Unit 2 Levy and Collection of G.S.T Mcom Notes

Unit 2 Levy and Collection of G.S.T Mcom Notes

Contents

Unit 2 Levy and Collection of G.S.T Mcom Notes

 

Unit 2 Levy and Collection of G.S.T Mcom Notes:- In this post, we want to tell you that, mcom 1st year Levy and collection of GST: Taxable event, “Supply” of goods and services; place of supply; within state, import and export; time of supply; valuation for GST – Valuation Rules, Import and export: time of supply. Explation from GST; small supplies and composition scheme; classification of goods and services; composite and mixed supplies. Levy and Collection G.S.T

 

उगाही एवं जी०एस०टी० का संग्रहण (Levy and Collection of GST)

वस्तु एवं सेवा कर में आपूर्ति से क्या आशय है? इसके प्रमुख तत्त्व क्या हैं? What is meant by supply under GST law? What are its main factors?

‘आपूर्ति’ शब्द से आशय व्यापारिक व्यवहार में किसी वस्तु के हस्तान्तरण से है। वस्तु एवं सेवा कर में आपूर्ति का महत्त्वपूर्ण स्थान है क्योंकि वस्तु एवं सेवा कर का उदय ही आपूर्ति के कारण हुआ और इसके अन्तर्गत वस्तु एवं सेवाओं की आपूर्ति में कोई अन्तर नहीं किया गया है।

परिभाषा (Definition) – आपूर्ति शब्द को केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम में परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम में कहा गया है कि आपूर्ति शब्द का वही आशय है जो केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 7 व्यक्त किया गया है।

“Supply shall have the same meaning as assigned to it in section 7 of the Central Goods and Services Act,”

[Sec, 2 (21) IGST Act, 2017]

1, धारा 7 में परिभाषा का पहला हिस्सा (First part of definition of supply in u/s, 7) – केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 7 में आपूर्ति शब्द को विस्तृत रूप से समझाया गया है। धारा 7(1) (a) में कहा गया है कि विक्रय, हस्तान्तरण, विनिमय वस्तु विनिमय, अनुज्ञा पत्र, किराये पर देना, पट्टा या निस्तारण आदि के सभी स्वरूप, ज प्रतिफल के लिए एवं व्यवसाय के दौरान या व्यवसाय के उत्थान के लिए किए गए हों, आपूर्ति कहलाते हैं।

“Supply includes-All forms of Goods and/or services such as: Sale, Transfer, Barter, Exchange, License, Rental Lease or Disposal, made or agreed to made for a consideration by a person in course of or furtherance of business,”

[Sec, 7 (1) (a) CGST Act, 2017]

2, परिभाषा का दूसरा हिस्सा (Second part of definition of supply) – केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 7(1) (b) के अनुसार, यदि प्रतिफल के लिए सेवाओं का आयात किया गया, तो भले ही वे व्यवसाय के दौरान या व्यवसाय के उत्थान के लिए हों या न हों, आपूर्ति में शामिल होगी।

Levy and Collection G.S.T

“Import of services for a consideration whether or not in the course

[Sec, 7 (1) (b) CGST Act, 2017]

3, परिभाषा का तीसरा हिस्सा (Third part of definition of supply) – or furtherance of business,” परिभाषा के इस हिस्से के लिए केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 7 (1) (c) के अनुसार, “जो क्रियाएँ अधिनियम की अनुसूची (Schedule) I में वर्णित हैं उन्हें प्रदान करना या प्रदान करने के लिए सहमत होना भी आपूर्ति है भले ही उसमें प्रतिफल न हो। “The activities specified in schedule I made or agreed to be made without a consideration,”

[Sec, 7 (1) (c) CGST Act, 2017]

4, परिभाषा का चौथा हिस्सा (Fourth part of definition of supply) – परिभाषा के इस हिस्से के लिए केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 7 (1) (d) के अनुसार, अनुसूची II में वर्णित क्रियाएँ माल या सेवा की आपूर्ति की श्रेणी में शामिल की जाएँगी।

“The activities to be treated as supply of goods or supply of services as referred to in schedule II,”

[Sec, 7(1) (d) CGST Act, 2017]

5, परिभाषा का पाँचवाँ हिस्सा (Fifth part of definition of supply) – परिभाषा के इस हिस्से में केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 7 (2) के अनुसार, अनुसूची 111 में वर्णित क्रियाएँ या लेन-देन तथा केन्द्र सरकार या राज्य सरकार या स्थानीय निकाय द्वारा जन अधिकारी के रूप में प्रदान की गई सेवाएँ न तो माल की आपूर्ति मानी जाएँगी और न ही सेवा आपूर्ति मानी जाएँगी।

“Not withstanding anything contained in sub-sec, I:

(a) Activities or transactions specified in schedule III, or

(b) Such activities or transactions undertaken by the Central Government, a State Government or any Local authority, in which they are engaged as public authorities, as may be notified by the Government on the recommendation of the council shall be treated neither as a supply of Goods nor a supply of services,”

[Sec, 7(2) CGST Act, 2017]

6, परिभाषा का छठवाँ हिस्सा (Sixth part of definition of supply) – परिभाषा के इस हिस्से के लिए केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 7(3) के अनुसार, सरकार वस्तु एवं सेवा कर परिषद् की संस्तुति के आधार पर एक अधिसूचना द्वारा ऐसे व्यवहारों की सूची जारी कर सकती है, जिसमें किसी क्रिया को माल की आपूर्ति या सेवा की आपूर्ति घोषित कर सकती है।

“Subject to the provisions of sub section (1) and (2) the government may on the recommendations of the council specify the notification, the transactions that are to be treated as:

(a) A supply of Goods and not as a supply of services,

(b) A supply of services and not as a supply of Goods,”

[Sec, 7 (3) CGST Act, 2017]

आपूर्ति के मुख्य तत्त्व (Main factors of Supply)

आपूर्ति के सभी खण्डों की परिभाषाओं का अध्ययन करने के बाद आपूर्ति के निम्नलिखित मुख्य घटक या तत्त्व स्पष्ट होते हैं। हम यह भी कह सकते हैं कि किसी क्रिया या व्यवहार को आपूर्ति मानने के लिए निम्नलिखित शर्तों का पूरा होना आवश्यक है –

(1) आपूर्ति एक कर योग्य घटना है।

(2) आपूर्ति माल या सेवाओं या दोनों की होगी।

(3) कुछ अपवादों को छोड़कर आपूर्ति प्रतिफल के लिए होगी।

(4) आपूर्ति को GST से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

(5) आपूर्ति कर योग्य व्यक्ति को प्रदान की गई हो।

(6) सेवाओं के आयात को भी आपूर्ति में शामिल किया क्या है।

(7) आपूर्ति कर योग्य क्षेत्र में प्रदान की गई हो।

(8) आपूर्ति तभी होगी जब उसका कोई आपूर्तिकर्ता होगा।

(9) आपूर्ति करने के लिए किसी व्यक्ति को कुछ करना पड़ेगा।

(10) कोई व्यक्ति स्वयं को आपूर्ति नहीं कर सकता।

(11) माल एवं सेवा के अलावा अन्य किसी आपूर्ति को GST में शामिल नहीं किया जाएगा।

 

वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के अन्तर्गत वस्तुओं एवं सेवाओं की पूर्ति के स्थान का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है? How the place of supply of goods and services is determined under GST Act?

चूंकि वस्तु एवं सेवा कर एक गन्तव्य आधारित कर है अर्थात् यह उपभोग के अन्तिम बिन्दु पर लगाया और वसूल किया जाता है, अतः वस्तु एवं सेवा कर में आपूर्ति के स्थान का निर्धारण अत्यन्त आवश्यक है। वस्तु एवं सेवा कर के विभिन्न रूपों (CGST SGST, IGST, UTGST) के अन्तर्गत करारोपण भी स्थान विशेष के आधार पर ही किया जाता है। अतः आपूर्ति के स्थान का महत्त्व और भी बढ़ जाता है।

आपूर्ति के स्थान का निर्धारण विभिन्न प्रकार के व्यापारियों जैसे अन्तर्राज्यीय व्यापार, विशेष आर्थिक जोन (SEZ), कई स्थानों से व्यापार का संचालन करने वाले तथा बॉर्डर के पार सेवाओं की पूर्ति करने वालों के लिए आवश्यक होता है।

Levy and Collection G.S.T

आपूर्ति के स्थान निर्धारण की आवश्यकता (Importance of Determination of Place of Supply)

(1) गन्तव्य आधारित कर व्यवस्था को सफल बनाने के लिए,

(2) करारोपण का बिन्दु एवं क्षेत्र निर्धारित करने के लिए,

(3) दोहरे करारोपण को रोकने के लिए,

(4) कर अपवंचन रोकने एवं बेहतर प्रशासन के लिए।

 

आपूर्ति के स्थान का निर्धारण (Determination of Place of Supply)

आपूर्ति के स्थान का निर्धारण करने के लिए वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत आपूर्तियों का वर्गीकरण किया गया है जिसके आधार पर स्थान का निर्धारण किया जाता है। आपूर्ति के विभिन्न क्षेत्रों को निम्न प्रकार समझा जा सकता है

 

I, आपूर्ति के राज्य का निर्धारण (Determination of State of Supply)

राज्य के आधार पर आपूर्तियाँ दो प्रकार की होती हैं –

1, अन्तर्राज्यीय आपूर्ति (Inter-state supply) – अन्तर्राज्यीय आपूर्ति के निर्धारण के लिए निम्नलिखित बिन्दुओं पर ध्यान केन्द्रित करना होगा –

(1) माल के आपूर्तिकर्ता (Supplier) का स्थान और आपूर्ति का स्थान, यदि –

(i) दो भिन्न राज्यों में हैं,

(ii) दो भिन्न संघ शासित प्रदेशों में है,

(iii) एक राज्य और एक संघ-शासित क्षेत्र में है, तो ऐसे मामलों में आपूर्ति को अन्तर्राज्यीय आपूर्ति माना जाएगा।

[धारा 7(1) IGST Act, 2017]

(2) यदि भारत में माल का आयात किया जाता है, तो जब से माल भारत की कस्टम सीमा पार कर लेगा, तब उन्हें अन्तर्राज्यीय आपूर्ति माना जाएगा।

[धारा 7 (2) IGST Act, 2017]

(3) सेवाओं की आपूर्ति के मामले में आपूर्तिकर्ता का स्थान, यदि

(i) दो भिन्न राज्यों में है,

(ii) दो भिन्न संघ शासित प्रदेशों में है,

(iii) एक राज्य और एक संघ शासित क्षेत्र में है, तो इन सेवाओं की आपूर्ति को अन्तर्राज्यीय आपूर्ति माना जाएगा।

