Modern Forms of Communication Notes in Hindi

Modern Forms of Communication Notes in Hindi

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(Modern Forms of Communication) सम्प्रेषण के आधुनिक स्वरूप

Modern Forms of Communication Notes in Hindi
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आधुनिक युग, सुचना तकनीक का युग है | पिछले दस वर्षो में आई सुचना तक्मिक क्रान्ति ने व्यावसायिक संचार को अत्यधिक और बहुमुखी प्रभावों से परिवर्तित कर दिया है | सस्ते दामो पर तीव्र गति से सुचना के क्षेत्र में उपलब्ध साधनों ने पुराने लिखित और औपचारिक संचार को सीधे और औपच्रारिक संचार में परिवर्तित कर दिया है |

आधुनिक समय में सम्प्रेषण तकनीक का काफी विकास और विस्तार ही चूका है | वर्तमान में समय में एक तरफ व्यावसायो का विकास हो रहा है तो दूसरी तरफ सम्प्रेषण तकनीक के भी नये-नये माध्यम विकसित होते जा रहे है | सम्प्रेषण के कुछ आधुनिक साधनों में इंटरनेट, ई-मेल, फैक्स, सेलफोन्स, कंप्यूटर, पेजर्स इत्यादि प्रमुख है | सम्प्रेषण की आधुनिक तकनीक से व्यक्ति काफी समय भी बचता है तथा दूरियां भी कम होती जा रही है | संचार की प्रगति की वाणिज्य, उघयोग तथा व्यवसाय इत्यादि क्षेत्रो में विकास में निर्णायक भूमिका है |

आधुनिक संचार के साधनों को करने के तरीको का भी कायाकल्प कर दिया है | अब हम इंटरनेट पर देश विदेश से अपने पसन्द की वस्तुएँ खरीद व बेच सकते है | सेल्युलर फोन की सहायता से यात्रा के समय किसी को भी कहीं भी सन्देश भेजा जा सकता है |





(MODERN FORMS OF COMMUNICATION) आधुनिक संचार के साधन

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(1) इलैक्ट्रॉनिक अथवा ई मेल (Electronic mair or E-mail) जिस प्रकार डाक द्वारा एक पत्र को एक स्थान से दुसरे स्थान पर भेजा जा सकता है, उसी प्रकार आज कंप्यूटर के द्वारा पत्र एक स्थान से दुसरे स्थान पर भेजे जाते है | इसे ई-मेल कहा जाता है | ई-मेल के द्वारा एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति तक संदेश अन्य साधनों की अपेक्षा आधिक तेज गति से एक स्थान से दुसरे स्थान तक भेजा जा सकता है |

ई-मेल के द्वारा जिस सन्देश या पत्र को प्रेषित करना होता है, उसकी समग्री वर्ड प्रोसेसर (Word Processor) द्वारा तैयार की जाती है, तत्पपश्चात् जिस पते पर यह पत्र प्रेषित करना होता है, वहाँ तक इसे टेलीफोन नेटवर्क द्वारा प्रेषित किया जाता है | पत्र या सन्देश की समस्त जानकारी सम्बन्धित व्यक्ति के कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाती है | सम्बन्धित व्यक्ति यदि उस समय उपलब्ध नहीं है तो संदेश उसके कंप्यूटर में संचित हो जाता है तथा व्यक्ति के कंप्यूटर आँन करते ही सन्देश टी० वी० स्क्रीन पर दिखाई देने लगता है | इस संदेश को वह प्रिंण्ट भी ले सकता है | ई-मेल द्वारा व्यक्ति कंप्यूटर सन्देश को टाइप करके किसी दुसरे कंप्यूटर में प्रेषित कर सकते है बशर्ते की दोनों क्व कंप्यूटर इन्टरनेट से जुड़े हो | यह प्रणाली न केवल सस्ती है बल्कि संदेश को तीव्र गति से पहुँचाती है है तथा इसमें कागज और समय दोनों की बचत भी होती है |

