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B Com 2nd Year Fundamentals of Entrepreneurship Notes

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B Com 2nd Year Fundamentals of Entrepreneurship Notes :

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दीर्घ उत्तरीय प्रशन ( B com 2nd year long Answer Questions)

 

प्रशन १.  उद्यमी  (साहसी) की परिभाषा दीजिए | एक उदाहरण की विशेषताओं का एव  गुणों का वर्णन कीजिए

Define Entreprencure, Explain the qualities and characteristics of an Entreprencure.

 

अथवा

उद्यमी वह व्यक्ति जो नवारम्भी प्रबंधक एवं समन्वयक  के रूप में कार्य करता है| विवेचना कीजिए

“An enterprencur is a person who function as an innovator, manager and co-ordinatior.” discuss.




उतर– प्रत्येक  व्यवसाय में चाहे उसका कोई भी पैमाना  हो और वह किसी भी प्रकार का हो कुछ ना कुछ जोखिम अवश्य होता है इस जोखिम को अर्थशास्त्री साहस कहते हैं जो व्यक्ति जोखिम उठाता है या अनिस्चता जलता है बहस साहसी या उद्योगी कहलाता है यह उत्तरदायित्व अपने ऊपर लेता है कि लाभ होने पर यह उसका अधिकारी होगा और हानि होने पर उसे पूरा करेगा आधुनिक उद्योग की  आधारशिला है वह किसी भी राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में अहम भूमिका निभाता है विकास की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखता है तथा निरंतर चलने वाले   उपक्रमों का सर्जन करता है |

 

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो० मार्शल ने अपना मत कुछ इस प्रकार प्रकट किया है कि “उद्यमी को उद्योग का कप्तान होता है क्योंकि वह जोखिम एवं अनिश्चितता का वाहक ही नहीं होता वरन है वह एक प्रबंधक भविष्यदृष्टा नवीन उत्पादन विधियों का आविष्कारक तथा देश के आर्थिक ढांचे का निर्माता भी होता है अपने लाभ को अधिकतम करने के लिए एक और वह उद्योग की अतिरिक्त व्यवस्था पर पूरी निगाह रखता है तो दूसरी और वह अपने प्रतिनिधियों की गतिविधियों पर भी पूरा ध्यान रखता है |

प्रबंध विशेषज्ञ पीटर एफ ड्रकर के अनुसार, “उधमी वह होता है जो सदैव परिवर्तन की खोज करता है उस पर प्रतिक्रिया करता है तथा एक आविष्कार के रूप में उसका लाभ उठाता है इस प्रकार हम कह सकते हैं कि उद्यमी देश में औद्योगीकरण तथा सामाजिक आर्थिक नवीनता का सूत्रपात करता है

उधमी शब्द का उदभव  (Evolution of the Word Entrepreneur)-उधमी शब्द का उद्भव फ्रेंच भाषा के शब्द एंट्रीपेंड्री से हुआ है |  जिसका अर्थ है एकाकी व्यक्ति अर्थात वह एकाकी व्यक्ति जो किसी नवीन उपक्रम की स्थापना की जोखिम उठाता है इस शब्द का प्रयोग सबसे पहले फ्रांसेस अर्थशास्त्री  रिचार्ड कैन्तिलों (Richard Cantillon) किया था | कुछ विद्वानों के अनुसार उधमी शब्द का प्रयोग स्वर प्रथम प्रांत में 16वीं शताब्दी में फौजी अभियानों में किया गया था 17वी शताब्दी में शब्द का प्रयोग अन्य साहसिक कार्यों में मुख्य रूप में नागरिक अभियांत्रिक के क्षेत्र में सड़कों, पुलों, बंदरगाहों तथा भवनों के निर्माण के क्षेत्र में किया गया था 18वीं शताब्दी में उधमी शब्द का प्रयोग आर्थिक क्रियाओं के संबंध में किए जाने लगा तब से इस शब्द का निरंतर विकास होता चला गया विभिन्न अर्थों में प्रयुक्त किया जाता रहा है

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 उधमी शब्द का अर्थ व परिभाषा

 (Meaning & Definition of Entrepreneur)

सरल शब्दों में बुधनी से ऐसे ऐसे व्यक्ति से है जो किसी नवीन उपक्रम की स्थापना करने की जोखिम उठाता है,  आवश्यक संसाधन एकत्रित करता है तथा उसका प्रबंध एवं नियंत्रण करता है|  जदपि जोखिम उठाना उधमी का प्राथमिक कार्य है, परंतु आधुनिक युग में उसे और भी कार्य संपन्न करने पड़ते हैं ;  जैसे-  नेतृत्व, सर्जनात्मक तथा नवाचार  संबंधी कार्य | विकसित देशों में नवप्रवर्तन करने तथा व्यहू- रचनात्मक योग्यता रखने वाले व्यक्ति की मुख्य रुप में कहलाते हैं | विकासशील देश विकास की प्रारंभिक अवस्था में होता है,  इन देशों में  आश्य उन व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह से होता है जो नया उपकरण प्रारंभ करते हैं पूंजी उपलब्ध करवाते हैं जोखिम वहन करते हैं  व्यवसायीक चुनौतियों का सामना करते हैं | उद्यमी एक व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का समूह या कोई संस्था हो सकती है |

उधमी  कीकुछ प्रमुख परिभाषाएं निम्नलिखित है-



 

प्रोफेसर मार्शल  के अनुसार, “साहसी विशिष्ट नियोजकों का वह समूह है जो जोखिम लेता है किसी कार्य के लिए आवश्यक पूंजी  एवं श्रम  की व्यवस्था करता है इसकी सामान्य योजना बनाता है व्यवस्थित करता है तथा इसके प्रत्येक बात का निरीक्षण करता है|”

 

फ्रेन्ज (Franz) के अनुसार, “उधमी पर  प्रबंधक से अधिक बड़ा है | वह ( स्त्री एवं पुरुष उधमी ) नव प्रवर्तक दोनों ही है |”

फ्रेन्ज की परिभाषा विकसित एवं विकासशील दोनों  प्रकार के देशों पर लागू होती है परिभाषा के अनुसार,  नव करण को जन्म देने  के साथ-ही-साथ नए उपक्रमों की स्थापना करने वाला व्यक्ति ( प्रवर्तक) भी उधमी कहलाता है | फ्रेन्ज  ने महिला उधमी की पहचान कर साहस के क्षेत्र में अधिक व्यापक बना दिया है|

 

शुमपीटर (schumpeter) के अनुसार, “ एक व्यक्ति अर्थव्यवस्था में उधमी वह व्यक्ति होता है जो अर्थव्यवस्था में कुछ नवीनता प्रदान करता है;  जैसे, उत्पादन की एक विधि जिसका संबंधित निर्माण शाखा में अभी तक अनुभव द्वारा प्रशिक्षण नहीं किया गया है,  एक उत्पाद जिसमें  अभी तक परीचित नहीं है, कच्चे माल का एक नया स्रोत, नए बाजार आदि|”

इस प्रकार शुम्पीटर  के अनुसार, “ अर्थव्यवस्था में कुछ नई बात;  जैसे उत्पादन की नई विधि,  नया उत्पाद,  नई संगठन संरचना,  कच्चे माल का नया स्त्रोत,  नया बाजार आदि प्रस्तुत करने वाले व्यक्तियों को उधमी कहा जाता है |