[धारा 7 (3) IGST Act, 2017]

(4) भारत में सेवाओं के आयात को अन्तर्राज्यीय आपूर्ति माना जाएगा।

[धारा 7 (4) IGST Act, 2017]

2, राज्य के अन्दर आपूर्ति (Intra state supply) – राज्य के अन्दर आपूर्ति का निर्धारण करने के लिए निम्नलिखित बिन्दुओं पर ध्यान केन्द्रित करना होगा

(1) यदि माल के आपूर्तिकर्त्ता का स्थान और माल की आपूर्ति का स्थान एक ही राज्य या एक ही संघ शासित प्रदेश में हैं, तो इस आपूर्ति को राज्य के अन्दर आपूर्ति कहा जाता है।

(2) यदि सेवा के आपूर्तिकत्र्त्ता का स्थान और सेवा की आपूर्ति का स्थान एक ही राज्य अथवा एक ही संघ शासित प्रदेश में स्थित है, तो सेवा की इस आपूर्ति को राज्य के अन्दर की आपूर्ति कहा जाता है।

[धारा 8 (2) IGST Act, 2017]

(3) यदि किसी आपूर्तिकर्त्ता का स्थान जल-मण्डल क्षेत्र (Territorial water) क्षेत्र में है, तो आपूर्तिकर्ता का स्थान और यदि आपूर्ति का स्थान जल मण्डल क्षेत्र में है, तो आपूर्ति का स्थान उस राज्य अथवा संघ शासित क्षेत्र में माना जाएगा जहाँ का बन्दरगाह सबसे निकट होगा।

[धारा 9 IGST Act, 2017]

II, आपूर्ति के आयात-निर्यात का निर्धारण (Determination of Export-Import of Supply)

(1) यदि माल या सेवाओं का आयात किया जाता है, तो आपूर्ति का स्थान आयातक का स्थान माना जाएगा। ऐसे मामलों को अन्तर्राज्य की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।

(2) यदि माल या सेवाओं का निर्यात किया जाता है, तो आपूर्ति का स्थान आयातक का स्थान (भारत से बाहर) होगा। निर्यात को GST से मुक्त रखा गया है।

III, माल की आपूर्ति के स्थान का निर्धारण (Determination of Place of Supply of Goods)

माल के सम्बन्ध में आपूर्ति के स्थान का निर्धारण करते समय कुछ सामान्य नियमों को ध्यान में रखना होता है; जैसे –

(1) यदि पंजीकृत व्यावसायिक स्थान से अलग किसी अन्य स्थायी प्रतिष्ठान से माल की आपूर्ति की जाती है, तो यह स्थायी प्रतिष्ठान ही आपूर्ति का स्थान होता है।

(2) यदि माल की आपूर्ति एक से अधिक प्रतिष्ठानों के माध्यम से की जाती है, चाहे वे रजिस्टर्ड प्रतिष्ठान हों अथवा स्थायी प्रतिष्ठान हो या अन्य कोई प्रतिष्ठान हों, तो आपूर्ति का स्थान वह होगा, जो ऐसी आपूर्ति से प्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित होगा।

(3) आपूर्ति के स्थान का निर्धारण न हो पाने की दशा में आपूर्तिकर्ता का सामान्य निवास स्थान ही आपूर्ति का स्थान होगा।

Levy and Collection G.S.T

विभिन्न स्थितियों में माल की आपूर्ति के स्थान का निर्धारण (Determination of Place of Supply of Goods in Different Situations)

माल की आपूर्ति के स्थान का निर्धारण करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए

1, जब माल की आपूर्ति में परिचालन निहित हो (When supply involves movement of goods) – यदि माल की आपूर्ति में परिचालन निहित है, चाहे वह आपूर्तिकर्ता अथवा प्राप्तकर्ता अथवा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा हो, तो आपूर्ति का स्थान वह होगा, जहाँ पर माल की अन्तिम रूप से सुपुर्दगी (Delivery) दी जाएगी। यहाँ पर आपूर्तिकर्ता और प्राप्तकर्ता के स्थान का महत्व नहीं है।

2, जब माल की आपूर्ति में परिचालन निहित न हो (When supply not involves movement of goods) – जब माल की सुपुर्दगी माल के क्रय-विक्रय वाले स्थान पर ही दे दी जाती है, भले ही माल की सुपुर्दगी लेने वाला उस माल को सुपुर्दगी के बाद कहीं भी ले जाए तो ऐसे मामले में क्रय-विक्रय वाला स्थान अर्थात् माल की सुपुर्दगी प्राप्त करने वाला स्थान ही आपूर्ति का स्थान होगा।

3, जब माल को जोड़ना या स्थापित करना हो (When goods are to be assembled or installed) – यदि कोई माल इस शर्त के साथ क्रय किया गया है कि आपूर्तिकर्ता को उसे साइट पर बाँधना (Assemble) या स्थापित (Installed) करना होगा, तो आपूर्ति का स्थान वह होगा जहाँ माल को स्थापित किया जाएगा।

4, ढुलाई वाहन पर आपूर्ति (Supply on carriage vehicle) – यदि माल की आपूर्ति किसी जलयान, वायुयान, रेलगाड़ी तथा मोटर वाहन पर की जाती है, तो यह माना जाता है कि वाहन पर माल का लदान होते ही माल की सुपुर्दगी हो जाती है, अतः माल के लदान वाले स्थान को ही माल की आपूर्ति का स्थान माना जाता है।

5, तीसरे व्यक्ति के निर्देश पर आपूर्ति (Supply on instruction of third party) – यदि माल की आपूर्ति किसी तीसरे व्यक्ति के निर्देश पर किसी अन्य व्यक्ति को की जाती है, तो यह माना जाता है कि तीसरे व्यक्ति ने माल की सुपुर्दगी प्राप्त कर ली है, भले ही माल वास्तविक रूप से किसी अन्य व्यक्ति को सुपुर्द किया जाए। ऐसे मामले में तीसरे व्यक्ति का स्थान ही माल की आपूर्ति का स्थान होगा।

Levy and Collection G.S.T

IV, सेवाओं की आपूर्ति के स्थान का निर्धारण (Determination of Place of Supply of Services)

सेवाओं की आपूर्ति माल की आपूर्ति से भिन्न होती है, क्योंकि माल जहाँ मूर्त और भौतिक रूप में होता है, वहाँ सेवाएँ अमूर्त और अदृश्य रूप में होती हैं। वे दिखाई नहीं देती है, का अतः सेवाओं की आपूर्ति के स्थान के निर्धारण के सम्बन्ध में निम्नलिखित बातों पर विचार से करना होगा –

(A) सेवा प्राप्तकर्त्ता का स्थान (Location of recipient of service),

(B) सेवा प्रदाता का स्थान (Location of service provider or supplier),

(C) लेन-देन के प्रकार (Types of transaction)

(A) सेवा प्राप्तकर्त्ता का स्थान (Location of recipient of service) – इस ना सम्बन्ध में निम्नलिखित चार स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं –

(1) यदि सेवाएँ प्राप्तकर्त्ता के रजिस्टर्ड स्थान पर प्राप्त की जाती है, तो सेवाओं के प्राप्तकर्त्ता का स्थान ऐसा रजिस्टर्ड स्थान होगा।

(2) यदि सेवाएं रजिस्टर्ड स्थान के अलावा ऐसे स्थान पर प्राप्त की जाती है, जहाँ सेवा ह प्राप्तकर्त्ता का स्थायी प्रतिष्ठान हैं, तो सेवा प्राप्तकर्त्ता का यही स्थान स्थायी प्रतिष्ठान होगा।

(3) यदि सेवाएँ एक से अधिक स्थान पर प्राप्त की जाती हैं, जो व्यवसाय के रजिस्टर्ड स्थान या स्थायी प्रतिष्ठान से अलग है, तो सेवा प्राप्तकर्ता का स्थान वह होगा, जो प्राप्तकर्त्ता से बहुत अधिक सम्बन्धित होगा।

(4) यदि सेवाएँ प्राप्त करने का स्थान उपर्युक्त तीनों से अलग होगा, तो सेवा प्राप्तकर्ता एका स्थान प्राप्तकर्ता का सामान्य निवास स्थान होगा।

(B) सेवा प्रदाता का स्थान (Location of service provider or supplier) – इस सम्बन्ध में भी निम्नलिखित चार स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं –

(1) यदि सेवाएँ व्यवसाय के रजिस्टर्ड स्थान से प्रदान की जाती है, तो सेवा प्रदाता का स्थान व्यवसाय का रजिस्टर्ड स्थान होगा। (2) यदि सेवाएँ व्यवसाय के रजिस्टर्ड स्थान से अलग किसी अन्य स्थान से अर्थात् किसी स्थायी प्रतिष्ठान से उपलब्ध करायी जाती हैं, तो सेवा प्रदाता का यही स्थान स्थायी प्रतिष्ठान होगा।

(3) यदि सेवाएँ एक से अधिक स्थानों से, जोकि व्यवसाय के रजिस्टर्ड या स्थायी प्रतिष्ठान से भिन्न हैं, तो सेवा प्रदाता का स्थान वह होगा, जो सेवा प्रदाता से सबसे अधिक सम्बन्धित होगा।

(4) यदि सेवाएँ उपर्युक्त तीनों से अलग किसी स्थान से उपलब्ध करायी जाती हैं, तो सेवा प्रदाता का स्थान उसका सामान्य निवास स्थान होगा।

(C) लेन-देन के प्रकार (Types of transaction) – सेवा प्रदाता और सेव प्राप्तकर्त्ता का स्थान निर्धारित होने के बाद सेवाओं के लेन-देनों की प्रकृति का भी पता लगाना होगा। यह लेन-देन दो प्रकार के होते हैं

1, घरेलू लेन-देन (Domestic transactions) – यदि सेवा प्रदाता और सेवा प्राप्तकर्त्ता दोनों का स्थान भारत में है, तो दोनों के मध्य हुए लेन-देनों को घरेलू लेन-देन कहा जाता है। यह लेन-देन भी दो प्रकार के होते हैं

(i) यदि सेवा प्रदाता और सेवा प्राप्तकर्त्ता दो अलग-अलग राज्यों में है, तो इनके मध्य हुए लेन-देनों को अन्तर्राज्यीय (Inter-state) लेन-देन कहा जाता है।

(ii) यदि सेवा प्रदाता और सेवा प्राप्तकर्ता दोनों एक ही राज्य तथा संघ-शासित प्रदेश में हैं, तो इनके मध्य हुए लेन-देनों को राज्य के अन्दर (Intra-state) लेन-देन कहा जाता है।

