियों का इलेक्ट्रॉनिक रूप से मिलान (Reconciliation) हो जाता है।

 

कर भुगतान की प्रक्रिया (Process of Payment of Tax)

वस्तु एवं सेवा कर का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर या कैश लेजर दोनों बहीखातों से किया जा सकता है। इसकी भुगतान की प्रक्रिया अग्रलिखित है –

(1) भुगतान करते समय देयताओं के निस्तारण का क्रम इस प्रकार रहता है –

(i) सर्वप्रथम पिछली कर अवधि का स्वः निर्धारित कर एवं अन्य देयताएँ समायोजित होगी।

(ii) चालू अवधि की स्वः निर्धारित कर की राशि एवं अन्य देयताओं का भुगतान समायोजित होगा।

(iii) विभागीय माँग या अन्य कोई देय राशि सबसे अन्त में समायोजित होगी। समायोजन का यह क्रम अनिवार्य रूप से लागू होगा।

[धारा 49 (8) के अनुसार)]

(2) यदि कोई करदाता निर्धारित अवधि में करों का भुगतान करने में असफल रहता है, तो उसे विलम्ब की अवधि में बकाया राशि पर 18% की दर से ब्याज देना होगा।

[धारा 50 CGST Act, 2017]

(3) यदि किसी अपंजीकृत व्यक्ति द्वारा कर का भुगतान किया जा रहा है, तो उसे एक अस्थायी पहचान नम्बर (Temporary Identification Number) सृजित करना होगा।

(4) यदि कोई करदाता क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भुगतान करता है, तो उसे पहले अधिकृत बैंक के माध्यम से GSTN के साथ लिंक कराना होगा।

(5) कर का भुगतान GSTR-3, जो अगले माह की 20 तारीख को जमा होगी, से पूर्व करना होगा।

(6) कर देयता का भुगतान सरकार के खाते में जमा होने की तिथि को माना जाएगा।

 

कर वापसी (रिफण्ड) से आप क्या समझते हैं? इसका दावा कैसे किया जाता है? What do you mean by refund of tax? How does the claim for refund is made,

कर भुगतान की प्रक्रिया में कभी-कभी किसी कारणवश देय राशि से अधिक राशि, सम्बन्धित व्यक्ति या फर्म द्वारा जमा कर दी जाती है तो यह आधिक्य की राशि को वापस प्राप्त करना उसका नैतिक एवं कानूनी अधिकार है। अतः सरकार के सम्बन्धित विभाग द्वारा कर की अधिक जमा राशि को वापस करने की प्रक्रिया को कर वापसी (रिफण्ड) कहा जाता है।

 

रिफण्ड की प्रक्रिया (Process of Refund)

1, रिफण्ड के लिए आवेदन पत्र देना (Application for Refund)

किसी कर, अर्थदण्ड, फोस या अन्य धनराशि का वापसी के लिए करदाता को निर्धारित प्रारूप GST RFD-01 पर कॉमन पोर्टल पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से एक निर्धारित समय-सीमा में आवेदन पत्र देना होगा लेकिन यदि इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में उपलब्ध शेष रिफण्ड लेना है, तो अलग से आवेदन पत्र देने की आवश्यकता नहीं है। उसकी वापसी का दावा भरे गए रिटर्न GSTR-03 या GSTR-04 या GSTR-07 के आधार पर स्वतः निर्धारित होगा।

II, समय सीमा (Time Limit)

वापसी का आवेदन पत्र प्रासंगिक (Relevant) तिथि से दो वर्ष के अन्दर प्रस्तुत करना होगा। विभिन्न परिस्थितियों में यह प्रासंगिक तिथि भिन्न-भिन्न होती हैं; जैसे—

(1) जब माल का निर्यात वायु मार्ग या समुद्री मार्ग से किया जा रहा है। — जिस तिथि को वायुयान या जलयान भारत छोड़ दे।

