Easy Notes

Income From Salary Bcom Income Tax Notes Hindi

Income From Salary Bcom Income Tax Notes Hindi

Income From Salary Bcom Income Tax Notes Hindi

Income From Salary Bcom Income Tax Notes Hindi:- This post uploaded by sachin daksh. and in this post we share you bcom question paper First Year, Second Year, Third year. and all the question, Notes, all solution in this site you can find easily. if you can not able to find solution and Notes all subject notes you can give a comment in comment box. and please share this post of your friends. and prepare your exam. and get highest marks. in your exam. best of luck from sdak24 groups. You can download here all Question paper, All Notes, easily in single one click. and if you want to read online here you can read also. because all the question paper is the both type we have uploaded. and all the question and notes paper in both languages.

In This Post:- All Bcom 2rd Year Student we are is presents today Bcom 2rd year Question Paper , Unsold Paper , Previous Paper, Most important Question and Practice Sets. This Question Paper, Notes Paper, Solution, is of the All university In India but all University’s student follow us and do the practice this question paper this subjects.

Income From Salary Bcom Income Tax Notes Hindi
Income From Salary Bcom Income Tax Notes Hindi

वेतन से आय (Income From Salary)

 

प्रश्न 1 अनुलाभ का क्या अर्थ है? कर मुक्त अनुलाभ कौन से हैं? 

उत्तर अनुलाभ की अर्थ (Meaning of Perquisites) अनुलाभ से आशय ऐसी सुविधाओं एवं लाभों से है जो किसी कर्मचारी को अपने मालिक से वेतन के अतिरिक्त ऐसी वस्तु या सेवा सुविधा के रूप में प्राप्त होती हैं जिनका मुद्रा में मूल्यांकन किया जा सकता है। ऐसी सुविधाएँ अथवा लाभ नियोक्ता के द्वारा अपने कर्मचारियों को स्वेच्छा से अथवा किसी अनुबन्ध के अधीन प्रदान की जा सकती हैं।

 

कर मुक्त अनुलाभ (Tax free Perquisites) 

ये वे सुविधायें हैं जो कर्मचारी को अपने मालिक से प्राप्त होती हैं किन्तु कर मुक्त होती हैं अर्थात् वेतन की आय में सम्मिलित नहीं की जातीं। निम्नलिखित अनुलाभ प्रत्येक कर्मचारी के लिए कर मुक्त है

 

  1. चिकित्सा सुविधाएँ- नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को कोई चिकित्सा सुविधा दी गयी हो, या चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति की गयी हो, तो ऐसी सुविधा पूर्णतः करमुक्त होगी लेकिन यदि इलाज प्राइवेट नर्सिंग होम में करवाया गया हो तो कर्मचारी के लिए 15,000 तक की प्रतिपूर्ति कर मुक्त होगी, शेष करयोग्य होगी। 

 

  1. नाश्ता- कार्यालय के समय नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को दी गयी नि:शुल्क नाश्ता या जापान संविधान पूर्णतया: करमुक्त होगी।

 

  1. टेलीफोन सुविधाएँ- कर्मचारी को अपने घर पर नियोक्ता से प्राप्त नि:शुल्क टेलीफोन या मोबाइल फोन सुविधा पूर्णतः करमुक्त होगी, चाहे फोन आंशिक रूप से कर्मचारी के निजी प्रयोग में भी आता हो।

 

  1. मनोरंजन सुविधाएँ- नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारी को दी गयी नि:शुल्क मनोरंजन सुविधाएँ जैसे खेलकूद, सिनेमा आदि की सुविधा कर मुक्त होती है। 
  2. रिफ्रेशर कोर्स- यदि नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को रिफ्रेशर कोर्स करवाने या प्रशिक्षण दिलवाने के लिए कोई व्यय या फीस दी जाती है, तो नियोक्ता द्वारा किया गया ऐसा व्यय कर मुक्त अनुलाभ होगा, क्योंकि इससे नियोक्ता को लाभ पहुँचता है।
  3. कर्मचारी को कार्यालय अथवा निजी प्रयोग के लिए दी गई कम्प्यूटर/लेपटॉप की सुविधा।
  4. 20,000 तक ब्याज मुक्त या रियायती दरों पर दिए गए ऋण की राशि।
  5. कर्मचारी के बच्चों को नियोक्ताओं द्वारा संचालित शिक्षण संस्था में प्रदान नि:शुल्क शिक्षा सुविधा, (यदि उसकी शिक्षा की लागत 1,000 प्रति माह प्रति बच्चे से अधिक नहीं  है।)

9.विदेश में मिले हुए भत्ते एवं अनुलाभ-भारत सरकार द्वारा भारत के बाहर सेवारत होने पर भारतीय नागरिक को दिये जाने वाले भत्ते एवं अनुलाभ करमुक्त होंगे। 

  1. उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय के जजों को बिना किराये के प्राप्त निवास, सवारी की सुविधा कर मुक्त होगी।
  2. केन्द्रीय मंत्री, संसद के निर्दिष्ट अधिकारी एवं संसद में विपक्ष के नेता आदि को किराया मुक्त आवास की सुविधा जिसमें उसका रखरखाव भी सम्मिलित हैं। 
  3. नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारियों को अपने निवास से कार्यस्थल तक आने और वहाँ से वापिस घर जाने के लिये दी गई निःशुल्क वाहन की सुविधा कर मुक्त है। 
  4. सामूहिक बीमा योजना के अन्तर्गत नियोक्ता द्वारा दिया गया अंशदान करमुक्त होगा।
  5. कर्मचारी के स्थानान्तरण पर होटल में अधिकतम 15 दिन की आवासीय सुविधा।
  6. नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारियों को रियायती दर पर बेचा गया माल, जो कि नियोक्ता द्वारा निर्मित है।
  7. कर्मचारी स्टॉक योजना के अन्तर्गत नियोक्ता कम्पनी द्वारा अपने कर्मचारियों को नि:शुल्क या रियायती दर पर अंश, ऋण-पत्र या वारन्ट जारी करना।
  8. तीस वर्ष या इससे अधिक पुरानी सम्पत्ति का हस्तांतरण-यदि नियोक्ता कर्मचारी को ऐसी कोई सम्पत्ति हस्तांतरित की हो, जो 10 वर्ष या इससे अधिक पुरानी हो गयी ने

हो, तो ऐसे हस्तांतरण का कोई भाग करयोग्य नहीं होता, परन्तु ऐसी सम्पत्ति में कम्प्यूटर्स, इलेक्ट्रोनिक वस्तुएं एवं कार शामिल नहीं है।

  1. अवकाश यात्रा सहायता- चार साल में अधिक से अधिक दो बार कर्मचारी को अवकाश यात्रा सहायता कर मुक्त रूप में प्राप्त हो सकती है।
  2. अनुलाभों पर आय- कर-यदि नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को दिये गये अनुलाभों पर आय-कर का भुगतान किया जाता है तो ऐसी राशि करमुक्त होगी। 
  3. कर्मचारी के बच्चों को शिक्षा के लिए दी गई छात्रवृत्ति। 

 

प्रश्न 11-अनुलाभों से आप क्या समझते हैं? सभी कर्मचारियों के लिए कर-योग्य अनु लाभों को समझाइए। अथवा नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारी को मुफ्त रहने के लिए प्रदान की गई सुविधा का मूल्य कैसे निर्धारित किया जाता है, जबकि मकान (1) असुसज्जित हो, (ii) सुसज्जित हो?