2, अन्तर्राष्ट्रीय लेन-देन (International transactions) – यदि सेवा प्रदाता और सेवा प्राप्तकर्त्ता दोनों में से एक पक्ष भी भारत से बाहर का है, तो इनके मध्य हुए लेन-देनों को अन्तर्राष्ट्रीय लेन-देन कहा जाता है।

विभिन्न प्रकार की सेवाओं की आपूर्ति के स्थान का निर्धारण (Determination of Place of Supply of Different kinds of Services) विभिन्न सेवाओं के लिए आपूर्ति का स्थान निम्नलिखित प्रकार से निर्धारित किया जाएगा

1, पंजीकृत प्राप्तकर्त्ता को दी गई सेवा (Service provided to a registered recipient) – कोई भी सेवा यदि किसी पंजीकृत सेवा प्राप्तकर्त्ता को उपलब्ध करायी जाती है,

तो ऐसे पंजीकृत व्यक्ति के स्थान को ही आपूर्ति का स्थान माना जाता है।

2, अपंजीकृत प्राप्तकर्त्ता को दी गई सेवा (Service provided to an unregistered recipient) – यदि सेवा प्राप्तकर्त्ता अपंजीकृत हैं और उसका पता (address) अभिलेखों में उपलब्ध है, तो यह पता ही सेवा की आपूर्ति का स्थान होगा। यदि प्राप्तकर्त्ता का पता अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है, तो सेवा प्रदाता (Service provider) का स्थान ही सेवा की आपूर्ति का स्थान माना जाएगा।

3, अचल सम्पत्ति सम्बन्धी सेवाएँ (Services relating to immovable property) – अचल सम्पत्ति के सम्बन्ध में सेवाओं की कई स्थितियाँ हो सकती हैं; जैसे –

(i) लॉजिंग (Lodging) सम्बन्धी सेवाएँ; जैसे-होटल, गेस्ट हाउस, होम स्टे (Home stay) क्लब, कैम्प साइट हाउस बोट; आदि में स्थान उपलब्ध कराना।।

(ii) ऐसी सेवाएँ, जो सीधे अचल सम्पत्ति से सम्बन्धित हैं; जैसे- आर्किटेक्ट, इण्टीरियर सजावटकर्ता, सर्वेयर, इंजीनियर आदि की सेवाएँ।

(iii) समारोहों के आयोजन के स्थान; जैसे-ऑफिशियल, सामाजिक, धार्मिक, व्यावसायिक समारोहों का आयोजन आदि।

(iv) उपर्युक्त तीनों प्रकार की सेवाओं के लिए सहायक सेवाएँ; जैसे- सम्पत्ति के न्दलाल, सम्पति के अधिकार का प्रयोग आदि।

4, व्यक्तिगत साज-सज्जा सेवाएँ (Personal grooming services) – इस प्रकार की सेवाओं में होटल, रेस्टोरण्ट, कैटरिंग, व्यक्तिगत साफ-सफाई, फिटनेस, सौन्दर्य उपचार, स्वास्थ्य सेवा, कॉस्मेटिक एवं प्लास्टिक सर्जरी सहित कई सेवाएँ शामिल की जा सकती हैं। इस प्रकार की सेवाओं की आपूर्ति का स्थान वह होगा जहाँ पर इस प्रकार की सेवाएँ उपलब्ध करायी जाएँगी।

5, कार्यक्रमों में प्रवेश (Admission to a function) – यदि सिनेमागृहों, क्लब, एम्यूजमेण्ट पार्क आदि में प्रवेश से सम्बन्धित सेवा है, तो सेवा की आपूर्ति का स्थान वह होगा, जहाँ पर कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। यदि इन कार्यक्रमों के लिए कुछ सहायक सेवाएँ ली गई। हैं और सेवा प्राप्तकर्ता पंजीकृत व्यक्ति है, तो सेवा आपूर्ति का स्थान सेवा प्राप्तकर्त्ता का स्थान होगा। यदि सेवा प्राप्तकर्त्ता अपंजीकृत है, तो सेवा की आपूर्ति का स्थान सेवा उपलब्ध कराने का स्थान होगा।

Levy and Collection G.S.T

स्पष्टीकरण (Explanation)

यदि कोई आयोजन एक-साथ कई राज्यों में हो रहा है, तो सेवा आपूर्ति का स्थान वे सभी राज्य होंगे, जहाँ सेवाएँ प्रदान की गई हैं और सेवाओं का विभाजन अनुबन्ध में दी गई व्यवस्था के आधार पर सेवाओं के मूल्य के आनुपातिक रूप से होगा।

6, सवारी वाहन पर सेवाएँ देना (Services on board a conveyance) – यदि सेवाएँ सवारी वाहन पर; जैसे- जलयान, वायुयान, रेलगाड़ी आदि पर उपलब्ध करायी गई हैं, तो इन आपूर्ति का स्थान वाहन के चलने का प्रारम्भिक स्थान होगा।

7, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएँ (Banking and financial services) – बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएँ, जिसमें शेयरों की दलाली की सेवाएँ भी शामिल हैं, के सम्बन्ध में यदि सेवा प्राप्तकर्त्ता का पता (Address) सेवा प्रदाता के अभिलेखों में उपलब्ध है, तो सेवा प्राप्तकर्ता का स्थान ही सेवा की आपूर्ति का स्थान होगा, लेकिन यदि सेवा प्राप्तकर्ता का पता अभिलेखों मे उपलब्ध नहीं है, तो सेवा प्रदाता का स्थान ही सेवा आपूर्ति का स्थान होगा।

Levy and Collection G.S.T

पूर्ति से आशय (Meaning of Supply)

वस्तु एवं सेवा के लिए पूर्ति शब्द अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि माल एवं सेवाओं क आपूर्ति अथवा पूर्ति के कारण ही वस्तु एवं सेवा कर का उदय होता है। वस्तु एवं सेवा कर वस्तु एवं सेवाओं की पूर्ति में अन्तर नहीं किया गया है चाहे माल की आपूर्ति तथा पूर्ति हो सेवा की पूर्ति हो, दोनों को बराबर का महत्त्व दिया गया है।

आपूर्ति तथा पूर्ति शब्द को केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम में परिभाषित नहीं किया गया है लेकिन एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम में कहा गया है कि पूर्ति शब्द का वही आशय है जो केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 7 में व्यक्त किया गया है।

“Supply shall have the same meaning as assigned to it in section 7 of the central Goods and Services Act,” ”

Levy and Collection G.S.T

माल अथवा वस्तु (Goods)

वस्तु एवं सेवा कर के अधीन माल की पूर्ति को कर योग्य घटना माना गया है अतः माल को परिभाषित करना आवश्यक है। केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 2(52) में माल को परिभाषित किया गया है। इस धारा के अनुसार –

(1) प्रत्येक प्रकार की चल सम्पत्ति,

(2) मुद्रा और प्रतिभूतियों को छोड़कर,

(3) लेकिन शामिल है,

(i) अनुयोज्य दावे,

(ii) बढ़ती हुई फसलें,

(iii) घास, और

(iv) वे चीजें, जो भूमि से जुड़ी हुई हैं अथवा उसके भाग के रूप में ऐसी वस्तुएँ शामिल हैं, जिन्हें पूर्ति से पहले अथवा पूर्ति के अनुबन्ध के तहत पृथक् किए जाने के लिए सहमत हैं।

Levy and Collection G.S.T

सेवाएँ (Services)

वस्तु एवं सेवा कर के अधीन सेवाओं की पूर्ति को भी कर योग्य घटना माना जाता है। अतः सेवा शब्द को भी परिभाषित करना आवश्यक है। साधारण शब्दों में, मानसिक या शारीरिक श्रम के माध्यम से सम्पन्न की गयी कोई क्रिया, जिसके द्वारा किसी अन्य को सन्तुष्टि मिलती हो या उसके उद्देश्य की पूर्ति होती हो, को सेवा कहा जाता है। इसमें क्रिया को सम्पन्न करने वालों को सेवा प्रदाता (Service Provider) और सेवा से लाभ उठाने वालों को सेवा गृहीता कहा जाता है।

Levy and Collection G.S.T

किसी पूर्ति में माल की पूर्ति या सेवाओं की पूर्ति निहित है, में अन्तर (Distinguish whether a Particulars Supply Involves Supply of Goods or Supply of Services,)

परिभाषा का छठवाँ भाग (Sixth part of definition of supply) – परिभाषा के इस हिस्से के लिए केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 7 (3) के अनुसार, उपधारा 1, 1A और 2 उपबन्धों के अधीन रहते हुए सरकार परिषद् की सिफारिशों पर अधिसूचना द्वारा ऐसे संव्यवहारों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, उन्हें—

(क) माल को पूर्ति के रूप में, न कि सेवा की पूर्ति के रूप में माना जाएगा, अथवा

(ख) सेवाओं की पूर्ति के रूप में, न कि माल की पूर्ति के रूप में माना जाएगा। सरकार वस्तु एवं सेवा कर परिषद की संस्तुति के आधार पर एक अधिसूचना द्वारा ऐसे व्यवहारों की सूची जारी कर सकती है, जिसमें किसी क्रिया को माल की पूर्ति या सेवा की पूर्ति घोषित कर सकती है।

आपूर्ति के अपवाद (Exceptions of supply) – कुछ क्रियाएँ एवं व्यवहार ऐसे हैं जो बिना प्रतिफल के किए जाते हैं, लेकिन फिर भी आपूर्ति की श्रेणी में शामिल किए जाते हैं। ऐसे व्यवहारों की सूची केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की अनुसूची 1 में दी गई है; जैसे –

(1) किसी व्यावसायिक सम्पत्ति का स्थायी रूप से हस्तान्तरण या निस्तारण पूर्ति माना जाता है यदि उस सम्पत्ति में पहले से ही इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया है। उदाहरण (Example)- मैसर्स ‘A’ Ltd, द्वारा एक लैपटॉप, जो व्यावसायिक कार्यों में प्रयुक्त हो रहा था, कुछ समय पश्चात् अपने एकाउण्टेण्ट को निजी प्रयोग के लिए दे दिया गया। चूँकि यहाँ पर लैपटॉप व्यावसायिक आपूर्ति माना जाता है।

(2) सम्बन्धित व्यक्तियों के मध्य माल या सेवाओं की पूर्ति व्यवसाय के दौरान या व्यवसाय की उन्नति के लिए की गई हो, भले ही उनके मध्य प्रतिफल का लेन-देन हो। यह क्रिया पूर्ति मानी जाती है। सम्बन्धित व्यक्ति (Related Person) की परिभाषा इस तक में अलग से दी गई है।

(3) एक ही व्यवसाय से माल या सेवाओं का अन्तरण अपनी दूसरी इकाई या शाखा को किया गया हो (जब दोनों का PAN एक ही हो) तो यह अन्तरण आपूर्ति माना जाएगा बशर्ते यह व्यवसाय की उन्नति के लिए किया गया हो।

अपात्र आपूर्ति (Ineligible supply) – यहाँ पर कुछ ऐसी क्रियाओं और व्यवहारों का वर्णन किया जा रहा है जिन्हें न तो माल की पूर्ति माना जाएगा और न ही सेवा की पूर्ति माना जाएगा। पूर्ति शब्द को समझने के लिए इन क्रियाओं की जानकारी भी आवश्यक है। केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की अनुसूची III में इनका वर्णन किया गया है। ये निम्नलिखित

(1) किसी कर्मचारी द्वारा नौकरी के सम्बन्ध में या नौकरी के दौरान अपने नियोक्ता को दी गई सेवाएँ।

(2) किसी विधान के अधीन स्थापित न्यायालय या ट्रिब्यूनल द्वारा दी गई सेवाएँ। न्यायालय शब्द में जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय शामिल है।

(3) सांसदों, विधायकों, पंचायत एवं नगरपालिका के सदस्यों और स्थानीय निकायों के सदस्यों द्वारा दी गई सेवाएँ।

(4) लॉटरी, जुआ एवं सर्व के अतिरिक्त अन्य अभियोग योग्य दावे।

(5) कब्जा प्राप्त करने के बाद भूमि या भवन का विक्रय

 

वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत करारोपण हेतु आपूर्ति के मूल्य से क्या आशय है? इस मूल्य का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है?What do you mean by value of supply for levy of GST? How the value is determined?

