Bcom Procedure For Assessment Notes

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कर-निर्धारण की कार्य-विधि (Procedure For Assessment)

उत्तर- कर-निर्धारण से आशय सम्बन्धित कर-निर्धारण वर्ष हेतु किसी करदाता की कुल आय एवं उस पर देय कर की गणना करना है। चूँकि आय-कर प्रतिवर्ष लगने वाला कर है, अत: करदाता का प्रत्येक वर्ष कर-निर्धारण किया जाता है। कर-निर्धारण की प्रक्रिया करदाता द्वारा आय का विवरण (Return of Income) प्रस्तुत करने के साथ प्रारम्भ होती है तथा करदाता द्वारा देय आय-कर के निर्धारण एवं माँग के नोटिस/कर वापसी तक चलती है। कर-निर्धारण निम्नलिखित चार प्रकार का होता है

सर्वोत्तम निर्णय कर- निर्धारण अथवा एक पक्षीय कर-निर्धारण कर- निर्धारण के दौरान जब कर-निर्धारण अधिकारी विभिन्न तथ्यों की जानकारी प्राप्त करने के लिए करदाता को नोटिस देता है और करदाता नोटिस में माँगी गई जानकारी कर-निर्धारण अधिकारी को प्रदान नहीं करता तो उस दशा में तथा अन्य कुछ दशाओं में कर-निर्धारण अधिकारी अपने विवेक के आधार पर करदाता का कर-निर्धारण कर देता है तो उसे ‘सर्वोत्तम निर्णय कर-निर्धारण’ कहते हैं। अत: जब करदाता कर-निर्धारण के सम्बन्ध में कर-निर्धारण अधिकारी को सहयोग नहीं करता तो कर-निर्धारण अधिकारी करदाता की आय से सम्बन्धित उपलब्ध सामग्री, तथ्यों एवं सूचनाओं के आधार पर अपने सर्वोत्तम विवेक से करदाता को हानि पहुँचाये बिना जो कर-निर्धारण करता है, उसे ‘सर्वोत्तम निर्णय कर-निर्धारण’ कहते हैं। चूँकि यह कर-निर्धारण अकेले कर-निर्धारण अधिकारी के निर्णय, पूर्ण विवेक एवं अनुमान पर आधारित होता है, इसलिए इसे ‘एक पक्षीय कर-निर्धारण’ (Ex-Parte Assessment) भी कहा जाता है। ऐसा कर-निर्धारण करदाता तथा राजस्व के हितों को ध्यान में रखते हुए सबसे अधिक उत्तम एवं उचित माना जाता है।

सर्वोत्तम निर्णय कर- निर्धारण करने से पूर्व सम्बन्धित कर-निर्धारण अधिकारी के द्वारा करदाता को इस आशय का नोटिस दिया जायेगा कि करदाता यह बताए कि क्यों न उस पर सर्वोत्तम निर्णय कर-निर्धारण कर दिया जाये? यदि करदाता इस नोटिस का संतोषजनक उत्तर नहीं देता तो उसके विरुद्ध ऐसा कर-निर्धारण कर दिया जाता है।

सर्वोत्तम निर्णय कर-निर्धारण दो प्रकार का होता है- (i) अनिवार्य (Compulsory), तथा (ii) विवेकीय (Discretionary)।

(1) अनिवार्य सर्वोत्तम निर्णय कर- निर्धारण (Compulsory Best Judgement Assessment)- कर-निर्धारण अधिकारी निम्नलिखित में से किसी भी दशा में अनिवार्य सर्वोत्तम निर्णय कर-निर्धारण कर सकता है –

(अ) यदि करदाता अपनी आय का स्वैच्छिक अथवा नोटिस की प्राप्ति के बाद भी विवरण दाखिल नहीं करता है; अथवा

(ब) यदि करदाता नोटिस के अनुसार लेखे अथवा अन्य प्रपत्र अथवा मांगी गयी सूचनाएं प्रस्तुत नहीं करता है अथवा अपने लेखों का अंकेक्षण नहीं कराता है; अथवा

(स) यदि करदाता नोटिस मिलने पर सुनवाई के लिए कार्यालय में उपस्थित नहीं होता अथवा आय के विवरण के पक्ष में सबूत प्रस्तुत नहीं करता तो कर-निर्धारण अधिकारी ‘अनिवार्य सर्वोत्तम निर्णय कर-निर्धारण’ कर सकता है।

(ii) विवेकीय सर्वोत्तम निर्णय कर-निर्धारण (Discretionary Best Judgement Assessment): ऐसा कर-निर्धारण निम्नलिखित परिस्थिति में किया जाता है

(अ) जब कर- निर्धारण अधिकारी करदाता के हिसाब-किताब से असन्तुष्ट है, अथवा

(ब) करदाता ने हिसाब-किताब की कोई नियमित पद्धति न अपनायी हो।

उपरोक्त दशाओं में कर-निर्धारण अधिकारी के पास सर्वोत्तम कर-निर्धारण के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता। कर-निर्धारण अधिकारी को ईमानदारी से कर की उचित राशि का निर्धारण करना चाहिए। इसके लिए पिछले वर्षों के आय विवरणों, कर-निर्धारणों आदि का ध्यान रखना चाहिए। ऐसे कर-निर्धारण से पूर्व करदाता को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करना होगा।

सर्वोत्तम कर-निर्धारण के परिणाम (Consequences of Best Judgement Assessment)- सर्वोत्तम कर-निर्धारण के निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं

  1. करदाता पर कम से कम 1,000 रुपये एवं अधिकतम 25,000 रुपये का अर्थदण्ड लगाया जा सकता है। (धारा 271)
  2. करदाता पर अभियोजन किया जा सकता है। (धारा 276 CC तथा 276D)
  1. कर की वापसी ‘अस्वीकृत’ की जा सकती है।
  1. करदाता को “निर्धारित कुल आय” के बारे में अपील करते समय “अपीलीय अधिकारियों के समक्ष नए तथ्य प्रस्तुत करने से रोका जा सकता है।
  1. यदि करदाता फर्म है, तो उसका कर निर्धारण व्यक्तियों के समुदाय के रूप में किया जायेगा।

सर्वोत्तम निर्णय कर-निर्धारण के विरुद्ध प्राप्त उपचार /उपाय/अपील करना (Remedies against Best Judgement Assessment)- यदि करदाता कर-निर्धारण अधिकारी के सर्वोत्तम निर्णय कर-निर्धारण से सन्तुष्ट नहीं है अर्थात् उसे ऐसा लगता है कि जो सर्वोत्तम निर्णय कर-निर्धारण किया गया है उसमें अनुचित रूप से अत्यधिक कर लगा दिया गया है तो ऐसी दशा में करदाता को सर्वोत्तम निर्णय कर-निर्धारण के विरुद्ध निम्नलिखित उपचार उपलब्ध है

(i) करदाता कमिश्नर (अपील) के यहाँ अपील कर सकता है।

(ii) करदाता कमिश्नर (अपील) के निर्णय के विरुद्ध अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता है।

(ii) यदि किसी मामले में कानूनी बिन्दु सन्निहित हो तो ऐसी दशा में वह उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।

(iv) करदाता कमिश्नर को पुनर्विचार हेतु प्रार्थना-पत्र दे सकता है।

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