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(2) इन्टरनेट (Internet) इन्टरनेट शब्द अंग्रेजी के दो शब्दों इंटरनेशनल तथा नेटवर्क से मिलकर बना है जिसका अर्थ है विश्वव्यापी तंत्र से है | इंटरनेट आधुनिक संचार माध्यम की ऐसी तकनीक है, जो विभिन्न स्थानों पर स्थापित कम्पूटर्स को टेलीफोन लाइन की मदद से जोड़कर संदेशो के सम्प्रेषण के लिए इतना बड़ा मार्ग स्थापित करता है की सुचना व् संदेश शीघ्र ही पहुँच जाते है | संचार के सबसे सशक्त यन्त्र इन्टरनेट ही शक्ति को हम निम्न कथन जे द्वारा स्पष्ट कर सकते है –

“यदि हम सम्प्रेष्ण के विभिन्न माध्यमो की गति व वृध्दि का अवलोकन करें तो हम देखेंगे की 40 वर्षो में रेडियो 50 मिलियन लोगो तक पहुँचा, जबकि इतने लोगो तक पहुँचने के लिए टी० वी० व कंप्यूटर ने क्रमश: 13 व 16 वर्षो के लिए, जबकि इन्टरनेट केवल चार वर्षो में ही पचास मिलियन लोगो तक पहुँच चूका है |”

भारत में इन्टरनेट 10 वर्षो से कार्य कर रहा है तथा भारत में इसका संचालन BSNL कर रहा है |

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(3) फैक्स (Fax) ‘फैक्स’ की उत्पति अंग्रेजी भाषा के शब्द ‘फेसिमिली’ से हुई है | ‘फेस’ से तात्पर्य ‘बनाना’ और सिमिली ‘उसी के समान’ से है | जब सम्प्रेषक तथा सन्देश प्राप्तकर्ता के मध्य दुरी आधिक होती है तब उस स्थिति में इस पद्धति का प्रयोग अत्यन्त उपयोगी तथा लाभदायक सिध्द होता है |

फैक्स सम्प्रेषण की एक आधुनिक तथा सरल विघुतीय तकनीक है | इसके अन्त्र्गार्ट मुद्रित अथवा लिखित सुचना अथवा मूल दस्तावेजो की फोटो काफी टेलीफोन नेटवर्क के मध्यम से एक जगह से दूसरी जगह पर भेजी जाती है |

यह प्रणाली एनी प्रणालियों की तुलना में त्वरित व सस्ती है | फोटोस्टेट मशीन के द्वारा जिस प्रकार किसी प्रपत्र की प्रतिलिपि प्राप्त हो जाती है उसी प्रकार फैक्स प्रक्रिया में भी प्राप्तकर्ता को दूसरी स्थान पर प्रपत्र की फोटो काफी प्राप्त हो जाती है |

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(4) विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग (Video Conferencing) विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग सचित्र संचार का एक प्रमुख साधन है | इस प्रध्दति के अंतर्गत आवाज तथा चित्र दोनों का सम्प्रेषण होता है | इसमें अलग-अलग जगहों पर उपस्थित व्यक्ति ‘वास्तविक सभा’ की तरह की संचार करते है | इसमें संदेशो को भेजने के साथ-साथ एक-दुसरे से सजीव बातचीत भी की जा सकती है जिससे उनके हाव भाव, भाव-बंगिमा, मुखाभिव्यक्ति का भी संचार हो जाट अहै | वर्तमान समय में भारत के प्रत्येक जिले में विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है | विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग प्रक्रिया को दो तिको से सम्पन्न किया जा सकता है –

(i) कंप्यूटर की सहायता से

(ii) बिना कंप्यूटर की सहायता से |

जब हम कंप्यूटर की सहायता से इस प्रणाली का प्रयोग करते ही तो हमें कंप्यूटर, टेलीफोन कनेक्शन, इटरनेट तथा वेब कैमरे की आवश्यकता होती है | इसे कंप्यूटर कॉन्फ़्रेंसिंग भी कहा जाता है |

