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Bcom Cost Accounting Theory Notes One Day Pattern

Bcom Cost Accounting Theory Notes One Day Pattern

Bcom Cost Accounting Theory Notes One Day Pattern : hello friends कैसे हैं आप i hope सब अच्छे ही होंगे तो दोस्तों जैसा कि हम सब जानते हैं कि बीकॉम द्वितीय वर्ष में एक विषय है जिसका नाम है लागत लेखांकन सभी छात्र इस विषय के पेपर में न्यूमेरिकल क्वेश्चन तो कर लेते हैं लेकिन वह सभी चोरी पर आकर रुक जाते हैं क्योंकि थ्योरी जल्दी से याद नहीं हो पाती और इधर उधर से किताबों से या इंटरनेट की दुनिया से सभी अच्छे हैं आसान भाषा के नोट्स ढूंढते रहते हैं और इंटरनेट पर भी कभी-कभी उन्हें वह नोट्स नहीं मिल पाते जो वह चाहते हैं लेकिन हमारी वेबसाइट इस विषय के थ्योरी नोट्स वह मेरी कल क्वेश्चन दोनों प्रोवाइड करती हैं यह छोरी नोट्स इतने आसान है कि यदि आप इसे पढ़ते हैं तो यह पढ़ते पढ़ते आसानी से याद हो जाते हैं और परीक्षा के समय आप सभी को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती क्योंकि उस समय अन्य विषयों के भी याद करने का एक समय नहीं मिल पाता जिस कारण सभी विद्यार्थी कुछ ज्यादा ही परेशान हो जाते हैं यह नोट्स एक बार के पढ़ने से ही आसानी से याद हो सकते हैं इस आर्टिकल में आप सभी को लागत लेखांकन के बारे में संपूर्ण जानकारी मिल जाएगी यदि आप न्यूमेरिकल प्रश्न व अन्य विषय के नोट्स भी ढूंढ रहे हैं तो हमारी वेबसाइट आपके लिए बहुत ही लाभदायक होगी धन्यवाद दोस्तों


लागत लेखांकन का क्या अर्थ है इसके उद्देश्य एवं लाभों की विवेचना कीजिए

लागत लेखों से आप क्या समझते है




लागत लेखांकन सामान्य लेखांकन की एक विशेष शाखा है जिसके अंतर्गत किसी वस्तु या सेवा के उत्पादन से संबंधित विभिन्न खर्चों का लेखा इस प्रकार किया जाता है ताकि उत्पादित की जाने वाली वस्तु या सेवा की कुल तथा प्रति इकाई लागत ज्ञात हो सके और नियंत्रण व प्रबंध के मार्गदर्शन हेतु आवश्यक सूचनाएं एवं समंक व्यवस्थित रुप से प्राप्त हो सके दूसरे शब्दों में लागत लेखांकन लेखांकन की एक ऐसी प्रणाली है जिसमें लागत ज्ञात करने एवं लागत पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से कार्यों का लेखा किया जाता है वस्तुतः लागत लेखांकन द्वारा प्रदत सूचनाओं से लागत का निर्धारण विश्लेषण एवं नियंत्रण संभव होता है

प्रमुख विद्वानों द्वारा लागत लेखांकन की दी गई परिभाषाएं निम्नलिखित हैं –

लागत लेखांकन का अर्थ खर्चों का वर्गीकरण लेखा-जोखा एवं उपयुक्त बटवारा करना है जिस से उत्पादित वस्तुओं अथवा सेवाओं की उत्पादन लागत ज्ञात हो सके समुचित एवं विस्तृत अगले इस प्रकार प्रस्तुत किए जाते हैं कि प्रशासकों का मार्गदर्शन हो सके उनके प्रबंध कार्य में सुविधा हो लागत लेखांकन प्रत्येक कार्य ठेका विधि सेवा या इकाई की लागत निर्धारित करता है तथा उत्पादन बिक्री एवं विवरण की लागत बताता है

लागत लेखांकन खर्चों का एक ऐसा विश्लेषण और वर्गीकरण है जिसके उत्पादन की किसी विशेष इकाई की कुल लागत शुद्धता पूर्वक ज्ञात हो सके और साथ ही यह भी ज्ञात हो सके की कुल लागत किस प्रकार प्राप्त हुई है