 

गोराल्ड एव सिल्वर (Geralad and Silver) के अनुसार, “ उद्यमी वह व्यक्ति है जो किसी नई वस्तु या सेवा के विचार की कल्पना करता है और उस वस्तु या सेवा का उत्पादन करने के लिए एक व्यवसाय की स्थापना हेतु पूंजी प्राप्ति के लिए किसी स्रोत की खोज करता है|”

 

गोराल्ड एव सिल्वर  की उक्त परिभाषा के अनुसार उधमी के कार्य किसी नए विचार की कल्पना से ही प्रारंभ हो जाते हैं परंतु उधमी केवल विचारों की कल्पना तक ही सीमित नहीं रहता वह उनको सामाजिक आवश्यकताओं के अनुसार  मूर्त रूप में देने का प्रयास करता है|

 

आर्थर डेविंग अनुसार, “ उद्यमी व्यक्ति होता है| जो  विचारों को लाभदायक व्यवसाय में रूपांतरित करता है|”

 

आरo टीo इली ( R.T.Ely ) के अनुसार, “ वह व्यक्ति है जो उत्पादक घटक को संगठित और निर्देशित करता है|”

 

निष्कर्ष ( Conclusion)- उधमी की उपरोक्त परिभाषाओं का अध्ययन करने के पश्चात उधमी को निष्कर्ष रूप में निम्न शब्दों  में परिभाषित किया जा सकता है- “ उधमी वह व्यक्ति है जो व्यवसाय में लाभप्रद  अवसरों की खोज करता है, आवश्यक संसाधन एकत्रित करता है,  नवाचार को जन्म देता है,  जोखिम वहन करता है तथा अपने चातुर्य एवं दूर  दृष्टि से असाधारण परिस्थितियों का सामना करता है एवम लाभ कमाता है|”

उधमी की  विशेषताएं

(characteristics of an Entrepreneur)

 

  1. नवप्रवर्तनकर्ता (innovators) : समाज में  उधमी नवप्रवर्तन करते हैं ऑ नए उत्पाद  की खोज करते हैं,  उत्पाद में नहीं विधि अपनाते हैं, नए बाजारों की खोज करते हैं| कि विकसित राष्ट्रीय में नवप्रवर्तन करने वाले व्यक्ति ही उधमी कहलाते हैं |
  2. जोखिम लेने वाले (Risk-Takers) :  उधमी अत्यधिक जोखिम लेने में विश्वास नहीं रखते है,  वह सामान्य जोखिम लेना पसंद करते हैं| व्यवसाय कार्यों को भाग्य के भरोसे संपन्न नहीं करते है|  वे  भाभी जोखिम का पूर्व अनुमान लगाकर जोखिम को कम करने का प्रयास करते हैं|  प्राकृतिक प्रकोपों से होने वाली जोखिम का बीमा करवाते हैं तथा आर्थिक,  राजनैतिक,  सामाजिक आदि परिवर्तनों से होने वाली जोखिम को ग्रहण करने की योजना बनाते हैं|
  3. साधन प्रदान करने वाला (Provider of Resources) : किसी  उपक्रम की स्थापना के लिए उधमी आवश्यक संसाधन; जैसे, भूमि,  भवन,  मशीन, प्लाट , कच्चा माल, पूंजी, श्रम  आदि की आवश्यकता अनुसार व्यवस्था करता है|  नवप्रवर्तन हेतु उधमी आवश्यक सूचनाएं एक तकनीकी क्रियाओं विकसित करते हैं |
  4. उच उपलब्धियों में विश्वास (High Achinevers) : पूर्व उच्च प्राप्तियों (High Achinevers) विश्वास रखते हैं |
  5. अवसरवादी (Opportunist) : उधमी अवसरों का विदोहन करते हैं अर्थात गए आर्थिक व्यवस्था अवसरों की खोज करके इनसे लाभ अर्जित करने के लिए तत्पर रहते हैं |
  6. प्रबंधकीय उधमी (Managerial Entrepreneur) :  बड़े उपक्रमों में उद्यमी के प्रबंधक अलग-अलग होते हैं कंपनी में उधमी प्रवर्तक के रूप में कार्य करते हैं जबकि प्रबंधक वेतनभोगी कर्मचारी होते हैं कभी-कभी उनकी संचालक मंडल की सदस्यता प्राप्त कर उचित प्रबंधक के रूप में भी कार्य करते हैं लघु आकार के व्यवसायिक उपक्रमों में उधमी प्रबंधकीय उधमी के रूप में कार्य करते हैं क्योंकि लघु आकार के व्यवसायिक उपकरणोंका संचालन के  प्रबंध स्वय उद्यमियों द्वारा किया जाता है |
  7. पेशेवर के व्यावहारिक (PProfessionalists and Practice Oriented) : उधमी जीवन के प्रति व्यापारिक दृष्टिकोण रखते हैं|  व्यावसायिक उपकर्मो का संचालन एवं प्रबंध भी व्यवहारिकता के आधार पर करते हैं|  आधुनिक युग में उद्यमी पेशेवर वर्ग (Professional Class) के रूप में विकसित हो रहे हैं |
  8. व्यक्ति, संस्था या समूह (Individual, Organisaiton or Groups) : उधमी एक व्यक्ति,  संस्था, या व्यक्तियों का समूह होता है |
  9. उधमी कई प्रकार के होते हैं (Several Types) :  उधमी के कई रूप हो सकते हैं विचारात्मक,  अनुकरणात्मक,  अवसर की प्रतीक्षा करने वाला तथा निष्क्रिय |
  10. उद्यमी पूंजीपति से भिन्न ( Different From Capitalist) : पूंजीपति पूंजी देने वाला होता है जबकि उसमें जोखिम उठाकर नए उद्योगों की स्थापना करता है|  परिवर्तन की दशा में गोद में भी प्रारंभिक पूंजी लगा सकते हैं |
  11. गतिशील प्रतिनिधि (Dynamic Agent) : शुम्पीटर के अनुसार,  उधमी गतिशील प्रतिनिधि है|  वह समाज को नई दिशा प्रदान करता है, व्यवसाय के क्षेत्र में परिवर्तन लाता है तथा परिवर्तन के मार्ग में आने वाली बाधाओं का साहसपूर्वक सामना करता है |  वास्तव में ‘व्यावसायिक गतिशीलता’ गतिशील उद्यमियों से ही संभव है|
  12. उधमी नेत्रत्व प्रदान करता है (Entrepreneur Provides Leadership) :   उद्यमी को उद्योग का कप्तान या नेता कहा जाता है व्यवसाय की नीतियों को सफलतापूर्वक   क्रियान्वित करने के लिए उधमी को अपने सभी सहयोगियो की मदद लेता है एवं विभिन्न क्रियाओं के संपन्न कराने में नेतृत्व का कार्य करता है |
  13. उधमी का प्रतिफल लाभ होता है ( Reward of Entrepreneur is Profit) :  उधमी के लिए जोखिम एवं अनिश्चितता का प्रतिफल लाभ होता है| नाम की मात्रा उधमी की सफलता पर निर्भर करती है |
  14. व्यहू रचनात्मक योग्यता (Strategic Ability) : व्यूह रचनात्मक योग्यता का गुण  पाया जाता है | आंतरिक संसाधनों के साथ वह निरंतर नए अवसरों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए व्यूह रचनात्मकता लाभ प्राप्त करने का प्रयास करता है |




 

 

प्रशन २.  उधमी से आप क्या समझते हैं ?  उधमी के आवश्यक गुणों की विवेचना कीजिए |

What do you mean by an entrepreneur ? Discuss the necessary qualities of an entrepreneur.