(2) जब माल का निर्यात सड़क मार्ग से हो रहा हो जाए। — जिस तिथि को भारत का बॉर्डर पार हो।

(3) जब माल डाकघर के माध्यम से भेजा जा रहा हो। — डाकघर द्वारा माल भेजने की तिथि |

(4) यदि सेवाओं की आपूर्ति की गई और भुगतान प्राप्त होने से पहले ही सेवा पूर्ण हो गई है। — भुगतान प्राप्त होने की तिथि।

(5) यदि सेवाएँ अग्रिम भुगतान प्राप्त होने के बाद दी गई हैं। — बीजक की तिथि।

(6) अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी वित्तीय वर्ष की अन्तिम तिथि। की स्थिति में।

(7) यदि माना हुआ (Deemed) निर्यात है, — तो विवरणी दाखिल करने की तिथि।

(8) अपीलकर्ता के पक्ष में अपील के निर्णय के कारण। — आदेश की तिथि।

(9) अस्थायी (provisional) कर निर्धारण के कारण — अन्तिम कर निर्धारण की तिथि।

(10) यदि आवेदक आपूर्तिकर्ता नहीं है। — जिस तिथि को माल प्राप्त हुआ है।

 

III, साक्ष्य प्रस्तुत करना (Presentation of Evidence)

वापसी का आवेदन अग्रलिखित साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करना होगा –

(1) धारा 107 एवं 112 के अधीन अपील निस्तारण के कारण वापसी की स्थिति में अपील की सन्दर्भ संख्या एवं आदेश की एक प्रति ।

(2) यदि माल के निर्यात सम्बन्धी वापसी है, तो एक विवरण (Statement), जिसमें शिपिंग बिल नम्बर तथा तरीख दिखाई गई हो तथा सम्बन्धित बीजकों के नम्बर तथा तिथियों सहित।

(3) यदि सेवाओं के निर्यात सम्बन्धी वापसी का दावा है तो एक विवरण जिसमें बीजकों के नम्बर, तिथियाँ तथा बैंक का रियलाइजेशन प्रमाण पत्र ।

(4) चार्टर्ड एकाउण्टेण्ट या कॉस्ट एकाउण्टेण्ट का प्रमाण-पत्र ।

(5) अन्य मामलों में बीजकों की संख्या एवं तिथियों के विवरण वाला स्टेटमेण्ट ।

 

IV, पावती पत्र (Acknowledgement)

यदि रिफण्ड इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर से है तो GST RFD-02 से पावती पत्र स्वतः आ जाएगा अन्यथा की दशा में आवेदन पत्र सम्बन्धित अधिकारी के पास जाएगा तथा वह अधिकारी पूर्णता की जांच कर कॉमन पोर्टल से पावती जारी करेगा।

 

V, अस्थायी वापसी (Provisional Refund)

जीरो रेटेड सप्लाई एवं निर्यात के मामलों में सक्षम अधिकारी द्वारा GST RFD-04 पर 90% धनराशि की अस्थायी (Provisionally) वापसी कर दी जाएगी बशर्ते करदाता पर पिछले 5 वर्षों में किसी मामले में कोई अभियोजन न रहा हो। इस धनराशि की स्वीकृति पावती पत्र की तिथि से 7 दिन के अन्दर की जाएगी। स्वीकृति के समुचित अधिकारी द्वारा GST RFD-05 पर एक भुगतान सलाह (Payment advice) निर्गत की जाएगी और धनराशि आवेदक के बैंक खाते में हस्तान्तरित कर दी जाएगी।

[नियम 91 के अनुसार]

Input Credit value Supply

VI, रिफण्ड वापसी का आदेश (Order Sanctioning Refund)