आपूर्ति के समय तथा स्थान के निर्धारण के साथ ‘आपूर्ति के मूल्य का भी निर्धारण आवश्यक होता है क्योंकि यही वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत करारोपण का आधार होता है।

Levy and Collection G.S.T

आपूर्ति के मूल्य का अर्थ (Meaning of Value of Supply)

वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत आपूर्ति प्राप्तकर्त्ता आपूर्ति के प्रतिफल में जो मूल्य आपूर्तिकर्ता को चुकाता है या चुकाने का वादा करता है, उस मूल्य को आपूर्ति का मूल्य कहा जाता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि क्रेता द्वारा वस्तु या सेवा के प्रतिफल में विक्रेता को भुगतान किया जाने वाला मूल्य आपूर्ति का मूल्य कहलाता है।

 

आपूर्ति के मूल्य से सम्बन्धित तथ्य (Factors Related to Value of Supply)

आपूर्ति के मूल्य से सम्बन्धित तथ्य निम्न प्रकार हैं –

(1) GST के सफल संचालन के लिए आपूर्ति के सही मूल्य का निर्धारण आवश्यक है।

(2) GST तन्त्र के लिए आपूर्ति के मूल्य का निर्धारण अति महत्त्वपूर्ण है।

(3) आपूर्ति में माल एवं सेवा दोनों को शामिल किया जाता है और दोनों के मूल्य की गणना के नियम समान हैं।

(4) आपूर्ति का मूल्य ही आपूर्ति का प्रतिफल होता है और यह प्रतिफल नकदी के अलावा किसी अन्य रूप में भी हो सकता है।

(5) आपूर्ति के मूल्य की गणना सामान्य तथा विशेष दोनों परिस्थितियों में की जाती है।

(6) आपूर्ति का निर्धारित मूल्य ही कर योग्य मूल्य होता है।

(7) सामान्यतः बीजक में प्रदर्शित मूल्य में से GST घटाने के बाद जो मूल्य बचता है, वही आपूर्ति का मूल्य होता है।

Levy and Collection G.S.T

आपूर्ति के मूल्य का निर्धारण (Determination of Value of Supply)

आपूर्ति के मूल्य की गणना का सामान्य नियम यह है कि क्रेता द्वारा आपूर्ति के लिए, मूल्य चुकता किया गया है या देय है, वही आपूर्ति का मूल्य होता है।

आपूर्ति का मूल्य प्रतिफल GST on consideration लेकिन यह नियम निम्नलिखित दो शर्तों के पूरा होने पर लागू होता है—

1, आपूर्ति का प्राप्तकर्ता और आपूर्तिकर्ता दोनों सम्बन्धित व्यक्ति न हों तथा

2, आपूर्ति का मूल्य आपूर्ति का एकमात्र प्रतिफल (Consideration) हो |

सामान्य नियम के अन्तर्गत आपूर्ति के मूल्य की गणना करने के लिए उपर्युक्त दोनों बातों या शर्तों का अनिवार्य रूप से पूरा होना आवश्यक है। यह वस्तु एवं सेवा दोनों पर समान रूप से लागू होगा और यह नियम CGST, SGST, UTGST तथा IGST सभी में समान रूप से लागू होगा।

Levy and Collection G.S.T

गणना में शामिल मदें (Items Involved in Calculation)

यदि सामान्य नियम के अधीन आपूर्ति के मूल्य की गणना की जा रही है, तो मूल्य में अग्रलिखित मदे शामिल की जाएँगी –

(1) धारा 15 (2) (a) के अनुसार, CGST Act, SGST Act, UTGST Act एवं GST (Compensation to State) Act के अधीन लगाए गए कर या उपकर को छोड़कर, शेष उस समय लागू किसी अन्य कानून के अनुसार वसूल किए गए निम्नलिखित भुगतान

(i) कोई कर (Any tax)

(ii) ड्यूटी (Duties)

(iii) फीस एवं चार्ज (Fees and charges)

(iv) उपकर (Cesses)

शामिल किए जाएंगे।

Levy and Collection G.S.T

गणना में घटाई जाने वाली मदें (Items Removed while Calculation)

आपूर्ति के मूल्य में धारा 15(2)(a) (b)(c) (d) एवं (e) के अनुसार राशियों को शामिल करके प्राप्त किए गए आपूर्ति के मूल्य में से निम्नलिखित मदें घटा दी जाएँगी, यदि वे गणना में पहले से ही शामिल हों –

(1) यदि CGST Act अथवा SGST Act अथवा UTGST Act अथवा GST (Compensation to State) Act के अधीन कोई कर या शुल्क आदि, यदि यह पहले से ही मूल्य में जोड़कर वसूल कर लिया गया है।

(2) केन्द्र या राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराया अनुदान, यदि कोई हो ।

(3) आपूर्तिकर्ता के अलावा प्राप्त किसी अन्य व्यक्ति को इस आपूर्ति से सीधे सम्बन्धित अनुदान की राशि।

(4) आपूर्ति से सम्बन्धित बीजक में शामिल कोई छूट (Discount), चाहे वह आपूर्ति के समय दी गई हो अथवा उससे पहले दी गई हो।

(5) आपूर्ति के समय के बाद दी गई कोई छूट, यदि आपूर्ति में ऐसी कोई शर्त हो तथा वह व्यावसायिक रीति-रिवाज के अनुसार हो

(6) वापसी योग्य जमाएँ (Refundable deposits)

Levy and Collection G.S.T

आपूर्ति के मूल्यांकन के विशेष नियम (Valuation Rules of Supply)

यदि केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 15 (1) (2) (3) के अनुसार, आपूर्ति के मूल्य की गणना सम्भव नहीं है, तो धारा 15(4) के अधीन दी गई व्यवस्था के अनुसार आपूर्ति के मूल्य की गणना की जाएगी। इसके लिए अधिनियम की नियमावली में कुछ नियम बनाए गए हैं, जो निम्न प्रकार हैं –

 

I, जब आपूर्ति का प्रतिफल पूर्ण रूप से नकदी में न हो (When the Consideration of Supply of Goods and Services is not wholly in Money)

यदि किसी वस्तु या सेवा के मूल्य का प्रतिफल पूर्णतया मुद्रा में नहीं दिया जा रहा है, तो इस प्रकार की आपूर्ति के मूल्य की गणना निम्न प्रकार से की जाती है—

(1) आपूर्ति का खुले बाजार में मूल्य ही आपूर्ति का मूल्य होगा।

(2) आपूर्ति का खुले बाजार का मूल्य ज्ञात न होने पर दोनों के मौद्रिक मूल्य का योग ही आपूर्ति का मूल्य होगा।

(3) इसके अतिरिक्त यदि मूल्य ज्ञात नहीं हो पा रहा है तो समान गुण, आकार वाली वस्तु एवं सेवा का मूल्य ही आपूर्ति का मूल्य होगा।

Levy and Collection G.S.T

II, एजेण्ट के अलावा सम्बन्धित या सुभिन्न व्यक्तियों के मध्य हुए माल या सेवा या दोनों की आपूर्ति का मूल्य (Value of Supply of Goods or Services or Both between Related or Distinct Persons other than through An Agent)

यदि कोई आपूर्ति सुभिन्न व्यक्तियों (जैसा कि धारा 25 (4) एवं (5) में वर्णित है) के मध्य हुई है अथवा आपूर्तिकर्त्ता और आपूर्ति प्राप्तकर्त्ता दोनों सम्बन्धित व्यक्ति हैं लेकिन एजेण्ट नहीं हैं, तो आपूर्ति का मूल्यांकन निम्न प्रकार से होगा –

(1) आपूर्ति का खुले बाजार का (Open market) मूल्य ही आपूर्ति का मूल्य होगा।

(2) यदि आपूर्ति का खुले बाजार का मूल्य ज्ञात नहीं है, तो आपूर्ति वाली वस्तु या सेवा के प्रकार और गुणवत्ता में समान वस्तु या सेवा का मूल्य ही इस आपूर्ति का मूल्य होगा।

(3) यदि उपर्युक्त बिन्दु (1) तथा (2) के अनुसार, आपूर्ति का मूल्य निर्धारित नहीं हो सकता है, तो नियम 30 तथा नियम 31 के अनुसार आपूर्ति का मूल्य

[नियम 28 के अनुसार)

Levy and Collection G.S.T

III, एजेण्ट से या एजेण्ट को की गई आपूर्ति का मूल्य निर्धारित किया जाएगा। (Value of Supply of Goods Made or Received through An Agent)

प्रधान और एजेण्ट के मध्य की गई आपूर्ति के मूल्य का निर्धारण निम्न प्रकार से होगा –

(1) सम्बन्धित आपूर्ति का खुले बाजार का मूल्य आपूर्ति का मूल्य होगा अथवा आपूर्तिकर्त्ता को विकल्प है कि वह उसी प्रकार एवं गुणवत्ता वाली आपूर्ति, जोकि आगे एजेण्ट द्वारा अपने अन्य ग्राहक को की जाती है (यदि वह ग्राहक और एजेण्ट सम्बन्धित व्यक्ति नहीं है) के मूल्य का 90% हिस्सा अपनी आपूर्ति का मूल्य मान सकता है।