लागत लेखांकन के उद्देश्य अथवा कार्य

संक्षेप में लागत लेखांकन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं

 

  • लागत निर्धारण – लागत लेखांकन का प्रमुख उद्देश्य किसी संस्था द्वारा उत्पादित की जाने वाली वस्तुओं की सेवाएं अथवा कार्य हेतु या प्रतिक्रियाओं की कुल तथा प्रति इकाई लागत ज्ञात करना है
  • लागत नियंत्रण – लागत लेखांकन का दूसरा प्रमुख उद्देश्य लागत पर नियंत्रण स्थापित करना है ताकि न्यूनतम लागत पर अधिकतम एवं श्रेष्ठ कम उत्पादन हो सके इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु  बजटरी नियंत्रण व प्रमाण लागत नियंत्रण तकनीक का प्रयोग किया जाता है
  • लागत में कमी – लागत नियंत्रण के साथ साथ लागत लेखांकन लागत में कमी करने के उद्देश्य से अपव्यय को रोकने का प्रयास भी करता है
  • प्रबंधकों का मार्गदर्शन करना – लागत लेखों द्वारा प्रदत सूचनाएं प्रबंधकों द्वारा अनेक प्रकार के निर्णय लेने में मार्गदर्शन भी करती हैं उदाहरण किसी वस्तु का स्वर्ण निर्माण किया जाएगा बाहर से करें करें हानि पर विक्रय करें या उत्पादन बंद कर दें विभिन्न वैकल्पिक उत्पादनों में से कौन सी वस्तुओं का उत्पादन किया जाए आदि
  • विक्रम मूल्य निर्धारित करना – लागत लेखांकन का उद्देश्य उचित विक्रय मूल्य निर्धारित करना भी है ताकि प्रतिस्पर्धा का सामना किया जा सके तथा साथ ही उचित लाभ भी अर्जित हो सके
  • वैधानिक अनिवार्यता की पूर्ति – कंपनी अधिनियम की धारा 209 ID के अंतर्गत केंद्रीय सरकार द्वारा 32 उद्योगों के लिए लागत लेकर रखना अनिवार्य कर दिया गया है अतः लागत लेखों को रखने का एक वैश्य वैधानिक दायित्व को पूरा करना भी है

 

लागत लेखांकन के लाभ या महत्व

संक्षेप में लागत लेखों के लाभ महत्व को नींद शीर्षकों के अंतर्गत समझा जा सकता है



 