अथवा

चूड़ी से आप क्या समझते हैं ?  उधमी के लिए आवश्यक गुणों की विवेचना कीजिए और रोजगार के अवसरों का सर्जन करने में उधमी के योगदानों का  मूल्यांकन कीजिए

What do you mean by entrepreneur ? Discuss the necessary qualities an entrepreneur and evaluate the role of the entrepreneur in generating and employment opportunities.

 

उतर– सरल शब्दों  मैं,  उधमी से आशय ऐसे व्यक्ति से है तो किसी नवीन उपक्रम की स्थापना करने की जोखिम उठाता है आवश्यक संसाधन  एकत्रित करता है तथा उसका प्रबंधन नियंत्रण करता है यदापि जोखिम उठाना  उधमी का प्राथमिक कार्य है परंतु आधुनिक युग में उसमें और भी कार्य संपन्न करने पड़ते हैं ; जैसे- नेत्रत्व, सर्जनात्मक तथा नवाचार संबंधी कार्य |  विकसित देशों में नवप्रवर्तन करने तथा व्यूह-रचनात्मक योग्यता रखने वाले व्यक्ति ही मुख्य रूप से  उधमी कहलाते हैं | विकासशील देश विकास की प्रारंभिक अवस्था में होता है, अत: दशाओं में उद्यमी से आती है उन व्यक्तियों व्यक्तियों के समूह से होता है जो नया उपक्रम आरंभ करते हैं पूंजी उपलब्ध करवाते हैं जो कि ग्रहण करते हैं तथा द्वारा चुनौतियों का सामना करते हैं |




 उद्यमी के आवश्यक गुण

(Necessary Qualities of an entrepreneur)

किसी भी राजस्थान में उद्योग तथा संचालन कार्य करना इतना आसान कार्य नहीं है है जितना समझा जाता है|  यह कार्य कभी पूरा कर सकता है,  जबकि उसने में अनेक प्रकार के गुण विद्यमान  हो |

 

जेम्स बर्न  उद्यमी के गुणों का वर्णन करते हुए लिखा है “एक साहसी संगठनात्मक प्रशासकीय, तकनीकी एव व्यावसायिक ज्ञान, अवसरों की अफसरों के प्रति सजगता परिवर्तनों को स्वीकार करने की अभिव्यक्ति एक जोखिम उठाने जाते गुणों का होना आवश्यक है | ब्रैडफोर्ड का मत है कि उद्यमी को ना केवल तकनीकी सिद्धांतों का स्पष्ट ज्ञान होना चाहिए वर्णन है उसमें विभिन्न व्यवसायिक समूह के बीच सहयोग के सिद्धांतों का ज्ञान राष्ट्रीय के सामाजिक जीवन में सक्रिय योगदान अर्थशास्त्र के सिद्धांतों का मूल ज्ञान मानव के लिए गहरी सहानुभूति व्यक्ति के चयन एवं प्रशिक्षण संबंधित संतुलित निर्णय क्षमता और सेवा के उच्च आदर्शों से प्रेरित विशाल दृष्टिकोण का होना भी आवश्यक है”

अब प्रश्न यह है कि उद्यमी में कौन-कौन से गुण होने चाहिए? वास्तव में इसकी कोई निश्चित सूची बनाना कठिन है| परंतु फिर भी एक उद्यमी में निम्नलिखित गुण होने चाहिए :

  1. शारीरिक गुण— उत्तम स्वास्थ्य, प्रभावशाली व्यक्तित्व, प्रसन्न मुद्रा, कल्पना शक्ति, दूरदर्शिता, आत्मविश्वास, आशावादिता, परीप्कवता, गतिशील विचार,
  2. मानसिक गुण— प्रखर बुद्धि,  सतर्कता, तीव्र स्मरण शक्ति, कल्पना शक्ति, दूरदर्शिता, आत्मविश्वास, आशावादिता,परिपक्वता,  गतिशील विचार
  3. सामाजिक गुण— मिलनसार व्यवहार कुशल, सहयोगपूर्ण व्यवहार, आदर-भाव
  4. व्यवसायिक गुण— व्यावसायिक अभिरुचि, साहसी योग्यता,  जोखिम वहन क्षमता, नवप्रवर्तन योग्यता, निर्णय क्षमता, तकनीकी कुशलता, अफसरों के प्रति जागरूकता, बाजार दशाओं का ज्ञान, विभिन्न वैधानिक नियमों का ज्ञान, सामाजिक उत्तरदायित्व की जागरूकता, नेतृत्व क्षमता, |
  5. नैतिक गुण— ईमानदारी, सच्चरित्रता, नम्रता, निष्ठावान, |

 

रोजगार के अवसरों का सृजन करने में उद्यमी के योगदान का मूल्यांकन

(Role of the Entrepreneur in Generation Employment Opportunities)

  1. वह समाज में सकारात्मक मूल्य का विकास करता है|
  2. सतत उद्योग एवं  व्यवसाय की स्थापना के द्वारा न तो सभ्य बाद बेरोजगार रहता है और ना अन्य व्यक्ति को बेरोजगार रहने देता है|  वह उत्पादक कार्यों में विनियोग को प्रोत्साहन करता है|
  3. सर्जनात्मक तथा स्वतंत्रता के द्वारा वह समाज में स्थिरता और शांति को प्रोत्साहित करता है|
  4. साहसी बेरोजगार तथा काम की योग्यता रखने वाले युवा व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करता है जिससे एक और आर्थिक संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है, वही दूसरी ओर व्यक्तियों के पटरी से उतरने का अध्याय समाप्त हो जाता है|
  5. वह काम उपलब्ध कराकर अनैतिक  सामाजिक बुराइयां(  अनैतिकता,चोरी,डकैती,लूटमार,हत्या आदि) से युवा व्यक्ति को रोकने का प्रयास करता है तथा कर्मशीलता हेतु प्रेरित करता है|

 

प्रशन ३- “उधमी,  प्रबंधक से बड़ा होता है, वह नव प्रवर्तक तथा प्रवर्तक दोनों है” | इस कथन को स्पष्ट करते हुए उद्यमी के विभिन्न प्रकार बताइए |

“The Entrepreneur is more than a manager. He is an lnnovator and promoter well.” Explain this statement and describe the various types of Entrepreneur.

