Private Company Corporate law Notes Bcom part 2

Private Company Corporate law Notes Bcom part 2

Private Company Corporate law Notes Bcom part 2 :-

निजी कंपनी या अलोक कम्पनी या प्राइवेट कंपनी

भारतीय कंपनी अधिनियम, 1956 (संश्योधित अधिनियम 2000की धारा 3(1)(iii) के अनुसार, “निजी कंपनी का आशय एक ऐसी कंपनी से है जिसकी प्रदत पूंजी कम से कम एक लाख रूपये या इससे अधिक निर्धारित की है तथा जो अपने अंतर्नियम द्वारा”-




(i) अपने अंशो के हस्तांतरण के अधिकार पर प्रतिबंध लगती है

(ii) अपने सदस्यों की संख्या को (अपने कर्मचारी सदस्यों को छोड़कर ) 50 तक सिमित रखती है |

(iii) अपने अंशो और ऋण-पत्रों के खरीदने के लिए जनसाधारण (जनता) को निमंत्रित नही करती |

(iv) अपने सदस्यों, संच्यालको अथवा उनके रिश्तेदारों के अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति से जमाये आमंत्रित करने या स्वीकार करने पर निषेध लगती है

यहाँ पर यह उल्लेखनीय है की कंपनी (संशोधन) अधिनियम 2000 लागु होने के समय यदि किसी निजी कंपनी की प्रदत पूंजी एक लाख रूपये से कम है तो ऐसी कंपनी को इस संशोधन अधिनियम लागु होने के दो वर्ष के भ्यितर अपनी प्रदत पूंजी को बढाकर एक लाख रूपये करना अनिवार्य होगा \यदि ऐसी कंपनी निर्धारित अवधि में अपनी प्रदत पूंजी न्हई बढाती है तो यूज़ कंपनी अधिनियम की धारा 560 के अधीन निष्क्री कम्पनी माना जायेगा एंव रजिस्ट्रार द्वारा उसका नाम कम्पनियों के रजिस्टर में से काट दिया जायेगा परन्तु जो कंपनी कला , वाणिज्य विज्ञान आदि के विकास हेतु धारा 25 के अन्त्र्गर पंजीकृत करायी जाएगी उन पर प्रदत पूंजी के प्रावधान लागु नही होगे |

जब दो या दो से अधिक व्यक्ति सयुंक्त नाम में कम्पनी के अंश लेते है तो कंपनी के सदस्यों की संख्या ज्ञात करने हेतु ऐसे अंशधारियो को एक अंशधारी ही माना जायेगा |

एक निजी कंपनी में कम से कम दो सदस्यों का होना अनिवार्य है कोइबी दो व्यक्ति मिलकर निजी कंपनी के रूप में सममेलन करा सकते है इसके अतिरिक्त ऐसी कंपनी को अपने नाम के अंत में प्राइवेट लिमिटेड शब्द लिखना आवश्यक है |

निजी कंपनी की विशेषताए या लक्षण  CHARACTERISTICS OF PRIVET COMPANY

निजी कंपनी की प्रमुख विसेश्ताये निम्न प्रकार है –



(i) न्यूनतम प्रदत पूंजी –भारतीय कंपनी (संशोधन) अधिनियम 2000 के अनुसार एक निजी कंपनी की कम से कम एक लाख रूपए की प्रदात पूंजी होनी चाइये |

(ii) अंशो के हस्तांतरण पर प्रतिबंध – एक निजी कंपनी के अंशो को हस्तांतरित नही किया जा सकता निजी कम्पनी अपने अन्त्र्निय्मो द्वारा अंशो के हस्तांतरण पर रोक लगा देती है |

(iii) सदस्यों की संख्या पर प्रतिबंध :- एक निजी कंपनी में कम से कम दो सदस्य होने चाहिए लेकिन सदस्यों की अधिकतम संख्या 50 हो सकती है इस अधिकतम संख्या में कम्पनिया के कर्मचारी शामिल नही किये जाते है|

(iv) अंशो व ऋणपत्रों के क्रय के लिये जनता को आमंत्रित ण करना – एक निजी कंपनी सार्वजनिक कंपनी की भांति अपने अंशो व ऋणपत्रों को क्रय करने के लिये जनता को आमंत्रित नही कर सकती है उसके अंशो व ऋणपत्रों का क्रय स्वयं के सदस्यों द्वारा ही किया जाता है |

(v) सिमित दायित्व :- निजी कम्पनी के सदस्यों का दायित्व सिमित होता है |

(vi) प्राइवेट लिमिटेड शब्द का प्रयोग – निजी कंपनी के लिये अपने नाम के बाद प्राइवेट लिमिटेड शब्द का प्रयोग करना अनिवार्य है