  • उत्पादकों व प्रबंधकों को लाभ – किसी भी संस्था में लागत नइखे रखे जाने से उत्पादकों वह प्रबंधकों को मुख्यतः निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं
  • सामग्री श्रम व संयंत्र का सर्वोत्तम उपयोग – लागत लेखांकन के अंतर्गत सामग्री श्रम तथा संयंत्र के विस्तृत लेख तैयार किए जाते हैं परिणाम दें सामग्री व श्रम के दुरुपयोग व चोरी को सरलतापूर्वक रोका जा सकता है तथा संयंत्र का सर्वोत्तम उपयोग किया जा सकता है
  • लाभप्रद एवं लाभप्रद कार्यों की जानकारी – लागत लेखांकन में प्रत्येक कार्य कार्य प्रक्रिया विभाग उत्पाद अथवा सेवा का प्रथक प्रथक लागत विश्लेषण किया जाता है जिससे प्रत्येक का अलग अलग अलग लाभ हानि ज्ञात हो जाता है इसका यह लाभ होता है कि अलाभप्रद क्रिया को बंद करके लाभप्रद क्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है या उनमें सुधार करने के लिए प्रयास किया जा सकता है
  • उत्पादन लागत का विश्लेषणात्मक एवं तुलनात्मक – लागत लेखांकन के अंतर्गत उत्पादन की कुल लागत को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष स्थिर एवं परिवर्तनशील उत्पादन कार्यालय एवं विक्रय तथा विवरण वीडियो में वर्गीकृत कर के प्रति इकाई लागत ज्ञात की जा सकती है लागत का यह विश्लेषण दो राज्यों के बीच होने वाले परिवर्तन तथा उसके कारणों पर प्रकाश डालता है
  • विक्रम मूल्य एवं टेंडर मूल्य निर्धारण में सहायक – लागत लेखों की सहायता से प्रत्येक कार्य की प्रमाप लागत निर्धारित करने में भी सुविधा हो जाती है
  • प्रमाप लागत के निर्धारण में सहयोग – लागत लेखों की सहायता से प्रत्येक कार्य की प्रमाप लागत निर्धारित करने में भी सुविधा हो जाती है
  • लागत नियंत्रण में सुविधा – लागत लेखे प्रबंध को नियोजन बसटन तथा लागत नियंत्रण के उपयोगी आंकड़े प्रदान करते हैं अतः लागत लेखांकन के कारण लागत नियंत्रण में भी सुविधा हो जाती है
  • अपव्यई का ज्ञान होना – लागत लेखे न केवल यही बताते हैं कि किसी वस्तु के उत्पादन लागत क्या है वरन यह भी बताते हैं कि कहां अपव्यय हो रहा है और उसको कैसे रोका जा सकता है
  • भावी नीति निर्धारण में सहायक – लागत लेखों द्वारा प्रदत सूचनाएं प्रबंध को अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सहायता पहुंचाते हैं जैसे नए उत्पाद का प्रारंभ अधिक लाभदायक उत्पादन मिश्रण बेकार पड़ी क्षमता का सदुपयोग सुन बनाने या खरीदने का निर्णय आदि
  • लाभ हानि विवरण किसी भी समय तैयार करना – लागत लेखों की सहायता से किसी भी समय साप्ताहिक मासिक अथवा त्रैमासिक लाभ हानि ज्ञात किया जा सकता है इससे यह लाभ हो जाता है कि यदि किसी उत्पाद उत्पादन या कार्य से हानि हो रही है तो उसे तुरंत बंद किया जा सकता है
  • मंदी काल में उपयोगिता – बंदी कॉल उत्पादकों के दृष्टिकोण में सबसे खराब समय होता है ऐसे समय में यदि उत्पादक की परिवर्तनशील लागत भी पूर्ण रूप से वसूल हो जाए तो उत्पादन को चालू रखना भी लाभ पर रहता है परिवर्तनशील लागत हो की जानकारी लागत लेखों द्वारा सरलता से हो जाती है

 