यदि हम कंप्यूटर के बिना इस प्रणाली की बात करे तो विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग मशीन, टेलीफोन सैटेलाइट कनेक्शन, प्रोजेक्टर एवं डिजिटल वेब कैमरे की आवश्यकता होती है |

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(5) सेल्युलर फ़ोन्स (Cellular Phones) सेल्युलर फ़ोन्स जिसे मोबाइल भी कहते है, आज के आधुनिक युग में मौखिक संप्रेषण की अत्यंत प्रचलित तकनीक है | यह आकार से इतना छोटा होता है की इसे आसानी से जेब में रखकर एक स्थान से दुसरे स्थान पर ले जाया सकता है | इसमें केबिल लगाने की आवश्यकता भी नहीं होती | इसका प्रयोग किसी भी स्थान पर किसी भी समय किसी भी वाहन में बैठे हुए देश के किसी भी क्षेत्र में जहाँ यह संचार प्रणाली उपलब्ध है, आसानी से किया जा सकता है |

जब संचार की भूमिगत प्रणालियाँ ख़राब हो जाती है तब इनकी उपयोगिता और भी आधिक हो जाती है, क्योकि क्योकि इनमे ऐसी कोई तकनीकी खराबी आने की सम्भावना नहीं होती |

 


(ADVANTAGES OF MODERN FORMS OF COMMUNICATION) आधुनिक संचार साधनों के लाभ

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आधुनिक संचार के साधनों के प्रमुख लाभ निम्नलिखित है –

(1) आधुनिक संचार साधनों के सहायता से सन्देश को शीघ्रता से कम समय में एक स्थान से दुसरे स्थान पर भेजा जा सकता है |

(2) विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग की सहायता से लम्बी दुरी की यात्रा किये बिना ही सभा तथा सम्मेलन में भाग लिया जा सकता है |

(3) सेल्युलर फोन पर किसी भी स्थान से कही भी जहाँ यह सुविधा उपलब्ध हो दुसरे सेल्युलर फोन या परंपरागत फोन पर बातचीत की जा सकती है |

(4) फैक्स की सहायता से दूरवर्ती स्थानों से महत्वपूर्ण दस्तावेजो अथवा प्रपत्रों को शीघ्रता से सुरक्षित भेजा जा सकता है |

(5) इन्टरनेट पर देश-विदेश से अपने पसंद की वस्तुएँ खरीद व बेच सकते है |

(6) आजकल का व्यापारिक संचार तेजी से कम औपचारिकता की तरफ बढ रहा है | ई-मेल दफ्तर में बिना कागज सुविधाएँ प्रदान करता है और कर्मचारी बिना दफ्तर पर बैठे ही कार्य करने में समर्थ हो पाते है |

(7) आधुनिक संचार साधनों के द्वारा प्रबंधको एवं कर्मचारियों के बीच सम्बन्ध आसन हो गए है | वे एक-दुसरे के साथ कार्य घंटो के अतिरिक्त आवश्यकता होनर पर घर बैठे सम्पर्क स्थापित करके काम निपटा सकते है |

(8) आधुनिक संचार साधनों के द्वारा संदेश को याददाश्त के लिये स्टोर भी किया जा सकता है |



(FAX) फैक्स

फैक्स प्रणाली का प्रयोग सर्वप्रथम स्काँटलैंड के वैज्ञानिक अलेक्जेंडर सेन ने सन् 1842 में किया जा सकता है लेकिन इसका पूर्णत विकास सन् 1900 में हुआ जब जर्मन के आर्थर केन ने फैक्स तन्त्र क निर्माण किया | सन् 1902 में उन्होंने चित्रों के के प्रेषण व अभिमुद्रण के लिए प्रथम फोटो इलैक्ट्रिक फैक्स तन्त्र का निर्माण का प्रयोग किया | अज फैक्स मशीन का प्रयोग प्रत्येक छोटे-छोटे ऑफिस में किया जाने लगा है |