(vii) सार्वजनिक जमाव पर निशेष :- कंपनी (संशोधन) अधिनियम , 2000 के अनुसार, धारा (1)(iii) में एक न्य प्रावधान सम्मिलित किया गया है जिसके अनुसार एक निजी कम्पनी अपाने सदस्यों, संचालको एंव उनके रिश्तेदारों के अतिरिक्त अन्य क्व्यक्तियुओ से जमाये आमंत्रित या स्वीकार नही कर सकती है |

(viii) कम से कम दो संचालक :- निजी कम्पनी में कम से कम दो संचालक होने आवश्यक है | अधिकतम संख्या अंतर्नियम में दी जा सकती है |

निजी कंपनी के विशेषाधिकार एंव छूटे

भारतीय कंपनी अधिनियम निजी और सार्वजानिक, कंपनिया पर सामान्यत: सामान रूप से लागू होता है परन्तु फिर भी निजी कंपनी को सार्वजनिक कंपनी की तुलना में कुछ विसेशाधिकार एंव छूटे प्राप्त है जिनकी संक्षिप्त विवेचना इस प्रकार है –

(1) प्रदत अंश पूंजी – एक निजी कम्पनी की प्रदत पूंजी कम से कम एक लाख रूपये की होनी आवश्यक है जब्नकी सार्वजनिक कंपनी की प्रदात पूंजी कम से कम पांच लाख रूपये होनी अनिवार्य है

(2) न्यूनतम सदस्य संख्या :– निजी कंपनी के सममेलन हेतु केवल दो सदस्यों की ही आवश्यकता होती है जबकि साफ्व्जनिक कंपनी की स्थापना हेतु कम से कम 7सदस्य आवश्यक है |

(3) सममेलन प्रमाण पत्र की प्राप्ति पर ही व्यापर प्रारम्भ :- एक निजी कंपनी सममेलन प्रमाण पत्र प्राप्त करते ही व्यापर प्रारम्भ कर सकती है इसे व्यवसाय प्रारम्भ करने का प्रमाण पत्र प्राप्त करने की आवश्यकता नही होती है |

(4) अंशो का आबंटन :- निजी कंपनी सममेलन के तुरन बाद अंशो का आबंटन कर सकती है इसके लिये न्यूनतम अभिदान की कोई शर्ते नही है |

(5) प्रविवरण या प्रविवरण का स्थानापन्न प्रविवरण – निजी कंपनी को प्रविवरण या प्रविवरण का स्थानापन्न विवरण तैयार करने और यूज़ रजिस्ट्रार के पास ज माँ कराने की आवश्यकता नही होती |

(6) नये अंशो का निर्गमन :- सार्वजानिक कंपनी की भांति निजी कंपनी नये अंशो को विधमान अंशधारियो को निर्गमित करने के लिये बाध्य नही है

(7) अंशो के हस्तांतरण पर प्रतिबंध :- यदि निजी कंपनी के संचालको ने किसी अंशधारी के अंशो का हस्तांतरण अस्वीकार कर दिया है तो वह अंशधारी उसके लिये केन्द्रीय सरकार से भी अपील नही कर सकता हिया |

(8) अंशो के प्रकार एंव मताधिकार :- एक निजी कंपनी किसी भी प्रकार के अंशो कर निर्गमन कर कस्ती है उसके लिये अंश पूंजी का प्रुवाधिकार एंव साधारण अंशो में विभाजन आवश्यक नही है ऐसी कंपनिया मताधिकार को भी स्वेछ्चा से निर्धारित कर सकती है |

(9) प्रबंधिकीय सभा तथा वैधानिक रिपोर्ट अनिवार्य नही :- निजी कंपनी के लिये वैधानिक सभा बुलाना तथा वैधानिक रिपोर्ट रजिस्ट्रार के पास प्रस्तुत करना आवश्यक नही है |

(10) कोरम की पर्याप्तता :-  यदि कंपनी के अन्त्र्नियामो में विपरीत व्यवस्था नही है तो एक निजी कम्पनी में अंशधारियो की साधारण सभा में दो सदस्यों की उपस्थिति ही सभा चलने के लिये पर्याप्त कोरम मानी जाती है एक सार्वजानिक कंपनी में इसके लिये पांच सदस्यों की आवश्यकता पड़ती है |

(11) मतगणना की मांग :- निजी कंपनी की दशा में सदस्य संख्य सात तक होने पर मागतांना की मांग केवल एक सदस्य ही कर सकता है परन्तु यदि सदस्य संख्या सात से अधिक है तो मतगणना की मांग दो सदस्य कर सकते है | सार्वजानिक कंपनी में मतगणना की मांग कम से कम पांच सदस्यों द्वारा की जा सकती अहि |