  1. कर्मचारियों को लाभ – लागत लेखा अपनाने पर श्रमिकों एवं कर्मचारियों के मध्य कार्य का विभाजन वैज्ञानिक आधार पर किया जाता है उनके कार्य के प्रमाण निर्धारित निर्धारित कर दिए जाते हैं कार्य ही समय नियंत्रित किया जाता है किए गए कार्यों का विस्तृत विवरण रखा जाता है तथा परिश्रमी देने की प्रेरणात्मक प्रत्यय का उपयोग किया जाता है वस्तुतः लागत लेखांकन से जहां एक ओर व्यवसाय समाज होता है वही श्रमिकों को सेवा की सुरक्षा तथा पर्याप्त पारिश्रमिक एवं सुविधाओं का आश्वासन भी मिलता है अर्थात लागत लेखांकन को अपनाए जाने से उत्पादक के साथ साथ स्वयं सारणिक भी लाभ प्रतीत होते है
  2. विनियोग ता एवं ऋण दाताओं को लाभ – किसी भी व्यवसाय के लाभ अर्जन करने की क्षमता संबंधी जानकारी लागत लेकर से भली प्रकार प्रकट हो जाती है एवम लाभ उपार्जन क्षमता का ज्ञान विनियोग ताऊ एवं ऋण दाताओं के लिए बहुत अधिक लाभप्रद होता है लागत लेखे संस्था का लाभ विभाजन क्षमता तथा भावी विकास की संभावनाओं के बारे में विश्वसनीय सूचनाएं प्रदान करते हैं जिससे वीर योद्धाओं को विनियोग करने में तथा ऋण दाताओं को ऋण देने में संबंधी निर्णय लेने में सुविधा रहती है एक संस्था जिस में लागत लेखांकन की सुचारू व्यवस्था है उस संस्था की अपेक्षा कहीं अधिक वीडियो जको तथा ऋण दाताओं को अपनी और आकर्षित कर सकती है जहां लागत लेकर की कोई उपयोग प्रणाली नहीं अपनाई जाती तथा लागत लेकर रखने वाली संस्थाएं ऋण दाताओं तथा विनियोग ता का विश्वास आसानी से प्राप्त कर लेती है
  3. उपभोक्ताओं को लाभ – लागत लेखों के माध्यम से उत्पादन लागत नियंत्रित होती है तथा किसी में भी सुधार होता है क्योंकि उत्पादन हेतु प्रमाणित कच्ची सामग्री तथा कार्य कुशल श्रमिकों का ही उपयोग किया जाता है इस प्रकार से उत्पादन लागत घटने का लाभ किसी हद तक उपभोक्ता तक भी कीमतों में कमी के रूप में पहुंचता है इस प्रकार लागत लेखों के कारण उपभोक्ता को अच्छी किस्म की वस्तुएं सस्ते मूल्य पर मिल जाती है इसके अतिरिक्त लागत लेखांकन अपनाने से उपभोक्ताओं को यह विश्वास भी हो जाता है कि उनसे जो मूल्य लिया जा रहा है वह उचित है
  4.  सरकार को लाभ – लागत लेखों से प्राप्त विस्तृत एवं विश्लेषणात्मक सूचनाएं विभिन्न उद्योग के संबंध में वास्तविक स्थिति का ज्ञान कराती है जिससे सरकार को उन उद्योगों को के संबंध में महत्वपूर्ण नीतियां बनाने में सहायता मिलती है मूल्य निर्धारण मूल्य नियंत्रण सरकारी संरक्षण मजदूरी निर्धारण लाभांश भुगतान उत्पादन कर तथा आय कर के निर्धारण आयात निर्यात अभी से संबंधित नीतियों के निर्धारण में लागत लेखे महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट है कि लागत लेखों के रखे जाने से केवल उत्पादक को ही लाभ नहीं होता वरुण समाज के प्रत्येक क्षेत्र में इसका लाभ पहुंचता है यह श्रमिकों नियोक्ताओं ऋण दाताओं उपभोक्ताओं तथा सरकार आदि सभी को पूरा पूरा लाभ पहुंचाते हैं

 

लागत लेखा पद्धति से आप क्या समझते हैं और वृद्धि एवं प्रक्रिया में यह वित्तीय लेखा पद्धति से किस प्रकार भिन्न है लागत लेखांकन पद्धति का स्थापना प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए




वित्तीय लेखे बनाम लागत लेखे

वित्तीय एवं लागत लेखे दोनों ही लेखांकन की दो शाखाएं हैं उनके उद्देश्यों में भिन्नता होते हुए भी इन की विधियां लगभग समान है एवं दोनों का एक दूसरे से घनिष्ठ संबंध है राय एक ही संस्थान में दोनों प्रकार के लेकर रखे जाते हैं दोनों की कार्यविधि समान है परंतु लक्ष्य एवं उद्देश्य में बनता है विद्यालय को का उद्देश्य संस्था की आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डालना है जबकि लागत लेखों का उद्देश्य लागत निर्धारण एवं लागत नियंत्रण है इसके बावजूद भी यह दोनों एक दूसरे के प्रति श्रद्धा में होकर पूरक ही हैं

स्पष्ट है कि विद्यालयों एवं लागत लेखे में घनिष्ठ संबंध तो है लेकिन दोनों में कुछ संभव समानताएं हैं एवं कुछ असमानताएं

विचार लिखो एवं लागत लेखों में समानताएं

 

  • दोनों ही लेकर दोहरी लेखा प्रणाली पर आधारित है

 

  1. दोनों लेखों के प्रकार प्रतीक जैसे बीजक प्रमाणक अन्य प्रतिवादी एक ही होते हैं
  2. दोनों ही लेखों में केवल मुद्रा में व्यक्त लेन-देन का लेखा किया जाता है
  3. दोनों ही लेकर व्यवसाय की लाभ हानि प्रकट करते हैं
  4. दोनों ही लेखों में विभिन्न अवधिया के विषयों एवं लाभ हानि का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है
  5. दोनों ही लेकर विक्रय मूल्य निर्धारण में समक्ष है
  6. दोनों ही लेखक विधियों के आधार पर व्यवसाय की भावी नीति निर्धारित की जा सकती है
  7. दोनों देखें परस्पर पूरक हैं

