Easy Notes

BCom 1st Year Business Economics Demand And Law of Demand in Hindi

BCom 1st Year Business Economics Demand And Law of Demand in Hindi

 

 

BCom 1st Year Business Economics Demand And Law of Demand in Hindi:- This post uploaded by sachin daksh. and in this post we share you bcom question paper First year. and all the question solution in this site you can find easily. if you can not able to find solution and all subject notes you can give a comment in comment box. and please share this post of your friends. in this post for example :-Demand And Law Demand this post is business economics bcom 1st year chapter 3  solution and notes. learn and read this post and comment your feels and sand me.

 

BCom 1st Year Business Economics Demand And Law of Demand in Hindi
BCom 1st Year Business Economics Demand And Law of Demand in Hindi

 

माँग एवं माँग का नियम Demand And Law of Demand

 

प्रश्न 4- माँग का अर्थ बताइए। माँग तालिका से आप क्या समझते हैं ? माँग तालिका एवं माँग वक्र में सम्बन्ध बताइए। 

(2006)

 

उत्तर–व्यावसायिक अर्थशास्त्र का एक महत्त्वपूर्ण पहलू माँग विश्लेषण है । माँग विश्लेषण से आशय किसी वस्तु अथवा सेवा की माँग के सम्बन्ध में विस्तृत अध्ययन से है। इसमें वस्तु या सेवा की माँग को निर्धारित करने वाले तत्त्वों का पता लगाया जाता है और उनके प्रभावों को मापा जाता है। इस विश्लेषण के आधार पर ही वस्तु या सेवा की भावी माँग का पूर्वानुमान लगाया जाता है। प्रस्तुत अध्याय में माँग एवं माँग के नियम की विस्तृत विवेचना की गई है।

माँग का अर्थ एवं परिभाषा

(Meaning and Definition of Demand)

 

आम बोलचाल में इच्छा, आवश्यकता एवं माँग का एक ही अर्थ लगाया जाता है परन्तु अर्थशास्त्र में इन तीनों का अर्थ एक-दूसरे से भिन्न है। अर्थशास्त्र में प्रत्येक इच्छा माँग नहीं होती।

 

मांग का अर्थ एक दी हुई वस्तु की उन विभिन्न मात्राओं से होता है जो उपभोक्ता बाजार में किसी निश्चित समय में विभिन्न मुल्यों पर क्रय करने के लिये तैयार रहते हैं । अन्य शब्दों में किसी वस्तु की माँग उस वस्तु की मात्रा तथा उसकी कीमत से सम्बन्धित होती है,जो समय विशेष पर खरीदी जा सकती है।

‘माँग’ को विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने निम्न प्रकार परिभाषित किया है

 

प्रो० जे० एस० मिल (J. S. Mill) के अनुसार, “माँग शब्द का अभिप्राय मांगी गई उस मात्रा से लगाया जाना चाहिए जो एक निश्चित कीमत पर क्रय की जाती है।”

प्रो० बेन्हम (Benham) के अनुसार, “किसी दी गई कीमत पर वस्तु की माँग वह मात्रा है जो उस कीमत पर एक निश्चित समय में खरीदी जाती है।”

प्रो० मेयर्स के अनुसार, “किसी वस्तु की माँग उन मात्राओं की तालिका होती है जिन्हें क्रेता एक समय विशेष पर सभी सम्भव कीमतों पर खरीदने को तैयार रहता है।”

 

उपरोक्त परिभाषाओं का यदि विश्लेषण किया जाये तो माँग में निम्नलिखित पाँच तत्त्व निहित होने आवश्यक हैं- .

(i) वस्तु की इच्छा (Desire for goods),

(ii) वस्तु क्रय के लिए पर्याप्त साधन (Sufficient resources to buy the goods),

(iii) साधन व्यय करने की तत्परता (Willingness to spend).

(iv) एक निश्चित कीमत (Given Price) एवं

(v) निश्चित समयावधि (Given time period)। ..

 

उदाहरण द्वारा स्पष्टीकरणएक उदाहरण द्वारा माँग के नियम को भली प्रकार स्पष्ट किया .. जा सकता है। माना एक व्यक्ति कार खरीदना चाहता है । इसे केवल उसकी इच्छा कहा जायेगा। यदि उसके पास कार खरीदने के लिये पर्याप्त धन है और वह इस धन से कार खरीदने को तैयार है तो भी इसे केवल उसकी आवश्यकता कहा जायेगा, माँग नहीं क्योंकि इसमें मूल्य और समय दोनों तत्त्वों का अभाव है। यदि वह यह कहता है कि मैं 3 लाख 40 हजार रुपये में कार खरीदने को तैयार हूँ तो इसे भी मांग नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसमें समय तत्त्व का अभाव है। यदि वह यह कहता है कि मैं आज 3 लाख 40 हजार रुपये में कार खरीदने को तैयार हूँ तो इसे माँग कहा जायेगा।