 

उत्तर  – सभी कर्मचारियों के लिए कर-योग्य अनुलाभ 

निम्नलिखित अनुलाभ सभी कर्मचारियों के लिए कर-योग्य होते हैं

 

 1.किराये से मुक्त मकान की सुविधा- नियोक्ता द्वारा प्रदान की जाने वाली किराये से मुक्त मकान कि सुविधा दो प्रकार की हो सकती है  (A.)  असुसज्जित मकान Unfurnished house), एवं (B) सुसज्जित मकान (Furnished house)।  इस सुविधा का मूल्यांकन आय कर नियमानुसार करके कर्मचारी की कर-योग्य आय में जोड़ा जाता है।

 

(अ) असुसज्जित मकान का मूल्यांकन- इस उद्देश्य से कर्मचारियों को दो वर्गों में विभाजित करेंगे  

(i)  सरकारी कर्मचारी (Govt. Servant) सरकारी कर्मचारियों की दशा में सरकार द्वारा निर्धारित अनुज्ञा शुल्क (Licence Fee) किराया ही एक असुसज्जित मकान का मूल्य माना जाता है। 

(ii) गैर सरकारी कर्मचारी (Non-Govt. Servant)-. 

  • (a) यदि मकान नियोक्ता का है तो मकान का मूल्यांकन शहर की जनसंख्या के आधार पर निश्चित होगा—यदि उस शहर की जनसंख्या 2001 की जनगणना के आधार पर 10 लाख से 25 लाख तक है तो उस अवधि में देय वेतन का 10% होगा। इसी प्रकार यदि जनंसख्या 25 लाख से अधिक है तो इस अवधि में देय वेतन का 15%, और यदि जनसंख्या 10 लाख तक है तो उस अवधि में देय वेतन का 7.5% माना जायेगा। 
  • (b) यदि मकान नियोक्ता का नहीं है अर्थात् किराये पर लेकर कर्मचारी को दिया गया है तो वास्तविक किराये की राशि या वेतन का 15% जो दोनों में से कम हो मकान का मूल्य माना जायेगा।

 

(ब) सुसज्जित मकान का मूल्यांकन- यदि मकान के साथ कर्मचारी को फर्नीचर एवं घरेलू उपकरण आदि भी प्रदान किये जाते हैं तो उपरोक्त वर्णित (अ) के अन्तर्गत ज्ञात की गयी राशि में निम्नलिखित राशि जोड़ दी जाएगी एवं इस प्रकार प्राप्त राशि ही सुसज्जित मकान की सुविधा का मूल्य कही जायेगी— 

  • (i) फर्नीचर व घरेलू उपकरणों, जिसका स्वामी नियोक्ता है, की लागत का 10% ; तथा
  • (ii) फर्नीचर व घरेलू उपकरण जिसका स्वामी नियोक्ता नहीं है अर्थात् नियोक्ता ने जिन्हें किराये पर लिया है, उनके लिए नियोक्ता ने जो किराया चुकाया है। 

विशेष

  1. उपरोक्त मकान के मूल्यांकन के लिए वेतन से आशय मूल वेतन + महंगाई भत्ता (सेवा श्तों के अन्तर्गत) + बोनस + कमीशन फीस+ नदी में प्राप्त भत्तों/नकदी में प्राप्त अन्य किसी भुगतान की करयोग्य रकम के योग से है।
  2. यदि कर्मचारी एक से अधिक नियोक्ताओं से वेतन प्राप्त करता है तो सम्बन्धित

अवधि में सभी नियोक्ताओं से प्राप्त वेतन को सम्मिलित किया जाएगा, चाहे मकान की सुविधा केवल एक ही नियोक्ता से मिली हो।

  1. मकान सुविधा के मूल्यांकन में वेतन देय आधार पर सम्मिलित किया जाता है। पिछली अवधि का बकाया वेतन (arrear of salary), अग्रिम वेतन (advance salary) तथा अर्जित अवकाश के नकदीकरण (encashment of earned leave) को सम्मिलित नहीं किया जाएगा। 
  2. भारत के बाहर उपार्जित वेतन भी सम्मिलित किया जाता है। 5. यदि प्रश्न में उचित किराया दिया गया है तो मकान का स्वामी नियोक्ता होगा व वास्तविक किराया दिया गया है तो मकान किराए पर लिया माना जाएगा। 
  3. यदि कर्मचारी स्थानान्तरित हो जाने के कारण नये स्थान पर नियोक्ता से नि:शुल्क रहने का मकान प्राप्त करता है तथा पुराने मिले हुए मकान को भी अपने पास रखता है तो 90 दिन तक दोनों मकानों में से जिस मकान का कम मूल्य होगा उस मकान को कर योग्य माना जायेगा। परन्तु यदि 90 द्विनों के पश्चात् भी दोनों मकान अपने पास रखता है तो दोनों ही मकान का मूल्य कर योग्य माना जायेगा। 

 

कर-मुक्त आवास सुविधा (Exempted Accomodation Facility)

 

 निम्नलिखित परिस्थितियों में नियोक्ता द्वारा प्रदान की गयी आवासीय सुविधा पूर्णतः कर-मुक्त होगी