लागत लेखों तथा वित्तीय लेखों में असमानताएं

लागत लेखांकन एवं वित्तीय लेखांकन में प्रमुख अंतर इस प्रकार है




  • उद्देश्य – वित्तीय लेखांकन का उद्देश्य संस्था की आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डालना है जबकि लागत लेखांकन के उद्देश्य विषयों पर नियंत्रण स्थापित करना एवं लागत ज्ञात करना है
  • क्षेत्र – विद्यालय के सभी प्रकार की संस्थाएं में रखे जाते हैं जबकि लागत लेखे केवल उन्हीं संस्थाएं में रखे जाते हैं जो उत्पादन कार्य में संगलन है अथवा सेवा प्रदान करने का कार्य करती हैं अतः विद्यालय खनखन का क्षेत्र विस्तृत है जबकि लागत लेखांकन का क्षेत्र संकुचित है
  • लेखक किए जाने वाले व्यवहारों का स्वभाव – विद्यालयों में सभी आर्थिक या वित्तीय व्यवहारों का लेखा किया जाता है जबकि लागत लेखांकन में केवल वही व्यवहारों का लेखा होता है जो वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन से संबंधित हैं अर्थात आय कर धरनावदा ब्याज लाभांश तथा दंडाधिकारी लेखन लागत लेखों में नहीं किया जाता क्योंकि इनका उत्पादन कार्य से कोई संबंध नहीं होता परंतु इनका लेखक वित्तीय लेखांकन में किया जाता है
  • खाटू की अनिवार्यता – विद्यालय के प्राय प्रत्येक संस्थान द्वारा कर निर्धारण हेतु रखना आवश्यक है जबकि लागत लेकर कंपनी अधिनियम की धारा 209 ID में वर्णित कुछ प्रविष्ट निर्माणी कंपनियों के लिए ही रखना अनिवार्य हैं
  • अंकेक्षण – वित्तीय लेखांकन में सभी कंपनियां को अपने खातों का अंकेक्षण कराना आवश्यक है जबकि लागत लेखों का अंकेक्षण केवल उल्लेखनीय 32 प्रकार की कंपनियां में तथा सिर्फ उन्हीं वर्षों में अनिवार्य है जब केंद्रीय सरकार इस आशय की घोषणा करें
  • अवधि –  विद्यालय के सामान्यता 1 वर्ष की अवधि के लिए तैयार किए जाते हैं जबकि लागत लेकर संस्था की आंतरिक महत्व के होने के कारण आवश्यकता अनुसार मासिक त्रैमासिक किया अन्य अवधि के लिए भी तैयार किए जाते हैं
  • सामग्री लागत अभिलेखन – वित्तीय लेखों में केवल सामग्री क्रय मूल्य का ही हिसाब रखा जाता है मात्रा कम ही जब की लागत लेखों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सामग्री का अलग-अलग लेखक किया जाता है और मूल्य में मात्रा दोनों का हिसाब रखा जाता है इतना ही नहीं इसमें सामग्री संबंधित शादी का विश्लेषण तौर पर नियंत्रित किया जाता है
  • श्रम लागत अभिलेखन – लागत लेखों में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष श्रम का प्रथक प्रथक लेखा किया जाता है योजना लागू की जाती है जबकि विद्यालय आंखों में इस प्रकार का श्रम लागत अभिलेखन नहीं किया जाता
  • महत्व – विद्यालय के व्यवसाय के प्रधान या प्रमुख लेकर होते हैं जबकि लागत लेखे वित्तीय लेखों के सहायक लिखे होते हैं अतः लागत लेखों का महत्व गौन होता है
  • नियंत्रण – विद्यालयों में मुख्य जोर लेखांकन पक्ष पर रहता है तथा नियंत्रण के महत्व को काफी हद तक भुला दिया जाता है जबकि लागत लेखांकन में लागत नियंत्रण बजटरी नियंत्रण तथा प्रमाप लागत लेखे विधि के माध्यम से कार्य क्षमता एवं व्यायोग पर समुचित नियंत्रण रखा जाता है