(2) यदि बिन्दु (1) के अनुसार, आपूर्ति का मूल्य निर्धारित नहीं हो सकता है, तो नियम 30 या नियम 31 के अनुसार आपूर्ति का मूल्य निर्धारित किया जाएगा।

Levy and Collection G.S.T

[नियम 29 के अनुसार)

IV, लागत के आधार पर माल या सेवा या दोनों की आपूर्ति का मूल्य (Value of Supply of Goods or Services or Both based on Cost)

यदि नियम 27, 28 एवं 29 के आधार पर किसी वस्तु अथवा सेवा का मूल्य निर्धारित नहीं हो पा रहा है, तो उस वस्तु की उत्पादन लागत अथवा निर्माणी लागत अथवा अधिग्रहण की लागत अथवा सेवा के मामले में उसकी प्रॉविजन की लागत में 10% अतिरिक्त मूल्य जोड़कर उस आपूर्ति का मूल्य निर्धारित किया जाएगा।

[नियम 30 के अनुसार)

यदि आपूर्ति के मूल्य का निर्धारण नियम 27 से नियम 30 तक के आधार पर नहीं हो पा रहा है, तो वाणिज्यिक एवं सामान्य सिद्धान्तों के अनुरूप तथा अधिनियम की धारा 15 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए आपूर्ति का मूल्य निर्धारित किया जाएगा। यदि सेवाओं की आपूर्ति का मामला है, तो आपूर्तिकर्त्ता नियम 10 को ध्यान में न रखते हुए इसी अवशिष्ट विधि से सेवा की आपूर्ति का मूल्य निर्धारित करेंगे।

नोट- आपूर्ति के मूल्य की गणना की इस विधि को अवशिष्ट विधि (Residual method) कहा जाता है।

Levy and Collection G.S.T

VI, लॉटरी, शर्त, जुआ और घुड़-दौड़ की आपूर्ति का मूल्य (Value of Supply in case of Lottery, Betting, Gambling and Horse Racing)

उपर्युक्त मामलों में आपूर्ति के मूल्य का निर्धारण निम्न प्रकार से किया जाता है—

(1) यदि लॉटरी का संचालन किसी राज्य सरकार द्वारा किया जाता है, तो लॉटरी टिकट के अंकित मूल्य का 100/112 अथवा सम्बन्धित राज्य द्वारा सरकारी गजट में अधिसूचित मूल्य, दोनों में जो भी अधिक होगा वही आपूर्ति का मूल्य होगा।

(2) यदि लॉटरी के संचालन को राज्य सरकार द्वारा अधिकृत किया गया है, तो टिकट के अंकित मूल्य का 100/128 अथवा अधिकृत करने वाले राज्य द्वारा सरकारी गजट में टिकट का अधिसूचित मूल्य, जो भी दोनों में अधिक हो, वही आपूर्ति का मूल्य होगा।

(3) अभियोग्य दावों, जैसे, शर्त लगाना, जुआ खेलना अथवा घुड़-दौड़ क्लब की बुड़-दौड़ में शर्त लगाने आदि के मामले में शर्त के मूल्य का 100% अथवा सर्व वितरण (Totalisator) का मूल्य ही आपूर्ति का मूल्य होगा।

Levy and Collection G.S.T

[नियम 31A के अनुसार)

VII, कुछ विशेष सेवाओं की आपूर्ति का मूल्यांकन (Determination of Value in Resptect of Certain Supplies)

नियम 32 के अन्तर्गत कुछ विशेष प्रकार की सेवाओं की आपूर्ति का मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया को वर्णित किया गया है, जो निम्न प्रकार है –

विदेशी मुद्रा के क्रय-विक्रय एवं मुद्रा परिवर्तन की सेवाएँ (Value of supply of services relation to the sale and purchase of foreign currency and money changing) – जब किसी विदेशी मुद्रा का भारतीय रुपये में विनिमय किया जाए या लिया जाए तो सेवा मूल्याकंन इस प्रकार से होता है –

सेवा का मूल्य (क्रय-विक्रय की दर का अन्तर)- (ऐसी मुद्रा की उस समय RBI सन्दर्भित दर) x करेन्सी की कुल संख्या

 VIII, शुद्ध अभिकर्ता के रूप में सेवा की आपूर्ति का मूल्य (Val of Supply of Services in case of Pure Agent)

यदि आपूर्ति प्राप्तकर्ता के शुद्ध एजेण्ट के रूप में आपूर्तिकर्त्ता (Supplier) की तरह कोई व्यय अथवा लागत को शुद्ध एजेण्ट द्वारा वहन किया जाता है या भुगतान किया जाता है, तो इस व्यय या लागत को आपूर्ति का मूल्य ज्ञात करते समय हटा दिया जाएगा, बशर्ते निम्नलिखित शर्तें पूरी होती हों –

(1) आपूर्तिकर्ता आपूर्ति प्राप्तकर्त्ता के शुद्ध एजेण्ट के रूप में कार्य करता हो और तीसरे पक्षकार को कोई भुगतान करने के लिए आपूर्ति प्राप्तकर्त्ता से अधिकृत हो।

(2) आपूर्ति प्राप्तकर्ता की ओर से शुद्ध एजेण्ट द्वारा किया गया भुगतान उस बीजक में स्पष्ट रूप से अंकित होगा, जो बीजक शुद्ध एजेण्ट द्वारा आपूर्ति प्राप्तकर्त्ता को जारी किया गया है।

(3) तीसरे पक्षकार से शुद्ध एजेण्ट द्वारा जो आपूर्तियाँ प्राप्त की गई हैं, वह ऐसी सेवाओं के अतिरिक्त हैं, जो वह अपने खाते से स्वयं प्रदान करता है।

Levy and Collection G.S.T

IX, भारतीय मुद्रा के अलावा अन्य मुद्राओं की अदला-बदली की दर (Rate of Exchange of Currency other than Indian Rupees for Determination of Value)

इस सम्बन्ध में निम्नलिखित दो स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं –

(1) कर योग्य माल के सम्बन्ध में आपूर्ति का मूल्य निर्धारण करने के लिए वे दरें लागू होती हैं, जो कस्टम एक्ट, 1962 की धारा 14 के अधीन उस समय बोर्ड द्वारा अधिसूचित होंगी।

(2) कर योग्य सेवाओं के सम्बन्ध में आपूर्ति का मूल्य निर्धारण करने के लिए वे दरें लागू होती हैं, जो उक्त अधिनियम की धारा 13 के अधीन उस समय सामान्यतः लेखांकन के स्वीकृत सिद्धान्तों के अनुकूल होती हैं।

Levy and Collection G.S.T

[नियम 34 के अनुसार]

 

X, GST के जुड़े होने पर (Inclusive of GST)

यदि आपूर्ति के मूल्य में GST (IGST, CGST, SGST अथवा UTGST) भी शामिल हैं और अलग से प्रदर्शित नहीं हैं, तो कर की राशि की गणना अग्र प्रकार से की जाएगी –

Inclusive of GST

इस प्रकार प्राप्त राशि को बीजक से अलग करके शेष राशि आपूर्ति का मूल्य होगी।

[नियम 35 के अनुसार]

 

आपूर्ति के मूल्य की गणना (Computation of Value of Supply)

 

Computation of Value of Supply

नोट – अधिकतम विक्रय मूल्य ज्ञात होने पर भी विक्रय मूल्य (₹ 40,000) को ही आपूर्ति मूल्य माना जाएगा क्योंकि आपूर्ति का प्रतिफल मौद्रिक रूप में पूर्ण है।

 

कर योग्य आपूर्ति के मूल्य की गणना

कर योग्य आपूर्ति के मूल्य की गणना

 

Levy and Collection G.S.T

लैपटॉप की बीजक (आपूर्ति) मूल्य की गणना

लैपटॉप की बीजक (आपूर्ति) मूल्य की गणना

 

नोट- भुगतान का समय ज्ञात न होने के कारण अतिरिक्त छूट नहीं घटाई गई है। यदि भुगतान 15 दिन में प्राप्त हो जाता है तो यह छूट घटा दी जाती।

प्रश्न 8-जयपुर के श्रीराम बुक स्टोर की दिसम्बर, 2019 माह के लिए पूर्तियाँ निम्न प्रकार हैं Shri Ram Book Store of Jaipur, has made the following supplies for the month of December, 2019,

1, अभ्यास पुस्तिकाएँ (Excercise books) 75,000
2, पाठ्य पुस्तकें (Text Books) 8,50,000
3, स्टेशनरी (Stationeries) 4,70,000
4, विजिटिंग कार्ड आदि (Visiting cards etc,) 78,000
5, स्लेट एवं चाकबत्ती (Slate and chalk sticks) 65,000
6, धार्मिक चित्र (Religious pictures) 35,000
7, समाचार पत्र (Newspapers) 2,85,000
8, खेल का सामान (Sports goods) 2,75,000
9, अखबारी कागज (News prints) 4,85,000
10, डायरियाँ (Diaries) 1,75,000

 

निम्नांकित अतिरिक्त सूचनाएँ उपलब्ध है – Following additional information are given:

(i) पुस्तकों की पूर्ति पर ₹2,000/ कटौती दी गई है। Cash discount allowed, ₹2,000 on supply of goods,

(ii) खेल का सामान की पूर्ति आगरा के व्यापारी को की गई है। Sports goods have been supplied to a dealer of Agra,

(iii) स्टेशनरी की पूर्ति के लिए ₹ 8,300 का ट्रक भाड़ा अलग से वसूल किया गया है। ₹ 8,300 has been charged additionally for truck freight against stationery,

(iv) ₹1,50,000 का खेल का सामान लखनऊ भेजा गया है। Sports goods of 1,50,000 has been supplied to Lucknow dealar,

(v) उपर्युक्त पूरित बिलों में वसूल की गई GST की राशि ₹58,000 हैं GST charged in the above supplies includes 58,000 – की राशि और देय जी०एस०टी० @12% की राशि ज्ञात कीजिए।

 

Compute taxable value of supply and GST payable @12% (Solution): In the Books of Ram Books Store of Jaipur Calculation of Taxable Value of Supply for the month of December 2019

 

 

Calculation of GST Payable

 

Calculation of GST Payable

Note: Sports Goods की Supply में यह मान लिया गया है कि आगरा और लखनऊ दोनों की Supply का मूल्य ₹ 2,75,000 ही है। दोनों की आपूर्तियाँ Out of state है अत: IGST की गणना की जाएगी।

 

निम्नलिखित सूचनाओं से GST के अधीन बीजक मूल्य की गणना कीजिए From the following particulars, calculate invoice value under GST:

राज्य के अन्दर कच्चे माल का क्रय ₹ 63,000 (5% जी०एस०टी० सहित) Purchases of Raw Materials within the State ₹63,000 (Inclusive: of% GST)

 

उत्पादक शुल्क (Excuse duty) @12%
वैट  (VAT) @12%
लाभ मार्जिन (Profit Margin) ₹ 9,500
निर्माणी व्यय (Manu facturing Expenses) ₹ 3,500
मजदूरी (Wages) ₹ 5,000
संग्रहण लागत (Storage Cost) ₹ 6,000
परामर्श मुल्क (Consultation Free) ₹ 2,500
CGST @ एवं SGST @ %
CGST @ 5% and SGST 5%

 

Calculation of Invoice Price Under GST

Calculation of Invoice Price Under GST

 

वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत छूट की आवश्यकता स्पष्ट कीजिए। छूट के विभिन्न प्रकार कौन से हैं? Explain the necessity of exemption under GST, Which types of exemptions?