 

इस प्रकार किसी वस्तु की माँग उसकी वह मात्रा है जो किसी निश्चित समय में दी हुई कीमत पर खरीदी जाती है। किसी वस्तु की माँग केवल उस वस्तु की कीमत से ही प्रभावित नहीं होती है बल्कि उपभोक्ता की आय, सम्बन्धित वस्तु की कीमत, उपभोक्ताओं की रुचि,मौसम एवं जनसंख्या आदि से भी प्रभावित होती है।

 

माँग को प्रभावित करने वाले तत्त्व

(Factors Affecting Demand)

 

माँग को प्रभावित करने वाले प्रमुख तत्त्व निम्नलिखित हैं –

 

(i) वस्तु की उपयोगिता (Utility of the goods)- उपयोगिता का अभिप्राय पर कामता एकदा गई समयावधि में वस्ती बात पर निर्भर करता है कि उस वस्त में मनष्य की आवश्यकता पर्ति की कितनी क्षमता है। अधिक उपयोगिता वाली वस्तु को माँग अधिक होगी तथा इसके विपरीत कम उपयोगिता वाली वस्तु की मॉग कम होगी ।

(ii) आय स्तर (Income Level)- आय स्तर का माँग पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। उपभोक्ता की आय जितनी अधिक होगी उसकी माँग उतनी ही अधिक हो जायेगी तथा इसके विपरीत आय का कम स्तर माँग को कम कर देगा।

(iii) धन का वितरण (Distribution of Wealth)– समाज में धन के वितरण का भी मांग पर प्रभाव पड़ता है। समाज में धन और आय का वितरण यदि असमान है तो धनी वर्ग द्वारा विलासिता की वस्तुओं की माँग अधिक होगी । वैसे-वैसे समाज में धन का वितरण समान होता जायेगा वैसे-वैसे समाज में आवश्यकता एवं आरामदायक वस्तुओं की माँग बढ़ती जायेगी।

(iv) वस्तु की कीमत (Price of the goods)- वस्तु की कीमत माँग को मुख्य रूप से प्रभावित करती है। कम कीमत पर वस्तु की अधिक माँग तथा अधिक कीमत पर वस्तु की कम माँग होती है।

(v) सम्बन्धित वस्तुओं की कीमतें (Price of related goods)– सम्बन्धित वस्तुएँ दो प्रकार की होती हैं

 

(a) स्थानापन्न वस्तुएँ (Substitutes goods)- ऐसी वस्तुएँ जिनका एक-दूसरे के बदले प्रयोग किया जा सकता है; जैसे–चीनी-गुड़, चाय-कॉफी, आदि।

(b) पूरक वस्तुएँ (Complementary goods)- ऐसी वस्तुएँ जिनका उपयोग एक साथ किया जाता है, जैसे-कार-पेट्रोल, स्याही-कलम, डबलरोटी-मक्खन, आदि। . स्थानापन्न वस्तुओं में एक वस्तु की कीमत में होने वाला परिवर्तन दूसरी वस्तु की माँग को विपरीत दिशा में प्रभावित करेगा तथा पूरक वस्तुओं में एक वस्तु के कीमत परिवर्तन के कारण दूसरी वस्तु की माँग समान दिशा में बदलेगी।

(vi) रुचि, फैशन, आदि (Taste, Fashion, etc.)– वस्तु की मांग पर उपभोक्ता की रुचि, उसकी आदत. प्रचलित फैशन, आदि का भी प्रभाव पड़ता है। किसी वस्तु विशेष का समाज में फैशन होने पर निश्चित रूप से उसकी माँग में वृद्धि होगी।

(vii) भविष्य में कीमत परिवर्तन की आशा (Expected Future change in Price)- सरकारी नियन्त्रण,दैवी विपत्ति की आशंका, युद्ध सम्भावना, आदि अनेक अप्रत्याशित एवं प्रत्याशित घटकों का भी वस्तु की माँग पर प्रभाव पड़ता है।’ – इसके अतिरिक्त, जनसंख्या परिवर्तन, व्यापार दिशा में परिवर्तन, जलवायु, मौसम आदि का भी वस्तु की माँग पर प्रभाव पड़ता है। .

 

माँग के प्रकार (Kinds of Demand)

 

सामान्यतया किसी वस्तु की माँग तीन बातों से प्रभावित होती है कीमत, आय और स्थानापन्न या पूरक वस्तुएँ । इस आधार पर माँग तीन प्रकार की होती है

(1) मूल्य माँग (Price Demand)

(2) आय मांग (Income Demand)

