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Negotiable Instruments According to Section 13 (1) of 1881 Business Law Notes

Negotiable Instruments According to Section 13 (1) of 1881 Business Law Notes

Negotiable Instruments According to Section 13 (1) of 1881 Business Law Notes

 Negotiable Instruments According to Section 13 (1) of 1881 Business Law Notes :- Negotiable instrument act 1881 or exchangeable instrument act, 1881 is a law of india that relates to the overseas instrument promotional notes, bill of exchange and check itc…financial institutions working in india, industry organizations and even the general public also do their transactions mostly through checks. problems also arise in addition to the features that happen in the financial business through check. the arrangement for loadging complaintent in the business through check has been provided in the negotiable instrument act, 1881.

Negotiable Instruments According to Section 13 (1) of 1881 Business Law Notes
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विनिमय-साध्य विलेख

(Negotiable Instruments)

विनियम-साध्य विलेख का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and definition of negotiable instrument)

‘विनिमय साध्य’ का अर्थ सुपुर्दगी द्वारा हस्तातंरणीय से है तथा ‘विलेख’ का अर्थ एक विधिवत् क़ानूनी दस्तावेज़ अथवा किसी व्यक्ति के पक्ष में कोई अधिकार उत्पन्न करने वाले दस्तावेज )विलेख या लेख-पत्र) से है | इस प्रकार विनिमय-साध्य विलेख का शाब्दिक अर्थ ऐसे लिखित दस्तावेज से है जो किसी व्यक्ति के हित में अधिकार उत्पन्न करता है एवं जो सुपुर्दगी के द्वारा हस्तातंरणीय होता है |




भारतीय विनिमय-साध्य विलेख अधिनियम, 1881 की धारा 13(1) के अनुसार, “एक विनिमय साध्य विलेख की से आशय है किसी प्रतिज्ञापत्र, विनिमय विपित्र अथवा चैक से है जिसका भुगतान आदेशित व्यक्ति को या वाहक को देय होता है |” यह परिभाषा विनिमय साध्य विलेखों की विशेषताओं एवं प्रक्रति की और कोई और संकेत नही करती वरन् केवल यह बताती है कि चैक, विनिमय पत्र और प्रतिज्ञापत्र ही विनिमय साध्य विलेख होते है | इस प्रकार अधिनिमम द्वारा दी गयी पारिभाषा संकुचित है |

न्यायमूर्ति के० सी० विलिस के अनुसार, “विनिमय-साध्य विलेख वह है जिसका स्वामित्व कसी भी ऐसे व्यक्ति को प्राप्त हो जाता है उसे सद्भावना से तथा मूल्य के बदले में प्राप्त करता है, भले ही जिस व्यक्ति से उसने प्राप्त किया है उसके अधिकार में कोई भी दोष हो |” इस परिभाषा का विश्लेषण करने पर पता चलता है की यदि कोई व्यक्ति सद्विश्वास से तथा मूल्य के बदले कोई विलेख प्राप्त करता है तो उसे हस्तान्तरक से अच्छा स्वामित्व प्राप्त होता है |

थामस के अनुसार, “विनिमय साध्य विलेख वह होता है जो की व्यापार के रीती-रिवाजो तथा कानून के अनुसार विनिमय साध्य होता है व जिसका हस्तान्तरण बिना उत्तरदायी व्यक्ति को सूचित किये, सुपुर्दगी अथवा बेचान रवम सुपर्दगी से इस प्रकार किया जा सकता है कि, (अ) उसका धारक अपने नाम से वाद चला जा सकता है, और (ब) इसका स्वामित्व हस्तान्तरक के दोषपूर्ण स्वामित्व रहने पर भी मूल्याकन प्रतिफल तथा सद्भावना से प्राप्त करने वाले हस्तारिती को प्राप्त हो जाता है |”

निष्कर्ष – उपर्युक्त परीभाषाओं के विशेषणात्मक विवेचन के आधार पर वह कहा जा सकता है की विनिमय-साध्य विलेख एक लिखित दस्तावेज होता है जिसका भुगतान मुद्रा में किया जाता है और जिसका हस्तान्तरण कानून या व्यापारिक प्रथा के अन्तर्गत एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति को किय जा सकता है | सद्भावना एवं मूल्य के बदले विलेख को प्राप्त करने वाले व्यक्ति को ऐसे प्रपत्र पर समुचित स्वामित्व रखने का विसेषाधिकार होता है, चाहे उसके हस्तान्तरणकर्ता का उस विलेख पर कोई स्वामित्व नही था अथवा दोषपूर्ण स्वामित्व था | चैक, प्रतिज्ञा-पत्र एवं विनिमय-विपित्र के अतिरिक्त बैंक ड्राफ्ट, कोशागार विपत्र (Treasury bills), हुण्डियों (Hundies) तथा लाभांश-अधिपत्र Dividens Warrabts) आदि को भी विनिमय-साध्य विलेख माना जाता है |




विनिमय-साध्य विलेख की आधारभूत विशेषतायें या लक्षण (Fundamental Characteristics of negotiable Instrument)

विनिमय साध्य विलेख की निम्नलिखित आधारभूत विशेषतायें या लक्षण है जो इसे अन्य सामान्य वस्तुओं तथा चल सम्पतियों से भिम्न करते है-

1, लिखित प्रपत्र (Written Document) विनिमय साध्य विलेख लिखित होना चाहिये, मौखिक नहीं | भुगतान की मौखिक प्रतिज्ञा या मौखिक आदेश को विलेख नही माना जा सकता |