(1) वापसी के आवेदन पत्र का समुचित अधिकारी द्वारा परीक्षण करने के बाद यदि वह सन्तुष्ट है कि आवेदक को रिफण्ड की धनराशि देय है, तो वह इस धनराशि की स्वीकृति का आदेश फॉर्म GST RFD-06 में जारी करेगा जिसमें अस्थायी रूप से यदि कोई वापसी दी गई है या कोई करदेयता (माँग) बकाया है, तो उस बकाया का समायोजन करने के बाद शेष राशि का आदेश में उल्लेख होगा। लेकिन यदि वापसी की सम्पूर्ण धनराशि का समायोजन कर लिया जाता है, तो आवेदक के लिए GST RFD-07 के पार्ट A में आदेश जारी किया जाएगा।

[नियम 92 (1) के अनुसार]

(2) यदि समुचित अधिकारी या कमिश्नर यह समझते हैं कि वापसी की धनराशि रोकने योग्य है तो वह अधिकारी लिखित कारणों की सूचना देते हुए GST RFD-07 के पार्ट B के आदेश पारित करेगा।

[नियम 92 (2) के अनुसार]

(3) यदि समुचित अधिकारी इस बात से सन्तुष्ट है कि वापसी की धनराशि का पूरा हिस्सा या उसका कोई हिस्सा वापसी योग्य नहीं है या आवेदक को वापस नहीं दिया जा सकता है तो वह अधिकारी 15 दिन का समय देकर GST RFD-08 पर एक कारण बताओ नोटिस जारी करेगा। आवेदक द्वारा GST RFD-09 पर अपना जवाब प्रस्तुत किया जाएगा। जवाब को संज्ञान में लेकर और आवेदक को सुनवाई का पर्याप्त अवसर देकर GST RFD-06 पर स्वीकृति या निरस्तीकरण का आदेश जारी होगा और इसकी सूचना इलेक्ट्रॉनिक रूप में आवेदक को दी जाएगी।

[नियम 92 (3) के अनुसार]

VII, वापसी की राशि उपभोक्ता कल्याण कोष में डालना (Transfer of Refund to Consumers Welfare Fund)

यदि सम्यक अधिकारी इस बात से सन्तुष्ट हो जाता है कि वापसी की धनराशि आवेदक को नहीं दी जा सकती तो वह GST RFD-06 पर आदेश पारित करके और GST RFD-05 पर भुगतान की सलाह देकर इस राशि को उपभोक्ता कल्याण कोष में हस्तान्तरित कर सकता है।

[नियम 92 (4) के अनुसार]

VIII, विलम्ब के लिए व्याज (Interest on Delayed Refund)

यदि आवेदन प्राप्त होने के 60 दिनों के अन्दर वापसी की धनराशि का भुगतान आवेदक को नहीं किया जाता तो इस राशि पर 61वें दिन से 6% की दर से ब्याज देय होगा। इस ब्याज की राशि को GST RFD-05 पर भुगतान एडवाइस जारी करने के बाद आवेदक के बैंक खा में हस्तान्तरित कर दिया जाएगा।

[नियम 94 के अनुसार]

वस्तु एवं सेवा कर की वापसी हेतु निर्धारित फॉर्म (Forms for Refund of GST Claims)

वापसी की समस्त कार्यवाही निर्धारित प्रारूपों पर ही होगी। इन प्रारूपों के साथ संलग्न होने वाले प्रपत्रों का विवरण भी इन्हीं प्रारूपों में दिया गया है। वापसी के निर्धारित फॉर्म निम्नलिखित है –

(1) GST RFD-01 — रिफण्ड के लिए आवेदन पत्र (Application for refund)

(2) GST RFD-01 (A) — रिफण्ड का मैनुअल आवेदन पत्र [Application for refund (Manual)]

(3) GST RFD-01 (B) — विस्तृत वापसी आदेश (Refund order details)

(4) GST RFD-02 — पावती पत्र (Acknowledgement)

(5) GST RFD-03 — आवेदन-पत्र में कमियाँ सूचित करना (Deficiency memo)

(6) GST RFD-04 — अस्थायी वापसी आदेश (Provisional refund order)

