Promissory notes and bills of exchange Business Law Notes Hindi

Promissory notes and bills of exchange Business Law Notes Hindi



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Promissory notes and bills of exchange Business Law Notes Hindi
Promissory notes and bills of exchange Business Law Notes Hindi

प्रतिज्ञा-पत्र एवं एंव विनिमय – विपत्र Promissory notes and bills of exchange

विनिमय विपत्र (bill of exchange)

परिभाषा – विनिमय साध्य विलेख अधिनियम की धारा 5 के अनुसार, “विनिमय – विपत्र एक शर्त रहित आज्ञा- पत्र है जिसमे लिखने वाले के हस्ताक्षर होते है तथा लेखक, विलेख में वर्णित निश्चित धनराशी किसी निश्चित व्यक्ति को अथवा उसके द्वारा आदेशित व्यक्ति को अथवा लेख पत्र के वाहक को भुग्तान करने का आदेश देता है “

रिजर्व बैंक या सर्कार को छोडकर कोई भी व्यक्ति ऐसा विनिमय पत्र नही लिख सकता जो वाहक की माँग पर देय हो |

विनिमय विपत्र का नमूना

विनिमय- विपत्र के लक्षण (characteristics of bills of exchange)- 1, यह लिखित होना चाहिये 2, विनिमय – विपत्र में एक निश्चित धनराशी के भुगतान करने का आदेश होता है | 3, यह शतर रहित आदेश होता है | 4, विनिमय विपत्र पर लेखक के हस्ताक्षर होना आवश्यक है | 5, इसका भुगतान निश्चित अवधि के बाद होता है | 6, इस पर नियमानुसार स्टाम्प भी लगाया जाता है | 7, इसका भुगतान निश्चित व्यक्ति को या उसके द्वारा आदेशित व्यक्ति को या लेखपत्र के वाहक को किया जाता है |

विनिमय-विपत्र के पक्षकार (parties to B/E)विनिमय – विपत्र में निम्नलिखित तीन पक्षकार होते है –

1, लेखक या आहर्ता (Drawer) वह व्यक्ति जो विनिमय विपत्र को लिखता है , लेखक या आहर्ता कहलाता है यह भुगतान का आदेश देता है |

2, आहार्यी या स्वीकर्ता (Drawee or Acceptor) वह व्यक्ति जिस पर विनिमय-पत्र लिखा जाता है अर्थात् जिसे भुगतान करने की आज्ञा दी जाती है, आहार्यी कहलाता है | जब यह स्वीकृति दे देता है तो इसे ‘स्वीकर्ता’ कह देते है |

3, भुगतान प्राप्तकर्ता या आदाता (Payee) वह व्यक्ति जो विनिमय-विपत्र का भुगतान प्राप्त करता है |

कभी-कभी लेखक और भुगतान प्राप्तकर्ता एक ही व्यक्ति होता है | ऐसी दशा में एक ही व्यक्ति दो पक्षकारों की स्थिति में होता है |

प्रतिज्ञा-पत्र (Promissory-Note)

परिभाषा (Definition) विनिमय-पत्र विलेख अधिनियम की धारा 4 अनुसार, “प्रतिज्ञा-पत्र एक लिखित विलेख है जिस पर लिखने वाले के हस्ताक्षर होते है तथा लेखक उसमे वर्णित किसी व्यक्ति अथवा उसके आदेशानुसार अथवा वाहक को शर्त रहित विलेख में अंकित राशि देने की प्रतिज्ञा करता है |”

यह ध्यान रखने योग्य है क रिजर्व बैंक तथा केन्द्रीय सरकार के अतिरिक्त कोई भी संस्था या व्यक्ति ऐसा प्रतिज्ञा-पत्र नही लिख सकता जो वाहक की माँग पर देय हो |