(12) सदस्यों की सूचि :- एक निजी कंपनी के लिये सदस्यों की सूचि रखना आवश्यक नही है |

(13) प्रबंधक की न्युक्ति :-  निजी कंपनी मैनेजर के पद पर किसी भी समामेलित संस्था , फर्म या संघ की नियुक्ति कर सकती अहि इतना ही नही किसी ऐसे व्यक्ति को भी पर्बंधक नियुक्त कर सकती है जो पहले से ही किसी कंपनी में पर्बंधक या पर्बंध संचालक हो |

(14) समान समूह की कंपनियों में ऋण व विनियोग :- निजी कंपनी उसी ग्रुप की अन्य कंपनियों के अंशो में विनियोग भी कर सकती है एंव ऋण भी प्रदान कर सकती है |

(15) लाभ हानि खाता व चिठा :- निजी कंपनी को अपने लाभ हानी खाते व आर्थिक छिठे की 3 प्रतिया रजिस्ट्रार को भेजना आवश्यक है परन्तु इनकी प्रतिलिपि लेने का अधिकार केवल सदस्यों को ही है सदस्य के अतिरिक्त एनी किसी व्यक्ति कोई इन्हें देखने का अधिकार नही होता है |

निजी कंपनी को सार्वजनिक कंपनी माना जाना PRIVATE COMPANY IS TO BE DEEMED AS A PUBLIC COMPANY  

निजी कंपनी को सार्वजानिक कंपनी माने जाने सम्बन्धी प्रावधान कंपनी अधिनियम 1960 द्वारा जोड़े गये है परन्तु कम्पनी (संशोधन) अधिनियम , 2000 द्वारा मानी हुई सार्वजनिक कंपनी सम्बन्धी धारा 43A के प्रावधानों को निष्प्रभावी कर दिया गया है परिणामस्वरूप, अब वर्ष 2000 के संशोधन क एलागु होने के बाद कोई भी निजी कंपनी मानी हुई सार्वजनकि कंपनी नही बन सकेगी जो कंपनिया मानी हुई सार्वजानिक कंपनी बन चुकी है उन्हें पुन: निजी कंपनी में परिवर्तित करवाया जा सकता है परन्तु जो कंपनी पुन: परिवर्तन नही करवाएगी उन्हें सार्वजानिक कंपनिया ही माना जाता रहेगा |

निजी कंपनी का सार्वजनिक कंपनी में परिवर्तन (Conversion of private company into public company)

यदि कोई निजी कंपनी अपने को सार्वजनकि कंपनी के रूप में परिवर्तित करना चाहती है तो कंपनी अधिनियम की धारा 44 के अनुसार निम्नलिखित विधि अपनानी होगी –

संचालक मंडल की सभा में प्रस्ताव पारित करना :- सर्वप्रथम संचालक मंडल की सभा में इस आशय का एक प्रस्ताव पारित करना चाइये और इस प्रस्ताव को पास करने के लिये कंपनी के सदस्यों की असाधारण सभा बुलाने का निर्णय लिया जाना चाहिए कंपनी की प्रदत पूंजी को कम से कम पांच लाख रूपये करने का निर्णय भी पारित करना होगा |

अंतर्नियम में परिवर्तन :- तत्पश्चात एक निजी कंपनी को अपने सदस्यों की सभा में विशेष प्रस्ताव पारित करके अपने अंतर्नियामो में इस प्रकार से परिवर्तन करना चाहिए जिससे की धारा 3(1) (iii) में उल्लखित आधारभूत शर्ते पूर्णता: समाप्त हो जाये ऐसे परिवर्तन की तिथि से ही वह निजी कंपनी नही रहेगी और सार्वजनिक कंपनी बन जाएगी अन्य परिवर्तन जो आवश्यक हो वह भी कर लेने चाहिए |

सदस्यों तथा संचालको का निश्चित संख्या में होना :- अंतर्नियम में उपर्युक्त परिवर्तन हो जाने के पश्चात कंपनी में कम से कम सात सदस्य तथा तीन संचालको का होना आवश्यक है यदि इससे कम है तो उस संख्या को बढाकर कम से कम क्रमश: 7 या 3 करना होगा |

नाम में आवश्यक परिवर्तन करना :- तत्पश्चात निजी कंपनी को अपने नाम में आवश्यक परिवर्तन करना होगा और कंपनी के नाम के आगे से प्राइवेट लिमिटेड शब्द हटाना होगा |