  1. उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, केन्द्रीय मंत्री, विपक्ष के नेता एवं संसद के अधिकारियों को प्रदान की गयी आवास सुविधा।
  2. यदि मकान दूर-दराज के क्षेत्रों (remote areas) में, जो शहर से कम-से-कम 40 किलोमीटर दूर है तथा जिसकी जनसंख्या गत वर्ष में 20,000 से अधिक नहीं है, में उपलब्ध कराया गया है।
  3. कर्मचारी, जो खनन स्थल (mining site) अथवा समुद्री तेल खोज (onshore oil exploration) स्थल अथवा परियोजना स्थल अथवा बांध साइट अथव विद्युत उत्पादन साइट (power generation site) अथवा समुद्र पार साइट (offshore site) पर कार्यरत है, को दिया गया आवास जो कि अस्थायी प्रकृति का है तथा जिसका क्षेत्र 800 वर्ग फुट से अधिक नहीं है तथा जो किसी नगरपालिका अथवा छावनी बोर्ड की स्थानीय सीमा से 8 कि.मी. या उससे अधिक दूरी पर स्थित है।
  4. यदि कर्मचारी को स्थानान्तरण (Transfer) होने के कारण नियोक्ता द्वारा होटल में रहने की सुविधा प्रदान की गयी है और होटल में 15 दिन से कम ठहरता है तो अनुलाभ का मूल्य शून्य होगा और यदि होटल में 15 दिन से अधिक ठहरता है तो सम्बन्धित अवधि के लिए देय वेतन का 24 प्रतिशत अथवा होटल के बिल की वास्तविक राशि जो कम हो, उस राशि को ही ऐसी सुविधा का मूल्य माना जायेगा

 

रियायती किराये पर रहने के लिए मिली सुविधा का मूल्यांकन 

रियायती मकान की सुविधा का आशय है कि नियोक्ता ने कर्मचारी से इस सुविधा के बदले में कुछ किराये की रकम वसूल की है। यह सुविधा भी सरकारी व अन्य संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को सुसज्जित व असुसज्जित मकान की हो सकती है। ऐसे मकान का मूल्यांकन सर्वप्रथम यह मानकर करेंगे जैसे कि उक्त मकान कर्मचारी को बिना किराये के ही मिला हो। उसके बाद इस मूल्यांकन में से कर्मचारी के वेतन में से वास्तव में काटी गई किराये की राशि घटा देंगे। शेष राशि रियायती किराये के मकान का मूल्य मानी जायेगी।

 

  1. कर्मचारी के दायित्वों का नियोक्ता द्वारा भुगतान [धारा 17(2)(iv) – यदि नियोक्ता कर्मचारी के किसी ऐसे दायित्व का भुगतान करता है जो यदि नियोक्ता भुगतान न करता तो कर्मचारी को करना पड़ता, तो ऐसी स्थिति में नियोक्ता के द्वारा भुगतान की गयी राशि अनुलाभ मानी जाती है एवं कर्मचारी की ‘वेतन’ शीर्षक की आय में शामिल की जाती है ऐसे भुगतानों के कुछ उदाहरण निम्नानुसार है

(i) कर्मचारी के बच्चों की शिक्षा के व्यय का नियोक्ता द्वारा भुगतान (किसी अन्य व्यक्ति के स्वामित्व वाली शिक्षण संस्था में);

(ii) कर्मचारी के पानी एवं बिजली के बिलों का नियोक्ता द्वारा भुगतान यदि पानी एवं बिजली का कनेक्शन कर्मचारी के नाम का हो;

(iii) कर्मचारी के होटल अथवा क्लब के बिलों का नियोक्ता द्वारा भुगतान; 

(iv) कर्मचारी द्वारा लिये गये ऋण का नियोक्ता के द्वारा भुगतान; (v) कर्मचारी के द्वारा नियुक्त किये गये नौकर के वेतन का नियोक्ता के द्वारा भुगतान; 

(vi) कर्मचारी के द्वारा देय आय कर का नियोक्ता के द्वारा भुगतान;

(vii) कर्मचारी की स्वयं की मोटर कार के खर्चों का नियोक्ता के द्वारा भुगतान अथवा प्रतिपूर्ति। 

 

  1. कर्मचारी के जीवन बीमा अथवा वार्षिकी के प्रीमियम का नियोक्ता के द्वारा भुगतान |धारा 17(2)(V))-नियोक्ता द्वारा अपने किसी कर्मचारी के जीवन बीमा प्रीमियम अथवा वार्षिकी अनुबन्ध के लिए चुकायी गयी राशि अनुलाभ मानी जाती है एवं कर्मचारी के वेतन शीर्षक की आय में सम्मिलित की जाती है।

 

प्रश्न 12-अनुलाभों से आप क्या समझते हैं? आय-कर अधिनियम के उन अनुलाभों के सम्बन्ध में प्रावधान बताइए जो केवल विशिष्ट कर्मचारियों के लिए कर-योग्य हैं।

 

उत्तर. विशिष्ट कर्मचारी से आशय

 

 धारा 17(2) (i) के अनुसार विशिष्ट कर्मचारी से आश्य, निम्नलिखित से है

 (1) वह व्यक्ति कर्मचारी होने के साथ-साथ अपनी नियोक्ता कम्पनी में संचालक (Director) भी है, चाहे वह पूर्णकालिक संचालक हो गया अंशकालिक अथवा

(2) कर्मचारी होने के साथ-साथ उसका नियोक्ता कम्पनी में सारवान हित (Substantial Interest) भी है। सारवान हित का आशय है कि वह कर्मचारी नियोक्ता कम्पनी के कम से कम 20% मताधिकार रखने वाले अंशों का स्वामी भी है। अथवा

(3) उस कर्मचारी की “वेतन शीर्षक की मौद्रिक आय 50,000रुपए से अधिक है। स्पष्ट है कि उपर्युक्त वर्णित तीनों शर्तों में से कम से कम कोई भी एक शर्त पूरी करने वाला विशिष्ट कर्मचारी माना जाएगा । 

 

नोट-मौद्रिक करयोग्य वेतन से आशय करयोग्य नकद प्राप्तियों (वेतन + बोनस + कमीशन + करयोग्य भत्ते एवं अन्य मौद्रिक लाभ) के योग में से धारा 16 के अन्तर्गत दी जाने वाली कटौतियाँ (व्यवसाय कर + सरकारी कर्मचारी को मनोरंजन भत्ते की छूट) घटाने के बाद ज्ञात होने वाली शुद्ध राशि से है। दूसरे शब्दों में अनुलाभों (सुविधाओं) का मूल्य इस दृष्टि से गणना में शामिल नहीं किया जाता है।

 

विशिष्ट कर्मचारियों के लिए कर-योग्य अनुलाभ 

 

निम्नलिखित अनुलाभ विशिष्ट कर्मचारियों की परिभाषा में आने वाले कर्मचारियों कोप्राप्त होने पर ही कर योग्य होते हैं अर्थात् यदि ये अनुलाभ किसी ऐसे कर्मचारी को मिल रहे हैं जो विशिष्ट कर्मचारी की परिभाषा में नहीं आता है, तो उस कर्मचारी के लिए ये अनुलाभ कर मुक्त होते हैं

 