 

 उत्तर-  कुछ व्यक्ति  उधमी प्रबंधक को एक ही मानते हैं,  जबकि दोनों एक दूसरे से अलग अलग है प्रबंधक किसी उपक्रम का प्रबंध करता है, उधमी किसी नवीन उपक्रम की स्थापना करने की जोखिम उठाता है, आवश्यक संसाधन एकत्रित करता है, तथा उसका प्रबंध एवं नियंत्रण करता है| उधमी, नेतृत्व, सर्जनात्मक नवाचार  संबंधी कार्य करता है फ्रेज का कहना है की उधमी प्रबंधक से बड़ा होता है|  उधमी नव प्रवर्तक एवं प्रवर्तक दोनों ही है| उपक्रम का आकार बढ़ने पर उधमी अपनी सहायता हेतु प्रबंध की नियुक्ति करता है, इस प्रकार प्रबंधक उद्यमी के सेवक के रूप में कार्य करता है |

उधमी के प्रकार

(Types of Entrepreneur)

  1. नव-प्रवर्तन योग्यता के आधार पर : सामान्यता प्रत्येक अर्थव्यवस्था का विकास स्तर अलग-अलग होता है जहां विकसित अर्थव्यवस्था उत्साही उद्यमियों को जन्म देती है वही अविकसित अर्थव्यवस्था में आलसी, सर मिले कुछ भी जन्म  लेते हैं| क्लीयरेंस डेन्हाफ़ ने विकास स्तर पर आधारित चार प्रकार के  उद्यमियों का वर्णन किया है
  2. ‘आलसी’ उधमी (Dronne Entrepreneurs)– अलसी उधमी नव कारणों के प्रति उदासीन रहता है इस प्रकार का उधमी आरामदायक जीवन व्यतीत करना चाहता है, वह जोखिम का सामना करना एवं चुनौतीपूर्ण कार्य करना पसंद नहीं करता है| उसका उद्देश्य को किसी प्रकार चलाते रहना है, इसी कारण आलसी आदमी का व्यवसाय लंबे समय तक नहीं चलता और ना ही व्यवसाय शीघ्र तक पहुंचता है |
  3. नव-प्रवर्तक उधमी (innovating entrepreneurs)– जो उद्यमी अपने व्यवसाय में नए-नए परिवर्तन करता रहता है वह नव प्रवर्तक उधमी कहलाता है| उदाहरण के लिए नई वस्तु का उत्पादन, नया कच्चा माल, उत्पादन की नई विधि, नए यंत्र उपकरण, नए बाजार एवं प्रबंध व्यवस्था आदि को अपने व्यवसाय में लागू करना|  इस प्रकार के उद्यमी विकसित राष्ट्रों में पाए जाते हैं, क्योंकि वहां अनुशासन के अत्यधिक अवसर होते हैं और नई वस्तु के उपभोग के लिए जनता के पास पर्याप्त की शक्ति होती है|  ‘शुंपीटर के अनुसार, “नव प्रवर्तक उधमी किसी भी नए आविष्कार को क्रियान्वित करने के उत्पादन के तरीकों में सुधार करने या उसे क्रांति लाने का कार्य करते हैं |” यह उधमी अपेक्षाकृत अधिक चुनौतियां पूर्ण कार्य करते हैं |
  4. सावधान उद्यमी (Fabian Entrepreneures)– जब कोई उधमी सफल उद्यमी की नकल सावधानीपूर्वक करता है,  तो ऐसे उधमी को सावधान उधमी कहते हैं | यह उधमी जहां तक हो सके पुरानी पद्धति पर ही कार्य करना पसंद करता है यह उद्यमी नई बातों को अपनाकर कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहता यह उधमी तब तक सफल उद्यमियों की नकल नहीं करता, जब तक कि उसे विश्वास ना हो जाए कि यही परिवर्तन को ना अपनाया तो हानि उठानी पड़े सकती है | ऐसे उधमी प्राय: हैं अविकसित राष्ट्रों में ही पाए जाते हैं |
  5. नकलची’ उधमी (Implicative Entrepreneurs)- इस प्रकार के उधमी सफल नवकारणों की नकल करते हैं, और नव-हिटप्रवर्तक उद्यमियों द्वारा आरंभ किए गए सफल परिवर्तनों को अपने उद्योग में अपना लेते हैं ये उधमी अपेक्षाकृत कम जोखिम लेते हैं यह नई परिवर्तन के लिए अनुशासन पर कुछ भी खर्च नहीं करते है, बल्कि सफल उद्यमियों के अनुकरण करके ही लाभ उठा लेते हैं यह प्रवृत्ति विकासशील देशों में पाई जाती है |

 

  1. सामाजिक लाभ की दृष्टि से (From the Angle of Social Benefit)- सामाजिक लाभ की दृष्टि से उधमियो को दो भागों में बांटा गया है-
  2. शोषक उद्यमी (Exploitative Entrepreneur)–  वह उधमी जो केवल स्वय के हित में कार्य करता है ‘शोषक उधमी’ कहलाता है यह उधमी समाज के हित में कार्य न करके सबके अत्यधिक लाभ अर्जित करने वाला होता है, यह सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति उदासीन होता है संक्षेप में यह उधमी स्-केंद्रित होता है तथा सामाजिक उत्तरदायित्व  की उपेक्षा करता है |

 