(3) तिरछी या आड़ी माँग (Cross Demand)।

(1) मूल्य या कीमत माँग (Price Demand)- मूल्य माँग से अभिप्राय वस्तु की उन मात्राओं से है जो एक निश्चित समयावधि में निश्चित कीमत पर उपभोक्ताओं द्वारा मांगी जाती है। ‘यदि अन्य बातें समान रहें तो वस्तु की कीमत बढ़ जाने से उनकी माँग कम हो जायेगी । और वस्तु की कीमत घट जाने से उसकी माँग बढ़ जायेगी। यहाँ यदि अन्य बातें समान रहें’, शब्द का अभिप्राय यह है कि जिस समय विशेष पर उपभोक्ता किसी वस्तु विशेष की माँग करता है, उस समय उपभोक्ता की आय, रुचि, व्यवहार एवं उसके आय स्तर में किसी प्रकार का कोई भी परिवर्तन नहीं होना चाहिए। कीमत एवं वस्तु मॉग में विपरीत सम्बन्ध होने के कारण कीमत माँग वक्र (Price Demand Curve) का ढ़ाल ऋणात्मक (Negative) होता है अर्थात् कीमत माँग-वक्र बायें से दायें नीचे गिरता हुआ होता है।

(2) आयमाँग (Income Demand)- आय-माँग किसी वस्तु की उन मात्राओं को व्यक्त करती है जो अन्य बातें समान रहने पर, उपभोक्ता द्वारा आय के विभिन्न स्तरों पर खरीदी जाती है । ऐसी माँग का सम्बन्ध वस्तु के मूल्य से न होकर ‘उपभोक्ता की आय’ से होता है। आय-माँग का विश्लेषण करते समय हम वस्तुओं के मूल्य, उपभोक्ता की रुचि आदि तत्त्वों को स्थिर मान लेते हैं। आय-माँग की दृष्टि से आय के बढ़ने पर माँग बढ़ती है और आय के घटने पर माँग कम होती है अर्थात् आय और माँग में सीधा सम्बन्ध होता है। आय-माँग वक्र का रुख “नीचे से दायें ऊपर की ओर” उठता हआ होता है। आय-माँग को ‘एंजिल वक्र’ भी कहते हैं।

 

यह ध्यान रखने योग्य है कि श्रेष्ठ एवं निकृष्ट वस्तुओं के सन्दर्भ में आय-माँग की प्रवृत्ति अलग-अलग होती है। आर्थिक दृष्टि से श्रेष्ठ वस्तुएँ (superior goods) जैसे विलासिता की वस्तुएँ, इनकी माँग आय में वृद्धि के साथ बढ़ती है। लेकिन इसके विपरीत आर्थिक दृष्टि से ‘निकृष्ट वस्तुएँ’ (inferior goods) जैसे मोटे अनाज,डालडा घी आदि की माँग आय-वृद्धि के साथ घटने की प्रवृत्ति रखती है।

 

(3) तिरछी या आड़ी माँग (Cross Demand)- जब किसी वस्तु की माँग पर अन्य वस्तुओं की कीमतों में होने वाले परिवर्तन का भी प्रभाव पड़ता है तो उसे उस वस्तु की तिरछी या आड़ी माँग कहते हैं। अन्य शब्दों में, आड़ी माँग में एक वस्तु की कीमत परिवर्तन का सम्बन्धित दूसरी वस्तु की माँग पर प्रभाव देखा जाता है, ये सम्बन्धित वस्तुएँ दो प्रकार की हो सकती हैं

 

(i) स्थानापन्न वस्तुएँ (Substitutes Goods)- वे वस्तुएँ जिन्हें एक-दूसरे के स्थान पर प्रयोग किया जा सकता है, स्थानापन्न वस्तुएँ कहलाती हैं जैसे चाय तथा कॉफी ।

 

स्थानापन्न वस्तुओं में जब एक वस्तु की कीमत में वृद्धि होती है तब अन्य बातें समान रहने पर’ स्थानापन्न वस्तु की माँग में वृद्धि हो जायेगी अर्थात् स्थानापन्न वस्तुओं के मूल्य तथा माँगी गई मात्रा में सीधा सम्बन्ध होता है। उदाहरण के लिए, कॉफी की कीमत बढ़ने की दशा में चाय की माँग में वृद्धि होगी। ..

 

(ii) पूरक वस्तुएँ (Complementary Goods)- पूरक वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जो किसी निश्चित उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक साथ प्रयोग की जाती हैं, जैसे-स्कूटर-पेट्रोल । यदि स्कूटर की कीमत में तीव्र वृद्धि हो जाये तब पूरक वस्तु पेट्रोल की माँग पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है, जबकि पेट्रोल की कीमत अपरिवर्तित रहती है। इस प्रकार पूरक वस्तुओं की कीमत और खरीदी जाने वाली मात्रा में विपरीत सम्बन्ध पाया जाता है।

 

माँग के अन्य प्रकार (Other Kinds of Demand)- माँग के कुछ अन्य प्रकार निम्नलिखित हैं-..

(1) संयक्त माँग (Joint Demand)- जब किसी व्यक्ति द्वारा अपनी आवश्यकता की सन्तष्टि के लिए दो या दो से अधिक वस्तुओं की %A

error: Content is protected !!