  1. मोटरकार की सुविधा : मालिक द्वारा कर्मचारी को दी जाने वाली मोटरकार की सुविधा का मूल्य निर्धारित करने के लिये कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी आवश्यक होती है। उदाहरणार्थ, पहले यह ज्ञात होना चाहिये कि कार का स्वामी कौन है-नियोक्ता या कर्मचारी; उसके खर्चों का भुगतान कौन करता है; कार कर्मचारी के निजी प्रयोग में आती है, या कार्यालय के लिये प्रयोग की जाती है या दोनों प्रकार के प्रयोग में आती है; कार बड़ी है या छोटी आदि। विभिन्न परिस्थितियों में कार-सुविधा के मूल्यांकन के नियम निम्न प्रकार हैं

(1) यदि मोटर कार मालिक (नियोक्ता)की है ये नियोक्ता द्वारा किराये पर ली गई है। 

  • (i) मोटर कार का केवल कार्यालय के लिए प्रयोग- यदि मोटर कार केवल कार्यालय कर्तव्य-पालन के लिये ही प्रयोग की जाती है तो इसके लिये कुछ भी मूल्य वेतन में नहीं जोड़ा जायेगा क्योंकि इसमें करदाता को कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं होता है। संक्षेप में, कार की दी गई ऐसी सुविधा अनुलाभ नहीं मानी जाती है।

 

  • (ii) मोटरकार पूर्णतया कर्मचारी के निजी प्रयोग में इस्तेमाल की जाती है- यदि मोटर कार कर्मचारी द्वारा केवल व्यक्तिगत कार्य के लिये ही प्रयोग की जाती है तथा इसके रखने या चलाने का सारा व्यय मालिक करता है तो चालक के पारिश्रमिक तथा मीटर के ह्रास (कार की वास्तविक लागत का 10% प्रतिवर्ष) सहित समस्त धन-राशि ही प्रदत्त कार सुविधा के अनुलाभ का मूल्य मानी जायेगी।

 

  • (iii) मोटरकार आंशिक रूप से निजी प्रयोग के लिये एवं आंशिक रूप से कार्यालय प्रयोग के लिये दी गई है

 

(अ) कार के समस्त व्यय नियोक्ता द्वारा वहन किये जाने पर- ऐसी दशा में कार की सुविधा का मूल्यांकन निम्न प्रकार किया जायेगा 

  • 1.छोटी कार की दशा में यदि कार 16HP. या 1600CC तक की है अथवा इंजन की क्षमता 1.6 लीटर तक है तो कार के अनुलाभ का करयोग्य मूल्य 1,800 प्रति माह माना जायेगा।
  • 2. बड़ी कार की दशा में यदि कार 16 H.P. या 1600CC से अधिक है अथवा इंजन की क्षमता 1.6 लीटर से अधिक है तो कार के अनुलाभ का करयोग्य मूल्य 2,400 ₹ प्रति माह माना जायेगा।

 

(ब)कार के निजी उपयोग से सम्बन्धित व्यय कर्मचारी द्वारा वहन किये जाने पर 

  • 1. छोटी कार की दशा में (16 H.P. या 1600CC या 1.6 लीटर तक इंजन की क्षमता वाली कार की दशा में) ऐसी कार के अनुलाभ का मूल्य 600 प्रति माह माना जायेगा।
  • 2. बड़ी कार की दशा में (16 H.P., 1600 CC या 1.6 लीटर से अधिक इंजन की क्षमता वाली कार की दशा में ऐसी कार के अनुलाभ का मूल्य 900 प्रतिमाह माना जायेगा। नोट-उपर्युक्त वर्णित (अ) तथा (ब) दोनों दशाओं में यदि नियोक्ता द्वारा कोई चालक (Driver) भी दिया जाता है तो उक्त सुविधा के मूल्य को 900 प्रति माह से बढ़ा दिया जायेगा।

 

नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को एक से अधिक मोटर-कार के प्रयोग की सुविधा (Facility of one or more than one Motor Cars)-

 

यदि नियोक्ता एक या एक से अधिक मोटर-कारों का मालिक है या उसने एक या एक से अधिक मोटर-कारें किराये पर ले रखी हैं और कर्मचारी या उसके परिवार के सदस्य को उसने कोई एक विशिष्ट मोटर-कार ही प्रयोग के लिए नहीं दे रखी है बल्कि विभिन्न कारों में से एक से अधिक कारों को निजी एवं कार्यालय कार्यों प्रयोग करने के लिए दे रखा है और उन कारों में से कोई कार बड़ी है एवं कोई कार छोटी है तो इस सुविधा का मूल्यांकन किस प्रकार किया जायेगा, आय-कर नियमों में इस सम्बन्ध में कुछ नहीं बताया गया है। अत: ऐसी दशा में कारों की सुविधा का मूल्यांकन इस प्रकार किया जायेगा जिससे कर्मचारी को लाभ हो, अर्थात् बड़ी कार कार्यालयीन एवं निजी कार्य के लिये मानी जा सकती है तथा छोटी कारें केवल निजी कार्य के लिये मानी जा सकती है । संक्षेप में, यदि नियोक्ता के पास एक से अधिक कार हैं अथवा उसने किराये पर लेकर कर्मचारी को उपलब्ध कराई हैं तथा कर्मचारी को सभी मोटर कारों को प्रयोग करने का अधिकार दे दिया है तो (पूर्णरूप से कार्यालय में प्रयोग होने वाली कार को छोड़कर) कार के अनुलाभ का कर योग्य मूल्य निम्न प्रकार ज्ञात करते हैं

(अ) एक कार का प्रयोग कार्यालय तथा निजी कार्यों के लिए माना जायेगा।

( 2700 प्रतिमाह अनुलाभ का मूल्य )

  • छोटी कार के लिये 1,800 प्रतिमाह }
  • चालक का वेतन 900 प्रतिमाह } 

 

अथवा

 

(3,300 प्रतिमाह अनुलाभ का मूल्य)

  • बड़ी कार के लिये 2,400 प्रतिमाह 
  • चालक का वेतन 900 प्रतिमाह

 

(ब) अन्य सभी कारों का मूल्यांकन इस आधार पर होगा, जैसे कि उन कारों को निज प्रयोग में लिया गया हो अर्थात् नियोक्ता द्वारा किये गये व्यय+ चालक का वेतन +कार की लागत का 10% – कर्मचारी द्वारा चुकार्यी गयी राशि = अनुलाभ का कर योग्य मूल्य।

 