  1. आदर्श उधमी (Model Entrepreneur)– इस प्रकार के उद्योगों में लाभ कमाने के साथ-साथ सामाजिक हित में कार्य करने की प्रवृत्ति भी होती है |  ऐसे उधमी अपने व्यवस्थाएं को सामाजिक हित में एवं लाभ के लिए संचालित करते हैं| ऐसे उद्यमी अपने व्यवसायिक वे औद्योगिक क्रियाओं के द्वारा सामाजिक लक्ष्यों की पूर्ति करते हैं| ये उधमी समाज में रोजगार, आय, आर्थिक उपयोगिताओं व उचच जीवन स्तर के लिए प्रयत्नशील रहते हैं |
  2. विकास की गति के आधार पर (On the Basis of Development Momentum)- विकास की गति गति के आधार पर उद्यमियों को निम्न प्रकार से वर्गीक्रत किया गया है-
  3. स्थानीय व्यापारी (Local Traders)- यह वह धनी होते हैं जो अपने क्षेत्र में व्यवसाय करते हैं इनका कार्य क्षेत्र स्थान में होता है यह अपनी आर्थिक क्रियाओं को किसी क्षेत्र में विशेष तक ही सीमित रखते हैं|
  4. मूल परिवर्तक (Prime Mover)-  इस प्रकार के उद्योग विकास के मूल प्रवर्तक होते हैं| ऐसे उधमी विकास की प्रिकिर्याओ  एवं कार्यों को प्रभावी ढंग से गतिमान बनाते हैं यह उधमी व्यवसाय को सदैव विकसित करने पर बल देते हैं
  5. अनुषगी (Satellite)- इस प्रकार के उद्यमी सहायक उद्योगों एवं व्यवस्थाओं को भी मूल व्यवस्थाएं के साथ-साथ चलाते हैं प्रारंभ में इस प्रकार के उधमी की भूमिका  पूर्ति करता एवं मध्यस्थ की होती है किंतु धीरे-धीरे में उद्योग का स्वतंत्र संचालन करने लगते हैं |
  6. लघु नव प्रवर्तक (Minor Innovator)- ऐसे उधमी अल्प मात्रा में नव प्रवर्तक का कार्य करके आर्थिक विकास की गति को बल प्रदान करते हैं यह उधमी समाज के संसाधनों के श्रेष्ठ उपयोग खोजते हैं उन्हें उत्पादक एवं लाभप्रद कार्यों में भी नियोजित करते हैं तथा विकास की गति में वृद्धि करते हैं|
  7. आरंभिक (Initiator)-  इस प्रकार के उधमी नव प्रवर्तक की परिक्रिया में भाग लेकर विकास को गति प्रदान करते हैं यह 19 अवयव परिवर्तनों की कल्पना नहीं करता किंतु उनके विचार पर फैलाव की अवस्था में सहभागी बनता है |
  8. प्रबंधक (Manager)- प्रबंधक उद्यमी कुशल प्रबंध के नियंत्रण के द्वारा उपक्रम का सफल संचालन करता है किंतु है उपक्रम के  विकास एवं विस्तार के लिए योजनाएं नहीं बनाता है| ऐसे उधमी में प्रबंधकीय कौशल असीमित होता है |
  9. विभिन्न क्रियाओं के आधार पर(On the Basis of Various Activities) : कार्ल वेस्पर विद्या क्रियाओं के आधार पर उद्यमियों के निम्नलिखित नो प्रकार बताए हैं-
  10. पूंजी संचायक(Capital Aggregators)–  इस प्रकार के उद्यम पूंजी संग्रह में विशेष दक्षता रखते हैं बैंकों में बीमा कंपनियों जिनमें व्रत संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता होती है की स्थापना में सहायता करते हैं |
  11. सट्टा लगाने वाले(Speculators)-  यह एक सभ्य कोई गम नहीं करते उन्हें विभिन्न प्रकार के स्वामित्व प्रपत्रों में व्यवसाय  करके के लाभ कमा लेते हैं |
  12. एकल स्व-नियुक्त उधमी(Solo  Self-employed Entrepreneur)–  ये उद्यमी स्वतंत्र रूप से एव स्व-नियुक्त अपना कार्य करते हैं जैसे- रंगमंच के कलाकार, डॉक्टर, एडवोकेट आदि |
  13. मितव्य्यितापूर्ण उधमी(Economy Scale of Exploiters)- इस प्रकार के उधमी उपभोक्ताओं की क्रिया शक्ति बढ़ाने का प्रयास करते हैं,  इसमें छुट भंडार, डाक व्यवस्था एक आदि को सम्मिलित किया जाता है|
  14. प्रारूप उधमी(Pattern Multiplers)- यह उधमी उत्पादन विधियों में परिवर्तन करके वस्तुओं के प्रारूप में वृद्धि करता है |
  15. अधिग्रहण उधमी(Takeover Artists)– इस  प्रकार का उद्यमी छोटी-छोटी फर्मो का अधिग्रहण करके उनका संचालन करता है कभी-कभी वे इन फर्मो का अपने व्यवसाय में पूर्णत है सर संविलियन कर लेते हैं |
  16. अप्रयुक्त संसाधन विदोहन करता(Unutilised Resource Exploiters)– इस प्रकार के उधमी प्राकृतिक संसाधनों का विदोहन करके उन्हें उत्पादक कार्यों के लिए उपलब्ध कराते हैं |
  17. कार्य शक्ति निर्माता(Work Force Builders)-  इस श्रेणी में वह है आदमी आते हैं जो स्वतंत्र रूप में यंत्र शालाओं, कंप्यूटर, एयरलाइंस सेवा फर्म आदि का निर्माण एव संचालन करते हैं |
  18. उत्पाद नव प्रवर्तक(Product Innovators)- साउथ में नए नए उत्पादों के डिजाइन तैयार करते हैं तथा उन का निर्माण कर के बाजार में लाते हैं | नए उत्पादों को निर्माता करने के कारण ऐसे उद्यमियों की प्रतिस्पर्धा स्थिति सुदृढ़ होती है |

 

प्रशन-“उधमी आर्थिक विकास का प्रेरक तत्व है” इस कथन को समझाइए एवं विकासशील अर्थव्यवस्था में उधमी की भूमिका एवं महत्व की विवेचना कीजिए |

“An entrepreneur is a catalytic agent in economic development.” Explain this statement and discuss the role and importance of entrepreneur in developing economy.

 उत्तर-   

उधमी की भूमिका एवं महत्व

(Role and Importance of Entrepreneur)

किसी भी देश के आर्थिक एवं उद्योग विकास में उधमी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है वास्तव में आधुनिक व्यवसायिक विकास में उद्यमी एक अनिवार्य अंग है उधमी उद्योग के विकास एवं विस्तार करने के साथ-साथ बेहतर आर्थिक ढांचे का निर्माता भी होता है |  औद्योगिक विकास के अभाव में आर्थिक विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन है उद्योगिक विकास का आधार स्तंभ उधमिता है सफल उद्यमियों के अभाव में पर्याप्त मानव्य अप्राकृतिक संसाधनों से युक्त अनेक विकासशील राष्ट्रीय आर्थिक एवं की दृष्टि से काफी पिछड़े हुए हैं |  भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बर्मा, बांग्लादेश आदि इसके स्पष्ट उदाहरण है | दूसरी और जापान, चीन, कोरिया, जैसे राष्ट्रीय का तीर आर्थिक तथा औद्योगिक विकास कुशल एवं योगियों का परिणाम है| उधमी  की महत्व को स्पष्ट करते हुए प्रमुख अर्थशास्त्री प्रो मार्शल ने कहा है कि “ उधमी उद्योग का कप्तान होता है|  वह जोखिम तथा अनिश्चितता का  वाहक ही नहीं  होता है अपितु एक प्रबंधक भविष्यदृष्टा, नवीन उत्पादन में जो का आविष्कारक तथा राष्ट्र के आर्थिक ढांचे का निर्माता भी होता है| अपने लाभ को अधिकतम करते हुए वह एक और उद्योग के अंतरिक व्यवस्था पर दूसरी ओर अपने परिस्थितियों पर पूरी निगाह  रखता है|” अर्थात उधमी  ही देश में नवीन वस्तुओं का निर्माण करके रोजगार, विनियोग में आय में वृद्धि करके तथा संपूर्ण समाज में उद्यमशीलता वह साहसिक चिंतन का प्रसार कर के राष्ट्रीय को प्रगति के पथ पर ले जाता है|  संक्षेप में, उधमी की भूमिका एवं महत्व को स्पष्ट किया जा सकता है-