(7) GST RFD-05 — भुगतान सलाह (Payment advice)

(8) GST RFD-06 — वापसी की स्वीकृति/निरस्तीकरण आदेश (Refund Sanction/Rejection order)

(9) GST RFD-07 — पूर्ण समायोजन का आदेश-पत्र (Order for complete adjustment of sanctioned refund)

(10) GST RFD-08 — आवेदन पत्र निरस्त करने का नोटिस (Notice for rejection of application for refund)

(11) GST RFD-09 — कारण बताओ नोटिस का जवाब (Reply to show cause notice)

(12) GST RFD-10 — संयुक्त राष्ट्र संघ एजेन्सियों, दूतावासों आदि के लिए। आवेदन-पत्र (Application for refund by any specialized agency of UN or any multilateral financial institution and organisation, consulate or Embassy of foreign countries)

(13) GST RFD- 11— बॉण्ड भरने के लिए (Furnishing of bond or letter of undertaking for export of goods and services)

Input Credit value Supply

वस्तु एवं सेवा कर के सन्दर्भ में स्रोत पर कर कटौती क्या होती है? कटौती करने के लिए कौन उत्तरदायी है? What is TDS (Tax Deducted at Source) under GST? Who is liable to deduct TDS?

आयकर के ‘कर पर कटौती’ की भाँति ही वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत भी कर की राशि का भुगतान करते समय पूर्व निर्धारित दर से स्रोत पर कटौती करने वाला कटौती करके सरकार के पास जमा करता है तो इस प्रक्रिया को ही स्रोत पर कर कटौती कहा जाता है। वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत यह व्यवस्था 1 अक्टूबर, 2018 से प्रभावी है।

Input Credit value Supply

परिभाषा (Definition)

स्रोत पर कर की कटौती को इस प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है “एक निश्चित धनराशि के ऊपर के कर योग्य सौदों पर कुछ श्रेणी के भुगतानकर्त्ताओं द्वारा निश्चित प्रतिशत से जब भुगतान के समय भुगतान प्राप्तकर्त्ता की सहमति के बिना ही कर की कटौती कर ली जाए, तो इसे उद्गम स्थल पर (स्रोत पर) कर की कटौती कहा जाता है।”

मुख्य विशेषताएँ (Main Features)

स्रोत पर कर की कटौती की मुख्य विशेषताएँ निम्न प्रकार है –

(1) वस्तु या सेवा के प्राप्तकर्त्ता द्वारा धनराशि के भुगतान के समय काटा जाता है।

(2) निर्धारित शर्तों के पूरा होने पर इस कर की कटौती पूर्व निर्धारित दरों से होना अनिवार्य हैं।

(3) केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 51 में इसका पूर्ण विवरण दिया गया है।

(4) इस कर को काटने में असफल रहने पर दायित्व का निर्धारण होता है तथा आर्थिक दण्ड का भी प्रावधान है।

कानूनी प्रावधान (Provisions of Law)

स्रोत पर कर कटौती के प्रावधान को केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 51, एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 20 एवं संघ शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 21 के अनुसार स्रोत पर कर की कटौती को अनिवार्य किया गया है। वस्तु एवं सेवा कर परिषद् 28वीं बैठक, जोकि 21-07-2018 को सम्पन्न हुई थी, में स्रोत पर कर की कटौती प्रावधान को लागू करने की तिथि 1 अक्टूबर, 2018 निर्धारित की थी।

Input Credit value Supply

कर का कटौतीकर्त्ता कौन है (Who is Deductor of TDS)

केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 51(1) के अनुसार, निम्नलिखित को लोत पर कटौती करने को अधिकृत किया गया है—