(II) यदि मोटरकार कर्मचारी की है-

(i) कार निजी एवं कार्यालय दोनों के लिए इस्तेमाल की जाती हो-कार का प्रयोग कर्मचारी अपने कर्तव्य पालन एक निजी प्रयोग दोनों के लिये करता है परन्तु इसके रखने व चलाने का व्यय मालिक द्वारा वहन किया जाता है तो ऐसी दशा में कार की सुविधा का मूल्यांकन, उपर्युक्त वर्णित (अ) कार के समस्त व्यय नियोक्ता द्वारा वहन किये जाने पर, के अनुसार किया जायेगा अर्थात् 1800 + 900 अथवा 2400 +900 प्रतिमाह किया जायेगा (जैसी भी स्थिति हो)। (i) कार केवल निजी प्रयोग में आए-यदि कार का उपयोग केवल निजी कार्य में ही हो तो इस सुविधा का मूल्य वह राशि होगा जिसे नियोक्ता ने बहन (कार चलाने, रखरखाव, ड्राइवर का वेतन आदि) किया हो तथा यह सभी कर्मचारियों के लिए कर योग्य होगी।

 

नोट-

  1. कार की सुविधा के मूल्यांकन के सम्बन्ध में ‘माह’ से तात्पर्य सम्पूर्ण माह से है। दिनों के लिए प्राप्त कार की सुविधा को ध्यान में नहीं रखा जाता है। 
  2. यदि प्रश्न में ड्राइवर की सुविधा के सम्बन्ध में स्पष्टतः कोई उल्लेख नहीं हो तो यह माना जाना चाहिए कि ड्राइवर की सुविधा प्रदान नहीं की गयी है। 
  3. यदि कार घर से कार्यालय व कार्यालय से घर लौटने के लिए प्रदान की जाती है तो इसे कर-योग्य अनुलाभ नहीं माना जाएगा।

 

  1. गैस, बिजली एवं पानी की सुविधा

 

(i) स्वयं के स्त्रोत से प्रदान किये जाने पर – यदि नियोक्ता ने स्वयं के स्रोत से गैस, बिजली एवं पानी की सुविधा प्रदान की है तो इस सुविधा का मूल्य नियोक्ता द्वारा वहन की गई प्रति इकाई उत्पादन लागत के बराबर होगा। 

(ii) बाह्य साधन से क्रय करके प्रदान किये जाने पर- यदि उक्त सुविधाएँ नियोक्ता ने बाह्य साधन से क्रय करके कर्मचारी को उपलब्ध करायी हैं तो ऐसी सुविधा का मूल्य

 

नियोक्ता द्वारा चुकायी गयी वास्तविक राशि के बराबर होगा।

 

विशेष

(a) यदि उपर्युक्त दोनों दशाओं में कर्मचारी से इन सेवाओं के बदले कोई राशि वसूल की जाती है तो कर्मचारी द्वारा चुकाई गई राशि को उपर्युक्त प्रकार से ज्ञात किए गए मूल्य में से घटा दिया जायेगा।

  1. b) यदि गैस, बिजली व जल आपूर्ति के बिल कर्मचारी के नाम से आते हों जिनका भुगतान नियोक्ता करता है, तो ऐसा अनुलाभ सभी कर्मचारियों के लिए कर योग्य होगा। अन्य किसी परिस्थिति में यह केवल विशिष्ट कर्मचारी के लिए ही करयोग्य होगा।

 

  1. घरेलू नौकर, माली, चौकीदार एवं फ्रांस की सुविधा

नियोक्ता द्वारा सफाई कर्मचारी, माली, चौकीदार या अन्य कोई घरेलू नौकर उपलब्ध कराने सम्बन्धी अनुलाभ का मूल्य इस सुविधा को उपलब्ध कराने के लिए नियोक्ता द्वारा वहन की गई वास्तविक लागत है। वास्तविक लागत से आशय नियोक्ता अथवा उसकी ओर से अन्य व्यक्ति द्वारा इन सेवाओं के लिए दिए गए अथवा देय कुल वेतन की राशि से है। परन्तु यदि कर्मचारी से इन सेवाओं के बदले कोई राशि वसूल की गई है तो उस राशि को उपरोक्त वर्णित लागत में से घटा दिया जायेगा, तथा शेष राशि सुविधा का मूल्य होगी।

 

नोट-

  • A. यदि घरेलू नौकर, माली, चौकीदार, फर्राश आदि की नियुक्ति कर्मचारी द्वारा की गयी है परन्तु इनका भुगतान नियोक्ता द्वारा किया गया है तो ऐसी सुविधा का मूल्य नियोक्ता द्वारा वास्तव में चुकायी गयी राशि के बराबर होगा एवं यह सभी कर्मचारियों के लिए कर-योग्य होगा। 
  • B. नियोक्ता के स्वामित्व वाले मकान में यदि माली की सुविधा प्रदान की गयी है तो माली को नियोक्ता द्वारा चुकायी गयी राशि को अनुलाभ माना जाएगा अर्थात् यह सुविधा कर्मचारी के लिए कर-योग्य होगी। 

 

  1. कर्मचारी के बच्चों के लिए शिक्षा सुविधा

 

(अ) नियोक्ता द्वारा संचालित या प्रबन्धित शिक्षण संस्थान में सुविधा प्रदान करना–  यदि कोई शिक्षण संस्थान नियोक्ता द्वारा संचालित की जाती है तथा इसी शिक्षण संस्थान में कर्मचारी के परिवार के बच्चों/सदस्यों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है, तो विशिष्ट कर्मचारी के लिए इस सुविधा का मूल्य, ऐसे ही क्षेत्र में ऐसी ही शिक्षण संस्थान में शिक्षा ग्रहण करने पर जो लागत आती, के बराबर होगा। यदि नियोक्ता ने कर्मचारी से इस सम्बन्ध में कोई राशि वसूल की है तो इस प्रकार वसूल की गई राशि को उक्त मूल्य में से घटा दिया जाएगा एवं शेष राशि ही शिक्षा सुविधा का मूल्य होगा।

 

अपवाद- यदि उक्त सुविधा पर नियोक्ता का व्यय 1,000 रु. प्रति माह प्रति बच्चे से अधिक नहीं है तो कर्मचारी के बच्चों को दी गयी ऐसी शिक्षा सुविधा का मूल्य पूर्णतः कर-मुक्त होगा। 

 

(ब) अन्य शिक्षण संस्थान में सुविधा-  यदि नियोक्ता द्वारा किसी अन्य शिक्षण संस्था में कर्मचारी के बच्चे अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य को नि:शुल्क शिक्षा सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है तो इस सम्बन्ध में नियोक्ता द्वारा किये गये वास्तविक व्यय की राशि ही प्रदत्त सुविधा का मूल्य होगा और सभी कर्मचारियों के लिए कर योग्य माना जायेगा।

 