प्रविवरण या प्रविवरण का स्थानापन्न विवरण रजिस्ट्रार के पास भेजना :- इसके पश्चात अन्त्र्नियामो में किया गये उपयुक्त परिवर्तन की विधि  से तीन दिन के अन्दर कंपनी के रजिस्ट्रार के पास प्रविवरण अथवा प्रविवरण का स्थानापन्न विवरण भेज देना चाइये |

यदि अंतर्नियम में परिवर्तन के 30 दिनों के भीतर प्रविवरण एंव स्थानापन्न प्रविवरण रजिस्ट्रार के पास प्रस्तुत नही किया जाता है तो कंपनी तथा कंपनी के प्रत्येक दोषी अधिकारी पर पांच हजार रूपये प्रतिदिन तक का जुरमाना टैब तक किया जा सकता है जब तक ऐसा दोष जारी रहता है सन 2000 में संशोधित द्वारा 44(3)




संचालको को योग्यता अंश लेने व संचालको की तरह कार्य करने की सहमती भी रजिस्ट्रार के पास भेजी जाती है |

यदि अंश प्रमाणपत्रों में इस परिवर्तन के कारन कुछ परिवर्तन करने होते है तो उन्हें वापस मांग लिये जाता है और उसमे आवश्यक परिवर्तन करके उन्हें पुन: वापस कर दिया जाता है |

एक घोषणा भी रजिस्ट्रार के पास इस विषय की देनी पड़ती है की पब्लिक कंपनी बनाने के लिये जो भी कार्यवाहिय की जनि चाहिए थी वे सब पूरी कर ली गई है |

यदि रजिस्ट्रार उपर्युक्त प्रलेखो की जाँच करने के पश्चात इस बात से पूर्णत: संतुष्ट हो जाता है की उक्त निजी कंपनी ने सार्वजानिक कंपनी के रूप में सभी आवश्यक बाते पूरी कर ली है तो वह उसकी रेगिस्त्री सार्वजनिक कंपनी के रूप में कर लेगा तथा सार्वजनिक कंपनी केर उप में समामेलन का न्य प्रमाण पत्र निर्गमित कर देगा |

सार्वजनिक कंपनी का निजी कंपनी में परिवर्तन CONVERSION OF PUBLIC COMPANY INTO A PRIVATE COMPANY




कंपनी अधिनियम में ऐसी वैधानिक विधि का वर्णन नही है जिसका पालन करके एक सार्वजनिक कंपनी निजी कंपनी में परिवर्तित हो जाये लेकिन फिर भी धहरा ३१ के अनुसार सार्वजनिक कंपनी को निजी कंपनी में परिवर्तित करने हेतु निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है –

संचालक मंडल द्वारा निर्णय करना :- यदि किसी सार्वजनिक कंपनी को निजी कंपनी में परिवर्तित करना है तसर्वप्रथम संचालक मंडल की सभा में इस आशय का एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए इसके लिये सदस्यों की एक सभा बुलाने का भी निर्णय लिया जाना चाइये |

विशेष प्रस्ताव पारित करना :- संचालक मंडल द्वारा निर्णय करने के पश्चात कंपनी द्वारा अपने सदस्यों की साधारण अथवा असाधारण सभा में एक सार्वजानिक कंपनी को निजी कंपनी में परिवर्तित करने के लिये विशेष प्रस्ताव पारित किया जाना चाइये इस प्रस्ताव में कंपनी के अंतर्नियम में आवश्यक परिवर्तन करने का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाना चाइये |

अंतर्नियम में परिवर्तन :- कंपनी को एक विशेष प्रस्ताव द्वारा अपने अंतर्नियम में परिवर्तन करके उन आवश्यक शर्तो का समावेश करना चाहिए जो की अधिनियम की धारा 3(1)(iii) के अधीन एक निजी कंपनी के लिये आवश्यक है |

केन्द्रीय सरकार की स्वीक्रति :- अंतर्नियम में किया गया परिवर्तन टैब तक मानी नही होगा जब तक क्लेंद्रिय सरकार द्वारा स्वीक्रति नही मिल जाती

परिवर्तित अंतर्नियम रजिस्ट्रार को भेजना :- केन्द्रीय सरकार से परिवर्तन की स्वीक्रति मिल जाने का बाद परिवर्तित अंतर्नियम को एक प्रतिलिपि स्वीक्रति के आदेश मिलने के 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रार को भेजना आवश्यक है

उपरोक्त वर्णित विधि से एक सार्वजनिक कंपनी निजी कंपनी में परिवर्तित हो जाएगी और कंपनी को सदस्य तथा संचाक्को की संख्या को निर्धारित सीमा तक घटना होगा तथा अपने नाम के साथ प्राइवेट शब्द जोड़ना होगा |







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