2, स्वामित्व हस्तान्तरण (Transfer of Title) ऐसे विलेख का स्वमित्व, यदि विलेख वाहक (Bearer) को देय है तो सुपुर्दगी मात्र से ही तो यदि विलेख आदेश पर देय हो तो पृष्ठांकन एवं सुपुर्दगी के द्वारा हस्तान्तरित किया जा सकता है |

3, मौद्रिक दायित्व (Monetary liabilities) विनिमय-साध्य विलेख का भुगतान मुद्रा में किया जाता है | अत: किसी ऐसे विलेख को विनिय-साध्य विलेख नही कहा जा सकता जिसमे मुद्रा के अतिरिक्त किसी अन्य वस्तु या सामान देने का आदेश या प्रतिज्ञा होती है |

4, भुगतानों का माध्यम (Means of Payments) विनिमय-साध्य विलेख ऋणों एवं दायित्त्वो के भुगतान करने का एक साधन है |

5, शर्त रहित (Unconditional) विनिमय साध्य विलेख शर्त रहित प्रतिज्ञा या आदेश होते है |

6, हस्तान्तरणकर्ता एक दोषों का कोई प्रभाव नही – यदि हस्तान्तरी ने सद्भावना से तथा मूल्य जे बदले विलेख को प्राप्त किया है तो उस पर विलेख के हस्तान्तरक या किसी अन्य पूर्व स्वामी के स्वामित्व में पाए जाने वाले किसी दोष कोई विपरीत प्रभाव नही पड़ता है अर्थात् उसे हस्तान्तरक से अच्छा स्वामित्व प्राप्त होगा |

उदाहरणार्थ, यदि मोहन ने सोहन का चैक चोरी करके उसे राम को हस्तांतरित किया है और यदि राम ने उस चैक को बिना उक्त चोरी की जानकारी के सद्भावनापूर्वक तथा प्रतिफल के बदले प्राप्त किया है तो राम उक्त चैक का निर्दोष स्वामी होगा, भले ही मोहन, चैक का दोषपूर्ण स्वामी है |

7, हस्तान्तरण की सूचना देना आवश्यक नही (No Notice of Transfer) इसके भुगतान के लिये उत्तरदायी व्यक्ति को इसके हस्तान्तरण की सुचना देना आवश्यक नही है | विनिमय-साध्य विलेख का यथाविधिधारी स्वयं अपने नाम से वाद प्रस्तुत कर सकता है |

विनिमय साध्य विलेख सम्बन्धी वैधानिक धारणाएँ या मान्यताएँ (Legal Presumptions as to Negotiable Instruments)

विनिमय-साध्य विलेख अधिनियम की धारा 118 एवं 119 के अनुसार किसी अन्य विपरीत बात के सिध्द न होने पर प्रत्येक विनिमय-साध्य विलेख के सम्बन्ध में अग्रलिखित मान्यतायें होती है –

1, प्रतिफल के सम्बन्ध में (As to Consideration) प्रत्येक विनिमय-साध्य विलेख के सम्बन्ध में यह माना जाता है की वह प्रतिफल के बदले में लिखा गया है, स्वीकार किया गया है, पृष्ठांकन किया गया है तथा हस्तांतरित किया गया है |

2, तिथि के सम्बन्ध में (As to Date) प्रत्येक विलेख उस पर अंकित तिथि को ही लिखा हुआ माना जाता है | उदहारण के लिये, यदि कोई चैक 16 जनवरी को लिखा गया था लेकिन भूल से उस पर 6 जनवरी लिखा गया तो वह चैक 6 जनवरी लिखा माना जायेगा जब कि दूसरा पक्ष यह सिध्द न कर दे की चैक 16 जनवरी को ही लिखा गया था |

3, स्वीकृत के सम्बन्ध (As to Acceptance) प्रत्येक विलेख को उसेक लिखे जाने की तिथि के बाद परन्तु उसकी परिपक्वता की तिथि से पूर्व समुचित समय के अन्दर स्वीकार किया गया था |

4, हस्तान्तरण के सम्बन्ध में (As to Transfer) माँग पर देय विलेख को छोड़कर प्रत्येक विनिमय-साध्य विलेख का प्रत्येक हस्तान्तरण उसकी अवधि समाप्त पूर्व किया हुआ माना जाता है |

5, पृष्ठांकन के क्रम के सम्बन्ध में (As to order of endorsements) विनिमय साध्य विलेख पर दिए गये पृष्ठांकन उसी क्रम में किये गये मने जायेंगे जिस क्रम में वे विलेख पर लिखे हुये है |

6, विधिवत स्टाम्प के सम्बन्ध में (As to necessary stamps) यदि कोई विनिमय-साध्य विलेख खो जाता है अतवा नष्ट हो जाता है तो यह मान लिया जाता है कि उस विधिवत् स्टाम्प लगी हुई थी |

7, धारक के सम्बन्ध में (As to holder)प्रत्येक विनिमय-साध्य विलेख के धारक को यथाविधिधारी माना जाता है जब तक की उस धारक के विरुध्द यह सिध्द न कर दिया जाये की धारक ने विलेख को किसी अप्रध्द द्वारा अथवा कपट द्वारा या गैर-क़ानूनी प्रतिफल के लिये प्राप्त किया था |

8, अनादरण के सम्बन्ध में (As to dishonor) – किसी अनादृत (dishonoured) विलेख को प्रोटेस्ट (Protest) कराने पर जब तक उसे असत्य सिध्द ने कर दिया गया जाये, न्यायालय द्वारा यही माना जायेगा की विलेख का अनादरण किया गया है |




Negotiable Instruments According to Section 13 (1) of 1881 Business Law Notes

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