  1. परिवहन व्यवसाय में संलग्न नियोक्ता द्वारा यातायात की सुविधा प्रदान करना नियम 3(6)

 

परिवहन व्यापार में संलग्न यदि कोई संस्था अपने किसी कर्मचारी या उसके परिवार के किसी सदस्य को अपने वाहन में यात्रा करने या माल लाने ले जाने की निःशुल्क अथवा रियायती दर पर सुविधा प्रदान करती है तो इस सुविधा का मूल्य वह राशि होगी जो उक्त परिवहन संस्था सामान्य व्यक्ति से ऐसी सुविधा के लिए वसूल करती। यदि नियोक्ता ने ऐसी सुविधा के लिए कोई राशि कर्मचारी से वसूल की है तो इस प्रकार वसूल की गई राशि को उक्त सुविधा के निर्धारित किये गये मूल्य में से कम कर दिया जायेगा एवं शेष राशि ही उक्त सुविधा का करयोग्य मूल्य कहा जायेगा। किराये से मुक्त सुसज्जित मकान का मूल्यांकन-पृष्ठ 67 पर देखें। 

 

Questions -भत्ते से क्या आशय है? विभिन्न प्रकार के भत्तों को समझाइए। 

 

 उत्तर-   भत्ते का अर्थ (Meaning of Allowance) 

 

नियोक्ता द्वारा अपने प्रश्न कर्मचारियों को वेतन के अतिरिक्त मुद्रा में जो मासिक भुगतान किये जाते हैं, उन्हें भत्ते के नाम से जाना जाता है। आय-कर की दृष्टि से भत्ते तीन प्रकार के होते है-

(i) पूर्णतया कर-मुक्त भत्ते

(ii) पूर्णतया कर-योग्य भत्ते एवं 

(iii) आंशिक कर-मुक्त भत्ते।

 

(i) पूर्णतया कर-मुक्त भत्ते (Fully Exempted Allowances

(1) विदेश भत्ता-  यह भत्ता सरकार द्वारा एक भारतीय नागरिक को भारत के बाहर सेवा करने के लिए दिया जाता है। यह भत्ता पूर्णतया कर-मुक्त है

(2) उच्च एवं उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को सत्कार भत्ता-  उच्च एवं उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को जो सत्कार भत्ता मिला है वह पूर्ण कर-मुक्त होता है

(3) संयुक्त राष्ट्र संघ के भत्ते-  संयुक्त राष्ट्र संघ (U.N.O.) द्वारा अपने कर्मचारियों को दिये गये भत्ते पूर्णतया कर-मुक्त होते हैं एवं (4) यदि होटल, बोर्डिंग एवं आवास के लिए कर्मचारी को प्रतिदिन के हिसाब से भत्ता दिया जाता है और उसे इसमें से कुछ राशि बच जाती है तो यह कर-मुक्त है।

 

(ii) पूर्णत: कर योग्य भत्ते (Fully Taxable Allowances) 

(1) महंगाई भत्ता (Dearness Allowance); 

(2) नगर क्षतिपूरक भत्ता (City Compensatory Allowance); 

(3) अधिसमय कार्य भत्ता (Overtime Allowance);

(4) चिकित्सा भत्ता (Medical Allowance)

(5) नौकर रखने हेतु भत्ता (Servant Allowance); 

(6) प्रतिनियुक्ति भत्ता (Deputation Allowance); 

(7) प्रॉक्टर भत्ता (Proctor Allowance); 

(8) ग्रामीण भत्ता (Rural Allowance); 

(9) अन्तरिम राहत (Interim Relief); 

(10) भोजन भत्ता (Lunch Allowance); 

(11) परियोजना भत्ता (Project Allowance) 

(12) वार्डन भक्तो (warden Allowance); 

(13) टिफिन भत्ता (Tiffin Allowance) आदि।

 

(iii) आंशिक कर-मुक्त भत्ते (Partially Exempted Allowance)

 

ये भत्ते कुछ सीमा तक कर-मुक्त होते हैं एवं उसके बाद बची हुई राशि कर योग्य होती है। ऐसे कुछ प्रमुख भत्ते इस प्रकार हैं

 

(1) मकान किराया भत्ता, (House Rent Allowance) 

(2) मनोरंजन भत्ता (Entertainment Allowance)

(3) कर्त्तव्य-पालन हेतु किये गये व्यय की पूर्ति हेतु विशेष भत्ते (Special Allowances to Meet out Expenses Incurred for Duties of Employment)

 

[धारा 10 (14)00); नियम 2 BJ-नियोक्ता द्वारा किसी कर्मचारी को उसकी नौकरी से सम्बन्धित कर्तव्यों का पालन करने के लिए किये गये व्यय के सम्बन्ध में दिये गये निम्नलिखित विशेष भत्ते, कर्मचारी द्वारा सम्बन्धित प्रयोजन पर व्यय की गयी राशि तक कर-मुक्त होते हैं 

  • (i) यात्रा भत्ता (Travelling Allowance) नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के दौरे (Tour) अथवा स्थानान्तरण के कारण की गयी यात्रा के व्यय की पूर्ति हेतु दिया गया यात्रा भत्ता।
  • (ii) दैनिक व्यय भत्ता (Daily Allowance) उपर्युक्त यात्रा की अवधि के दौरान कर्मचारी के सामान्य दैनिक व्यय की पूर्ति हेतु दिया गया भत्ता।
  • (i) सवारी भत्ता (Conveyance Allowance)-नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को उसके कर्त्तव्य-पालन के लिये किये गये सवारी व्ययों की पूर्ति हेतु दिया गया भत्ता। 
  • (iv) सहायक भर्ती (Helper Allowance)-नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को कर्तव्य पालन में सहायता के लिए सहायक रखने के व्यय की पूर्ति हेतु दिया जाने वाला भत्ता। 
  • (v) शैक्षणिक या अनुसंधान भत्ता (Academic or Allowance) शिक्षण संस्थाओं एवं अनुसंधान संस्थान में शिक्षण, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण को प्रोत्साहन देने के लिए दिया जाने वाला भत्ता। Research
  • (vi) वर्दी भत्ता (Uniform Allowance)-नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को कर्तव्य पालन के दौरान पहनी जाने वाली वर्दी (पोशाक) के क्रय और रख-रखाव हेतु दिया जाने वाला भत्ता।

 

(4) निश्चित सीमा तक व्यक्तिगत व्यय की पूर्ति के लिए विशेष भत्ते (Allowances to Meet Personal Expenses to Certain Extent) 

 

[धारा 10(14)(ii)] अनेक प्रकार के भत्तों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा समय-समय अधिसूचना जारी करके उन्हें एक निश्चित सीमा तक कर-मुक्त घोषित किया गया है। ऐसे भत्ते मुख्यतः निम्नलिखित है

