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Parallel Economy Meaning of Black Money Government Effects Stop Black Money

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Parallel Economy  भारत में काला धन या समानान्तर अर्थव्यवस्था



Meaning of Black Money  काले धन का अर्थ

सामान्यत: काले धन से आशय उस धन से है जो या तो अवैधानिक किर्याओ से अर्जित किया जाता है या वैधानिक किर्याओ से अर्जित करने के  बाद उस पर कर नही चुकाया जाता है | इसे बिना हिसाब-किताब की मुद्रा भी कहा जाता है | अत: स्पष्ट है की काला धन वह धन है जो कानून के प्रावधानों का उल्लघन करके अर्जित किया जाता है |

समान्तर अर्थव्यवस्था— समान्तर अर्थव्यवस्था से आशय ऐसी अर्थव्यवस्था से होता है जहा वैध अर्थव्यवस्था व अवैध अर्थव्यवस्था साथ-साथ चलती है | भातीय अर्थव्यवस्था भी एक समान्तर अर्थव्यवस्था है, जहा काले धन व् सफेद धन को अलग-अलग करने सम्भव नही है | व्यवहार में काले धन का सफेद धन का काले धन में परिवर्तन होता रहता है |

 

हमारे देश में इस समय दो अर्थव्यवस्थाए चल रही है— एक अर्थयवस्था वह है जिसमे खुले लेन-देंन होते है तथा सरकारी नियमो के अनुसार धन पैदा किया जाता है और धन का हिसाब होता है | इसके अतिरिक्त एक दूसरी अर्थव्यवस्था है जो इस सरकारी अर्थव्यवस्था के समानान्तर चल रही है जिसमे छिपे लेन-देंन होते है तथा प्राप्त आय को छिपा लिया जाता है | कालान्तर में इसका आकार बहुत बढ़ गया है |

Due to the creation of black money in India भारत में काले धन की उत्पति के कारण

 

  1. करो की ऊँची डरे— भारत में करो की दर बहुत ऊँची है जिससे अधिकतर व्यक्ति क्र बचाने के लिये अपनी वास्तविक आय से बहुत कम आय प्रकट करते है | परिणामस्वरूप बिना हिसाब-किताब की मुद्रा बढने से काला धन बढ़ता रहता है |
  2. मूल्यों में तीर्व व्रद्धि— मूल्यों में होने वाली निरन्तर व्रद्धि घूसखोरी, कालाबाजारी, माल का सग्रह तथा सट्टेबाजी को प्रोत्साहन करती है, जिससे काले धन बढ़ता रहता है |
  3. कर चोरी रोकने के कमजोर प्रयास— भारत में करो की चोरी रोकने के लिये सरकार द्वारा कठोर उपाय नही अपनाए जाते | आयकर विभाग में विगत दो दशको में प्रशासन के निचले स्तर पर भ्रष्टाचार बहुत अधिक बढ़ गया है जिससे काले धन में व्रद्धि हो रही है
  4. तस्करी— तस्करी भी देश में काले धन को बढ़ाने में सहायक होती है | कुछ व्यक्ति देश से चोरी छिपे माल बाहर भेजते है तथा बाहर से यहा माल लाते है | इससे देश में कीमतों पर प्रभाव पड़ने के साथ-साथ काले धन की मात्रा भी बढती है |
  5. दोषपूर्ण चुनाव प्रणाली— काला धन भारतीय अर्थव्यवस्था की राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चूका है | भारत में लोकसभा, विधानसभा तथा स्थानीय संस्थाओ के चुनाव पर अत्यधिक राशि व्यय हो जाती है | इस राशि का कोइ हिसाब नही होता, जिससे काले धन की मात्रा बढती है |
  6. सरकारी व्यय में व्रद्धि— सावर्जनिक वित्त एंव नीति के राष्टीय सस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, “सरकार स्वय शीशे के मकान में रहती है, क्योकि पिछले दो दशको में इसके द्वारा व्यय में व्रद्धि ने काले धन के सर्जन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है |” निर्माण के सब ठेको, खरीद-बिक्री तथा अन्य नियमित व्यापार में जो सरकार की और से किये जाते है एक निशिचत प्रतिशत का भुगतान किया जाता है जिससे काले धन में वर्धि होती है |

Black money side effects on country’s economy काले धन का दश की अर्थव्यवस्था पर दुष्प्रभाव