(1) केन्द्र राज्य सरकार के विभाग या प्रतिष्ठान।

(2) स्थानीय प्राधिकारी।

(3) सरकारी एजेन्सीजा

(4) कोई प्राधिकारी / बोर्ड/संस्थान, जो –

(i) संसद या विधान मण्डल द्वारा पारित अधिनियम के अधीन स्थापित हो |

(ii) सरकार द्वारा स्थापित ऐसे संस्थान, जिनमें 51% या इससे अधिक अंश सरकार के हो |

(5) केन्द्र (राज्य) स्थानीय प्राधिकारी द्वारा सोसाइटीज पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अधीन स्थापित सोसाइटी

(6) पब्लिक सेक्टर अण्डरटेकिंग

Input Credit value Supply

कटौती कब आवश्यक है (When Tax Deduction is Required)

निम्नलिखित परिस्थितियों में स्रोत पर कर की कटौती आवश्यक है –

(1) जब एक अकेले अनुबन्ध के अधीन कर योग्य आपूर्ति का मूल्य 2,50 लाख से अधिक हो।

(2) यदि आपूर्तियों में कर योग्य आपूर्तियों और कर मुक्त आपूर्तियों दोनों शामिल हैं और अनुबन्ध राशि ₹2,50 लाख से अधिक है, तो कर की कटौती तभी होगी जब कर योग्य आपूर्तियों का मूल्य ₹2,50 लाख से अधिक होगा।

Input Credit value Supply

कटौती की आवश्यकता नहीं (Tax Deduction is not Required)

निम्नलिखित परिस्थितियों में स्रोत पर कर की कटौती आवश्यक नहीं होगी-

(1) जब किसी अनुबन्ध में कर योग्य आपूर्तियों का मूल्य र 2,50 लाख या इससे कम हो।

(2) जब आपूर्ति में कर योग्य और कर मुक्त दोनों आपूर्तियां शामिल हों, लेकिन कर योग्य आय का मूल्य 2,50 लाख या इससे कम हो।

(3) ऐसी सेवाओं की आपूर्ति का मूल्य, जो कर मुक्त की श्रेणी में आती हैं।

(4) उन वस्तुओं की आपूर्ति के मूल्य पर जिन पर, वस्तु एवं सेवा कर के अधीन कर लागू नहीं होगा; जैसे

(i) पेट्रोलियम क्रूड (Petrolium crude)

(ii) पेट्रोल (Petrol)

(iii) हाई स्पीड डीजल (High speed diesel)

(iv) प्राकृतिक गैस (Natural gas)

(v) विमानन टरबाइन ईंधन (Aviation turbine fuel)

(vi) मानवीय उपभोग के लिए शराब (Alcohol for human consumption)

(5) उन बीजकों का भुगतान जो 1-10-2015 से पूर्व जारी हो चुके थे।

(6) जब कुछ राशि का अधिम भुगतान 1-10-2018 से पूर्व हो गया हो, लेकिन बीजक (1-10-2018 को या उसके बाद जारी हुआ, तो अग्रिम भुगतान पर कर नहीं करेगा।

(7) यदि कोई बीजक 1-7-2017 से पूर्व जारी कर दिया गया था, लेकिन भुगतान 1-7-2017 के बाद में हुआ है।

(8) जब आपूर्तिकर्ता का स्थल और आपूर्ति का स्थल तो एक ही राज्य में हो, लेकिन आपूर्ति प्राप्तकर्त्ता (Deductor) किसी अन्य राज्य में पंजीकृत हो।

(9) केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की अनुसूची (Schedule III) में वर्णित वस्तुएँ चाहे वे कितनी ही धनराशि की हो।

(10) जब भुगतान प्राप्त करने वाला (Deductee) रिवर्स चार्ज के अन्तर्गत कर का भुगतान कर रहा हो।

(11) यदि अपंजीकृत आपूर्तिकर्ता को भुगतान किया जा रहा हो।

(12) यदि भुगतान केवल उपकर (Cess) से सम्बन्धित हो ।

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TDS विवरणी (Return of TDS)

TDS से सम्बन्धित रिटर्न फाइल करने के सम्बन्ध में मुख्य प्रक्रिया निम्न प्रकार है –