यद्यपि वस्तु एवं सेवा कर सम्पूर्ण देश में समान रूप से सभी वस्तुओं और सेवाओं पर लागू है लेकिन एक लोकतान्त्रिक देश होने के कारण और भौगोलिक एवं सामाजिक असमानता होने के कारण कुछ क्षेत्र, कुछ व्यक्तियों तथा कुछ वस्तुओं एवं सेवाओं को वस्तु एवं सेवा कर से छूट प्रदान की गई है जिसे वस्तु एवं सेवा कर से छूट या मुक्ति कहा जाता है।

 

छूट की आवश्यकता (Necessity of Exemption)

वस्तु एवं सेवा कर में छूट की अवधारणा को क्यों लागू करना पड़ा, इसके पीछे कुछ कारण है; जैसे

1, भू-भाग में असमानता (Geographical differences) – भारत विविधताओं का देश है। यहाँ का कोई क्षेत्र, समतल, उपजाऊ और सुखकर है, तो कुछ हिस्से ऐसे भी हैं जो ऊबड़-खाबड़, दुर्गम और बंजर हैं। विकास की दृष्टि से कुछ क्षेत्र अति विकसित और कुछ अति पिछड़े हुए हैं। ऐसे में सरकार पिछड़े और दुर्गम क्षेत्रों के लिए करों में राहत देती है, ताकि इन क्षेत्रों को भी विकसित क्षेत्रों के बराबर की श्रेणी में लाया जा सके।

2, सामाजिक असमानता (Social differences) – देश का सम्पूर्ण समाज समान नहीं है, अत: सभी को कर के दायरे में लाना या कर के दायरे से बाहर रखना सम्भव नहीं है। अतः सरकार समाज के जिस हिस्से को कर से बाहर रखना चाहती है, उसे वस्तु एवं सेवा कर से छूट प्रदान कर देती है। यह छूट अस्थायी और स्थायी दोनों प्रकार की हो सकती है।

3, भुगतान क्षमता (Paying capacity) – कर का भुगतान अनिवार्य होता है। इसमें किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जा सकती अन्यथा देश में वित्तीय अनुशासनहीनता बढ़ती है। लेकिन सभी की कर देय क्षमता समान नहीं होती और कुछ लोग कर का भुगतान करने की स्थिति में नहीं होते हैं। ऐसे में सरकार कर भुगतान में असमर्थ वर्ग को छूट प्रदान करती है।

4, वस्तु और सेवाओं की प्रकृति (Nature of goods and services) – कुछ वस्तु एवं सेवाएं इस प्रकार की होती हैं जिनका उपयोग बहुतायत में होता है और वे देश तथा समाज के लिए अति आवश्यक की श्रेणी में आती हैं। इन वस्तुओं एवं सेवाओं से समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग प्रभावित होता है। ऐसे में बड़े वर्ग को राहत देने के उद्देश्य से इन वस्तुओं या सेवाओं को सरकार या तो कर मुक्त कर देती है या कर की दरों में राहत प्रदान करती है।

शर्तें (Conditions) – केन्द्र सरकार या राज्य सरकार कर से छूट प्रदान करने के अपने अधिकार का प्रयोग निम्नलिखित शर्तों के अधीन ही कर सकती है –

(1) वस्तु एवं सेवा कर परिषद् की संस्तुति आवश्यक है।

(2) छूट प्रदान करने का निर्णय जनहित में हो, किसी व्यक्ति या वर्ग विशेष के लिए न हो।

(3) अधिसूचना जारी करके ही ऐसा किया जा सकता है।

(4) यदि छूट प्रदान की गई है, तो कोई व्यक्ति उस वस्तु या सेवा या क्षेत्र में कर की वसूली नहीं करेगा।

(5) विशेष परिस्थितियों में विशेष आदेश के माध्यम से भी छूट प्रदान की जा सकती है।

(6) कर से छूट या तो पूर्ण रूप से या हिस्सों में या वस्तु एवं सेवा के किसी विशेष विवरण के अनुसार दी जा सकती है।

(7) छूट स्थायी तथा अस्थायी दोनों प्रकार की हो सकती हैं।

 

छूट प्रदान करने का अधिकार (Right to provide exemption) )

वस्तु एवं सेवा कर से छूट प्रदान करने का अधिकार केवल सरकार को है। यहाँ सरकार में केन्द्र और राज्य सरकारों दोनों को शामिल किया जाता है। सरकार को भी यह छूट प्रदान करने की शक्ति स्वतः ही नहीं है वरन् यह विधान द्वारा प्रदान की जाती है। केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम द्वारा धारा 11 के अधीन सरकार को यह अधिकार प्रदान किया गया है।

1, धारा 11 (1) [Section 11 (1)]

अधिनियम की धारा 11 (1) कहती है कि यदि केन्द्र सरकार या राज्य सरकार इस बात से सहमत है कि जनहित में ऐसा करना आवश्यक है, तो वह वस्तु एवं सेवा कर परिषद् की संस्तुति पर एक अधिसूचना द्वारा किसी वस्तु सेवा को या उसके किसी भाग को पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से या कुछ शर्तों के अधीन वस्तु एवं सेवा कर से छूट प्रदान कर सकती है। यह छूट अधिसूचना जारी होने की तिथि से या उसके बाद की किसी तिथि से या अधिसूचना में वर्णित तिथि से प्रभावी हो सकती है।

Where the Government is satisfied that it is necessary in the public interest so to do, it may on the recommendations of the council, by notification, exempt generally, either Absolutely or subject to such conditions as may be specified therein, Goods or services or both of any specified description from the whole or any part of the tax leviable thereon with effect from such date as may be specified in such notification.

[Sec, 11 (1) CGST Act, 2017]

2, धारा 11 (2) [Section 11 (2)]

अधिनियम की धारा 11 (2) के अनुसार, यदि केन्द्र सरकार या राज्य सरकार इस बात से सन्तुष्ट है कि ऐसा करना जनहित में आवश्यक है तो वह वस्तु एवं सेवा कर परिषद् की संस्तुति के आधार पर एक विशेष आदेश द्वारा किसी वस्तु या सेवा विशेष को विशेष परिस्थितियों और अपवादस्वरूप कर के भुगतान से मुक्त कर सकती है।

Where the Government is satisfied that it is necessary in the public interest so to do, it may on the recommendation of the council, by special order in each case under circumstances of an exceptional nature to be stated in such order, exempt from payment of tax any goods or services or both on which tax is leviable.

[Sec, 11(2) CGST Act, 2017)

नोट – अधिनियम की धारा 11(1) एवं 11 (2) में विशेष अन्तर यह है कि 11(1) में एक सामान्य अधिसूचना द्वारा सामान्य अर्थात् सभी के लिए छूट प्रदान की जाती है, जबकि (2) में एक विशेष आदेश द्वारा किसी वस्तु विशेष या सेवा विशेष को आदेश में विशेष 11 परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए छूट प्रदान की जाती है।

 

3, धारा 11 (3) Section 11 (3)

अधिनियम की धारा 11 (3) के अनुसार, यदि सरकार की अधिसूचना में उसके प्रभावी क्षेत्र या लागू होने के सम्बन्ध में किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता है तो सरकार धारा 11 (1) या 11 (2) में जारी अधिसूचना या आदेश में एक वर्ष के अन्दर स्पष्टीकरण जारी कर सकती है। और यह स्पष्टीकरण उसी प्रकार से प्रभावी होगा जैसे कि यह स्पष्टीकरण भी मूल अधिसूचना या आदेश का हिस्सा था।

 

छूट के प्रकार (Types of Exemption)

वस्तु एवं सेवा कर के अधीन छूट के विभिन्न रूपों की निम्न प्रकार से व्याख्या की जा सकती है

1, सम्पूर्ण छूट (Absolute exemption) – जब कोई छूट पूर्ण रूप से प्रदान की जाती है अर्थात् कोई शर्त नहीं लगायी जाती है तो उसे सम्पूर्ण छूट कहा जाता है; जैसे- विद्युत वितरण की छूट, रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया की सेवाओं की छूट आदि।

2, सशर्त छूट (Conditional exemption) – जब छूट प्राप्त करने के लिए कुछ शर्तें लगा दी जाती है और उन शर्तों के पूर्ण होने पर ही छूट प्रदान की जाती है; जैसे किसी होटल में ठहरने पर यदि ठहरने का किराया 1,000 प्रतिदिन होने पर ही कर से छूट मिलेगी। इस प्रकार की छूट को सशर्त छूट कहा जाता है।

3, सशर्त एवं आंशिक छूट (Conditional and partly exemption) – जब शर्त के साथ छूट का हिस्सा भी निर्धारित कर दिया जाए, तो इसे शर्त सहित आंशिक छूट कहा जाता है जैसे किसी पंजीकृत व्यापारी द्वारा किसी अपंजीकृत व्यापारों से सौदा क्रय करने पर यदि वह रिवर्स चार्ज के अधीन आता है, तो प्रतिदिन ₹ 5,000 तक की खरीद रिवर्स चार्ज से मुक्त होगी। इस व्यवस्था में शर्त भी है और छूट की सीमा भी निर्धारित है।

4, निर्धारित सीमा की छूट (Threshold limit) – जब कोई छूट प्रदान करने के लिए कोई सीमा निर्धारित कर दी जाती है, तो इसे सीमा के अधीन छूट कहा जाता है; जैसे साधारण परिस्थितियों में ₹ 20 योजना के अन्तर्गत कर के भुगतान से छूट दी गई है। ये कम्पोजीशन योजना में रियायती दर से कर का भुगतान कर सकते हैं।