  1. सरकारी आय में कमी— कर चोरी के कारण सरकार को प्रतिवर्ष अरबो रूपये की कर राजस्व की हानि होती है फलत: सरकार अपनी आय बढ़ाने के लिये कर की दरो में व्रद्धि करती है जिससे एक तरफ तो कर प्रणाली जटिल बनती है तथा दूसरी और क्र वचन को प्रोत्साहन मिलता है | अत: अर्थव्यवस्था पर इसके दीर्घकालिक गम्भीर प्रभाव पढ़ते है |
  2. साधनों का दुरपयोग— काले धन से मुद्रा के अपव्यय को प्रोत्साहन मिलता है इससे विलासिता की वस्तुओ के उपभोग में व्रद्धि होती है तथा वितीय साधनों का उपयोग अनुत्पादक कार्यो में होने लगता है इसके फलस्वरूप देश में प्रचुर मात्रा में पूजी उपलब्ध होते हुए भी प्राक्रतिक संसाधनो का विदोहन नही हो पाता तथा देश का विकास धीमा हो जाता है |
  3. अर्थव्यवस्था का गलत विशलेषण—बढ़ी मात्रा में काले धन की उपलब्धता के करण राष्टीय आय, उपभोग,बचत,आय के वितरण आदि के सम्बन्ध में सही आकडे उपलब्ध नही हो पाते | इससे आर्थिक नियोजन में बाधा उत्पन होती है तथा आर्थिक निर्णय अर्थहीन हो जाते है |
  4. प्रदर्शनकारी प्रभाव में वर्धि— काले धन का प्रयोग लोग प्रदर्शन में करते है जिससे समाज के कमजोर वर्ग में हीनता की भावना विकसित होने लगती है
  5. आय के वितरण में असमानताओ का अधिक होना— जिन लोगो के पास काला धन अधिक विधमान होता है वे उतनी ही अधिक मात्रा में अपनी सही आय को छुपाने का प्रयास करते है धनी लोग कर चोरी करके इस काली आय का उपयोग गैर-क़ानूनी व्यवस्थाओ में करते है जिससे और अधिक काले धन का सर्जन होता है परिणाम स्वरूप आय का वितरण और अधिक असमान हो जाता है |

 

Government efforts to stop black money काले धन को रोकने के लिये सरकारी प्रयास




सरकार ने काले धन की समस्या को स्वीकार करके इसके नियन्त्रण के लिए अनेक प्रयास किये है | लेकिन आज यह समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है | इसके समाधान के लिये सरकार द्वारा किये गये प्रयास निम्नलिखित है—

  1. विमुद्रिकरण— काले धन को समाप्त करने के लिए सरकार ने दो वर मुद्रा का विमुद्रिकरण किया है— पहला 1964 में तथा दूसरा 1978 में | इसमे सरकार ने 1000 के नोटों का चलन बंद कर दिया जिससे बहुत सारा काला धन जो बड़े नोटों के रूप में सचित करके रखा गया था समाप्त हो गया |
  2. स्वैच्छिक आय घोषणा योजना— इस योजना को 1997 में लागु किया गया जिसमे स्वेच्छा से आय घोषित करने वालो को करो में रियायते व् अन्य कई प्रकार की सजाओ व ह्र्जानो से मुक्ति देने का वायदा किया गया था | इस योजना से लगभग 33,000 करोड़ रूपये का काला धन, सफेद धन में परिवर्तित हुआ है |
  3. विशिष्ट धारक ब्राण्ड— सरकार द्वारा काले धन को सामने लाने के लिये विशिष्ट योजनाए चलायी जाती है ; जैसे— इंदरा विकास पत्र तथा इसके समकक्ष अन्य | इन योजनाओ में जमा कराने वाले से मुद्रा का स्त्रोत नही पुछा जाता और अवधि समाप्ति के बाद काला धन सफेद धन में बदल जाता है |
  4. छापे तलाशिया आदि— काली मुद्रा को बहार निकालने के लिए कर अधिकारी समय-समय पर उन लोगो के घरो में छापे मारते रहते है जिनके पास काले धन होने की आशंका रहती है | छापे के बाद बरामद किये गए काले धन को जोरदार प्रचार किया जाता है लेकिन इन उपायों से आशानुकूल सफलता अर्जित नही हो सकी है |
  5. कर सरचना में सुधार— काले धन को नियन्त्रित करने के लिए कर सरचना में सुधार लाना आवश्यक है | देश में कर प्रणाली समझाने योग्य व सरल होनी चाहिए जिसमे सामान्य दर वाले कर हो | कर प्रणाली में सुधार के लिये यह भी आवश्यक है की कर निर्धारण का कार्य शीघ्र ही निबटाया जाए | अत्यधिक व्यय पर ऊँची दर से कर लगाना चाहिए | इस दिशा में पिछले दशक में सरकार ने पर्याप्त प्रयास किये है |





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