(1) TDS की रिटर्न फॉर्म GSTR-07 में ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों प्रकार से भरी जा सकती है।

(2) कर की कटौती करने वाले माह से अगले माह की 10 तरीख तक GSTR-07 में विवरणी दाखिल करनी होगी।

[धारा 51 (2) CGST Act, 2017]

(3) फॉर्म GSTR-07A पर कर की कटौती करने वाले को TDS का प्रमाण-पत्र (Certificate) जारी करना होगा।

[धारा 51 (3) CGST Act, 2017]

(4) GSTR-07 भरने के 5 दिन के अन्दर प्रमाण पत्र जारी करना होगा।

[धारा 51 (4)]

(5) भुगतान प्राप्तकर्ता (Deductee) TDS का इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकता है।

(6) TDS के भुगतान एवं विवरणी आदि दाखिल करने की सम्पूर्ण प्रक्रिया गवर्नमेण्ट पोर्टल पर होगी।

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दण्ड व्यवस्था (Penalty Provision)

(1) यदि TDS का कटौती कर्त्ता निर्धारित समय में रिटर्न जमा करने में असफल रहता है, तो उसे 100 प्रतिदिन प्रति अधिनियम के अनुसार विलम्ब के दिवसों के लिए अर्थदण्ड देना होगा जो अधिकतम ₹ 5,000 होगा।

(2) यदि TDS का कटौतीकर्त्ता निर्धारित अवधि में TDS का प्रमाण-पत्र भुगतान प्राप्तकर्ता (Deductee) को उपलब्ध नहीं कराता तो उसे 100 प्रतिदिन प्रति अधिनियम की दर से विलम्ब अवधि का दण्ड देना होगा जो अधिकतम ₹5,000 होगा।

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जॉब वर्क से आशय (Meaning of Job Work)

वस्तुओं की निर्माण की प्रक्रिया में यह आवश्यक नहीं है कि सभी प्रक्रियाओं को एक ही व्यक्ति या संस्था द्वारा पूर्ण किया जाए। किसी उत्पाद को अन्तिम रूप से उपभोग के लिए तैयार करने से पूर्व कई ऐसे अनेक छोटे-छोटे कार्य होते हैं, जिन्हें उस वस्तु का मूल उत्पादक सम्पन्न नहीं कर पाता और वह ऐसे कार्य को किसी एक अन्य व्यक्ति से या कई अन्य व्यक्तियों से पूर्ण कराता है; जैसे-वस्तु की रंगाई करना, ढलाई करना, फैब्रीकेटिंग करना, पैकिंग करना आदि। जो व्यक्ति इन कार्यों को कराता है उसे प्रधान या स्वामी तथा जो व्यक्ति इन कार्य को करता है, उसे ‘जॉब वर्कर’, और जो कार्य किया जाता है उसे ‘जॉब वर्क’ कहा जाता है।

वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत जॉब वर्क का अध्ययन इसलिए आवश्यक हो जाता है। क्योंकि माल एक स्थान से दूसरे स्थान को स्थानान्तरित होता है और माल पर कर लगाना होता है तथा माल की ढुलाई के लिए नियमानुसार चालान, ई-वे बिल आदि की आवश्यकता होती है।

परिभाषा (Definition) – वस्तु एवं सेवा कर के केन्द्रीय अधिनियम में जॉब वर्क को परिभाषित किया गया है। अधिनियम के अनुसार वस्तु पर कोई ट्रीटमेण्ट या प्रोसेस जब एक व्यक्ति द्वारा किसी दूसरे पंजीकृत व्यक्ति के कहने पर किया जाता है, तो इसे जॉब वर्क और इसी आधार पर कार्य करने वाले को जॉब वर्कर कहा जाता है।

Job work’ means any treatment or process undertaken by a person on goods belonging to another registered person and the expression Job worker’ shall be constructed accordingly,