  1. आर्थिक विकास में योगदान(Contribution in Economic)-  उधमी की किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका होती है|, जापान, चीन, अमेरिका, कोरिया जैसे राष्ट्रीय कातिल आर्थिक विकास किस बात का प्रमाण है की औद्योगिक तथा आर्थिक विकास काफी सीमा तक उधमियों की योग्यता एवं क्षमता पर निर्भर करता है| उधमी नए नए उपकरणों की स्थापना करते हैं | संसाधनों का प्रयोग करता है, रोजगार में वृद्धि करता है एवं राष्ट्रीय आय को बढ़ाता है |  स्पष्ट है कि किसी भी देश के आर्थिक विकास में उद्यमी का महत्वपूर्ण योगदान होता है |
  2. नव प्रवर्तक को प्रोत्साहन(Promotion to Innovations)-  उजनी मूल्यत: नव-प्रवर्तक सृजनकर्ता होता है | वह नहीं वस्तु, नए विचार, एक नई उत्पादन तकनीक को जन्म देता है| इसके लिए शोध एव विकास कार्यक्रमों को चलाता है इन सब के कारण समाज को नई-नई वस्तुओं एवं सेवाओं के उपभोग करने का अधिकार अवसर प्राप्त होता है और समाज में का जीवन-स्तर ऊंचा होता है |
  3. समाज के उत्पादक साधनों का संगठन करता(Organisor of Society’s Productive Resources)- जेम्स बर्न के अनुसार, “ उधमी समाज के उत्पादक साधनों का संगठन करता होता है वह विभिन्न उत्पादन साधनों( पूंजी, छम, मशीन, आदि) को पर्याप्त मात्रा में एकत्रित करता है और इन सभी साधनों को बेहतर समन्वय स्थापित करने का पूर्ण प्रयत्न करता है | समाज में प्रयुक्त साधनों को उत्पादक कार्यों में लगाने, श्रम शक्ति को गतिशील बनाने तथा वैज्ञानिक आविष्कारों का व्यावसायिक प्रयोग करने में उधमी  महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है |”
  4. नवीन वस्तुओं का उत्पादक(Producer of New Products)-  कुर्मी समाज में नई नई वस्तुएं प्रदान करता है|  वह निरंतर नवीन उत्पादनों की संभावनाओं को ज्ञात करता है ए व्यवस्था होने पर नई वस्तु का उत्पादन करता है |
  5. नवीन बाजारों का आविष्कार(Development of New Market)- उधमी केवल नवीन वस्तुओं का उत्पादक ही नहीं है वरन है व्यवसाय के विकास एवं विस्तार हेतु नए बाजार की खोज भी करता है | वह नये बाजारों को पता लगाकर उनकी आवश्यकता के अनुरूप वस्तु प्रदान करता है |
  6. पूंजी निर्माण में सहायक(Helpful in Capital Formation)- किसी भी राष्ट्रीय की आर्थिक व औद्योगिक गति पूंजी निर्माण से ही संभव होती है उधमी इस कार्य मैं पूर्ण रूप से सहायक होता है|  वह नवीन औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, बेरोजगारों को रोजगार, आय और बचत में वृद्धि का प्रयास करता है| इस में पूंजी निर्माण की दर में वृद्धि होती है तथा तीन आर्थिक एवं औद्योगिक विकास का मार्ग प्रशस्त होता है |
  7. रोजगार अवसरों में वृद्धि(Increase in employment Opportunities)-  उधमी रोजगार के अवसरों में वृद्धि करता है| वह नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना करता है तथा पुराने उद्योगों का विस्तार करके रोजगार अवसरों को बढ़ाने में सहायक होता है |
  8. उद्योग का आधार स्तंभ(Pillar of Industry)-  उद्योग का आरंभ होता है| वह जोखिम तथा अनिश्चिताओ का वहन करने के साथ-साथ उपक्रम का प्रबंधक, भविष्य- दृष्टा, पूंजीपति तथा नियोजनकर्ता होता है |
  9. शोध एवं विकास को प्रोत्साहन(Encouragement to Research and Development)- उधमी के प्रवर्तन के साथ-साथ नवप्रवर्तन कार्य को भी संपन्न करता है|  इसे शोध एवं विकास कार्यों को प्रोत्साहन मिलता है जिससे उपभोक्ताओं का श्रेष्ठ उत्पाद प्राप्त होता है |
  10. सामाजिक ढांचे में परिवर्तन(Changes in Social Framework)-  उधमी के प्रयास से सामाजिक ढांचे में अनेक रचनात्मक परिवर्तन आते हैं समाज उद्योग प्रधान बन जाता है जिसके कारण  अंधविश्वास का प्रभाव कम होता है तथा  समाज अनेक रूढ़िवादिताओं  एव घिसी-पिटी परम्पराओ से मुक्त होने लगता है |
  11. व्यवसाय क्रियाओं का आधार(Basis of Business Activities)- वास्तव में उधमी सभी व्यवस्थाएं क्रियाओं का आधार है उधमी ही नए नए उद्योगों की स्थापना करते हैं | और नई-नई वस्तुओं का उत्पादन करते हैं उधमिता के अभाव में व्यवसाय की कल्पना भी नहीं की जा सकती उधमिता से ही उद्योग, व्यापार, वाणिज्य एवं अन्य सहायक क्रियाओं को बढ़ावा मिलता है |
  12. गरीबी दूर करना(Removal Poverty)– उधमी नए नए उपकरणों की स्थापना करते हैं जिससे बड़ी मात्रा में रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं उद्यमी गरीबों के दुष्चक्र को तोड़कर समृद्धि लाते हैं |
  13. नए औद्योगिक संगठनों की स्थापना(Establishment of New Industrial Organization)– उधमी नव प्रवर्तक  होते हैं और नए नए उपकरणों की स्थापना करते हैं उधमी एक के बाद एक नया औद्योगिक संगठन स्थापित करते हैं, भारत में टाटा, बिलडा, मोदी, गोयनक, अंबानी, Bajaj में मित्तल इस तरह के उधमी रहे हैं|  इनके समूह की कंपनियां लगातार बढ़ती जा रही हैं| अधिक मात्रा में औद्योगिक संगठनों की स्थापना होने से देश में औद्योगिक विकास का वातावरण तैयार होता है|
  14. विद्यमान  उपक्रमों का विस्तार(Expansion of Existing Units)–  उधमी नए नए उपकरणों की स्थापना तो करते हैं, साथ ही साथ अपने विद्वान उद्योग का विस्तार भी करते हैं,
  15. गतिशील प्रतिनिधि(Dynamic Agent)- शुम्पीटर  नए उद्यमी को अर्थव्यवस्था के गतिशील प्रतिनिधि की संज्ञा दी है वह व्यवस्था परिवर्तन एवं नवप्रवर्तन द्वारा संपूर्ण अर्थव्यवस्था को गतिशील कर देता है जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है वस्तुत: है उधमी उत्पादन के विभिन्न साधनों को गतिमान करके विकास की गति को बढ़ावा देता है |
  16. उत्प्रेरक तत्व(Catalytic Agent)- उधमी प्रगति का प्रेरक तत्व है फौजियों के कारण ही समाज में धन-संपदा बढ़ती है गरीबी को उन्मूलन होता है, संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग होता है तथा आत्मनिर्भरता समाज की रचना संभव होती है|

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प्रशन- “उधमी वह व्यक्ति है, जो कुछ नहीं से निरंतर चलने वाले व्यावसायिक उपक्रम का सृजन करता है |”  इस कथन की व्याख्या करते हुए उधमी के कार्यों को पर प्रकाश डालिए |

“An Entrepreneur is a person who creates an on going business enterprise from nothing. “Explain this statement and discuss the main functions of an entrepreneur.