 

  • (i) विशेष पर्वतीय क्षतिपूरक भत्ता, अधिक ऊंचाई के स्थान का भत्ता, असमान प्रकृति की जलवायु का भत्ता, बर्फ से ढके हुए स्तन का भत्ता तथा पहाड़ से खिसक कर नीचे गिरे हुए खेर के स्थान का भत्ता
  • (ii) सीमावर्ती क्षेत्र, दूरस्थ बस्ती, कठिन क्षेत्र अथवा अशान्त क्षेत्र का भत्ता
  • (iii) जनजाति क्षेत्र भत्ता
  • (iv) परिवहन की किसी संस्था में सेवारत व्यक्ति को वाहन के एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाने ले जाने के समय कार्य करते हुए किये गये निजी व्ययों की पूर्ति के लिए भत्ता
  • (v) बच्चों हेतु शिक्षा भत्ता
  • (vi) बच्चों को छात्रावास भत्ता
  • (vi) यातायात भत्ता
  • (viii) भूमिगत भत्ता
  • (ix) सशस्त्र सैनिकों को विशेष भत्ते

 

नोट-उपरोक्त वर्णित भत्तों की कर मुक्ति के लिए वास्तव में खर्च की गई राशि को ध्यान में नहीं रखा जाता है। ये भत्ते प्राप्त राशि या आय-कर अधिनियम के अन्तर्गत उल्लेखित राशि जो दोनों में कम है तक कर-मुक्त होते हैं तथा शेष राशि कर-योग्य मानी जाती है।

 

प्रश्न 14-उन भविष्य निधियों के नाम बताइये जिनका एक वेतनभोगी व्यक्ति सदस्य बन सकता है एवं उनमें से प्रत्येक के बारे में आय-कर के प्रावधानों का वर्णन कीजिए।

 

उत्तर  – प्रॉविडेण्ट फण्ड/भविष्य निधि का अर्थ

 

प्रॉविडेन्ट का शाब्दिक अर्थ है भविष्य के लिए बचत कर ना। प्राविडेन्ट फण्ड को सामान्यत: निम्नलिखित दो भागों में बाँटा जा सकता है-

(अ) कर्मचारियों सम्बन्धी भविष्य निधि 

(ब) सभी व्यक्तियों सम्बन्धी भविष्य निधि।

 

(अ) कर्मचारियों सम्बन्धी भविष्य निधि –  कर्मचारियों सम्बन्धी प्रोविडेंट फण्ड या भविष्य निधि योजना एक ऐसी योजना है जिसमें कर्मचारी अपने सेवाकाल में अनिवार्य रूप से वेतन में से बचत करके भविष्य के लिये धन संचित करते हैं। ये फण्ड दो प्रकार से संचित होते हैं-प्रथम, सह-अंशदायी (contributory) आधार पर-जिसमें मालिक (नियोक्ता) भी अपना अंशदान देता है जो कि प्यार: उतना ही होता है जितना कर्मचारी का अंशदान है और द्वितीय, गैर अंशदायी (Non-contributory) आधार पर जिसमें केवल कर्मचारी ही अपने वेतन में से अंशदान देता है। फण्ड की राशि किसी बैंक या डाकखाने या सरकारी प्रतिभूतियों में जमा की जाती है। जो ब्याज मिलता है वह भी फण्ड में जमा हो जाता है। फण्ड में एकत्र राशि कर्मचारी की सेवा से अवकाश ग्रहण करते समय मिल जाती है और अगर अवकाश प्राप्ति से पूर्व ही कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो वह राशि उसके उत्तराधिकारी को मिल जाती है।

 प्रॉविडेण्ट फण्ड योजना एक ओर तो कर्मचारी की वृद्धावस्था का सहारा होती है तथा दूसरी ओर उस पर आय-कर में भी कुछ छूट मिलती हैं आय-कर के दृष्टिकोण से कर्मचारियों हेतु प्रोविडेंट फण्ड निम्नलिखित प्रकार के होते हैं 

  1. वैधानिक प्रोविडेंट फण्ड (Statutory Provident Fund) – यह प्रोविडेंट फण्ड, 1925 के भारतीय प्रॉविडेन्ट फण्ड अधिनियम (Indian Provident Fund Act, 1925) के नियमों के अनुसार रखा जाता है। यह फण्ड सामान्यतया सरकारी सेवाओं (केन्द्रीय, राज्य एवं स्थानीय सत्तायें), अर्द्ध सरकारी सेवाओं विश्वविद्यालयों तथा सरकारी निगमों में रखा जाता है। इस प्रोविडेंट फण्ड के सम्बन्ध में निम्नलिखित नियम उल्लेखनीय है
  • (i) कर्मचारी द्वारा दिये गये अंशदान की राशि वेतन में सम्मिलित की जाती है एवं दिये गये अंशदान की 1,50,000 (कर-निर्धारण वर्ष 2015-16 से) तक की राशि पर धारा 80-C के अन्तर्गत कटौती मिलती है।
  • (ii) मालिक द्वारा दिये गये अंशदान की राशि वेतन में सम्मिलित नहीं की जाती है अर्थात् पूर्ण कर मुक्त होती है। 
  • (iii). इस निधि में संचित धन का ब्याज कुल आय में सम्मिलित नहीं किया जाता है एवं पूर्ण कर मुक्त होता है।
  • (iv) अवकाश ग्रहण करने पर, मृत्यु होने पर अथवा नौकरी छोड़ने पर कर्मचारी या उसके उत्तराधिकारी को इस निधि की जो रकम वापस प्राप्त होती है वह कर्मचारी की कुल आय में सम्मिलित नहीं की जाती है एवं पूर्ण कर मुक्त होती है। 
  1. प्रमाणित प्रोविडेंट फण्ड (Recognised Provident Fund)- यह ऐसी भविष्य निधि होती है जो आयकर अधिनियम द्वारा मान्यता प्राप्त होती है। इस भविष्य निधि को मान्यता भी दी जाती है जबकि आयकर आयुक्त (Income-tax Commissioner) को यह विश्वास हो जाय कि प्रस्तुत भविष्य निधि मान्यता सम्बन्धी सभी शर्त पूरी करती है। इस निधि के अन्तर्गत कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952 के अधीन बनाई गई भविष्य-निधियाँ भी आ जाती हैं सामान्यतः ऐसी भविष्य निधि बैंकों, बीमा कम्पनियों, कारखानों व व्यापारिक संस्थाओं में बनायी जाती है। इससे सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण नियम निम्नलिखित हैं 
  • (i) कर्मचारी द्वारा इस निधि में दिया गया अंशदान उसके वेतन में सम्मिलित किया जाता है तथा 1,50,000 ₹(कर-निर्धारण वर्ष 2015-16 से ) तक के दिये गये अंशदान की राशि पर धारा 80-C के अन्तर्गत कटौती दी जाती है।
  • (ii) मालिक का अंशदान, यदि कर्मचारी के वेतन के 12 प्रतिशत तक है तो वह पूर्ण कर मुक्त होगा और कर्मचारी की कुल आय में सम्मिलित नहीं किया जायेगा, परन्तु यदि मालिक वेतन के 12 प्रतिशत से अधिक अंशदान भविष्य निधि में देता है तो यह आधिक्य कर्मचारी के कुल वेतन में जोड़ दिया जायेगा।
  • (iii) फण्ड में जमा धन पर प्राप्त ब्याज का वह भाग जो 9.5% से अधिक है, कर्मचारी की वेतन आय में जोड़ा जाता है।
  • (iv) कर्मचारी के अवकाश ग्रहण करने, नौकरी छोड़ने अथवा मृत्यु होने पर जब इस निधि की राशि वापिस मिलती है तो वह पूर्णतया कर मुक्त होती है और कर्मचारी की कुल आय में शामिल नहीं की जाती है, किन्तु शर्त यह है कि कर्मचारी ने उस मालिक के यहाँ लगातार 5 वर्ष तक सेवा की हो और यदि उक्त कर्मचारी 5 वर्ष तक सेवा न कर सका हो तो सेवा कार्य समाप्त होने में अपरिहार्य (Unavoidable) कारण हों, जैसे कर्मचारी की मृत्यु, अपंगता तथा छंटनी, तालाबन्दी आदि। 
  1. अप्रमाणित भविष्य निधि (Unrecognised P.F.)-वह भविष्य निधि जो आय-कर आयुक्त द्वारा प्रमाणित न हो तथा वैधानिक अथवा प्रमाणित भविष्य निधि न हो, अप्रमाणित भविष्य निधि कहलाती है। सामान्यतया यह फण्ड छोटे स्तर पर व्यापार करने वाली निजी संस्थाओं द्वारा रखा जाता है। इस फण्ड से सम्बन्धित महत्वपूर्ण नियम निम्नलिखित हैं