 

लागत निर्धारण पद्धति की स्थापना

यदि किसी निर्माण संस्था में लागत निर्धारण पद्धति की स्थापना करनी है तो इसके लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनानी चाहिए

 

  • तकनीकी विशेषताओं का अध्ययन – लागत निर्धारण पद्धति का चयन करते समय संबंधित संस्थान की तकनीकी विशेषताओं जैसे सामग्री का स्वभाव प्लांट की क्षमता श्रम की योग्यता एवं स्वभाव आदि बातों को ध्यान में रखना चाहिए क्योंकि यह सभी पहलू लागत निर्धारण पद्धति के चयन को काफी सीमा तक प्रभावित करते हैं
  • उत्पादित वस्तु की प्रक्रिया का अध्ययन – उत्पादित की जाने वाली वस्तु की प्रकृति भी लागत निर्धारण पद्धति के चयन को प्रभावित करती है अतः हमें यह देखना होगा कि उस संस्था में उत्पादित की जाने वाली वस्तु की प्रकृति क्या है
  • लागत केंद्रों का निर्धारण – लागत लेखा विधि की स्थापना के लिए लागत केंद्रों का निर्धारण आवश्यक है ताकि प्रत्येक केंद्र पर होने वाली लागत ज्ञात की जा सके और उस पर उचित नियंत्रण स्थापित किया जा सके
  • लागत इकाई का निर्धारण – लागत इकाई शरण लिया संयुक्त हो सकती है प्रति दर्जन प्रति मीटर प्रति टन आदि सरल इकाइयों के उदाहरण हैं जबकि प्रति टन किलोमीटर प्रति यात्री किलोमीटर आदि संयुक्त इकाई है लागत इकाई का निर्धारण व्यवसाय के स्वभाव पर निर्भर करता है इस प्रकार लागत निर्धारण पद्धति की स्थापना हेतु अपना ही जाने वाली प्रक्रिया में लागत केंद्रों के निर्धारण के पश्चात लागत इकाई का निर्धारण किया जाना चाहिए
  • लागत लेखा संबंधित प्रक्रियाओं का निर्धारण – बड़े आकार के एक व्यवसाय में लागत लेखा प्रणाली को विस्तृत रूप में लागू किया जाता है जबकि एक छोटे व्यवसाय में इस प्रणाली को छोटे रूप में ही लागू करने की आवश्यकता होती है ताकि इसके स्थापना के व्यवसाय चलाने के लिए वह इससे प्राप्त उपयोगिता से कम ही रहे अतः व्यवसाय के आकार के अनुसार ही लागत लेखा प्रणाली का चयन करना चाहिए
  • नियंत्रण की मात्रा का निर्धारण  – लागत निर्धारण पद्धति का चयन इस बात पर भी निर्भर करता है कि हम सामग्री श्रम एवं उपरिव्यय पर किस स्तर पर नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं
  • पापत्रों का प्रारूप निर्धारण – लागत निर्धारण पद्धति की स्थापना से पूर्व यह भी आवश्यक है कि विभिन्न कार्यों के लिए प्रयुक्त होने वाले प्रपत्र के मानक एवं प्रारूप निर्धारित किए दिए जाएंगे विभिन्न कार्यों के लिए प्रयुक्त पेपर पत्र विभिन्न रंगों में होने चाहिए ताकि उन्हें सुगमता से पहचाना जा सके

 

प्रतिवेदन संबंधी निर्धारण – लागत लेखों के माध्यम से प्रबंध को महत्वपूर्ण सूचनाएं प्रेषित की जाती हैं यह सूचनाएं विभिन्न विवरण एवं प्रतिवेदन के रूप में भेजी जानी चाहिए इन प्रतिवेदनों के आधार पर नियंत्रण व कार्य में बहुत सहायता मिलती है अतः यह निर्धारित किया जाना चाहिए कि कौन कब किसका पुत्र में किसे प्रतिवेदन भेजेगा














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