 

  उधमी या साहसी के कार्य

(Functions of Entrepreneur)

विभिन्न विद्वानों के उधमी के भिन्न-भिन्न कार्य बताइए—

 

  1. पहल करना तथा जोखिम लेना (Initiation and Risk Taking)-  उधमी का प्रमुख कार्य आर्थिक एवं व्यावसायिक क्रियाओं के प्रारंभ करने से पहल करना है  एक जोखिम वहन करना है वर्तमान समय में उत्पादन प्रणाली की जटिलता, गला काट प्रतियोगिता, बदलती प्रौद्योगिक, श्रम समस्या एवं आदि जोखिम को निरंतर बढ़ाते रहते हैं| अपनी योग्यता के द्वारा जोखिम का प्रबंध करता है |
  2. आर्थिक एवं व्यवसायिक अवसरों का ज्ञान (Perceiving the Economic and Business Opportunities)–  प्रत्येक समाज में व्यक्ति के विकास के लिए अनेक अवसर होते हैं उन्हें आर्थिक क्षेत्रों में अवसरों की खोज करते हैं और इनके संबंध में आवश्यक ज्ञान प्राप्त करते हैं तथा अपने परिवार से इन अवसरों का विदोहन करते हैं |
  3. प्रयोजना नियोजन (Project Planning)-  परियोजना नियोजन से भी महत्वपूर्ण कार्य है परियोजना नियोजन से प्रारंभिक  अनुसंधानकर्ता है आवश्यक सूचना एकत्रित करता है सूचना का विश्लेषण के विभिन्न विकास करते हैं तथा सर्वोत्तम विकल्प का चयन करता है|
  4. परियोजना/सम्भाव्यता प्रतिवेदन तैयार करना (Preparing the Project / Feasibility Report)-  उधमी यह प्रतिवेदन भावी उपक्रम की स्थापना में आने वाली लागत एवं परियोजना की लाभदायकता को प्रकट करने के लिए तैयार करता है | इस प्रतिवेदन में उत्पादित की जाने वाली वस्तु,पूंजी,श्रम,मशीन,कच्चा माल, कार्यशील पूंजी आदि के संबंध में विस्तृत विवेचन होता है |
  5. परियोजना का अनुमोदन करना (Approval of the Project)- उधमी उपक्रम का पंजीयन करवाने, विभिन्न सरकारी विभागों के संस्थाओं में सुविधा प्राप्त करने, बैंक के वित्तीय संस्थाओं में भी प्राप्ति करने आदि के लिए संबंधित विभागों के संस्थाओं को परियोजना प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है |
  6. उपक्रम स्थापित करना (Establishing the Enterprise)- उधमी पूर्व निर्धारित योजनाओं के अनुसार उपक्रम स्थापित करता है |  उपक्रम की स्थापना कच्चे माल, एवं श्रम की उपलब्धता, विकास की आधारभूत सुविधाओं,बाजार की निकटता आधी को ध्यान में रखते हुए की जाती है |  उपक्रम की स्थापना के साथ-साथ वैज्ञानिक विधि से संयंत्र अभियान अभिनियास किया जाता है |
  7. वित्त प्राप्ति करना (Arranging Finance) –  उधमी उपक्रम की अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन पूंजीगत आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्थाई एवं क्रियाशील पूंजी की व्यवस्था करता है|  वह विभिन्न स्त्रोतों का तुलनात्मक अध्ययन करके ही उपयुक्त निर्णय लेता है |
  8. उपक्रम का प्रबंध करना (Managing the Enterprise)- उपक्रम की स्थापना के बाद आदमी को इसका सफल संचालन एवं प्रबंध करना होता है | छोटे उद्योगों में उधमी ही प्रबंधक के रूप में कार्य करता है, परंतु बड़े उद्योगों में उधमी को पेशेवर प्रबंधक की सेवा लेनी पड़ती है | पेशेवर प्रबंधक को नियुक्त किए जाने की दशा में उद्यमी मुख्यतः नीति निर्धारण व नेतृत्व का कार्य करता है |
  9. नवप्रवर्तन एक विभेदीकरण (Innovations and Diversifications)- उधमी का प्रमुख कार्य नाव-करण होता है | उधमी समाज में नई नई खोज को जन्म देता है | वह शोध एवं अनुसाधन द्वारा तकनीकी एवं व्यवसायिक नव-प्रवर्तन करता है नये उत्पाद विकसित कर, उत्पाद विभेदीकरण करता है जिससे उपक्रम का विस्तार होता है |
  10. उधमिता विकास कार्यक्रमो में भाग लेना (To Participate in Entrepreneurship Development Programmes)- उधमियो के विकास हेतु सरकारी विभाग एवं संस्थाएं, बैंक के वित्तीय संस्थाएं, प्रबंध संस्थान आदि समय-समय पर विकास कार्यक्रम एवं विचार गोष्ठियों आयोजित करते हैं |  उद्यमी को इन कार्यक्रमों में भाग लेना चाहिए |  इन कार्यक्रमों के माध्यम उधमी को व्यवसायिक परिवर्तनों एवं विचारधाराओं की जानकारी होती है | उपकरण एवं नवप्रवर्तन संबंधित समस्याओं पर विचार विमर्श होने के कारण आदमी के ज्ञान में वृद्धि होती है |
  11. सामाजिक विकास में योगदान (To Contribuite in Social Development)- प्रत्येक उद्यमी को सामाजिक कार्यों में योगदान देना चाहिए, क्योंकि उद्यमी समाज में विकसित होता है | इसलिए उसे समाज विशेष रुप से स्थानीय समाज के विकास के लिए कार्य करना चाहिए उसे भौतिक एवं मानवीय संसाधनों, का मितव्ययितापूर्वक सर्वोत्तम प्रयोग करना चाहिए | स्थानीय लोगों को रोजगार देना चाहिए समाज के विभिन्न पक्षों के प्रति सामाजिक दायित्व की पूर्ति करनी चाहिए |
  12. वितरणात्मक कार्य करना (Distributional Function)- वितरणात्मक कार्य के अंतर्गत उधमी उत्पादन के प्रत्येक साधन को उसकी सेवा के बदले में प्रतिपल प्रदान करता है अर्थात पूजने उद्योग की आय को उत्पत्ति के विभिन्न साधनों में वितरित करता है |
  13. कुशल विपणन व्यवस्था करना (Making Efficient Marketing Arran)- कुशल विपणन व्यवस्था करना भी उधमी का एक प्रमुख कार्य है इसके लिए  उधमी बाजार अनुसंधान, विक्रय पूर्वानुमान, विक्रय सवर्धन, विज्ञापन आदि कार्य संपन्न करता है |मुझे मेरा वह कुशल मध्यस्थों एवं विक्रय कर्ताओं की नियुक्ति करता है |

 

लघु उत्तरीय प्रशन  (B com 2nd Year Short Answer Question) 

 

प्रशन १. उधमी के जाति वर्ग के उदभाव को समझाइए |

Explain the caste class emergence of entrepreneur.

 

उजनी का जाति वर्ग का उदभाव

(Caste Class Emergence of Entrepreneur)

 

इतिहास किस तत्व का साक्षी है कि भारत में अधिकांश उद्यमी वर्ग का उदभव जाति के आधार पर ही हुआ है कुछ धर्म एवं  जातियां उधमी निपुणता को प्रोत्साहित करते हैं जैसे- जैन, महेश्वरी, मारवाड़ी, पंजाबी, सिंधी आदि | इनका भारत के अधिकांश उद्योगों पर आज भी एकाधिकार है| श्रीं एनo गंगाधर राव आंध्र प्रदेश की औद्योगिक बस्तियों में स्थित 87 उद्यमियों के किए गए  सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष निकाला कि अधिकांश उपकरणों पर वैश्यों का अधिकार है |

 

प्रशन २.  उधमी के पारिवारिक पृष्ठभूमि वर्ग के उदभव को समझाइए |

Explain the family background class emergence of entrepreneur.