फैक्स दूरसंचार द्वारा लिखित दस्तावेजो या चित्रों को प्रेषित करने की एक आधुनिकतम विधि है | इसके माध्यम से कोई व्यापारी से कोई व्यापी या संस्था अन्य व्यापारी या संस्था को चाहे वह कितना भी दूर क्यों न हो, सन्देश भेज सकते है, बशर्ते सन्देश प्राप्त करने वाले व्यक्ति या संस्था क्र पास फैक्स मशीन हो | इसमें ग्राफ, चार्ट, हस्तलिखित व मुद्रित सामग्री को टेलीफोन नेटवर्क के माध्यम से एक स्थान से दुसरे स्थान पर मूल प्रति की फोटो काफी के रूप में प्रेषित किया जाता है |

(WORKING PROCEDURE OF FAX) फैक्स की कार्य प्रणाली

जिस संदेश को फैक्स करना होता है सवर्प्रथम उसे स्केंनिग प्रक्रिया से गुजारा जाता है | संदेश मुद्रित अथवा लिखित किसी भी प्रकार का हो सकता है | इसमें यह सुचना अथवा विघुतीय संकेतो में बदल जाता है | जब यह विघुत संकेत रिकाँर्डर से होकर गुजरते है, तो प्राप्तकर्ता की मशीन में सम्प्रेषित सुचना अथवा सन्देश की प्रतिलिपि प्राप्त हो जाती है | फोटोस्टेट मशीन के द्वारा जिस प्रकार किसी प्रपत्र की प्रतिलिपि प्राप्त हो जाती है, उसी प्रकार फैक्स प्रक्रिया में भी प्रपत्र की फोटो काफी प्राप्त होती है | इस पध्दति में सम्प्रेषक तथा फोटो काफी प्राप्त करने वाला व्यक्ति दोनों भिन्न-भिन्न जगह पर होते है | ये दुरी टेलीफोन लाइन के द्वारा जोड़ी जाती है | आधुनिक युग में फैक्स सेवा का महत्व निरन्तर बढ़ता जा रहा है | इस पध्दति से संदेश भेजने की लागत काफी कम आती है तथा संचार की गुणवता में भी सुधार आता है | वर्तमान समय में सभी समाचार पत्र समूह इस पध्दति का प्रयो करते है |

(ADVANTAGES OF FAX SYSTEM) फैक्स विधि के लाभ

फैक्स मशीन के द्वारा संदेशो का भेजना बहुत ही आसान हो गया है, इसलिए बड़े व माध्यम आकार के व्यापारी गृह संदेश वाहन के साधन के रूप में फैक्स मशीन का उपयोग करने लग गए है | इससे प्राप्त लाभ निम्न प्रकार है –

(1) इस यंत्र से संदेश भेजना अत्यन्त सरल होता है |

(2) इस यंत्र से दस्तावेजो को लिखित रूप में भेजा जा सकता है |

(3) व्यापारी की अनुपस्थिति में भी उसका फैक्स मशीन संदेश को ग्रहण कर सकती है |

(4) फैक्स मशीन से सन्देश कुछ ही सेकण्डो में या मिनटों में भेजा जा सकता है संदेश वाहन को यह त्वरित प्रणाली है |

(5) भेजा गया सन्देश मूल दस्तावेजो की हुबहू नक़ल होती है तथा उसमे सन्देश भेजने की प्रक्रिया के दौरान काट-छाट नहीं की जा सकती है |

(6) फैक्स मशीन से भेजा गया सन्देश पूर्णतया गोपनीय रहता है |

(E-MAIL) ई-मेल

ई-मेल संचार की एक ऐसी पध्दति हिया जिसमे कंप्यूटर के द्वारा सन्देश को एक स्थान से दुसरे स्थान पर भेजा जा सकता है | ई-मेल सुविधा के द्वारा जिस सन्देश को सम्प्रेषण के अन्य साधनों की तुलना में तीव्र गति से एक व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को भेजा जा सकता है |

ई-मेल के द्वारा जिस संदेश या पत्र को प्रेषित करना होता है, उसकी सामग्री वर्ड-प्रोसेसर द्वारा तैयार की जाती है, तत्पश्चात् जिस पते पर यह पत्र प्रेषित करना होता है, वहाँ तक इसे टेलीफोन नेटवर्क के प्रयोग द्वारा भेज दिया जाता है पत्र या सन्देश की समस्त जानकारी सम्बन्धित व्यक्ति के कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाती है |