5, भौगोलिक छूट (Geographical exemption) – जब देश के किसी भू-भाग के लिए कर से कोई छूट या रियायत दी जाती है, तो इसे भौगोलिक छूट कहा जाता है; उदाहरणार्थ, उत्तर-पूर्व के राज्य जैसे अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय एवं जम्मू-कश्मीर आदि के लिए कम्पोजीशन योजना में ₹1,50 करोड़ के स्थान पर ₹ 75 लाख की सीमा या पंजीकरण के लिए ₹ 20 लाख वार्षिक टर्नओवर के स्थान पर इन राज्यों के लिए ₹ 10 लाख की सीमा केवल इन राज्यों की भौगोलिक स्थिति के कारण निर्धारित की गई है और रियायत दी गई हैz

6, वस्तु या सेवा विशेष के लिए छूट (Exemption for specific goods or services) – छूट की इस श्रेणी के अन्तर्गत कुछ वस्तुओं या सेवाओं के व्यापार अर्थात् लेन-देनों को वस्तु एवं सेवा कर से छूट प्रदान की जाती है। इस श्रेणी में बड़ी मात्रा में उपभोग वाली वस्तुओं और सेवाओं आदि को शामिल किया जाता है। वस्तु एवं सेवा कर के अधीन जिन वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति को कर मुक्त किया गया है।

7, गैर कर योग्य आपूर्तियों को छूट (Exemption for non-taxable supplies) – कुछ आपूर्तियों को वस्तु एवं सेवा कर के दायरे से ही बाहर रखा गया है। कुछ लोग इन आपूर्तियों को भी छूट प्राप्त आपूर्तियों में शामिल करते हैं; जैसे (i) पेट्रोलियम क्रूड, (ii) हाई स्पीड डीजल, (iii) पेट्रोल, (iv) प्राकृतिक गैस, (v) विमानन ईंधन, (vi) मानव उपभोग हेतु शराब।

कानूनों की आपसी निर्भरता (Mutual Dependence of Laws)

वर्तमान में वस्तु एवं सेवा कर के करारोपण एवं उपकर लगाने के सम्बन्ध में निम्नलिखित

अधिनियम के प्रावधान प्रभावी हैं

(1) केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम (CGST Act, 2017)

(2) एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम (IGST Act, 2017) (3) राज्य वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम (SGST Act, 2017) (4) संघ शासित प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम (UTGST Act, 2017)

(5) वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017

जहाँ तक कर से छूट का प्रश्न है वहाँ व्यवस्था यह है कि यदि CGST Act के अधीन किसी वस्तु या सेवा या व्यक्ति या क्षेत्र को कोई छूट प्रदान की गई है, तो ये प्रावधान IGST Act पर लागू नहीं माने जाएंगे। CGST Act के प्रावधान केवल SGST या UTGST पर तो लागू होंगे लेकिन IGST Act में लागू नहीं होंगे। इसी प्रकार, कर से छूट के सम्बन्ध में IGST Act के प्रावधान CGST Act में लागू नहीं होंगे।

 

कम्पोजीशन योजना से क्या आशय है? इसके गुण-दोषों पर प्रकाश डालिए। What is meant by composition scheme? Explain its merits and demerits,

 

वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत छोटे एवं मझोले व्यापारियों की समस्याओं को देखते हुए केन्द्र सरकार द्वारा कम बिक्री वाले व्यापारियों को ‘कम्पोजीशन योजना’ के रूप में एक सरल विकल्प उपलब्ध कराया गया है। इसके अन्तर्गत व्यापारियों को वस्तु एवं सेवा कर के विकल्प चुनने में स्वतन्त्रता रहेगी। इस योजना के अन्तर्गत कर की दरें पूर्व निर्धारित रहती हैं। तथा वस्तु एवं सेवा कर की अनुपालनाएँ कम होती है।

 

परिभाषा ( Definition) – केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 10 (1) के अनुसार, वे सभी पंजीकृत व्यक्ति जिनकी गत वर्ष में एकीकृत टर्नओवर ₹ 50 लाख से अधिक नहीं रहा है, तो वे कर भुगतान का यह विकल्प स्वीकार कर सकते हैं जिसकी गणना उस दर से की जाएगी जो इस सम्बन्ध में निर्धारित की गयी है। पूर्ण परिभाषा इस प्रकार है

“Not withstanding anything to the contrary contained in this act but subject to the provisions of sub-section (3) and (4) of section 9, a registered person, whose aggregate turnover in the preceding year did not exceed fifty lakh rupees, may opt to pay, in lieu of the tax payable by him, an amount calculated at such rate as may be prescribed,

नोट- टर्नओवर की सीमा को ₹50 लाख से बदलकर र डेढ़ करोड़ कर दिया गया है।

 

कम्पोजीशन योजना के लाभ (Advantages of Composition Scheme)

वस्तु एवं सेवा कर की कम्पोजीशन योजना को अपनाने वाले कारोबारियों को निम्नलिखित लाभ होते हैं –

1, निश्चित दर पर एक मुश्त टैक्स (Lump sum tax with fix rate) – कम्पोजीशन योजना में कारोबारी को किस दर से कर का भुगतान करना है। यह पहले से ही निश्चित रहता है, अतः व्यापारी अपनी प्रत्येक तिमाही की सप्लाई की गणना करके स्वयं कर की गणना करके, कर को जमा कर सकता है।

2, रिटर्न भरने में आसानी (Easy to file return) – इस योजना के कारोबारियों को तीन माह में केवल एक रिटर्न भरना होता है, जबकि सामान्य योजना में प्रतिमाह रिटर्न भरना होता है। वह भी तीन रिटर्न भरने होते हैं। इस प्रकार कम्पोजीशन योजना के अधीन वर्ष में केवल चार तिमाही रिटर्न और एक सालाना रिटर्न भरने होते हैं। इन रिटर्न में भी तिमाही के कुल लेन-देन, बिक्री की राशि, कर की राशि और भुगतान किए गए कर का विवरण इस प्रकार, रिटर्न के दृष्टिकोण से यह योजना लाभकारी है।

3, बीजक अपलोड नहीं करना (No need to upload invoices) – कम्पोजीशन योजना के अन्तर्गत बीजकों या बिल ऑफ सप्लाई को कॉमन पोर्टल पर अपलोड करने की आवश्यकता नहीं है जबकि सामान्य योजना में बीजकों को रिटर्न के साथ ही अपलोड करना होता है। अत: इस योजना में अपलोड के झंझट से बचत होती है।

4, ग्राहकों को लाभ (Benefits to customers) – इस योजना में चूँकि व्यापारी अपने ग्राहक से किसी प्रकार का GST वसूल नहीं कर सकते हैं अतः ग्राहक के लिए तुलनात्मक रूप से मूल्य कम हो जाते हैं जिससे ग्राहकों को लाभ होता है।

5, कम अनुपालना (Limited compliance) – कम्पोजीशन योजना के व्यापारियों की कागजी कार्यवाही कम होती है। प्रति माह उन्हें विभाग को सूचना देना आवश्यक नहीं है अतः उन्हें किसी प्रकार की चिन्ता नहीं रहती है। प्रत्येक तीन माह में एक बार कर का भुगतान करना है और एक विवरणी जमा करनी है।

6, कम कर दायित्व (Limited tax liability) – कम्पोजीशन विकल्पधारी के लिए कर की अधिकतम दर 5% है। कुछ मामलों में तो यह दर केवल 1% है, अतः इन्हें 12%, 18%, 28% की चिन्ता नहीं रहती है। इस कम कर दायित्व के कारण यह सामान्य योजना के व्यापारियों के साथ अच्छी और मजबूत प्रतिस्पर्धा कर लेते हैं।

7, बार-बार सूचना देने की आवश्यकता नहीं (No need to inform) – यदि किसी व्यापारी ने शर्तें पूर्ण करके एक वर्ष में कम्पोजीशन योजना को अपना लिया है, तो उसे अगले वर्षों में बार-बार सूचना देने की आवश्यकता नहीं है। जब तक किसी शर्त का उल्लंघन न हो तब तक वह व्यापारी इस योजना को चालू रख सकता है।

कम्पोजीशन योजना की कमियाँ (Shortcomings or Disadvantages)

कम्पोजीशन योजना में कुछ कमियाँ भी हैं, जिनके कारण व्यापारी इस योजना में शामिल होने से हिचकिचाते हैं और हतोत्साहित होते हैं। यह कमियाँ निम्न प्रकार हैं-

1, दूसरे राज्यों में आपूर्ति नहीं (No supply in other states) – कम्पोजीशन योजना के कारण व्यापार का क्षेत्र एक राज्य विशेष या संघ शासित प्रदेश विशेष तक ही सीमित हो जाता है, क्योंकि इस योजना के विकल्पधारियों को दूसरे राज्य में व्यवसाय करने की अनुमति नहीं है, अतः व्यापार का क्षेत्र सीमित हो जाता है।

2, इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं (No benefit of ITC) – कम्पोजीशन योजना को अपनाने वाले व्यापारी अपने खरीदारियों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं उठा सकते। क्रय पर उन्होंने जो GST दिया है वे अपनी कर देनदारियों में Input tax के रूप में घटा नहीं सकते। इनपुट क्रेडिट न मिलने से व्यापारियों के लाभ में कमी आती है।

3, कर नहीं वसूल सकते (Tax cannot be collect) – सामान्य योजना में व्यापारियों को, जो वे बिक्री करते हैं उसमें कर की वसूली करने का अधिकार होता है और इस कर में वे इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेकर शेष रकम सरकार को जमा कर देते हैं, जबकि कम्पोजीशन योजना में व्यापारी GST की वसूली नहीं कर सकते। इस प्रकार, उन्हें कर सम्बन्धी कोई लाभ नहीं होता है।

उदाहरण के लिए, यदि आप किसी रेस्टोरेण्ट का संचालन कर रहे हैं और कम्पोजीशन योजना में पंजीकृत हैं। यदि किसी ग्राहक का बिल ₹500 का बना तो आप ग्राहक से इस ₹500 में GST जोड़कर वसूली नहीं कर सकते। इसके विपरीत यदि आप सामान्य योजना में होते और GST की दर 18% होती, तो आप ग्राहक से GST के ₹90 जोड़कर कुल ₹ 590 वसूल कर सकते थे।

4, सेवा क्षेत्र के लिए अनुमान्य नहीं (Not applicable in service sector) – केवल रेस्टोरेण्ट व्यवसाय को छोड़कर अन्य सेवाओं के व्यापार में कम्पोजीशन योजना लागू नहीं है। इस प्रकार, छोटे पैमाने पर सेवाओं का लेन-देन करने वाले व्यापारी इस योजना से वंचित रह जाते हैं।

