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Brand Name and Trade Mark Bcom Notes

Brand and Trademark Bcom Notes

Brand Name and Trade Mark Bcom Notes

Brand Name and Trade Mark Bcom Notes:- In this post, we will give you notes of Principal of Marketing of BCom 3rd year English and Hindi, Marketing Brand Name and Trade Mark Notes Hindi and English.

Notes:- This Post Already Available in Hindi and English language.

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ब्राण्ड तथा ट्रेडमार्क (Brand and Trademark)

 

ब्राण्ड का अर्थ एवं परिभाषाएँ (Meaning and Definitions of Brand)

उत्पादकों अथवा निर्माताओं द्वारा अपने उत्पाद की पहचान के लिए जिस व्यापारिक चिन्ह का प्रयोग किया जाता है, वह ब्राण्ड कहलाता है। ब्राण्ड के अन्तर्गत उत्पाद का नाम अथवा उसकी पहचान कराने वाला कोई शब्द, अक्षर, प्रतीक, डिजाइन चिन्ह आदि सम्मिलित किये जाते हैं। ब्राण्ड के अन्तर्गत ऐसे सभी संकेत, प्रतीक अथवा चिन्ह आते हैं जिनसे किसी विशिष्ट उत्पादक अथवा निर्माता के उत्पाद तथा अन्य प्रतिस्पद्ध उत्पादों में भेद किया जा सके। ब्राण्ड की कुछ प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं –

(1) अमेरिकन मार्केटिंग एसोसिएशन (American Marketing Association) के अनुसार, “ब्राण्ड एक नाम, चिन्ह या डिजाइन अथवा इन सबका एक सम्मिश्रण है जिसका उद्देश्य एक विक्रेता या एक समूह के विक्रेताओं के माल या सेवाओं को पहचानना है और प्रतियोगियों के माल या सेवाओं से भेद करना है।”

(2) स्टेण्टन (Stanton) के अनुसार, “सभी ट्रेडमार्क ब्राण्ड हैं और इस प्रकार इसमें वे शब्द लेख या अंक शामिल हैं जिनका उच्चारण हो सकता है। इसमें तस्वीर की डिजाइन भी शामिल है।”

 

ट्रेडमार्क (Trademark)

जब किसी ब्राण्ड का सरकार से पंजीयन करा लिया जाता है तो वह ट्रेडमार्क बन जाता है जैसे- ए०सी०सी० सीमेण्ट, बच्चे के हाथ में ब्रुश लिये हुए एशियन छाप पेण्ट्स। कभी-कभी ट्रेडमार्क ब्राण्ड को एक विशिष्ट ढंग से लिखने से भी बन जाते हैं, जैसे कोका कोला। भारत में ट्रेडमार्क के पंजीयन के लिये इण्डियन ट्रेडमार्क एक्ट 1940 है। ट्रेडमार्क की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं –

अमेरिकन मार्केटिंग एसोसिएशन के अनुसार, “ट्रेडमार्क एक ऐसा ब्राण्ड है जिसे वैधानिक संरक्षण प्रदान किया जाता है, क्योंकि कानून के अन्तर्गत केवल एक विक्रेता ही उसका प्रयोग कर सकता है।” आर० एस० डाबर के अनुसार, “ट्रेडमार्क शब्द को सामान्यतः ब्राण्ड के स्थान पर उस समय प्रयुक्त किया जाता है जबकि ब्राण्ड का पंजीयन कराना होता है और वैधानिक कार्यवाही की आवश्यकता होती है।”

निष्कर्ष-“ट्रेडमार्क किसी उत्पाद की पहचान कराने वाला ब्राण्ड है जिसका पंजीयन कराना आवश्यक होता है। ”

ट्रेडमार्क तथा ब्राण्ड में अन्तर (Distinction Between Trademark and Brand)

 

Brand Name Trade Mark

 

एक अच्छे ब्राण्ड की विशेषताएँ

(1) साधारण तथा सूक्ष्म (Simple and Short) – ब्राण्ड साधारण होना चाहिए तथा साथ में सूक्ष्म भी। सूक्ष्म से आशय है कि ब्राण्ड का नाम छोटा होना चाहिए जिसे सरलता से याद रखा जा सके।

(2) सरल उच्चारण (Easy Pronunciation) – ब्राण्ड का नाम इस प्रकार का होना चाहिए जिसको बच्चे, बूढ़े, जवान, पढ़े, अनपढ़ आदि सभी बोल सकें और सरलता से सही उच्चारण कर सकें, जैसे- ‘बाटा’, ‘टाटा’, ‘भारत’, ‘ताज’, ‘हिमालय’, ‘हनुमान’, ‘कथा’, ‘नेशनल’, ‘पारले’, ‘मरफी’, ‘किसान’