स्पष्टीकरण (Explanation) –

यदि कोई रजिस्टर्ड व्यक्ति अपने सोने के बिस्किट ज्वैलरी बनाने के लिए किसी कारीगर (सुनार) को भेजता है, तो बिस्किट भेजने वाला व्यक्ति प्रधान और ज्वैलरी बनाने वाला व्यक्ति जॉब वर्कर तथा ज्वैलरी बनाने के काम को जॉब वर्क कहा जाता है।

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वस्तु एवं सेवा कर तथा जॉब वर्क से सम्बन्धित प्रावधान (Provision Related to GST and Job Work)

जॉब वर्क के सम्बन्ध में जी०एस०टी० के अधीन क्या प्रावधान हैं, उनका वर्णन निम्नवत् किया जा रहा है –

1, पंजीकरण (Registration) – जी०एस०टी० के अधीन प्रधान का पंजीकरण आवश्यक है। यदि प्रधान अपंजीकृत है, तो उसके द्वारा कराया गया कार्य जॉब वर्क नहीं माना। जाएगा। जॉब वर्कर के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य नहीं है, यदि उसका कारोबार पंजीकरण के निर्धारित सीमा से कम हो। चूँकि जॉब वर्कर सेवाओं का पूर्तिकर्ता होता है, अतः पंजीकरण कराना उसके हित में होता है।

2, इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) – जो माल प्रधान द्वारा जॉब वर्क के लिए भेजा गया है उसकी खरीद पर यदि प्रधान द्वारा कर का भुगतान किया गया है, तो वह इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ ले सकता है। इसके लिए आवश्यक नहीं है कि जॉब वर्क के लिए खरीदा गया माल पहले प्रधान के व्यावसायिक स्थल पर आए, फिर जॉब वर्क के लिए भेजा जाए। यह माल सीधे आपूर्तिकर्ता द्वारा ही प्रधान के निर्देश पर जॉब वर्कर को भेजा जा सकता है।

3, जॉब वर्कर को माल भेजने की तिथि (Effective date of goods sent to job workers) – यदि माल प्रधान के व्यावसायिक स्थल से जॉब वर्कर को भेजा जाता है, तो व्यावसायिक स्थल से माल निकासी की तिथि ही जॉब वर्कर को माल भेजने की तिथि होगी। यदि प्रधान के निर्देश पर माल के आपूर्तिकर्ता द्वारा सीधे माल जॉब वर्कर को भेजा जाता है, तो जॉब वर्कको माल भेजने की तिथि वह होगी, जिस तिथि को माल जॉब वर्कर को प्राप्त होगा। इस तिथि का निर्धारण इसलिए आवश्यक है, क्योंकि यदि जॉब वर्क वाला माल वापस प्रधान को प्राप्त नहीं होता तो इसी तिथि को कर लगाया जाएगा।

4, जॉब वर्क के बाद माल की वापसी (Goods received back after job, work) – जॉब वर्क के बाद जॉब वर्क के प्रधान को एक निर्धारित समय सीमा में माल वापस प्राप्त हो जाना चाहिए। समय सीमा इस प्रकार है –

(i) इनपुट माल (उपभोग योग्य) – 1 वर्ष

(ii) पूँजीगत माल – 3 वर्ष

यदि निर्धारित समय – सीमा में माल वापस प्राप्त नहीं होता है, तो उसे माल की मानकर उस तिथि से कर लगाया जाएगा जिस तिथि को माल जॉब वर्कर को भेजा गया था और इस कर का भुगतान ब्याज सहित प्रधान को करना होगा।

स्पष्टीकरण (Explanation) – मोल्ड्स, डाई, जिग्स, फिक्चर्स एवं औजारों को पूँजीकरण माल नहीं माना जाएगा।