5, कर मुक्त वस्तुओं में व्यापार नहीं (No business in exempted goods) – कम्पोजीशन योजना के अन्तर्गत कर मुक्त वस्तुओं का व्यापार करने की अनुमति नहीं है। हाँ, यदि कोई व्यापारी कर योग्य और कर मुक्त दोनों वस्तुओं में व्यापार करता है, तो वार्षिक टर्न ओवर की गणना करते समय दोनों के मूल्य को कुल टर्नओवर में जोड़ लिया जाएगा। 6, SEZ को माल नहीं बेच सकते (Goods cannot be sold to SEZ) – कम्पोजीशन योजना के व्यापारी विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special economic zone) में स्थित इकाइयों को अपना माल नहीं बेच सकते क्योंकि SEZ इकाइयों को की गई आपूर्ति को अन्तर्राज्यीय आपूर्ति माना जाता है। इस प्रकार, इस योजना में ग्राहकों की संख्या भी कम हो जाती है।

 

सेवा प्रदाताओं एवं मिश्रित आपूर्ति वालों के लिए कम्पोजीशन योजना (Composition Scheme for Services and Mixed Supplies)

अभी तक कम्पोजीशन योजना में रेस्टोरेण्ट सेवा को छोड़कर अन्य सेवाओं या मिश्रित आपूर्तिकर्ताओं के लिए मान्यता नहीं थी। लेकिन 1 अप्रैल, 2019 से यह नया प्रावधान किया गया है—

1, वित्तीय वर्ष 2018-19 में पंजीकृत व्यवसायी (Dealers registered in financial year 2018-19) – इस श्रेणी के व्यापारियों की यदि पिछले वित्तीय वर्ष में वार्षिक आवर्त र 50 लाख तक रही है और वे सेवाओं या मिश्रित (माल+ सेवाओं) के आपूर्तिकर्त्ता हैं तो वे नई कम्पोजीशन योजना में 6% (3% CGST + 3% SGST) कर के भुगतान का विकल्प चुन सकते हैं।

2, 1 अप्रैल, 2019 या उसके बाद पंजीकृत व्यापारी (Dealer registered on or after 1st April, 2019) – 1 अप्रैल, 2019 को या उसके बाद पंजीकृत व्यापारियों के लिए माल या सेवाओं या दोनों की प्रथम आपूर्ति किसी भी वित्तीय वर्ष में ₹50 लाख तक होनी चाहिए तभी वे 6% कर देने का विकल्प चुन सकेंगे।

 

संयुक्त आपूर्ति एवं मिश्रित आपूर्ति से क्या आशय है? इनमें क्या अन्तर है? What do you mean by composite supply and mixed supply? Differentiate between them,

वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत सामान्य रूप से किसी माल विशेष या सेवा विशेष की आपूर्ति की दशा में निर्धारित दर से कर लगा दिया जाता है किन्तु यदि कई वस्तुओं या सेवाओं की एक साथ या समूह में आपूर्ति होने पर किस वस्तु या सेवा पर किस दर से कर लगाया जाएगा। यह ज्ञात करना मुश्किल हो जाता है। अतः इस कारण से वस्तु एवं सेवा कर के अन्तर्गत संयुक्त आपूर्ति तथा मिश्रित आपूर्ति की पहचान की व्यवस्था की गई है।

 

संयुक्त आपूर्ति (Composite Supply)

अर्थ (Meaning)

संयुक्त आपूर्ति का आशय उस आपूर्ति से है जिसमें दो या दो से अधिक वस्तुओं या सेवाओं की एक बण्डल के रूप में आपूर्ति की जाती है। यह बण्डल अपने स्वाभाविक रूप में होता है और ऐसा व्यवसाय या व्यवसाय की उन्नति के लिए सामान्यतः एक प्रथा या क्रिया के रूप में होता है अर्थात् यह आपूर्ति सामान्यतः बण्डल के रूप में ही होती है। इन वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति को एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता अन्यथा सभी का महत्त्व समाप्त हो जाता है।

उदाहरण – एक कार विक्रेता ने कार के साथ रजिस्ट्रेशन, बीमा तथा मेण्टीनेन्स सर्विस का ऑफर भी दिया। इसे संयुक्त आपूर्ति कहा जाएगा क्योंकि बिना वाहन खरीदे इन सेवाओं की अलग से आपूर्ति का कोई औचित्य नहीं है। इसी प्रकार फ्रिज की बिक्री/आपूर्ति (जिसमें पैकिंग, बीमा एवं परिवहन सेवा भी शामिल है) की दशा में फ्रिज प्रधान आपूर्ति तथा अन्य आश्रित आपूर्तियाँ होंगी।

 

परिभाषा (Definition)

किसी कर योग्य व्यक्ति द्वारा आपूर्ति प्राप्तकर्ता को की गई ऐसी आपूर्ति, जिसमें दो या दो से अधिक माल या सेवाओं की या उनके संयोजन की आपूर्ति, जोकि प्राकृतिक अर्थात् स्वाभाविक रूप से एक-साथ संलग्न (Attached) हैं और उनकी एक-साथ आपूर्ति व्यवसाय के दौरान की गई हो और उनमें एक आपूर्ति प्रधान आपूर्ति हो, को संयुक्त आपूर्ति कहा जाता है। केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 2 (30) में संयुक्त आपूर्ति को इस प्रकार से परिभाषित किया गया है—

“Composite supply means a supply made by a taxable person to a recipient consisting of two or more taxable supplies of goods or services or both or any combination thereof which are naturally bundled and supplied in conjection with each other in the ordinary course of business, one of which is a principal supply,”

[Section 2(30), CGST Act, 2017]

संयुक्त आपूर्ति की विशेषताएँ (Characteristics of Composite Supply)

संयुक्त आपूर्ति को प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

(1) संयुक्त आपूर्ति में दो या दो से अधिक कर योग्य आपूर्तियों शामिल होंगी।

(2) संयुक्त आपूर्ति में शामिल माल या सेवाओं को अलग-अलग करके नहीं बेचा जा सकता है।

(3) इस आपूर्ति में शामिल सहायक आपूर्तियों के कारण प्रधान आपूर्ति का मूल्य बढ़ जाता है।

(4) क्रेता केवल प्रधान आपूर्ति को क्रय करता है और सहायक आपूर्तियों का क्रय स्वाभाविक रूप से हो जाता है।

(5) संयुक्त आपूर्ति व्यवसाय की सामान्य अवस्थाओं में की गई हो।

(6) इस आपूर्ति में शामिल सभी आपूर्तियों की विशेषताएँ एवं उनका स्वभाव बरकरार रहता है, वे केवल स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे से जुड़ी होती है।

(7) आपूर्तियों माल या सेवा या दोनों से सम्बन्धित हो सकती हैं।

 

संयुक्त आपूर्ति में कर दायित्व (Tax Liability of Composite Supply)

संयुक्त आपूर्ति में चूंकि एक आपूर्ति, प्रधान आपूर्ति होती है। अतः सम्पूर्ण आपूर्ति में, प्रधान आपूर्ति में लगने वाली GST की दर से कर लगाया जाएगा। अन्य सहायक आपूर्तियां कर के लिए महत्त्वहीन हो जाएंगी।

[धारा 8(a), CGST Act के अनुसार)]

संयुक्त आपूर्ति की दशा में आपूर्ति के समय का निर्धारण (Determination of Time of Supply in case of Composite Supply)

संयुक्त आपूर्ति की दशा में, जो प्रधान आपूर्ति होती है उसी के अनुरूप कर की गणना होती है। यदि प्रधान आपूर्ति माल से सम्बन्धित है, तो आपूर्ति का समय माल पर लगने वाले नियमों के अनुसार निर्धारित होगा लेकिन यदि प्रधान आपूर्ति सेवा है, तो आपूर्ति का समय सेवा सम्बन्धी नियमों के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।

 

मिश्रित आपूर्ति (Mixed Supply)

अर्थ (Meaning)

जब दो या दो से अधिक आपूर्तियाँ, जिनमें से प्रत्येक को अपनी निजी पहचान है और उन्हें अलग-अलग भी पूरित किया जा सकता है, लेकिन ग्राहक की सुविधा के लिए उन्हें एक ही पैकिंग में रखकर एक ही मूल्य में इनकी आपूर्ति की जाती है, तो ऐसी आपूर्ति को मिश्रित आपूर्ति कहा जाता है। इस आपूर्ति में आपूर्तियों का जो संयोजन या बण्डल बनता है। वह स्वाभाविक नहीं होता है और न ही वे आपूर्तियों एक-दूसरे पर निर्भर होती हैं।

परिभाषा (Definition)

जैसा कि पहले ही चर्चा की जा चुकी है कि जब दो या दो से अधिक स्वतन्त्र स्वभाव वाली आपूर्तियाँ चाहे वे माल से सम्बन्धित हों या सेवा से या दोनों से हों, एक ही बण्डल या पैकेज में एक मूल्य पर उपलब्ध करायी जाती हैं, तो इस आपूर्ति को मिश्रित आपूर्ति कहा जाता है। केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम में मिश्रित आपूर्ति को इस प्रकार से परिभाषित किया गया है—

“Mixed supply means two or more individual supplies of goods or services or any combination thereof, made in conjunction with each other by a taxable person for a single price where such supply does not constitute a composite supply,”

[धारा 2 (74), CGST Act, 2017]

मिश्रित आपूर्ति में कर दायित्व (Tax Liability of Mixed Supply)

मिश्रित आपूर्ति में यद्यपि सभी आपूर्तियाँ स्वतन्त्र स्वभाव की होती है तथापि वहाँ पर कोई आपूर्ति न तो प्रधान आपूर्ति होती है और न ही महत्त्वहीन आपूर्ति होती है। पैकेज या बण्डल में शामिल सभी आपूर्तियों में से जिस आपूर्ति की कर की दर सबसे उच्च अर्थात् अधिक होगी उसी दर से पैकेट की सभी वस्तुओं पर GST लागू होगा अर्थात् कम कर दर वाली आपूर्तियाँ भी उच्च दर से करारोपित हो जाएँगी।

[धारा 8 (b), CGST Act, 2017]

मिश्रित आपूर्ति की दशा में आपूर्ति के समय का निर्धारण (Determination of Time of Supply in case of Mixed Supply)

मिश्रित आपूर्ति में जिस आपूर्ति की कर की दर ऊँची होगी, उसी दर से कर लगेगा। यदि उच्च दर वाली आपूर्ति माल से सम्बन्धित है, तो आपूर्ति का समय निर्धारित करते समय सेवा वाले नियम लागू होंगे।

Unit 2 Levy and Collection of G.S.T Mcom Notes
Unit 2 Levy and Collection of G.S.T Mcom Notes

Levy and Collection G.S.T


Follow me at social plate Form
Facebook Instagram YouTube Twitter

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
B.com
M.com
B.sc
Help