 

  • (i). कर्मचारी का अंशदान उसके मूल वेतन में सम्मिलित किया जाता है। परन्तु इस पर धारा 80C की कटौती नहीं दी जाती है। 
  • (ii) मालिक द्वारा दिया गया अंशदान कर्मचारी के वेतन में शामिल नहीं किया जाता है।
  • (iii) इस निधि पर प्रति वर्ष मिले हुये ब्याज पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। 
  • (iv)कर्मचारी के अवकाश ग्रहण करने, नौकरी छोड़ने अथवा मृत्यु होने पर इस निधि से जो रकम वापस मिलती है, उस रकम को दो भागों में विभक्त किया जाता है 

(क) कर्मचारी का अंशदान कर मुक्त होता है अर्थात् कुल आय में नहीं जोड़ा जाता है क्योंकि इसे प्रतिवर्ष कर योग्य आय में शामिल कर लिया गया है; परन्तु कर्मचारी के अंशदान पर अर्जित ब्याज की रकम को ‘अन्य साधनों से आय’ वाले शीर्षक में शामिल करते हैं।

 

(ख) मालिक का अंशदान एवं उस पर अर्जित कुल ब्याज को वेतन शीर्षक की आय में जोड़ लिया जाता है तथा यह कर योग्य होता है। इस पर धारा 89 (1) के अन्तर्गत छूट मिलेगी।

 

कभी-कभी अप्रमाणित भविष्य निधि को भविष्य निधि आयुक्त से प्रमाणित भविष्य निधि में परिवर्तित करा लिया जाता है। परिवर्तन की तिथि को इस निधि में जो शेष होता है उसे ‘हस्तान्तरित शेष’ कहा जाता है। हस्तान्तरित शेष में से नियोक्ता का अंशदान तथा उस पर प्राप्त ब्याज कर्मचारी के वेतन शीर्षक में कर योग्य होता है जबकि कर्मचारी के अंशदान पर प्राप्त ब्याज ‘आय के अन्य स्रोतों में कर योग्य करते हैं ।

 

नोट- नियोक्ता के अंशदान एवं उस पर प्राप्त ब्याज की राशि को कर्मचारी के वेतन में शामिल करने से जो अतिरिक्त कर दायित्व उत्पन्न होता है उसके लिए आवेदन करने पर धारा 89 (1) की छूट प्राप्त हो जाती है।

 

वेतन भोगी एवं गैर-वेतनभोगी सभी व्यक्तियों एवं HUF को धारा 80C की कटौती हेतु स्वीकृत सार्वजनिक भविष्य निधि Public Provident Fund (P.P.F)

 सार्वजनिक भविष्य निधि योजना का प्रारम्भ 1 जुलाई 1968 से हुआ। इस निधि के लिए कोई भी व्यक्ति (चाहे वह वेतन भोगी हो या नही, व्यवसायी हो या पेशेवर व्यक्ति) एवं (H.U.F) प्रधान डाक घर, भारतीय स्टेट बैंक अथवा इसकी सहायक बैंकों में अथवा केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित 13 राष्ट्रीयकृत बैंकों की किसी भी शाखा में खाता खोल सकता है। इस खाते में 500 से लेकर अधिकतम 1,50,000 (कर-निर्धारण वर्ष 2015-16 से) तक एक वित्तीय वर्ष में जमा किया जा सकता है। इस खाते में एक माह में एक बार अर्थात् अधिकतम 12 किस्तों में धनराशि जमा की जा सकती है। इस खाते में जमा की गयी राशि पर धारा 80C के अन्तर्गत कटौती प्राप्त होगी जबकि प्राप्त ब्याज पूर्णतया कर मुक्त माना जाता है। खाता खोलने के पाँच वर्ष बाद ही इस खाते से वर्ष में एक बार आहरण किया जा सकता है। खाते की अवधि 15 वर्ष है लेकिन इसे अगले पांच वर्ष तक चालू रखा जा सकता है। खाता बन्द होने पर प्राप्त सम्पूर्ण राशि ब्याज सहित कर मुक्त है। यदि खाताधारक की मृत्यु 15 वर्ष से पूर्व हो जाती है तो इस फण्ड की सम्पूर्ण रकम उसके उत्तराधिकारियों को तुरन्त भुगतान कर दी जाती है।


Follow me at social plate Form
FacebookInstagramYouTubeTwitter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!