उदाहरण (Example) 1,

एक पंजीकृत वस्त्र निर्माता नमन अपैरल्स 1 अगस्त, 2017 को एक पंजीकृत जॉबकर्त्ता मै० सुमित एम्ब्रॉयडर्स को 200 कुर्ते उन पर कढ़ाई के लिए भेजते हैं। कढ़ाई का कार्य पूरा होने के बाद मै० सुमित एम्ब्रॉयडर्स 20 सितम्बर, 2017 को कुर्ते वापस कर देते हैं। ऐसी स्थिति में कोई कर नहीं लगेगा क्योंकि माल एक वर्ष के भीतर ही प्रधान को वापस प्राप्त हो गया है।

उदाहरण (Example) 2,

यदि उपर्युक्त मामले में मै० सुमित एम्ब्रॉयडर कढ़ाई के बाद कुतें 20 सितम्बर, 2018 को वापस करते हैं, तो चूँकि वापसी की अवधि एक वर्ष बाद की है अतः इसे आपूर्ति मानकर 1 अगस्त, 2017 से कर लगाया जाएगा और इस कर का भुगतान मै० नमन अपैरल्स को निर्धारित ब्याज के साथ करना होगा।

5, माल भेजने के लिए प्रपत्र (Accompanying documents) – जॉब वर्क के लिए भेजे जाने वाले माल के प्रपत्रों के सम्बन्ध में स्थिति इस प्रकार से होगी –

(i) जॉब वर्क के लिए भेजे जाने वाली सभी वस्तुओं के साथ चालान अवश्य होगा।

(ii) चालान प्रधान द्वारा निर्गत किया जाएगा।

(iii) माल के साथ ई-वे बिल होगा, यदि दूरी निर्धारित सीमा से अधिक है तथा म ₹50,000 से अधिक है।

(iv) यदि जॉब वर्कर द्वारा अगले जॉब वर्कर को या प्रधान को माल टुकड़ों में भेज रहा है, तो इसके लिए जॉब वर्कर द्वारा नया चालान जारी किया जाएगा।

(v) चालान के निम्नलिखित विवरण अंकित होगे—

(a) सुपुर्दगी चालान का नम्बर व दिनांक,

(b) प्रेषक एवं प्राप्तकर्त्ता का नाम, पता व GSTIN नम्बर,

(c) HSN Code, माल की मात्रा एवं उसका विवरण,

(d) CGST, SGST, IGST आदि के लिए अलग-अलग कर योग्य मूल्य, कर की दर, कर की राशि का विवरण,

(e) आपूर्ति का स्थान,

(f) हस्ताक्षर।

6, विवरण दाखिल करना (Filing of return) – चालानों का विवरण इस प्रकार से दाखिल करना होगा

(i) फॉर्म GSTR-01 में

(ii) GST ITC-04 में

प्रधान द्वारा फॉर्म GST ITC-04 प्रत्येक तिमाही में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमे निम्नलिखित विवरण होगा –

(1) जॉब वर्क के लिए भेजे गए माल का चालान का विवरण

(2) जॉब वर्कर से वापस प्राप्त माल का विवरण

(3) एव जॉब वर्कर से दूसरे जॉब वर्कर को माल भेजने का विवरण।

7, जॉब वर्कर के स्थान से माल की आपूर्ति (Supply of goods from the place of job worker) – कभी-कभी ऐसी स्थिति आ सकती है कि जॉब वर्कर के स्थान से ही माल की पूर्ति कर दी जाए। ऐसी स्थिति में, यदि जॉब वर्कर रजिस्टर्ड व्यक्ति है, तो प्रधान उसके व्यावसायिक स्थल से सीधे माल की पूर्ति कर सकता है। यदि जॉब वर्कर रजिस्टर्ड नहीं है, तो प्रधान को सबसे पहले जॉब वर्कर के व्यावसायिक स्थल को अपना अतिरिक्त व्यावसायिक स्थल घोषित करना होगा, तभी वह उस स्थान से माल की पूर्ति कर सकेगा।

Unit 3 Input Tax Credit & value of Supply Mcom Notes
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