ई-मेल प्रणाली सन्देश भेजने की बहुत तीव्र प्रणाली है | इससे भागदौड वाली जिन्दगी में समय व कागज़ दोनों की ही बचत होती है | यह बहुत ही सस्ती विधि है परन्तु इस प्रणाली का इस्तेमाल करने के लिए दोनों व्यक्ल्तियो के पास इन्टरनेट कनेक्शन होना जरुरी होता है |

ई-मेल भेजने की विधि

ई-मेल भेजने के लिए कंप्यूटर, इन्टरनेट तथा अन्य आवश्यक उपकरणों के साथ ई-मेल पता होना आवश्यक होता है | इन्टरनेट से जुड़े हुए व्यक्ति को हम चाहे वह कही भी हो, ई-मेल किया जा सकता है | ई-मेल करने के लिए सबसे पहले विंडो के Start वाले चिन्ह पर Click किया जाता है | इससे कंप्यूटर में विघमान सभी कार्यक्रमों की सूचि स्क्रीन पर दिखाई देने लगती है | इसमें Outlook Express पर Click करने पर प्रोग्राम चालू हो जाता है तथा स्क्रीन पर ‘नया मेल’ चिन्ह दिखाई देता है | इसे Click करने पर ‘New Message’ नामक खिड़की खुल जाती है | इसमें जहाँ To लिखा होता है वहाँ पर पता लिख दिया जाता है | इसके बाद सन्देश टाइप करके Send के चिन्ह पर क्लिक करना होता है | यह सब होने के बाद सन्देश माँडम द्वारा इनकोड होकर फ़ोन लाइन के लिए जरिए एनालाँग सिंग्नल्स की तरह भेजा जाता है |

ई-मेल प्राप्त करने की प्रक्रिया भी काफी सरल है | यदि कंप्यूटर में E-mail Software अथवा Outlook Express है तो यह Internet से जुड़ते ही सन्देश की जाँच करेगा | यदि कंप्यूटर में सन्देश है तो वह Screen के निचले हिस्से पर दिखाई देगा | अब को खोलकर सन्देश को पढ़ा जा सकता है |




(ADVANTAGES OF E-MAIL) ई-मेल के लाभ

(1) ई-मेल बहुत दुरी पर तुरन्त बहुत से व्यक्तियों को एक साथ भेजा जा सकता है |

(2) ई-मेल के द्वारा सन्देश बहुत से व्यक्तियों को एक साथ भेजा जा सकता है |

(3) ई-मेल में कागज व समय दोनों की बचत होती है |

(4) यदि सन्देश से सम्बन्धित व्यक्ति उस समय उपलब्ध नहीं है तो संदेश कंप्यूटर में संचित हो जाता है तथा व्यक्ति के कंप्यूटर आँन करते ही स्क्रीन पर दिखाई देने लगता है |

(5) इसमें प्राप्तकर्ता संदेश को केवल पढ़ ही नहीं सकता बल्कि उसका प्रिंण्ट भी ले सकता है |

(6) ई-मेल के द्वारा व्यावसायिक संचार कम औपचारिक हो गया है | इससे प्रबन्धको व कर्मचारियों के बीच आसानी से सम्पर्क स्थापित हो जाता है |

इन्टरनेट एक अत्यन्त शक्तिशाली तथा गतिशील संचार का माध्यम है | इंटरनेट आधुनिक सम्प्रेषण माध्यम की एक ऐसी पध्दति है जोई अलग-अलग जगहों पर स्थापित कम्पूटरर्स को टेलीफोन लाइन की सहायता से जोड़ता है तथा संचार के लिये एक ऐसा रास्ता तैयार करता है जिससे की सन्देश तथा सुचना शीघ्रता से पहुँच जाते है | इन्टरनेट अंग्रेजी के दो शब्दों से मिलकर बनता है –