प्रतिज्ञा-पत्र के लक्षण या विशेषताएँ (Characteristics of P/N) उपर्युक्त परिभाषा के आधार पर प्रतिज्ञा- पत्र में इन लक्षणों का होना अनिवार्य है – 1, यह लिखित होना चाहिये | 2, लेखक द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिये | 3, यह देनदार (ऋणी) द्वारा लिखा जा सकता है | 4, इसमें भुगतान करने की प्रतिज्ञा की जाती है | 5,  भुगतान की प्रतिज्ञा शर्त रहित होनी चाहिये | 6, उसमे धनराशि का निश्चित होना आवश्यक है | 7, भुगतान की अवधि निश्चित होती है | 8, भुगतान देश की मुद्रा में होना चाहिये | 9, रकम के अनुसार मुद्रांक (Stamp) का लगाया जाना अनिवार्य है | 10, भुगतान एक निश्चित व्यक्ति को या उसके आदेशित व्यक्ति को दिया जाता है |

प्रतिज्ञा-पत्र के पक्षकार (Parties of Promissory-Note) प्रतिज्ञा पत्र में दो पक्षकार होते है –

(i) लेखक अथवा आहर्ता (Drawer) जो प्रतिज्ञा-पत्र के लिखता हैं, यह व्यक्ति ऋणी या देनदार होता है जो भुगतान करने की प्रतिज्ञा करता है |

(ii) आदाता या भुगतान पाने वाला (Payee) जिसे प्रतिज्ञा-पत्र की रकम का भुगतान प्राप्त करना होता है |

विनिमय विपत्र, चैक एवं प्रतिज्ञा-पत्र में अन्तर

आधार विनिमय विपत्र चैक प्रतिज्ञा-पत्र
1, पक्षकार इसमें तीन पक्षकार होते है – लेखक, स्वीकर्ता एवं आदाता (देनदार) | इसमें भी तीन पक्षकार होते है – लेखक, बैंक एवं भुगतान पाने वाला | इसमें दो पक्षकार होते है
2, लेखक इसमें लेखक राशि प्राप्त करने वाला होता है | इसमें लेखक देनदार होता है | इसमें भी लेखक देनदार होता है |
3, स्वीकृति इसमें देनदार से स्वीक्रति कराना आवश्यक होता है | इसमें स्वीकृति की आवश्यकता नही होती है | इसमें भी स्वीकृति की आवश्यकता नही होती है |
4, प्रकृति इसमें भुगतान का आदेश होता है | इसमें भी भुगतान का आदेश होता है | इसमें भुगतान करने की प्रतिज्ञा होती है |
5, अवधि यह देखने या अवधि समाप्त होने पर देय होता है | यह हमेशा माँग पर देय होता है यह माँग पर अवधि समाप्त होने पर देय होता है |
6, स्टाँम्प  इसमें स्टाम्प लगाया जात है | इसमें स्टाम्प की कोई आवश्यकता नही होती | इसमें भी स्टाम्प लगाना आवश्यक होता है |
7, रेखांकन इसमें रेखांकननही होता है | इसमे रेखांकन किया जा सकता है | इसमें रेखांकन नहो होता है |
8, अनुग्रह दिन इसमें तीन दिन अनुग्रह के दिये जाते है | इसमें अनुग्रह दिन का प्रश्न ही नही उठता है | इसमें तीन दिन अनुग्रह के दिये जाते है |
9, लेखक की मृत्यु की प्रभाव लेखक की मृत्यु का कोई प्रभाव नही पड़ता है | लेखक की मृत्यु होने पर बैंक भुगतान रोक देता है | मृत्यु का कोई प्रभाव नही पड़ता है |
10, अनादरण अनादरण की दशा में धारक को अन्य दायी पक्षकारों की सूचना देना आवश्यक है | इसमें अनादरण की सुचन देना आवश्यक नही है | इसमें सुचना देने का प्रश्न ही नही उठता है |
11, नोटिंग एवं प्रोटेस्टिंग अनादरण हो जाने पर नोटिंग एवं प्रोटेस्टिंग अवश्यक हो जाता है | इसमें इनकी कोई आवश्यकता नहो होती | इसमें भी इनकी कोई आवश्यकता नही होती है |

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