(3) स्मरणीय (Memorable) – ब्राण्ड का नाम ऐसा होना चाहिए जिसे आसानी से याद रखा जा सके।

(4) पहचानने योग्य (Recognizable) – जिसे सरलता से पहचाना जा सके। ब्राण्ड का नाम ऐसा होना चाहिए|

(5) आकर्षक (Attractive) – ब्राण्ड का नाम आकर्षक होना चाहिए जो सुनने एवं बोलने में मधुर लगे तथा साथ ही उसमें आकर्षण का भी गुण जैसे—’कश्मीर’, ‘ताजमहल’, ‘अजन्ता’, ‘हिमालय’, ‘भारत’ आदि। हो,

(6) समयानुकूल (Timely) – ब्राण्ड का नाम समयानुकूल होना चाहिए। देखा गया है कि समय व्यतीत हो जाने के पश्चात पुराने ब्राण्ड अप्रचलित हो जाते हैं। अतएव ब्राण्ड समय-समय पर बदला जाना चाहिए। एक अच्छा ब्राण्ड वही है जो समयानुकूल हो।

(7) अश्लीलता रहित (Lack of Obscence) – ब्राण्ड में तो अश्लीलता किंचित मात्र भी नहीं होनी चाहिए। यह सामाजिक तथा र्मिक भावनाओं के अनुकूल होना चाहिए।

(8) मितव्ययिता (Economical) – एक अच्छे ब्राण्ड में मितव्ययिता का गुण होना चाहिए अर्थात् उसे पैकेस पर छपवाने या उसके विपणन पर अधिक व्यय नहीं होना चाहिए।

(9) विशिष्ट (Specific) – ब्राण्ड का नाम विशिष्ट होना चाहिए और अन्य ब्राण्ड से भिन्न होना चाहिए।

(10) पंजीकरण योग्य (Registerable) – ब्राण्ड ऐसा हो जिसका पंजीयन Trade & Merchandise Marks Act, 1958 के अन्तर्गत कराया जा सके। ब्राण्ड का नाम किसी विद्यमान रजिस्टर्ड ब्राण्ड के नाम से अथवा उससे मिलता-जुलता अथवा सरकार द्वारा प्रतिबंधित नहीं होना चाहिए।

(11) सुझावात्मक (Suggestive) – ब्राण्ड का नाम सुझावात्मक होना चाहिए जिससे कि ग्राहकों पर उसका अच्छा प्रभाव पड़े।

 

ब्राण्ड नीतियाँ (Brand Policies)

विपणनकर्ता को यह निर्णय लेना पड़ता है कि वह एक ब्राण्ड नाम के अधीन बहुत से उत्पाद बेचे अथवा एक ही उत्पाद को विभिन्न ब्राण्ड नामों से बेचे। विपणनकर्ता द्वारा विभिन्न ब्राण्ड नाम नीतियाँ अपनाई जाती है जो निम्न प्रकार है –

(1) निर्माता ब्राण्ड – यह ब्राण्ड नाम निर्माता द्वारा विकसित किया जाता है। सोनी, पैनासौनिक, एच०सी०एल० आदि निर्माता के ब्राण्ड है। जब निर्माता ब्राण्ड राष्ट्रीय स्तर पर प्रयोग किया जाता है तो इसे राष्ट्रीय ब्राण्ड कहते हैं जबकि एक विशेष क्षेत्र में प्रयुक्त ब्राण्ड क्षेत्रीय ब्राण्ड कहलाता है। विज्ञापन ब्राण्डों में ब्राण्ड चिन्हों पर जोर दिया जाता है।

(2) वितरकों के ब्राण्ड – जब थोक व्यापारियों अथवा वितरकों द्वारा निजो ब्राण्ड विकसित किया जाता है तो इसे वितरक ब्राण्ड कहत हैं। वितरकों के ब्राण्ड के प्रकार हैं-निजी ब्राण्ड स्टोर ब्राण्ड, डीलर ब्राण्ड, गृह ब्राण्ड आदि।

(3) व्यक्तिगत ब्राण्ड – नाम इसमें प्रत्येक उत्पाद का अपना विशिष्ट ब्राण्ड नाम रहता है। इसकी संवर्द्धन लागत अधिक रहती है जैसे सर्फ, व्हील कपड़े धोने का पाउडर, चैलपार्क आदि।

(4) पारिवारिक ब्राण्ड – इसमें कम्पनी एक वर्ग की सभी वस्तुओं के लिये एक ही ब्राण्ड का प्रयोग करती है। यह कम खर्चीला तरीका है। पारिवारिक ब्राण्ड नामों के उदाहरण हैं शरबतों, अचारों और चटनी के लिये ‘किसान’, ‘अमूल’ के उत्पाद जैसे- दूध, चाकलेट तथा प्रसाधन सामग्री के लिये ‘लैक्मे’ आदि।