इंटरनेशनल तथा नेटवर्क, जिसका तात्पर्य विश्वव्यापी यंत्र से है |

इन्टरनेट का शुभभारम्भ में अमेरिका में हुआ था जब अमेरिका के प्रतिरक्षा विभाग ने अपने आँकड़ो को विभिन्न, जो दूर-दूर के राज्यों में स्थित थे, भेजने व प्राप्त करने के लिए उपग्रहों और केबल नेटवर्क का उपयोग किया गया था | बाद में कुछ पुस्तकालय और कुछ कुछ निजी स्थान भी इससे जुड़ गये | भारत वर्ष में की सुविधा सवर्प्रथम एजुकेशन एण्ड रिसर्च नेटवर्क ने उपलब्ध करायी थी किन्तु 15 अगस्त 1995 से इसका संचालन भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) व्यावसायिक उपयोग के लिये कर रहा है | वर्तमान समय में कुछ निजी कम्पनियाँ, सरकारी उपक्रम तथा केबल आपरेटर भी यह सुविधा प्रदान कर रहे है |

आधुनिक समय में इन्टरनेट का प्रयोग भिन्न-भिन्न प्रकार की सूचनाएँ प्राप्त करने में किया जाता है | इन्टरनेट की सहायता से देश-विदेश से अपनी पसंद की वस्तुएँ खरीदी व बेचीं भी जा सकती है | इससे घर बैठे-बैठे ही दूर रहने वाले लोगो से सम्पर्क स्थापित करके बातचीत की जा सकती है |

वर्तमान समय में संचार के लिये इन्टरनेट अत्यंत आवश्यक है | के०के० सिन्हा ने अपनी पुस्तक Business Communication, 2002 में लिखा है की –

“यदि हम संचार के लिये भिन्न-भिन्न माध्यमो की गति व वृध्दि का अवलोकन करे तो हम देखेगे की 40 वर्षो में रेडियो 50 मिलियन लोगो तक पंहुचा | जबकि इतने ही लोगो तक पहुँचने के लिये टी० वी० व कंप्यूटर ने क्रमश: 13 व 16 वर्ष लिये, जबकि इन्टरनेट केवल चार वर्षो में ही पचास मिलियन लोगो तक पहुँच चुका है |”

इन्टरनेट के उपयोग के लिए इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर का सदस्य बानाना अत्यंत आवश्यक होता है | भारतीय परिपेक्ष्य में कार्य BSNL कर रहा है | इसके अन्तिरिक्त हार्डवेयर व साँफ्टवेयर की आवश्यकता होती है | एक पी० सी० मल्टीमीडियायुक्त पेटियम जिसमे कम-से-कम 16 मेगाबाइट कान्टैम उपलब्ध हो, का कार्य उपयोग इन्टरनेट के उपयोग के लिये आवश्यक है जिसमे विंडो टर्मिनल साँफ्टवेयर, इन्टरनेट एक्स्प्लोरर, बकिंजर साँफ्टवेयर आवश्यक होता है | हार्डवेयर साँफ्टवेयर के अतिरिक्त एक टेलीफोन व एक विशेष मोडम आवश्यक होता है | मोडम की गति जितनी तीव्र होगी, उतना ही इन्टरनेट उपयोग की द्रष्टि से उतम होगा |

भारत में इनेत्नेट का नया स्वरूप नेटआँन केबल के रूप में उजागर हुआ है | इसमें कम्पनियाँ आप्टिकल केबल का जाल बिछाकर घरो-घरो में टी० वी० पर इन्टरनेट पेश कर रही है |

इण्डियन क्रेडिट रेटिंग एजेंसी की इण्डियन इन्टरनेट बिजनेस रिपोर्ट के अनुसार सम्पूर्ण भारत में इन्टरनेट प्रयोगकर्ताओं की संख्या वर्ष 2005 तक 83 लाख होने का अनुमान है |