 

उधमी का पारिवारिक पृष्ठभूमि वर्ग का उदभव

(Family Background Class Emergence of Entrepreneur)

 

उधमी वर्ग के उदभव  में पारिवारिक पृष्ठभूमि की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है अपने परिवार को ऊंचा उठाने, परिवार के सदस्यों को कार्यक्रम पर लगाने, प्रतिष्ठा अर्जित करने आदि जैसे प्रवृतियों में उधमी वर्ग के उदभव को अनेक प्रकार से प्रोत्साहित किया है,  बिरला ग्रुप, टाटा ग्रुप, रिलायंस ग्रुप, Bajaj ग्रुप आदि उधमी के प्रारंभिक पृष्ठभूमि वर्क के प्रमुख उदाहरण हैं |

 

प्रशन ३. उधमी तथा आंतरिक उधमी में अन्तर बताईये |

Defferentiate between Entrepreneur and Intrapreneur

 

उधमी तथा आंतरिक उधमी में अन्तर

(difference between Entrepreneur and Intrapreneur

 

उधमी एवं आंतरिक उद्यमी दोनों ही नई नई खोज एवं संसाधनों से संबंधित है तथा दोनों ही किसी उपक्रम के संगठन एवं प्रबंध के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं वह धनी व्यक्ति है | जो अपनी नवाचार की विचारधारा  सच्चाई को प्रारंभ करते हैं समस्त जोखिम वहन करता है तथा लाभ कमाता है इसके विपरीत तांत्रिक उधमी वह व्यक्ति है जो आदमियों के अधीन कार्य करता है उन पर आश्रित रहता है आंतरिक व शब्द की उत्पत्ति सर्वप्रथम अमेरिका में हुई थी|

 

उधमी एव आंतरिक उधमी में मुख्यता निम्नलिखित अंतर है—

 

  1. उधमी व्यवसाय का स्वामी होता है जबकि आंतरिक उधमी और उधमीयों के अधीन कार्य करता है |
  2. उधमी स्वय विभिन्न स्त्रोतों से पूंजी जुटाता है जबकि आंतरिक उधमी का पूंजी जुटाने में कोई संबंध नहीं है |
  3. उद्यमी अपने व्यवसाय के संचालन के संबंध में पूर्णता स्वतंत्र होता है जब की आंतरिक उद्यमी उपक्रम के स्वामियों पर आश्रित रहता है |
  4. उधमी संपूर्ण व्यवसाय की सारी जोखिम स्वय वहन करता है, जबकि आंतरिक उद्यमी द्वारा व्यवसाय की जोखिम वहन करने का प्रशन ही नहीं होता |
  5. उधमी व्यवसाय से बाहर का प्रबंध करता है, जबकि आंतरिक उधमी व्यवसाय का प्रबंधक होता है और संस्था के अंदर रहकर प्रबंध करता है |
  6. उधमी में पेशेवर योग्यता का होना आवश्यक नहीं है जबकि आंतरिक उधमी में पेशेवर योग्यता का होना आवश्यक है |

 

 प्रशन 4.  उधमी तथा प्रबंधक में अंतर कीजिए |

Differentiate Between Entrepreneur and Manager.

उत्तर-

 उधमी एव प्रबंधक

(Entrepreneur and Manager)

 सामान्यता  उधमी  एवं प्रबंधक को समान रुप में एक ही अर्थ में प्रयुक्त किया जाता है  क्योंकि दोनों ही परिमाण  उत्पादित करते हैं | यदापि दोनों विभिन्न संदर्भों में परिणाम को उत्पादित करते हैं फिर भी दोनों निर्णय एक नेतृत्व कार्य में जुड़े हुए हैं उनके द्वारा संगठनात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अन्य व्यक्तियो द्वारा काम लिया जाता है उन्हें प्रभावशाली निष्पादन के लिए प्रेरित किया जाता है दोनों ही अपनी भूमिका को प्रभावशाली बनाने के लिए प्रबंध एवं उद्यमिता के निश्चित सिद्धांतों का अनुसरण करते हैं

 

जहां तक उधमी एव प्रबंधक विभिन्नता का प्रशन है, उधमी एक व्यापक शब्द है तथा प्रबंधक उधमिता का मध्यम  है|  एक उधमी पप्रबन्धक की नियुक्ति कर सकता है | फ्रिज का कहना है की उधमी प्रबंधक से बड़ा होता है उधमी नव प्रवर्तक एव प्रवर्तक दोनों ही है | प्रबन्धक कभी भी  उधमी का स्थान ग्रहण नहीं कर सकता  है उधमी एक प्रबन्धक हो सकता है परंतु वैतनिक (वेतन पाने वाला) प्रबंधक उधमी की जगह नहीं ले सकता लघु आकार के व्यवसायिक उपक्रमो का संचालन एवं प्रबन्धक स्वय उधमियो द्वारा किया जाता है, अत: इन उपक्रमो में उधमी, प्रबन्धक के रूप में भी कार्य करते है | इसके विपरीत, बड़े उपक्रमों में उधमी एव प्रबन्धक अलग-अलग होते है | कम्पनी प्रारूप में उधमी प्रवर्तक के रूप में कार्य करते है जबकि प्रबन्धक वेतनभोगो कर्मचारी होते हैं | उधमी संग्रह संगठन के लिए व्यापक नीति का निर्धारण करता है जोखिम उठाने का कार्य करता है तथा उधम का संचालन करता है प्रबंधक तथा उधमी में मुख्यतः निम्नलिखित अंतर पाए जाते हैं-

  1. उधमी उपक्रम की स्थापना करता है जबकि प्रबंधक उपक्रम का संचालन करता है |
  2. उधमी व्यवसाय का स्वामी होता है जबकि प्रबंधक सामान्यता उपक्रम का वेतन भोगी कर्मचारी होता है |
  3. उधमी अपने व्यवसाय के संचालन के संबंध में पूर्णतया स्वतंत्र होता है जबकि प्रबंधन के स्वामित्व पर आश्रित रहता है |
  4. उधमी सम्पूर्ण व्यवसाय की सारी जोखिम स्वय वहन करता है,जबकि प्रबंधक द्वारा व्यवसाय की जोखिम वहन करने का प्रशन ही उत्पन नहीं होता |
  5.  उधमी नितियो का निर्धारित करता है जबकि प्रबंधक उनका क्रियान्वन करता है |
  6.  उधमी का प्रतिफल लाभ होता है जबकि प्रबंधक का प्रतिफल वेतन होता है |
  7.  उधमी प्रबंधक भी हो सकता है परंतु प्रबंधक उधमी नहीं हो सकता |
  8.  उधमी में पेशेवर योग्यता का होना आवश्यक नहीं है, जबकि प्रबंधक में पेशेवर योग्यता का होना आवश्यक है |
  9.  उधमी व्यवसाय से बाहर का प्रबंध करता है जबकि प्रबंधक संस्था के अंदर रहकर प्रबंध करता है |
  10.  उधमी प्रबंधक से बड़ा होता है उधमी नव प्रवर्तक प्रवर्तक दोनों ही हैं |
  11.  उधमी नवाचार करता है जबकि प्रबंधक का नवाचार से कोई संबंध नहीं है |

 

 

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