(5) समूहगत ब्राण्ड (Umbrella Brand) – इसमें कम्पनी के सभी उत्पादों को एक ही नाम से प्रचारित किया जाता है। गोदरेज, टाटा, हिन्दुस्तान लीवर इसके उदाहरण हैं।

(6) बहु ब्राण्ड विधि – इसमें एक ही उत्पाद की विभिन्न किस्मों के लिये विभिन्न ब्राण्डों का प्रयोग किया जाता है। प्रायः वस्तु की किस्मों में विशेष अन्तर नहीं होता।

(7) लड़ाकू ब्राण्ड – जब बाजार में तीव्र प्रतिस्पर्द्धा विद्यमान हो तो निर्माता अपने मूल ब्राण्ड की प्रतिष्ठा को बचाए रखने की दृष्टि से कम मूल्य की वस्तु तैयार करके नए ब्राण्ड नाम से बाजार में उतार देते हैं। इसे लड़ाकू ब्राण्ड कहते हैं।


English Version

Brand Name and Trade Mark

Brand: According to American Marketing Association, “Brand is a name, term, sign, symbol or design or combination of these intended to identify the goods and services of one seller and to distinguish them from those of competitors.”

A brand may be a name, a mark, a mnemonic or a logo. Example: Cinthol, Lux, Maggi, Tata Steel etc.

A brand is more than just a product. Brands are not merely symbols on a product or a graphic exercise. It is a signature on a constantly renewed, creative process. To brand is to name or mark a product as proof of ownership. In modern competitive marketing, brands have become inevitable in meeting out competition successfully and in placing the goods on the market in most effective way.

Trade Mark: Trade mark is a legal term. When a brand name or brand mark is registered and legalised it becomes a trade mark. According to American Marketing Association, “A trade mark is a brand that has legal protection because it is capable of exclusive appropriation (i.e., only the owner can use it.)”

In India, it is registered under “Trade and Merchandise Marks Act, 1958”. Therefore all trade marks are brands but not all brands are trade marks. Only those brand names or marks which are registered with the government are known as trade mark.

 

DIFFERENCE BETWEEN BRAND AND TRADE MARK

  1. All trade marks are brands but all brands are not trade marks.
  2. Scope of brand is limited while trade mark has a wide scope because one trade mark can be used for all products.
  3. Trade mark is always registered under Trade & Merchandise Act, 1958. A brand is not registered.
  4. Brand denotes the quality of a product whereas the Trade mark denotes the producer who got it registered.
  5. Trade mark enjoys legal protection against misuse by competitors but this is not so for brand.

6 Brand can be used by all but trade mark can be used only by the person who got it registered in his firms name.

  1. A brand may be copied by competitors and no legal action can be taken against them. But a trademark can not be copied, otherwise legal action can be taken under Trade Mark Act.

 

FEATURES/CHARACTERISTICS FOR SELECTION OF A GOOD BRAND NAME

(1) Should be Short, Simple and Easy to Pronounce: Eg. Rin, Ariel, Surf Excel, Action Shoes, Titan, HMT etc.

(2) Should Suggest Product Benefits or Qualities: Eg. HMT Tools, Lijjat Papad, Surf detergents.

(3) Should be Pleasing and Positive Noting: Eg. Fair & Lovely is pleasing and has a positive noting of something assured.

(4) Names should be Distinctive and Appealing: Dull and unimaginative name will not have any influence on consumers. Therefore brand name should be distinctive and appealing. Eg. Kodak, Tinopal, Philips, Eveready, Ujala etc.

(5) Should be Capable of Registered under Law: Name should not be undesirable under the Emblems and Names (Prevention of Improper Use) Act, 1950..

(6) Should be short of 7 or 8 Letters in Length or Less: Eg. Fiat (car), Pears (soap), Coke, Pepsi etc.

(7) Should Denote Product Attribute: A name should suggest the product itself or products quality or some benefit. Eg. Duroply (plywood), Dettol (soap), Medimix (soap).

(8) Should be Suited to Markets, Buyers and Products: Women consumers are attracted to feminine name and mark and men to masculine one. Eg. Gillete Presto (blade), Evening in Paris (Perfume)

(9) Should be Versatile: Brand name should be versatile, so that it can be applicable to any product added to the line. Family names like Tata, Modi, Birla, Bajaj etc. possess this characteristic.

(10) Should be Attractive: for Advertising and Promotional Purpose: Eg. Frooti is coined “Fresh and Juicy”, Thumps Up “Taste the Thunder.”

(11) Adaptable to Packaging and Labelling: Brand should match the strategies of packaging and labelling. A small name/mark can be easily inscribed on packages and labels. brand

(12) Should be such as to describe a complete picture of the product.

(13) Should be free from complicated matter relating to fashion, style or individual tastes of customer.

 

 

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