(USE OF INTERNET) इन्टरनेट के प्रयोग

(1) ई-मेल – यह इन्टरनेट द्वारा प्रदान की जाने वाली सबसे आधिक लोकप्रिय सेवा है | इसमें एक व्यक्ति पलभर में ही विश्व के किसी भी कोने में सन्देश भेज सकता है | इसमें कागज के प्रयोग की आवश्यकता नहीं होती तथा समय व धन दोनों की ही बचत होती है | यह सुविधा का प्रयोग करने के लिये प्रेषक व प्राप्तकर्ता के पास ई-मेल पता होना आवश्यक होता है |

(2) ई-कॉमर्स – इन्टरनेट की इस सुविधा का प्रयोग करने के लिये क्रेडिट कार्ड होना आवश्यक होता है | ई-कॉमर्स विभिन्न व्यावसायिक सहयोगियों, ग्राहकों, उपभोक्ताओं एवं कम्पनियों आदि के व्यावसायिक सूचनाओ का आदान-प्रदान है, जो विकसित सुचना प्रोघोगिकी एवं कंप्यूटर नेटवर्को की सहायता से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम द्वारा किया जाता है | इसे साधारण भाषा में इस प्रकार भी कह सकते है की जब दो या दो से आधिक पार्टियों के बीच वस्तुओं और सेवाओ का आदान-प्रदान इलेक्ट्रॉनिक माध्यमो द्वारा किया जाता है, तो उसे ई-कॉमर्स कहा जाता है | इसके प्रयोग से व्यापार के तरीको से पूर्ण बदलाव आ गया है |

दरअसल वास्तविकता यह है की “वस्तुओ या सेवाएँ की इन्टरनेट पर खरीद-फरोख्त या विज्ञापन द्वारा उत्पादों की सुचनाओ का ग्राहकों तक सम्प्रेषण ई-कॉमर्स कहलाता है |”

इस प्रणाली के अन्तर्गत जब एक ग्राहक/व्यक्ति वेबसाइड पर उपलब्ध सामग्री को पसन्द करके क्रय करता है, इसे फार्म पर वह अपना क्रेडिट कार्ड नम्बर, देय राशी व पाने वाले व्यक्ति का नाम आदि सूचनाओं को अंकित करता है | इस फार्म के भरते ही व्यक्ति/ग्राहक के खाते से उचित धन राशिविक्रेता के खाते में स्थानान्तरित हो जाती है |

(3) ई-बैकिंग – इन्टरनेट ने बैकिंग के क्षेत्र में नए युग का सूत्रपात किया है | यह एक ऐसी सुविधा है जिसने विश्व के प्रत्येक बैंक को आपस में जोड़ दिया जाता है | इस सुविधा के फलस्वरूप टैलिसेविंग, मोबिल बैंकिंग, पी० सी० बैंकिंग व ई-बैंकिंग का प्रोग लगातार बढ़ता जा रहा है |

(4) वर्ल्डवाइड वेब – ई-मेल के बाद यह इन्टरनेट की दूसरी महत्वपूर्ण सेवा है | इसे www के नाम से भी जाना जाता है | इसकी सहायता से हम विभिन्न प्रकार की सूचनाएँ विस्तारपूर्वक एवं विषयानुसार प्राप्त कर सकते है |

(5) चैट रुम – इन्टरनेट की इस सुविधा से हम देश-विदेश के किस भी कोने में स्थित व्यक्ति से न केवल बातचीत कर सकते है बल्कि सम्बन्धित व्यक्ति को हम के द्वारा अपनी कंप्यूटर स्क्रीन पर देख सकते है |

(6) इन्टरनेट – इन्टरनेट का यह प्रयो अत्यंत सीमित है | सामान्यत: बड़ी कम्पनियाँ इसका प्रयोग अपने मुख्यालय व शाखाओ से आपसी सम्पर्क बनाने के लिए करती है |

(7) टेलनेट – इस सुविधा के द्वारा इन्टरनेट से जुड़े विश्व के किसी भी कंप्यूटर पर करके इस प्रकार कार्य किया जा सकता है जैसे वह कंप्यूटर वह हमारे ही नियन्त्रण में हो | इसकी सहायता से नई एवं उपयोगी सूचनाओ को एक कंप्यूटर से दुसरे कंप्यूटर पर उतारा भी जा सकता है |

(PROBLEMS FROM USING INTERNET) इन्टरनेट के प्रयोग से उत्पन्न समस्याएँ

यघपि इन्टरनेट आज सम्प्रेषण का सबसे आधिक लोकप्रिय साधन है, परन्तु इसके प्रयोग में कुछ समस्याएँ आती है जो निम्न प्रकार है –

(1) भाषा की समस्या – इन्टरनेट में मुख्यत: अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग होता है | अत: भारत जैसे देश में जहाँ अनेक भाषाएँ प्रयोग होती है, वहाँ इन्टरनेट के प्रयोग में बाधा उत्पन्न होती है |

(2) धोकधडी – इन्टरनेट के प्रयोग से क्रेडिट कार्ड के धोखे भी उजागर हुए है |

(3) अश्लीलता – इन्टरनेट के प्रयोग से अश्लील फिल्मो व अश्लील साहित्य को भी बहुत बढ़ावा मिला है | इससे देश के युवा वर्ग पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है |

(4) वायरस की समस्या – इन्टरनेट पर अनेक साइबर अपराधी वायरस फ़ैलाने का कार्य करते है ओ कंप्यूटर के लिये हानिकारक होता है |

(5) हैकिंग की समस्या – इन्टरनेट के प्रयोग में सबसे बड़ी समस्या हैकिंग की है | इसमें पासवर्ड चुराकर कोई भी व्यक्ति हमारे आँकड़ो व फाइलों का गलत प्रयोग कर सकता है |

(6) आधिक समय लगना – इन्टरनेट खोलने के लिये लिये फोन का सहारा लिया जाता है तथा फोन की लाइने सदा व्यस्त रहती है जिससे इन्टरनेट तक पहुँचने में आधिक समय लगता है |

(7) जानकारियों का दूरुप्रयोग – इन्टरनेट पर लगभग सभी प्रकार की सूचनाएँ उपलब्ध रहती है तथा फोन बहुत से दुष्ट प्रवृति के व्यक्ति इन सूचनाओ का गलत प्रयोग करते है जैस एकी बम बनाने की जानकारी का कुछ असामाजिक तत्व गलत प्रयोग करते है |

“आधुनिक युग सुचना क्रांति का युग है |”

प्राचीन समय में संचार के साधन बहुत ही अविकसित थे | ऐसी स्थिति में किसी व्यक्ति को अपना संदेश पहुँचानें के लिये दुसरे व्यक्ति के पास स्वयम जाना पड़ता था अथवा अन्य किसी व्यक्ति को संदेश लिखित रूप में देकर उस व्यक्ति के पास भेजना पड़ता था | इस स्थिति में संदेश को पहुँचानें में बहुत आधिक समय लगता था, लेकिन धीरे-धीरे संचार के साधनो को विकास होता गया जिससे संदेश भेजने में सरलता होने लगी | प्रारम्भ में तो समाचार पत्र, डाक, पत्रिकाएँ, टेलीग्राफ आदि का प्रयोग संदेश भेजने के लिये किया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे टाइपराइटर, टेलेक्स, कंप्यूटर, टेलीविजन, टेलीफोन आदि के अविष्कार के साथ-साथ संचार की गति तीव्र होनर लगी | आज हम शीघ्रता के साथ एक स्थान पर बैठकर दुरी पर रहने वाले व्यक्तियों से आसानी से सम्पर्क स्थापित कर सकते है | आधुनिक संचार साधनों के द्वारा हम कही भी किसी ऐसे बात कर सकते है जैसे वह व्यक्ति हमारे सामने बैठा हो | संचार के आधुनिक साधनों में ई-मेल, इन्टरनेट, कंप्यूटर, फैक्स, विडियो कान्फ्रेसिंग, सेल्युलर फोन अदि प्रमुख है |

स्पष्ट है की आधुनिक संचार साधनों के प्रयोग ने पुरे विश्व को एक विश्व गाँव में बदल दिया है जिसमे हम आसानी से किसी भी व्यक्ति से सम्पर्क स्थापित करके बातचीत कर सकते है |





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